# साल 2026 में कब है गणेश चतुर्थी, जानिए महाराष्ट्र के अलावा देश के 8 राज्यों में कैसे मनाई जाती है बप्पा की आराधना

> साल 2026 में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। महाराष्ट्र से लेकर गोवा, कर्नाटक और तमिलनाडु तक देश के अलग-अलग राज्यों में बप्पा के स्वागत और पूजन की अपनी अनूठी परंपराएं हैं।

**Type:** article · **Category:** धर्म · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/religion/when-is-ganesh-chaturthi-in-2026-discover-how-8-indian-states-celebrate-bappa-beyond-maharashtra-31723 · **Language:** Hindi
**Tags:** गणेश चतुर्थी 2026, गणेशोत्सव, मोदक, माटोली, लालबागचा राजा, विनायक चविथि, धार्मिक पर्व

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गजानन का आगमन बेहद हर्षोल्लास के साथ किया जाता है, और इस बार यह पावन तिथि 14 सितंबर दिन सोमवार को पड़ रही है। हालांकि गणेश चतुर्थी का यह पर्व संपूर्ण भारत में व्यापक स्तर पर मनाया जाता है, फिर भी प्रत्येक राज्य में इसकी संस्कृति और अनुष्ठान की शैली बिलकुल भिन्न है। कुछ क्षेत्रों में जहां इसे दस दिवसीय सार्वजनिक उत्सव के रूप में भव्यता से आयोजित किया जाता है, वहीं अन्य स्थानों पर लोग अपने परिवारों के साथ पारंपरिक रूप से इसकी पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी विशेष दिवस पर भगवान गणेश का प्रादुर्भाव माता पार्वती और भगवान शिव के सुपुत्र के रूप में हुआ था। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और बुद्धि व विवेक का प्रदाता देवता माना जाता है। आइए जानते हैं कि देश के विभिन्न राज्यों में इस पर्व का क्या महत्व है और इसे किस प्रकार मनाया जाता है।

महाराष्ट्र में इस उत्सव का रंग ही बिल्कुल अलग और अनूठा दिखाई देता है, जबकि दक्षिण भारत में इस पावन पर्व को मां गौरी और भगवान गणेश के आत्मीय व पवित्र रिश्ते के रूप में देखा और सराहा जाता है। गोवा में मिट्टी के गणपति और पारंपरिक व्यंजनों के जरिए इस पर्व को मनाया जाता है, वहीं पश्चिम बंगाल और उत्तर भारत में इसका परिदृश्य पूरी तरह से भिन्न और मनमोहक होता है।

## महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की भव्य संस्कृति
महाराष्ट्र के भीतर गणेशोत्सव एक प्रमुख सांस्कृतिक पर्व के रूप में उत्साहपूर्वक आयोजित किया जाता है। यहाँ के निवासियों के लिए यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह इस संपूर्ण राज्य की सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। इस प्रदेश का सबसे प्रमुख आकर्षण मुंबई के दुनिया भर में प्रसिद्ध लालबागचा राजा और विशाल पंडालों में स्थापित भगवान गणेश की अत्यंत भव्य और मनमोहक प्रतिमाएँ हैं। लालबागचा राजा को ‘नवसाचा गणपति’ यानी भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला भगवान कहा जाता है, जिनके अलौकिक दर्शन के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं। भगवान गणेश को भोग के रूप में अर्पित किए जाने वाले नारियल और गुड़ के मिश्रण से तैयार उकडीचे मोदक इस संपूर्ण उत्सव के विशेष स्वाद और मुख्य आकर्षण का केंद्र होते हैं।

