नीट एसएस में कटऑफ घटकर 30 परसेंटाइल हुई, मेडिकल स्पेशियलिटी के नए पासिंग मार्क्स जारी स्वास्थ्य मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज ने पात्रता सीमा 50 से घटाकर 30 परसेंटाइल कर दी है। सभी प्रश्न पत्र समूहों के न्यूनतम अंक घोषित हो चुके हैं, जबकि पहले जारी रैंक और स्कोरकार्ड में कोई बदलाव नहीं होगा। सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के इच्छुक डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज यानी एनबीईएमएस ने नीट-एसएस 2025 के लिए जरूरी क्वालिफाइंग परसेंटाइल को 50वें परसेंटाइल से घटाकर 30वां परसेंटाइल तय कर दिया है। मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना में बोर्ड ने बताया कि यह कदम केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पत्राचार और 17 सितंबर 2026 को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर उठाया गया है। इस संशोधन के बाद वे सभी अभ्यर्थी अब पात्र माने जाएंगे जिन्होंने अपने संबंधित विषय वर्ग में कम से कम 30वां परसेंटाइल स्कोर किया है। बोर्ड ने आगे की प्रवेश प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए संशोधित परिणाम मेडिकल काउंसलिंग कमेटी, डीजीएचएस और स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिए हैं। रैंक और स्कोरकार्ड की मौजूदा स्थिति संशोधित पात्रता सूची सामने आने के बावजूद अभ्यर्थियों की मेरिट स्थिति में कोई बुनियादी फेरबदल नहीं किया गया है। एनबीईएमएस ने यह स्पष्ट रूप से दोहराया है कि 23 जनवरी 2026 को घोषित किए गए प्रश्न पत्र समूह आधारित रैंक बिल्कुल पहले जैसे ही रहेंगे। इसके साथ ही छात्रों के लिए कोई नया स्कोरकार्ड भी प्रिंट या जारी नहीं किया जाएगा। आसान शब्दों में कहें तो कटऑफ नीचे आने से नए अभ्यर्थी काउंसलिंग में शामिल होने के योग्य तो बन गए हैं, लेकिन जो डॉक्टर पहले से ही मेरिट सूची में उच्च स्थान पर थे, उनकी ग्रुप-विशिष्ट रैंक अप्रभावित रहेगी। इस पूरी प्रक्रिया का डेटा आगे की सीट आवंटन व्यवस्था के लिए अधिकृत काउंसलिंग एजेंसियों को सौंपा जा चुका है। विभिन्न प्रश्न पत्र समूहों के न्यूनतम कटऑफ अंक नीट-एसएस 2025 की कुल 600 अंकों की परीक्षा में 30वें परसेंटाइल के हिसाब से अलग-अलग विषयों के लिए न्यूनतम पासिंग मार्क्स निर्धारित किए गए हैं। अलग-अलग मेडिकल शाखाओं के संशोधित कटऑफ अंक इस प्रकार तय हुए हैं • ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी: इस वर्ग में न्यूनतम अर्हक अंक सबसे अधिक 325 तय किए गए हैं। • रेडियोडायग्नोसिस और माइक्रोबायोलॉजी: रेडियोडायग्नोसिस के लिए कटऑफ 315 अंक और माइक्रोबायोलॉजी के लिए 306 अंक निर्धारित है। • साइकियाट्री और रेस्पिरेटरी मेडिसिन: साइकियाट्री ग्रुप में 302 अंक और रेस्पिरेटरी मेडिसिन के लिए 285 अंक पाना अनिवार्य है। • ऑर्थोपेडिक्स और क्रिटिकल केयर: ऑर्थोपेडिक्स वर्ग में कटऑफ 256 अंक और क्रिटिकल केयर मेडिसिन में 254 अंक रखी गई है। • एनेस्थीसियोलॉजी और ईएनटी: एनेस्थीसियोलॉजी के अभ्यर्थियों को 249 अंक तथा ईएनटी ग्रुप में 247 अंक प्राप्त करने पर पात्र माना गया है। • सर्जिकल और पैथोलॉजी: सर्जिकल ग्रुप के लिए 243 अंक और पैथोलॉजी संकाय के लिए 238 अंक न्यूनतम कटऑफ घोषित की गई है। • पीडियाट्रिक और फार्माकोलॉजी: पीडियाट्रिक में 231 अंक और फार्माकोलॉजी में 213 अंक तय किए गए हैं। • मेडिकल ऑन्कोलॉजी और मेडिकल ग्रुप: मेडिकल ऑन्कोलॉजी के लिए 180 अंक तथा मेडिकल समूह के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम कटऑफ 175 अंक निर्धारित हुई है। एमबीबीएस अंकों का मिलान और उम्मीदवारी के नियम प्रवेश के समय योग्यता सत्यापन को लेकर कड़े दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। अभ्यर्थियों ने अपने ऑनलाइन आवेदन पत्र में सभी एमबीबीएस प्रोफेशनल परीक्षाओं के जो कुल अंक प्रतिशत में दर्ज किए थे, काउंसलिंग अथवा प्रवेश प्राधिकारी मूल दस्तावेजों से उनका भौतिक सत्यापन करेंगे। स्कोरकार्ड में एमबीबीएस के इन कुल अंकों का उल्लेख उन मामलों में किया गया है जहां नीट-एसएस 2025 में दो उम्मीदवारों के बीच टाई की स्थिति को सुलझाने के लिए इनका सहारा लिया गया था। