उज्जैन में मंगलवार तड़के महाकाल का भस्मी श्रृंगार, भक्तों ने मांगी सुख-समृद्धि मंगलवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती हुई, जिसमें बाबा महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत पूजन और चांदी के आभूषणों से श्रृंगार किया गया। उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार, 21 जुलाई 2026 की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भस्म आरती के साथ भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन हुए। मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया और इसके बाद श्री महाकाल का जलाभिषेक शुरू हुआ। दूध-दही से लेकर पंचामृत तक पूजन विधि जलाभिषेक के बाद पुजारियों ने दूध, दही, देसी घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से बाबा महाकाल का पूजन किया। सबसे पहले घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया, जिसके बाद पूजा विधि आगे बढ़ी। इसी क्रम में मंदिर के पुजारियों ने माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की भी विधिवत पूजा-अर्चना की और महाकाल को मिठाई तथा फलों का भोग अर्पित किया। कपूर से आरती करने के बाद बाबा को नैवेद्य चढ़ाया गया और इसके बाद भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें श्री महाकालेश्वर को पवित्र भस्म रमाई गई। चांदी के आभूषण, रुद्राक्ष और फूलों से भव्य श्रृंगार पूजन के दौरान भगवान महाकाल का श्रृंगार रजत ॐ, बिल्वपत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला से किया गया। बाबा के मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल सजाया गया, साथ ही डमरू, शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला भी अर्पित की गई। इसके अलावा खुशबूदार फूलों से बनी विशेष माला भी बाबा महाकाल को पहनाई गई, जिससे पूरा गर्भगृह दिव्य आभा से भर उठा। निराकार से साकार रूप में मिलते हैं महाकाल के दर्शन मान्यता है कि भस्म आरती के बाद श्री महाकाल निराकार रूप से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी वजह से हर मंगलवार और खासकर भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। दर्शन के दौरान पूरा मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने बाबा से अपने और अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। दीयों की रोशनी और भक्तों का अनुभव आज की भस्म आरती में भगवान श्री महाकालेश्वर का श्रृंगार आकर्षक वस्त्रों और आभूषणों से किया गया। दीयों की रोशनी और मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण दिव्य हो उठा। दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि भस्म आरती के दर्शन मात्र से मन को गहरी शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कई भक्तों ने इस दर्शन को अपने जीवन का सबसे पवित्र अनुभव बताया। मंदिर प्रशासन ने भी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के खास इंतजाम किए ताकि हर श्रद्धालु आराम से बाबा महाकाल के दर्शन कर सके। इस तरह आज की भस्म आरती एक बार फिर भक्ति, श्रद्धा और आस्था का अनूठा संगम बनकर सामने आई। इसका आप पर असर यह खबर सीधे तौर पर आम जनजीवन पर आर्थिक असर नहीं डालती, लेकिन उज्जैन जाने वाले और घर बैठे दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए इसका खास महत्व है। • भारत में: देशभर के महाकाल भक्त रोजाना की भस्म आरती से जुड़कर अपनी सुबह की पूजा-अर्चना और आस्था को इससे जोड़ पाते हैं। • उज्जैन में: मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को पता होना चाहिए कि प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के खास इंतजाम किए हैं, जिससे दर्शन आसान और सुरक्षित हो सकते हैं। सवाल-जवाब 1. आज भस्म आरती कब हुई? मंगलवार, 21 जुलाई 2026 की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती हुई। 2. पंचामृत पूजन में क्या-क्या शामिल था? दूध, दही, देसी घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से बाबा महाकाल का पूजन किया गया। 3. महाकाल का श्रृंगार किन चीजों से किया गया? रजत ॐ, बिल्वपत्र, मुकुट, रुद्राक्ष की माला, त्रिपुंड-त्रिशूल, डमरू, शेषनाग का रजत मुकुट और चांदी की मुंडमाल से श्रृंगार किया गया। 4. भस्म आरती के बाद क्या मान्यता है? मान्यता है कि भस्म आरती के बाद श्री महाकाल निराकार रूप से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। 5. पूजन में किन देवी-देवताओं की आराधना हुई? महाकाल के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की भी विधिवत पूजा-अर्चना की गई। 6. श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव के बारे में क्या कहा? श्रद्धालुओं ने बताया कि भस्म आरती के दर्शन से मन को गहरी शांति मिलती है और कई ने इसे जीवन का सबसे पवित्र अनुभव बताया। https://trendkia.com/religion/ujjain-men-mngalavara-tarake-mahakal-ka-bhasmi-shrringara-bhakton-ne-mangi-sukha-samriddhi-9284 TrendKia — Har trend, sabse pehle.