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  "type": "article",
  "title": "अभूतपूर्व एल नीनो तूफान भी कोलोराडो नदी के गहराते ऐतिहासिक जल संकट को टालने में नाकाम रहेगा",
  "summary": "अमेरिकी दक्षिण-पश्चिम में अभूतपूर्व एल नीनो के कारण भारी बारिश और हिमपात का अनुमान है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मौसमी वर्षा कोलोराडो नदी, लेक पॉवेल और लेक मीड के ऐतिहासिक जल संकट को समाप्त नहीं कर पाएगी।",
  "content": "प्रशांत महासागर में रिकॉर्ड इतिहास का सबसे भयंकर तूफान रूप ले रहा है, लेकिन पर्यावरण वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आगामी शीतकालीन बारिश और बर्फबारी अमेरिकी पश्चिम के गहराते जल संकट को हल नहीं कर पाएगी। इस वर्ष आकार ले रहा सुपर एल नीनो मौसम तंत्र सर्दियों और वसंत के दौरान दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और पर्वतीय हिमपात ला सकता है। इसके बावजूद जलविज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बेहतर स्थिति में भी यह मौसमी वर्षा कोलोराडो नदी घाटी के घटते जल स्तर की भरपाई करने में असमर्थ साबित होगी। सात राज्यों की विशाल आबादी और कृषि क्षेत्र को जीवन देने वाली कोलोराडो नदी लगातार बढ़ते तापमान और दशकों से चले आ रहे जल के अत्यधिक दोहन के कारण विनाशकारी स्थिति में पहुंच चुकी है।\n\n \n\nऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंची लेक पॉवेल और लेक मीड झीलें\n\nजल संकट की यह भयावह तस्वीर कोलोराडो नदी पर बने दो मुख्य जलाशयों लेक पॉवेल और लेक मीड के गिरते जल स्तर में स्पष्ट दिखाई देती है। हाल ही में दर्ज किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लेक पॉवेल का जल स्तर घटकर मात्र 3,519.4 फीट पर आ गया है, जबकि लेक मीड का स्तर गिरकर 1,039.6 फीट रह गया है। ये दोनों आंकड़े इतिहास में अब तक का सबसे निचला स्तर दर्ज किए गए हैं। कोलोराडो नदी का मुख्य आधार अपर बेसिन के चार राज्यों कोलोराडो, यूटा, न्यू मेक्सिको और वायोमिंग के पहाड़ों पर पिघलने वाली बर्फ है। यही बर्फ पिघलकर लेक पॉवेल में जमा होती है और वहां से आगे बढ़ते हुए लेक मीड के जरिए लोअर बेसिन के तीन राज्यों कैलिफोर्निया, एरिजोना और नेवादा तक पानी पहुंचाती है।\n\n यदि जल स्तर में लगातार हो रही यह गिरावट नहीं रुकी, तो दोनों जलाशय उस स्थिति में पहुंच जाएंगे जिसे जलविज्ञान में 'डेडपूल' कहा जाता है। लेक पॉवेल के लिए डेडपूल का स्तर 3,370 फीट तय है, जबकि लेक मीड के लिए यह सीमा 895 फीट है। डेडपूल का स्तर छूते ही ग्लेन कैन्यन बांध और हूवर बांध के निकास द्वार इतने नीचे रह जाएंगे कि जलाशयों से पानी का प्रवाह पूरी तरह रुक जाएगा। इससे निचले राज्यों एरिजोना, कैलिफोर्निया और नेवादा को पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो जाएगी। इतना ही नहीं, डेडपूल के स्तर तक पहुंचने से काफी पहले ही घटते जल स्तर के कारण बांधों पर बने जलविद्युत संयंत्र बंद हो जाएंगे, जिससे पूरे दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में लाखों लोगों के लिए स्वच्छ बिजली का उत्पादन रुक जाएगा।