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि किसी अभ्यर्थी ने आवेदन में गलत अंक दर्ज किए थे और उन्हीं अंकों के आधार पर टाई हल करके रैंक तय हुई थी, तो संबंधित उम्मीदवार की दावेदारी फौरन रद्द कर दी जाएगी। अनुचित साधनों पर रोक और आधिकारिक सहायता परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए सख्त चेतावनी भी जारी की गई है। यदि किसी भी चरण में कोई अभ्यर्थी अनुचित साधनों का उपयोग करते हुए या कदाचार में लिप्त पाया जाता है, तो एनबीईएमएस, एमसीसी अथवा संबंधित काउंसलिंग प्राधिकरण उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कदम उठाएंगे। ऐसे अभ्यर्थियों का परिणाम अथवा चयन तुरंत प्रभाव से निरस्त माना जाएगा, भले ही वे सूची में सफल क्यों न घोषित हो चुके हों। किसी भी प्रकार की शंका या तकनीकी समस्या के समाधान के लिए अभ्यर्थी टेलीफोन नंबर 011-45593000 पर संपर्क कर सकते हैं या फिर संस्थान के आधिकारिक कम्युनिकेशन वेब पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसका आप पर असर कटऑफ परसेंटाइल में कटौती से सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों पर प्रवेश के मौकों और काउंसलिंग की पात्रता में सीधा विस्तार हुआ है। • अखिल भारतीय स्तर पर: जिन एमबीबीएस और पीजी उत्तीर्ण डॉक्टरों का स्कोर 30वें से 50वें परसेंटाइल के बीच था, वे अब सुपर स्पेशियलिटी सीटों की काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र हो गए हैं। इस निर्णय से अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी की खाली सीटें भरने में मदद मिलेगी। • मेरिट और रैंक पर असर: संशोधित कटऑफ से अर्हता तो मिली है, लेकिन 23 जनवरी 2026 को जारी ग्रुप-विशिष्ट रैंक में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि पहले से उच्च रैंक वाले अभ्यर्थियों की कॉलेज वरीयता और काउंसलिंग क्रम सुरक्षित रहेगा। • दस्तावेज सत्यापन की अनिवार्यता: प्रवेश के समय आवेदन में दर्ज कुल एमबीबीएस अंकों का मूल प्रमाण पत्रों से कड़ाई से मिलान किया जाएगा। यदि टाई-ब्रेकिंग में इस्तेमाल की गई जानकारी गलत पाई जाती है, तो प्रवेश तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। • हेल्पलाइन और सहायता: किसी भी संशय की स्थिति में अभ्यर्थी बोर्ड के फोन नंबर 011-45593000 पर बात कर सकते हैं। इसके अलावा आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर समाधान पाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह फैसला खाली रह जाने वाली सीटों को भरने, सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक आदेश और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नीतिगत निर्देश के अनुपालन में लिया गया है। • न्यायिक और प्रशासनिक आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को इस संबंध में स्पष्ट आदेश पारित किया था। इसी आदेश के आलोक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने परीक्षा नियामक बोर्ड को पात्रता मानदंड संशोधित करने का औपचारिक निर्देश भेजा। • सीटों का खाली रहना: पूर्व में 50वें परसेंटाइल की अनिवार्य शर्त के कारण कई विशिष्ट चिकित्सा शाखाओं में योग्य उम्मीदवारों की संख्या सीमित रह जाती थी। कटऑफ को 30वें परसेंटाइल पर लाने से रिक्तियों को भरने के लिए पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ उपलब्ध हो सकेंगे। • रैंकिंग व्यवस्था का संरक्षण: बोर्ड ने काउंसलिंग की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पुरानी रैंकों को न बदलने का रास्ता चुना। इससे पहले से योग्य छात्रों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना अतिरिक्त डॉक्टरों को काउंसलिंग में शामिल किया जा सका। सवाल-जवाब 1. नीट-एसएस 2025 का नया क्वालिफाइंग परसेंटाइल क्या तय किया गया है? एनबीईएमएस ने नीट-एसएस 2025 का क्वालिफाइंग कटऑफ 50वें परसेंटाइल से घटाकर 30वां परसेंटाइल कर दिया है। 2. क्या उम्मीदवारों के लिए कोई नया स्कोरकार्ड जारी किया जाएगा? नहीं, बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थियों के लिए कोई नया स्कोरकार्ड जारी नहीं होगा और 23 जनवरी 2026 को घोषित रैंक में कोई बदलाव नहीं होगा। 3. कटऑफ घटाने का फैसला किस आधार पर लिया गया? यह निर्णय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पत्र और सुप्रीम कोर्ट के 17 सितंबर 2026 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। 4. संशोधित कटऑफ में सबसे अधिक और सबसे कम पासिंग मार्क्स किस विषय के हैं? ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी में सबसे अधिक 325 अंक तथा मेडिकल ग्रुप में सबसे कम 175 अंक का कटऑफ स्कोर तय हुआ है। 5. आवेदन में एमबीबीएस के गलत अंक पाए जाने पर क्या कार्रवाई होगी? यदि टाई-ब्रेकिंग में इस्तेमाल किए गए एमबीबीएस अंक सत्यापन के दौरान गलत पाए जाते हैं, तो अभ्यर्थी की उम्मीदवारी तुरंत रद्द कर दी जाएगी। 6. किसी भी समस्या या जानकारी के लिए अभ्यर्थी कहां संपर्क कर सकते हैं? अभ्यर्थी फोन नंबर 011-45593000 पर संपर्क कर सकते हैं या आधिकारिक वेब पोर्टल exam.natboard.edu.in के माध्यम से अपनी शिकायत भेज सकते हैं। https://trendkia.com/results/neet-ss-men-kata-pha-ghatakara-30-parasentaila-hui-medikala-speshiyaliti-ke-nae-pasinga-marksa-jari-36705 TrendKia — Har trend, sabse pehle.