# तेलंगाना के नीलेपल्ली में शिव मंदिर और सूफी मजार की सदियों पुरानी साझी विरासत आज भी कायम

> तेलंगाना के विकाराबाद जिले के नीलेपल्ली गांव में श्री एकाम्बरी रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर में श्रद्धालु पहले शिव के दर्शन करते हैं, फिर परिसर में ही स्थित सूफी संत हजरत याकूब साहब की मजार पर शीश नवाते हैं।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-07-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/telangana-ke-nilepally-men-shiva-mndira-aura-suphi-majara-ki-sadiyon-purani-sajhi-virasata-aja-bhi-kayama-4613 · **Language:** Hindi
**Tags:** नीलेपल्ली मंदिर, रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर, हजरत याकूब साहब, तेलंगाना मंदिर, हिंदू मुस्लिम एकता, दक्षिण काशी

तेलंगाना के विकाराबाद जिले में बशीरबाद मंडल के नीलेपल्ली गांव में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान शिव के दर्शन के बाद श्रद्धालु सीधे एक सूफी संत की मजार पर सिर झुकाते हैं। यह परंपरा सैकड़ों साल से उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है, जैसी सदियों पहले शुरू हुई थी।

## शिवलिंग के ठीक सामने मजार
यहां का श्री एकाम्बरी रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर सिर्फ अपनी प्राचीनता और पौराणिक कथाओं के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि सांप्रदायिक सद्भाव की एक अनोखी मिसाल के तौर पर भी मशहूर है। मंदिर के गर्भगृह के ठीक सामने सूफी संत हजरत याकूब साहब की मजार बनी है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु पहले भगवान शिव के दर्शन करता है, फिर उसी परिसर में मजार पर भी शीश नवाता है।

## याकूब साहब और रामलिंगेश्वर का रिश्ता
गांव के लोग बताते हैं कि हजरत याकूब साहब भगवान रामलिंगेश्वर के गहरे भक्त थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इसी मंदिर परिसर में सेवा और इबादत करते हुए गुजार दी। जब उनका निधन हुआ, तो लोगों ने उनकी इच्छा का मान रखते हुए मंदिर परिसर में ही उनकी समाधि बनवाई। तभी से यह जगह हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की आस्था का साझा केंद्र बन गई।

## राम और रावण वध की पौराणिक कथा
स्कंद पुराण की मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में लंका पर जीत हासिल करने और रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम पर ब्रह्महत्या का दोष लग गया था। इस दोष से मुक्ति पाने के लिए गुरु वशिष्ठ ने उन्हें शिवलिंग स्थापित करने की सलाह दी थी। वनवास के दौरान दंडकारण्य से गुजरते समय भगवान श्रीराम ने इसी स्थान पर शिवलिंग स्थापित किया था, इसीलिए यहां विराजमान शिव को रामलिंगेश्वर स्वामी कहा जाता है। इस धार्मिक महत्व के चलते इस इलाके को दक्षिण काशी की उपाधि भी मिली हुई है।

## महाशिवरात्रि और उर्स पर एक जैसा उत्साह
मंदिर परिसर का शांत माहौल और वहां मौजूद प्राचीन पवित्र जलकुंड इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। महाशिवरात्रि और उर्स के मौके पर यहां का नजारा देखने लायक होता है, जब हजारों श्रद्धालु बिना किसी भेदभाव के एक साथ जुटते हैं। हिंदू और मुस्लिम समुदाय मिलकर पूजा-अर्चना और इबादत करते हैं, जो आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है।

## एकता का संदेश देने वाला तीर्थ
नीलेपल्ली का यह ऐतिहासिक मंदिर आज भी यही संदेश देता है कि आस्था लोगों को जोड़ने के लिए होती है, बांटने के लिए नहीं। यह पावन स्थल भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक एकता की परंपरा को पूरी गरिमा के साथ आज भी संजोए हुए है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की जीवंत मिसाल के तौर पर देशभर के श्रद्धालुओं और शोधार्थियों के लिए एक अहम उदाहरण बनता है।
- **तेलंगाना में:** विकाराबाद जिले के नीलेपल्ली गांव में महाशिवरात्रि और उर्स के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन और आवाजाही बढ़ सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह मंदिर कहां स्थित है?
यह तेलंगाना के विकाराबाद जिले के बशीरबाद मंडल स्थित नीलेपल्ली गांव में है।

### 2. मंदिर का पूरा नाम क्या है?
इसे श्री एकाम्बरी रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर कहा जाता है।

### 3. मंदिर परिसर में मजार किसकी है?
सूफी संत हजरत याकूब साहब की मजार भगवान शिव के गर्भगृह के ठीक सामने स्थित है।

### 4. यहां कौन सी परंपरा निभाई जाती है?
श्रद्धालु पहले भगवान शिव के दर्शन करते हैं और फिर उसी परिसर में मजार पर शीश नवाते हैं।

### 5. भगवान शिव को यहां रामलिंगेश्वर स्वामी क्यों कहा जाता है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने इसी स्थान पर शिवलिंग स्थापित किया था, इसी वजह से उनका नाम रामलिंगेश्वर स्वामी पड़ा।

### 6. इस क्षेत्र को दक्षिण काशी क्यों कहा जाता है?
धार्मिक महत्व के कारण इस इलाके को दक्षिण काशी की उपाधि दी गई है।

### 7. यहां किन मौकों पर सबसे ज्यादा भीड़ जुटती है?
महाशिवरात्रि और उर्स के मौके पर यहां हजारों श्रद्धालु एक साथ जुटते हैं।

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