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  "title": "उज्जैन में सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी पर उमड़ी भीड़, चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में निकले बाबा महाकाल",
  "summary": "सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के खास अवसर पर उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य सवारी निकाली गई। इस दौरान शहर शिवभक्ति में सराबोर नजर आया और देश भर से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।",
  "content": "सावन महीने का तीसरा सोमवार और नागपंचमी का पावन पर्व इस बार एक ही दिन पड़ने से उज्जैन नगरी पूरी तरह से शिवमय नजर आई। इस खास मौके पर राजाधिराज बाबा महाकाल ने चंद्रमौलेश्वर स्वरूप धारण किया और अपनी प्रजा का हालचाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। सवारी के शुरू होने से काफी पहले से ही महाकालेश्वर मंदिर और आसपास के रास्तों पर भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था, जिससे चारों तरफ धार्मिक उत्साह का माहौल बन गया।\n\nदोपहर के समय महाकाल मंदिर के सभा मंडप में भगवान चंद्रमौलेश्वर की विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा पूरी की गई। इसके बाद ठीक शाम को मंदिर परिसर से यह भव्य सवारी उत्साह के साथ आगे बढ़ी। मुख्य द्वार पर तैनात पुलिस के जवानों ने पालकी को सलामी दी और गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, शंखों की ध्वनि और गगनभेदी जयकारों के बीच पूरा शहर शिवभक्ति में डूबा दिखाई दिया।\n\nसवारी के दौरान भक्तों को भगवान के अलग-अलग दिव्य रूपों के दर्शन का सौभाग्य मिला। रजत पालकी में विराजमान होकर चंद्रमौलेश्वर रूप में बाबा महाकाल ने सभी को आशीर्वाद दिया। इसके अलावा पारंपरिक रूप से मनमहेश स्वरूप को हाथी पर और शिव तांडव रूप को गरुड़ रथ पर सवार किया गया, जिससे इस यात्रा की भव्यता और बढ़ गई। रास्ते में खड़े श्रद्धालुओं ने लगातार जय महाकाल के नारे लगाते हुए इन स्वरूपों के दर्शन किए।\n\nयह पावन यात्रा श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी मार्ग से होती हुई क्षिप्रा नदी के रामघाट तक पहुंची। रामघाट पर मोक्षदायिनी मां क्षिप्रा के पवित्र जल से भगवान का जलाभिषेक किया गया, जिसके बाद विशेष पूजा और भव्य आरती उतारी गई। पूजन के बाद यह काफिला शहर के अन्य प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए वापस मंदिर की तरफ बढ़ा।\n\nवापसी के समय यह सवारी रामघाट से चलकर रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, प्रसिद्ध गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी चौराहा के रास्ते होते हुए अपने गंतव्य यानी महाकाल मंदिर पहुंची। तय कार्यक्रम के अनुसार शाम के समय इसके मंदिर लौटने की पूरी संभावना रही।\n\nइस बार नागपंचमी का दिन होने के कारण इस आयोजन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया। महाकाल मंदिर के ऊपरी हिस्से में स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर के कपाट साल में केवल एक ही बार 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं, जो 16 अगस्त की मध्यरात्रि से शुरू होकर 17 अगस्त की मध्यरात्रि तक खुले रहे। इन दुर्लभ दर्शनों को पाने के लिए देश के दूर-दूर इलाकों से हजारों भक्त उज्जैन पहुंचे। एक ही दिन सावन सोमवार, नागपंचमी और महाकाल की सवारी का योग बनने से शहर में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ा, जिसे संभालने के लिए प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: देश के विभिन्न हिस्सों से सावन और नागपंचमी के पावन अवसर पर शिव मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।\n\nउज्जैन में: स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी भीड़ के कारण यातायात डायवर्जन और सुरक्षा के कड़े प्रबंधों का सामना करना पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी किस स्वरूप में निकाली गई?\nबाबा महाकाल रजत पालकी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले।\n\n2. नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में कितनी बार खुलते हैं?\nभगवान नागचंद्रेश्वर के कपाट वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं।\n\n3. महाकाल की सवारी किस नदी के तट पर पहुँची?\nबाबा महाकाल की सवारी रामघाट पर मोक्षदायिनी मां क्षिप्रा के तट पर पहुँची जहाँ विशेष अभिषेक हुआ।\n\n4. नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन कब से कब तक खुले रहे?\nये कपाट 16 अगस्त की मध्यरात्रि से 17 अगस्त की मध्यरात्रि तक श्रद्धालुओं के लिए खुले रहे।",
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  "category": "धर्म",
  "publishedAt": "2026-08-17",
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    "महाकाल सवारी",
    "उज्जैन",
    "सावन सोमवार",
    "नागपंचमी",
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