## गोवा में माटोली और चवथ की अनूठी परंपरा
गोवा में गणेश चतुर्थी के इस पावन पर्व को स्थानीय कोंकणी भाषा में ‘चवथ’ के नाम से पुकारा जाता है। इस क्षेत्र में प्रकृति प्रदत वस्तुओं, ताजे फलों और सब्जियों की मदद से ‘माटोली’ को सजाने की एक बेहद अनूठी और प्राचीन परंपरा आज भी जीवित है। नदी की विशेष मिट्टी से गढ़ी गई गणेश जी की पारंपरिक प्रतिमाओं को आदर के साथ घरों में लाया जाता है, जिनके ठीक ऊपर जंगली फलों, हरी सब्जियों और औषधीय पौधों को मिलाकर एक सुंदर और कलात्मक छत का निर्माण किया जाता है, जिसे ही ‘माटोली’ कहा जाता है। यह अनूठी परंपरा प्रकृति के प्रति गोवा के अगाध प्रेम और जुड़ाव को दर्शाती है। इस संपूर्ण उत्सव के दौरान विघ्नहर्ता भगवान गणेश के साथ-साथ माता गौरी यानी पार्वती और भगवान शिव की भी संयुक्त रूप से विधिवत पूजा की जाती है। उत्सव का पहला दिन, जिसे स्थानीय भाषा में ‘ताय’ कहा जाता है, पूरी तरह से माता गौरी को ही समर्पित होता है। यह पावन पर्व डेढ़, पाँच, सात या फिर नौ दिनों तक निरंतर चलता है, और सातवें दिन राज्य के कुछ चुनिंदा गाँवों जैसे कि कुम्भारजुआ में सजी-धजी नावों की एक बेहद अनोखी और भव्य झांकी निकाली जाती है। इस पर्व के दौरान बनने वाली सबसे खास मानसूनी मिठाई चावल के आटे के भीतर गुड़ और नारियल का मिश्रण भरकर हल्दी के ताजे पत्तों के बीच भाप में पकाकर तैयार की जाती है।

## कर्नाटक में गौरी हब्बु और महागणपति की आराधना
कर्नाटक राज्य में गणेश चतुर्थी के ठीक एक दिन पूर्व गौरी हब्बु यानी माता गौरी की विशेष पूजा संपन्न की जाती है। इसके पश्चात उत्सव के दूसरे दिन से बेंगलुरु और हुबली जैसे बड़े शहरों के सार्वजनिक पंडालों में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मंत्रोच्चार, भजनों और अत्यंत भव्य स्तर पर महागणपति की आराधना का दौर शुरू हो जाता है। तयशुदा नियमों और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार डेढ़, तीन, पाँच या सात दिनों की अवधि पूरी होने के बाद इन सभी गणेश प्रतिमाओं को भारी हर्षोल्लास और जयकारों के बीच जल में विसर्जित कर दिया जाता है।

## तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में विनायक चविथि का उल्लास
तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश में इस पावन पर्व को मुख्य रूप से ‘विनायक चविथि’ के नाम से जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के इस पांवन अवसर पर स्थानीय लोग अपने घरों के भीतर मिट्टी अथवा शुद्ध हल्दी से निर्मित भगवान गणेश की छोटी और आकर्षक प्रतिमा स्थापित करते हैं। कई क्षेत्रों में विशेष तौर पर मैटी विनायकुडु यानी पूरी तरह से शुद्ध मिट्टी के गणेश की पूजा किए जाने का सख्त विधान है। चित्तूर जिले में स्थित अत्यंत प्रसिद्ध वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर के भीतर इस सुअवसर पर लगातार 21 दिनों तक विशाल वार्षिक ब्रह्मोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश के दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। इसके अलावा हैदराबाद शहर के भीतर स्थित विश्वविख्यात ‘खैरताबाद गणेश’ की अत्यंत विशालकाय मूर्ति और हुसैन सागर झील के पावन तट पर आयोजित होने वाला भव्य विसर्जन जुलूस हर किसी के लिए मुख्य आकर्षण का बड़ा केंद्र रहता है।

## गुजरात में पंडालों की रौनक और गरबा की धूम
गुजरात के प्रमुख शहरों जैसे कि अहमदाबाद, सूरत और बड़ौदा में गणेश चतुर्थी के अवसर पर अत्यंत भव्य और कलात्मक पंडाल सजाए जाते हैं। इन तमाम स्थानों पर गणेश चतुर्थी की शाम को विधिवत महाआरती संपन्न होने के पश्चात पारंपरिक और ऊर्जावान ‘गरबा’ तथा ‘डांडिया रास’ का बड़े पैमाने पर आयोजन किया जाता है, जिसमें स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।

## उत्तर प्रदेश में गंगा घाटों की महाआरती
उत्तर प्रदेश के वाराणसी, लखनऊ और कानपुर जैसे ऐतिहासिक व प्रमुख शहरों में भी इस दौरान बेहद भव्य गणेश पंडाल सजाए जाते हैं। विशेष तौर पर वाराणसी में पावन गंगा नदी के विभिन्न घाटों पर विघ्नहर्ता बाप्पा की एक बेहद विशेष और भव्य महाआरती का आयोजन किया जाता है, और अंत में पवित्र गंगा नदी के भीतर ही गणेश प्रतिमा का विधि-विधान से विसर्जन भी संपन्न किया जाता है।

