# गोड्डा के ऐतिहासिक शिवपुर शिवधाम में विराजे हैं तीन ज्योतिर्लिंग, चार सदियों पुरानी है महिमा

> झारखंड के गोड्डा जिले में स्थित चार सौ साल पुराना बाबा रत्नेश्वर नाथ धाम अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहां एक साथ तीन शिवलिंगों की पूजा की जाती है। सावन के महीने में यहां दूर-दूर से श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/three-jyotirlingas-draw-thousands-to-goddas-four-century-old-shivpur-temple-50719 · **Language:** Hindi
**Tags:** गोड्डा, झारखंड, सावन, शिवलिंग, रत्नेश्वर नाथ, मंदिर, धार्मिक यात्रा

झारखंड के गोड्डा जिले के शिवपुर इलाके में स्थित बाबा रत्नेश्वर नाथ धाम मंदिर में सावन के पवित्र महीने के दौरान श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। करीब चार सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक शिव मंदिर की अपनी एक खास धार्मिक महत्ता है। ऐसी गहरी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान शंकर की आराधना करता है, उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। इसी विशेष मान्यता के कारण इस पावन स्थल का नाम बाबा रत्नेश्वर नाथ पड़ा है।

 

## एक ही प्रांगण में तीन स्वरूपों की पूजा

मंदिर के पुजारी विवेकानंद ठाकुर के अनुसार, सावन के हर एक सोमवार को इस मंदिर परिसर में दस हजार से अधिक भक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के वास्ते आते हैं। इस प्राचीन मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां तीन अलग-अलग शिवलिंगों यानी बाबा रत्नेश्वर नाथ, बाबा धनेश्वर नाथ और बाबा कपलेश्वर नाथ की एक साथ पूजा की जाती है, जो इसे पूरे जिले में पूरी तरह से अद्वितीय बनाती है।

 

## इतिहास और इलाके की पहचान

स्थानीय निवासी सुरजीत झा बताते हैं कि बीते समय में यह मंदिर घने जंगलों के बीच घिरा हुआ था और शुरुआती दौर में यहां बहुत कम संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे। हालांकि, उन्नीस सौ के दशक के दौरान यहां बनेली स्टेट के राजा की ओर से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया और एक नए भवन का निर्माण किया गया। इस ऐतिहासिक कार्य के बाद से इस पावन स्थल की ख्याति झारखंड के साथ-साथ पड़ोसी राज्य बिहार के भी कई जिलों तक फैल गई।

 

## भक्तों की आस्था और यात्रा मार्ग

इस मंदिर की बढ़ती प्रसिद्धि का ही परिणाम है कि इस पूरे क्षेत्र का नाम शिवपुर पड़ गया, जो गोड्डा के हटिया चौक से उत्तर दिशा की ओर स्थित है। सावन के पूरे महीने यहां भक्तों का मेला लगा रहता है, लेकिन विशेष तौर पर सोमवार के दिन श्रद्धालु भागलपुर के बरारी गंगा घाट से जल भरकर और पैदल यात्रा कर बाबा को अर्पित करते हैं। शिवपुर का यह मंदिर पूरे गोड्डा जिले का इकलौता ऐसा केंद्र है, जहां तीन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन एक साथ होते हैं, जिसके कारण सावन में दूर-दराज से हजारों लोग यहां पहुंचते हैं।

## इसका आप पर असर
इस ऐतिहासिक मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और सावन मास की यात्रा स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।

- **झारखंड में:** गोड्डा और आसपास के जिलों में सावन के सोमवार के दौरान यातायात व्यवस्था और भीड़भाड़ में बदलाव देखने को मिलता है। श्रद्धालुओं को भागलपुर के बरारी गंगा घाट से पैदल यात्रा के दौरान विशेष प्रबंध करने होते हैं।

- **शिवपुर में:** स्थानीय क्षेत्र में भक्तों के भारी आगमन से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और बाजार की गतिविधियों में तेजी आती है। दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों को सावन के सीजन में अतिरिक्त आजीविका के अवसर मिलते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह प्राचीन मंदिर अपनी अनूठी संरचना और ऐतिहासिक संरक्षण के कारण सदियों से श्रद्धालुओं का केंद्र बना हुआ है।

- **ऐतिहासिक जीर्णोद्धार:** उन्नीस सौ के दशक में बनेली स्टेट के राजा द्वारा इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराए जाने के बाद इसकी ख्याति दूर-दूर तक फैली।

- **धार्मिक मान्यताएं:** मंदिर में तीन प्रमुख शिवलिंगों की एक साथ उपस्थिति और पुत्र प्राप्ति की विशेष मान्यता ने इसे पूरे क्षेत्र में अद्वितीय बना दिया है।

## सवाल-जवाब

### 1. बाबा रत्नेश्वर नाथ धाम मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर झारखंड के गोड्डा जिले के शिवपुर इलाके में स्थित है।

### 2. इस मंदिर की स्थापना कब हुई थी?
यह ऐतिहासिक मंदिर करीब चार सौ वर्ष पुराना है।

### 3. यहां कौन से तीन शिवलिंगों की पूजा होती है?
यहां बाबा रत्नेश्वर नाथ, बाबा धनेश्वर नाथ और बाबा कपलेश्वर नाथ की एक साथ पूजा की जाती है।

### 4. सावन के सोमवार को श्रद्धालु कहां से जल लेकर आते हैं?
श्रद्धालु भागलपुर के बरारी गंगा घाट से जल भरकर पैदल यात्रा करते हैं।

### 5. उन्नीस सौ के दशक में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किसने कराया था?
बनेली स्टेट के राजा द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._