\n\n \n\nएल नीनो और अपर बेसिन हिमपात के बीच का अंतर\n\nसर्दियों की बारिश से कुछ निचले इलाकों को अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन मौसम विज्ञानियों का कहना है कि एल नीनो का असर उन पर्वतीय क्षेत्रों में बहुत कम होता है जहां से कोलोराडो नदी को पानी मिलता है। बर्कले अर्थ के जलवायु वैज्ञानिक ज़ेके हॉसफादर के अनुसार, एल नीनो के दौरान देश के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश की संभावना काफी अधिक होती है, लेकिन उत्तरी पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी सुनिश्चित नहीं होती। ज़ेके हॉसफादर ने बताया, \"एक मजबूत एल नीनो दक्षिणी अमेरिका में दक्षिणी कैलिफोर्निया से एरिजोना, न्यू मेक्सिको और गल्फ कोस्ट तक गीले मौसम की संभावना को काफी बढ़ा देता है।\"\n\n ऐतिहासिक मौसम आंकड़े भी इस भौगोलिक विषमता की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2015-16 की सर्दियों में आए पिछले बेहद मजबूत एल नीनो के दौरान दक्षिणी राज्यों में भारी वर्षा हुई थी, लेकिन नदी के अपर बेसिन वाले राज्यों में सामान्य बर्फबारी ही दर्ज की गई थी। शोध दर्शाते हैं कि एल नीनो और अपर बेसिन के हिमपात या जल प्रवाह के बीच कोई सीधा या मजबूत संबंध नहीं है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया एग्रीकल्चर एंड नेचुरल रिसोर्सेज के जलवायु वैज्ञानिक डैनियल स्वैन के अनुसार, एक सामान्य एल नीनो और एक अत्यधिक भयंकर एल नीनो दो बिल्कुल अलग स्थितियां होती हैं। हालांकि यह भयंकर एल नीनो कुछ बारिश उत्तरी राज्यों तक पहुंचा सकता है, लेकिन इसका मुख्य असर लोअर बेसिन के राज्यों पर ही पड़ेगा। इससे लेक पॉवेल और लेक मीड में जल भंडार बढ़ाने में कोई खास मदद नहीं मिलेगी।\n\n \n\nजलवायु परिवर्तन और घटता जल प्रवाह\n\nवैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि ने सर्दियों के मौसम के प्राकृतिक चक्र को पूरी तरह बदल दिया है। जलवायु परिवर्तन के कारण अब सर्दियों में होने वाली बारिश और बर्फबारी पहले जितनी प्रभावी नहीं रह गई है। तापमान बढ़ा होने के कारण जब बारिश या बर्फ गिरती है, तो पानी का बड़ा हिस्सा सूखी मिट्टी द्वारा सोख लिया जाता है, हवा में वाष्पीकृत हो जाता है, या बर्फ बनने के बजाय केवल बारिश के रूप में बह जाता है। डैनियल स्वैन का कहना है कि मौजूदा गर्म माहौल में होने वाली बारिश वर्ष 1980 या 1990 जैसी भारी बर्फबारी की जगह कभी नहीं ले सकती, जो गर्मियों तक धीरे-धीरे पिघलकर नदी को पानी देती थी।\n\n आगामी वर्ष में एल नीनो के प्रभाव से वैश्विक तापमान में और अधिक वृद्धि होने की आशंका है, जिससे यह साफ होता है कि जलवायु परिवर्तन कितनी तेजी से हमारी जल प्रणालियों को प्रभावित कर रहा है। वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के चलते वर्ष 2050 तक कोलोराडो नदी के कुल जल प्रवाह में 30 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। ऐसे में केवल एक साल की अच्छी बर्फबारी दशकों से चले आ रहे जल घाटे को पूरा नहीं कर सकती।\n\n \n\nसैकड़ों साल पुराने जल समझौते की समाप्ति और राजनीतिक संकट\n\nप्राकृतिक जल संकट के साथ-साथ यह नदी एक भीषण प्रशासनिक और राजनीतिक संकट से भी जूझ रही है। कोलोराडो नदी के जल बंटवारे को नियंत्रित करने वाला 100 साल पुराना अंतरराज्यीय समझौता इस वर्ष के अंत में समाप्त हो रहा है। इस ऐतिहासिक समझौते में शुरू से ही नदी की वास्तविक क्षमता से अधिक पानी कृषि और बढ़ते शहरों के लिए आवंटित कर दिया गया था। अब नए समझौते को लेकर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।