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  "type": "article",
  "title": "उदयपुर में सावन के आखिरी सोमवार पर निकली महाकाल की शाही सवारी, 50 से अधिक झांकियों के साथ उमड़ी भारी भीड़",
  "summary": "उदयपुर में सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान महाकाल की भव्य सवारी निकाली गई जिसमें 50 से अधिक झांकियां शामिल हुईं और हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़े।",
  "content": "उदयपुर शहर में सावन मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर भगवान महाकाल की एक अत्यंत भव्य और आकर्षक शाही सवारी निकाली गई। परंपरा के अनुसार इस बार भी महादेव नगर भ्रमण पर निकले, जिन्हें निहारने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए सड़कों पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया। सावन के इस आखिरी सोमवार को लेकर स्थानीय भक्तों में जबरदस्त उत्साह और उमंग का माहौल देखा गया, जो सुबह से ही प्रमुख मार्गों पर जमा हो गए थे।\n\nशहरी परंपरा के मुताबिक उदयपुर में सावन के चारों सोमवार को भगवान शिव से जुड़े विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और आयोजन किए जाते हैं। सावन के पहले सोमवार को मंदिर परिसर में ही भगवान की विशेष परिक्रमा कराई जाती है, जबकि दूसरे सोमवार को महादेव को वन भ्रमण कराया जाता है। इसके पश्चात, तीसरे सोमवार के दिन भगवान को प्रसिद्ध फतेहसागर झील ले जाया जाता है जहां जल विहार का आयोजन होता है। और अंत में, सावन के आखिरी सोमवार को महादेव की यह विशाल सवारी निकाली जाती है जो शहर के तमाम प्रमुख रास्तों से होकर गुजरती है।\n\nमहाकाल मंदिर से शुरू होकर मुख्य मार्गों से गुजरी यात्रा\nयह भव्य यात्रा महाकाल मंदिर से आरंभ हुई। सबसे पहले मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जिसके बाद भगवान महाकाल की पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। तय रूट के अनुसार यह सवारी चेतक सर्कल, हाथीपोल और जगदीश चौक जैसे शहर के व्यस्त और प्रमुख मार्गों से गुजरी। मार्ग में हर जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर और आरती उतारकर भगवान महाकाल का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके दर्शन का लाभ उठाया। पूरी परिक्रमा के बाद यह सवारी वापस महाकाल मंदिर लौट आई।\n\nइस धार्मिक यात्रा के दौरान पूरा शहर शिवमय वातावरण में रंग गया। हवा में लगातार ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के गूंजते जयकारों से पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। हर वर्ष की भांति इस बार भी इस विशेष सवारी में बड़ी संख्या में मनमोहक झांकियों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन में करीब 50 से ज्यादा झांकियां शामिल हुईं जिन्होंने सभी का ध्यान खींचा। इन झांकियों के माध्यम से विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश भी दिए गए, जिन्हें देखने के लिए शहर के कोने-कोने से लोग पहुंचे थे।\n\nउदयपुर की परंपरा और सावन के आयोजनों का महत्व\nउदयपुर में महाकाल की यह वार्षिक सवारी अब शहर के सबसे बड़े और प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शुमार हो चुकी है। जिस प्रकार मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में सावन के दौरान महाकाल की सवारी निकाली जाती है, उसी ऐतिहासिक तर्ज पर उदयपुर में भी इस गौरवशाली परंपरा को पूरी श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ निभाया जा रहा है। सावन के चारों सोमवार के अलग-अलग चरणों और आयोजनों को पूरा करने के बाद, अंतिम सोमवार की यह विशाल सवारी हर साल श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बनती है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: सावन के दौरान इस तरह के पारंपरिक धार्मिक आयोजनों से देश भर में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मेलजोल बढ़ता है।\n\nउदयपुर में: शहर के प्रमुख मार्गों जैसे चेतक सर्कल, हाथीपोल और जगदीश चौक पर भारी भीड़ के कारण यातायात में फेरबदल और अस्थायी प्रतिबंध देखने को मिले।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उदयपुर में महाकाल की शाही सवारी किस अवसर पर निकाली गई?\nयह भव्य सवारी सावन मास के अंतिम सोमवार के अवसर पर निकाली गई।\n\n2. इस सवारी में कितनी झांकियां शामिल थीं?\nसावन के अंतिम सोमवार की इस यात्रा में 50 से ज्यादा झांकियां शामिल हुईं।\n\n3. सवारी शहर के किन प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी?\nयह सवारी चेतक सर्कल, हाथीपोल और जगदीश चौक सहित शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी।\n\n4. सावन के तीसरे सोमवार को उदयपुर में क्या आयोजन होता है?\nसावन के तीसरे सोमवार को भगवान को फतेहसागर झील में जल विहार कराया जाता है।",
  "url": "https://trendkia.com/religion/udayapura-men-savana-ke-akhiri-somavara-para-nikali-mahakal-ki-shahi-savari-50-se-adhika-jhankiyon-ke-satha-umari-bhari-bhira-21184",
  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-08-24",
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    "उदयपुर समाचार",
    "महाकाल सवारी",
    "सावन सोमवार",
    "उदयपुर उत्सव",
    "भगवान शिव"
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