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  "title": "सितंबर में लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, जानिए भारत में दिखेगा या नहीं और क्या रहेगा सूतक का समय",
  "summary": "साल का दूसरा चंद्र ग्रहण सितंबर में लगने जा रहा है। देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसका असर भारत पर भी पड़ेगा।",
  "content": "आकाश मंडल में एक और बड़ी खगोलीय घटना घटने जा रही है, क्योंकि साल का दूसरा चंद्र ग्रहण इसी सितंबर महीने में लगने वाला है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का प्रभाव मानव जीवन पर अवश्य पड़ता है। इस खगोलीय स्थिति से ठीक 8 घंटे पहले सूतक काल की शुरुआत हो जाती है, जिसके दौरान पूजा-पाठ, हवन और किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होने जा रहा है। लोगों के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या पिछले चंद्र ग्रहण की तरह इसका प्रभाव भी भारत में महसूस नहीं होगा या इस बार स्थिति अलग होगी। आइए देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कि इस वर्ष का दूसरा चंद्र ग्रहण कब घटित होगा और इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।\n\nदेवघर के ज्योतिषाचार्य की राय\nदेवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने जानकारी देते हुए बताया कि चंद्र ग्रहण हमेशा किसी न किसी महीने की पूर्णिमा तिथि पर ही घटित होता है। यह वार्षिक चंद्र ग्रहण भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर पड़ेगा और यह खगोलीय गतिविधि दो अलग-अलग तारीखों के बीच तय की गई है। जी हां, साल का यह दूसरा चंद्र ग्रहण 7 और 8 सितंबर को सक्रिय रहेगा। इस अवधि में चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे और नक्षत्रों की स्थिति में शतभिषा के साथ पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र भी प्रभाव में रहेगा।\n\nग्रहण की अवधि और समय\nज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के मुताबिक, ऋषिकेश पंचांग के अनुसार साल के इस दूसरे ग्रहण का आरंभ 07 सितंबर की रात 09 बजकर 58 मिनट पर होगा और इसका समापन 08 सितंबर की रात 01 बजकर 26 मिनट पर होगा। इस तरह से इस पूरे ग्रहण का कुल प्रभाव और समय सीमा 03 घंटे 29 मिनट तक बनी रहेगी।\n\nक्या भारत में दिखेगा ग्रहण\nपिछले चंद्र ग्रहण का प्रभाव भारतीय क्षेत्र पर बिल्कुल नहीं देखा गया था, लेकिन 7 सितंबर को लगने जा रहा यह दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में पूरी तरह प्रभावी रहेगा। भारत के अलावा यह खगोलीय परिदृश्य एशिया, यूरोप, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर के क्षेत्रों में भी साफ तौर पर दिखाई देगा।\n\nधार्मिक दृष्टि से क्यों माना जाता है अशुभ\nविज्ञान की नजर में ग्रहण केवल एक सामान्य खगोलीय घटना है, लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से इसे अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण को राहु और चंद्र ग्रहण को केतु का प्रतीक माना गया है, और दोनों को ही नकारात्मक प्रभाव वाला माना जाता है। सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य देव संकट में माने जाते हैं, जबकि चंद्र ग्रहण के समय चंद्र देव पर संकट का साया रहता है। इस खास समय में दोनों ग्रह नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रभाव से जूझते हैं, जिसके कारण नकारात्मक ताकतों का असर बहुत बढ़ जाता है। यही कारण है कि धार्मिक परंपराओं में इसे अशुभ मानकर इस काल में भगवान का नामजप और पाठ करने की सलाह दी जाती है।\n\nइसका आप पर असर\nचंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल और धार्मिक नियमों का पालन करने वाले आम नागरिकों को दैनिक पूजा और शुभ कार्यों में सावधानी रखनी होगी।\n\n• भारत में: देशवासियों के लिए यह ग्रहण महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका प्रभाव भारत में स्पष्ट रूप से रहेगा। लोगों को धार्मिक परंपराओं के अनुसार 8 घंटे पहले से शुरू होने वाले सूतक काल का ध्यान रखना होगा।\n• समय और अवधि: ग्रहण की कुल अवधि 03 घंटे 29 मिनट की होगी जो 7 सितंबर की रात से 8 सितंबर की रात तक चलेगी। इस दौरान लोग घरों में रहकर धार्मिक पाठ और जाप कर सकेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nखगोलीय स्थिति और चंद्रमा की गति के कारण साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भाद्रपद मास की पूर्णिमा पर लग रहा है।\n\n• खगोलीय कारण: पूर्णिमा तिथि के दिन सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण पूर्ण चंद्र ग्रहण बनता है।\n• नक्षत्र प्रभाव: इस बार ग्रहण के समय चंद्रमा कुंभ राशि के साथ शतभिषा और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में स्थित रहेंगे।\n• धार्मिक मान्यता: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ग्रहण को राहु और केतु के प्रभाव से जोड़कर अशुभ माना जाता है जिसमें नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. साल का दूसरा चंद्र ग्रहण कब लगेगा?\nसाल का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 और 8 सितंबर को लगेगा।\n\n2. इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि कितनी होगी?\nइस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 03 घंटे 29 मिनट की होगी।\n\n3. क्या यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?\nहाँ, यह चंद्र ग्रहण भारत के अलावा एशिया, यूरोप और अन्य महाद्वीपों में भी दिखाई देगा।\n\n4. सूतक काल कब से शुरू होता है?\nसूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 8 घंटे पहले लग जाता है।\n\n5. इस ग्रहण की जानकारी किस ज्योतिषाचार्य ने दी है?\nइसकी जानकारी देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने दी है।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-10-21",
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    "चंद्र ग्रहण 2025",
    "खगोलीय घटना",
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