## तमिलनाडु में पिल्लैयार चतुरथाई की परंपरा
तमिलनाडु राज्य में गणेश चतुर्थी के इस पर्व को ‘विनायक चतुरथाई’ अथवा ‘पिल्लैयार चतुरथाई’ के नाम से पुकारा जाता है। स्थानीय तमिल संस्कृति के भीतर भगवान गणेश को आदर के साथ ‘पिल्लैयार’ कहा जाता है। इस क्षेत्र में उन्हें सामान्य रूप से एक ब्रह्मचारी देवता के रूप में पूजा जाता है, और उत्तर भारत तथा अन्य राज्यों के विपरीत वे अपनी दोनों पत्नियों यानी सिद्धि और बुद्धि के साथ नहीं बल्कि यहाँ अकेले ही पूजे जाते हैं। इस पर्व के दौरान बनने वाला सबसे खास और पारंपरिक पकवान कोझुकट्टई होता है, जो असल में उत्तर भारत के मोदक का ही दक्षिण भारतीय तमिल संस्करण माना जाता है。

## बिहार में चौरचन और व्रतों का पर्व
बिहार राज्य में गणेश चतुर्थी के पवित्र दिन विशेष रूप से चौरचन यानी चौर चतुर्थी का लोक पर्व मनाया जाता है। इस दिन परिवार की महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य और अनंत समृद्धि के लिए कठोर व्रत रखती हैं तथा अपने घरों के आँगन में सुंदर और कलात्मक अरिपन बनाकर विधि-विधान से चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करती हैं।

## इसका आप पर असर
गणेश चतुर्थी के इस पावन पर्व पर देश भर में धार्मिक आयोजनों और यात्राओं के दौरान विशेष तैयारियां देखने को मिलती हैं।

- **भारत में:** देश के विभिन्न राज्यों में सार्वजनिक पंडालों, परिवहन व्यवस्था और बाजारों में भारी भीड़ रहने की संभावना है। श्रद्धालुओं को यात्रा करते समय स्थानीय यातायात सलाह और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।
- **महाराष्ट्र और प्रमुख शहरों में:** मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में भव्य विसर्जन जुलूसों के दौरान मार्ग परिवर्तन और सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए जाते हैं। स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को जुलूस के दिनों में अतिरिक्त यात्रा समय को ध्यान में रखना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
गणेश चतुर्थी का यह पर्व धार्मिक मान्यताओं और क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपराओं के एक अनूठे मेल से जुड़ा हुआ है।

- **पौराणिक महत्व:** धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र के रूप में भगवान गणेश का प्रादुर्भाव हुआ था।
- **सांस्कृतिक विविधता:** देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय लोक संस्कृति, कृषि परंपराओं और मौसमी बदलावों के आधार पर बप्पा के स्वागत के विभिन्न तौर-तरीके विकसित हुए हैं।
- **ऐतिहासिक परंपरा:** लोकमान्य तिलक के समय से सार्वजनिक गणेशोत्सव ने सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान का रूप लिया, जो आज भी विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रूपों में जीवंत है।

## सवाल-जवाब

### 1. साल 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व कब मनाया जाएगा?
साल 2026 में गणेश चतुर्थी का यह पावन पर्व 14 सितंबर दिन सोमवार को मनाया जाएगा।

### 2. गोवा में गणेश चतुर्थी को किस स्थानीय नाम से पुकारा जाता है?
गोवा में गणेश चतुर्थी को स्थानीय भाषा में ‘चवथ’ कहा जाता है।

### 3. मुंबई के किस प्रसिद्ध गणपति के दर्शन के लिए देश-विदेश से भक्त आते हैं?
मुंबई के विश्व प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों भक्त आते हैं।

### 4. कर्नाटक में गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले कौन सा पर्व मनाया जाता है?
कर्नाटक में गणेश चतुर्थी से एक दिन पूर्व माता गौरी की पूजा से जुड़ा ‘गौरी हब्बु’ पर्व मनाया जाता है।

### 5. बिहार में गणेश चतुर्थी के दिन कौन सा लोक पर्व मनाया जाता है?
बिहार में गणेश चतुर्थी के दिन ‘चौरचन’ या ‘चौर चतुरथी’ का पर्व मनाया जाता है जिसमें महिलाएं व्रत रखती हैं।

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