तिलक लगाने के नियम और महत्व, जानिए किस उंगली से किसे लगाया जाता है तिलक सनातन संस्कृति में पूजा-पाठ के दौरान माथे पर तिलक लगाने के विशेष नियम और महत्व हैं। जहानाबाद के आचार्य राजेश कुमार मिश्रा ने हाथ की पांचों उंगलियों के आधार पर तिलक लगाने की सही विधि और उनके महत्व के बारे में विस्तार से बताया है। सनातन संस्कृति में पूजा-पाठ का विशेष स्थान है और इसमें हर एक विधि का अपना अलग महत्व होता है। हालांकि, तमाम लोग पूजा-पाठ तो करते हैं लेकिन उन्हें इसकी सही विधि और तौर-तरीके की पूरी जानकारी नहीं होती है। पूजा-अर्चना के दौरान माथे पर तिलक लगाया जाता है जो हमेशा बीच में लगाया जाता है। इसके अलावा, तिलक लगाने के लिए उंगली भी तय होती है कि किस उंगली का इस्तेमाल किसके लिए किया जाना चाहिए। जहानाबाद में कर्मकांड करवाने वाले आचार्य राजेश कुमार मिश्रा ने इस विषय पर पूरी जानकारी दी है। शरीर के पांच तत्व और उंगलियों का महत्व आचार्य राजेश कुमार मिश्रा के अनुसार, हाथ की पांचों उंगलियों का अपना अलग महत्व होता है। हमारा पूरा शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना हुआ है। ये पांचों तत्व हमारी उंगलियों में निवास करते हैं और शरीर को अलग-अलग प्रकार की ऊर्जा प्रदान करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार तिलक को लेकर सभी उंगलियों के नियम तय किए गए हैं। अंगूठे और तर्जनी उंगली के नियम अंगूठे में अग्नि का वास माना जाता है और यह मजबूत पकड़, निर्णायक क्षमता और स्वीकृति का प्रतीक होता है। जब भी किसी अतिथि को तिलक लगाया जाता है, तब अंगूठे का प्रयोग किया जाता है। वहीं दूसरी ओर, तर्जनी उंगली में वायु का वास होता है जो नेतृत्व, क्षमता और पेट से जुड़ी बीमारियों का संदेश देती है। पितरों के अनुष्ठान और तर्पण के लिए यह उंगली काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. मध्यमा और अनामिका उंगली के प्रयोग मध्यमा उंगली में आकाश तत्व निवास करता है और यह संतुलन, करियर और कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए जानी जाती है। जब कोई व्यक्ति खुद को तिलक लगाता है, तब इसी मध्यमा उंगली का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, अनामिका उंगली में पृथ्वी का वास होता है जो स्वास्थ्य, भावनाओं, यश, कीर्ति और बुद्धि का प्रतीक है। देवी-देवताओं को तिलक लगाने के लिए अनामिका उंगली का इस्तेमाल किया जाता है और इसमें माता-पिता तथा गुरुजन भी शामिल होते हैं। कनिष्ठा उंगली से जुड़े वर्जित नियम कनिष्ठा उंगली में जल का वास होता है और यह आर्थिक स्थिति के संचार का प्रतीक मानी जाती है। हालांकि, धार्मिक कार्यों और अनुष्ठानों में इस कनिष्ठा उंगली का उपयोग करना पूरी तरह वर्जित बताया गया है। इसका आप पर असर धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ के दौरान सही उंगली से तिलक लगाने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक संतुलन बेहतर रहता है। • भारत में: सनातन परंपराओं का पालन करने वाले सभी श्रद्धालुओं को पूजा के दौरान उंगलियों से जुड़े इन नियमों का सही ज्ञान होना चाहिए। • जहानाबाद में: स्थानीय लोग कर्मकांड के जानकारों के बताए इन पारंपरिक नियमों के अनुसार ही देवी-देवताओं, अतिथियों और खुद को तिलक लगा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ सनातन धर्म में शरीर के पांच तत्वों और उंगलियों के आपसी संबंधों के आधार पर ये नियम तय किए गए हैं। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक उंगली अलग ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। • तत्वों का संतुलन: हाथ की पांचों उंगलियां अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल इन पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। • ऊर्जा का प्रवाह: अलग-अलग व्यक्तियों और देवताओं को तिलक लगाने के लिए विशिष्ट उंगलियों का चयन शरीर में ऊर्जा के सही संतुलन के लिए किया जाता है। • शास्त्रीय विधान: कर्मकांड की परंपराओं में प्राचीन ग्रंथों और मान्यताओं के आधार पर ही इन विधानों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया गया है। सवाल-जवाब 1. तिलक हमेशा माथे पर कहां लगाया जाता है? तिलक हमेशा माथे के बीच में लगाया जाता है। 2. अतिथियों को तिलक किस उंगली से लगाया जाता है? अतिथियों को तिलक लगाने के लिए अंगूठे का प्रयोग किया जाता है। 3. स्वयं को तिलक लगाने के लिए किस उंगली का उपयोग होता है? स्वयं को तिलक लगाने के लिए मध्यमा उंगली का इस्तेमाल किया जाता है। 4. देवी-देवताओं को तिलक लगाने के लिए किस उंगली का प्रयोग होता है? देवी-देवताओं, माता-पिता और गुरुजनों को तिलक लगाने के लिए अनामिका उंगली का इस्तेमाल किया जाता है। 5. किस उंगली का उपयोग धार्मिक कार्यों में वर्जित है? धार्मिक कार्यों में कनिष्ठा उंगली का उपयोग करना वर्जित है। https://trendkia.com/religion/tilaka-lagane-ke-niyama-aura-mahatva-janie-kisa-ungali-se-kise-lagaya-jata-hai-tilaka-39700 TrendKia — Har trend, sabse pehle.