\n\n राज्यों द्वारा तय समय सीमा तय करने में विफल रहने के बाद अब अमेरिकी संघीय सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा है। लेक पॉवेल और लेक मीड के ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर और राजनीतिक गतिरोध के बीच पर्यावरण विशेषज्ञ इस स्थिति को बेहद गंभीर मान रहे हैं। पर्यावरण गैर-लाभकारी संगठन वेस्टर्न रिसोर्स एडवोकेट्स के नीति प्रबंधक जॉन बर्ग्रेन ने स्थिति की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि लोग दशकों से कोलोराडो नदी संकट की बात कर रहे थे, लेकिन अब हम वास्तव में इस संकट के बीच खड़े हैं। जॉन बर्ग्रेन ने चेतावनी दी कि यदि एक अच्छी बर्फबारी से कुछ समय की राहत मिल भी जाती है, तब भी मुख्य समस्या जस की तस बनी रहेगी और संकट जल्द ही वापस लौट आएगा।\n\nइसका आप पर असर\nजल संकट के इस गहराते प्रभाव का सीधा असर कृषि, ऊर्जा व्यवस्था और पर्यावरणीय स्थिरता पर पड़ रहा है:\n\n• वैश्विक स्तर पर: प्रमुख नदी प्रणालियों पर जलवायु परिवर्तन का यह असर वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं, कृषि उत्पादों की कीमतों और मौसम में अनिश्चितता के बढ़ते जोखिम को दर्शाता है।\n\n• अमेरिकी दक्षिण-पश्चिम में: जलाशयों का गिरता स्तर सात राज्यों के 4 करोड़ निवासियों की पेयजल आपूर्ति के लिए खतरा पैदा कर रहा है, साथ ही कृषि सिंचाई में भारी कटौती और प्रमुख बांधों से पनबिजली उत्पादन ठप होने का जोखिम बढ़ा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एल नीनो कोलोराडो नदी के जल संकट को क्यों नहीं सुलझा पाएगा?\nएल नीनो का मुख्य असर लोअर बेसिन में बारिश के रूप में होता है, जबकि नदी के जलाशयों लेक पॉवेल और लेक मीड को भरने के लिए अपर बेसिन के पहाड़ों पर हिमपात की आवश्यकता होती है।\n\n2. लेक पॉवेल और लेक मीड का वर्तमान जल स्तर कितना है?\nलेक पॉवेल का जल स्तर गिरकर 3,519.4 फीट और लेक मीड का जल स्तर घटकर 1,039.6 फीट पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।\n\n3. यदि जलाशय डेडपूल के स्तर तक पहुंच जाते हैं तो क्या होगा?\nलेक पॉवेल के लिए 3,370 फीट और लेक मीड के लिए 895 फीट के डेडपूल स्तर पर पहुंचते ही बांधों से नीचे की ओर पानी का बहाव रुक जाएगा, जिससे जल आपूर्ति और पनबिजली उत्पादन ठप हो जाएगा।\n\n4. कोलोराडो नदी समझौते के सामने राजनीतिक संकट क्यों है?\nजल अधिकारों को नियंत्रित करने वाला 100 साल पुराना अंतरराज्यीय समझौता इस वर्ष के अंत में समाप्त हो रहा है और राज्य नए जल आवंटन पर सहमति बनाने में विफल रहे हैं।\n\n5. जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक नदी के जल प्रवाह में कितनी कमी आ सकती है?\nवैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, बढ़ते तापमान और सूखी मिट्टी के कारण वर्ष 2050 तक कोलोराडो नदी के कुल जल प्रवाह में 30 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।",
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  "category": "विज्ञान",
  "publishedAt": "2026-08-22",
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