आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की खोज से हिला कंप्यूटर साइंस, एक्सपोनेंशियल टाइम हाइपोथिसिस पर उठे सवाल ओपनएआई और एंथ्रोपिक के दावों ने सैद्धांतिक कंप्यूटर साइंस की नींव हिला दी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन नए एआई प्रूफ्स से दशकों पुराना शोध और कई अकादमिक पेपर अप्रাসঙ্গিক हो सकते हैं। ओपनएआई और एंथ्रोपिक नामक प्रमुख संगठनों ने दावा किया है कि उन्होंने एक्सपोनेंशियल टाइम हाइपोथिसिस को गलत साबित कर दिया है। इस परिकल्पना पर सैद्धांतिक कंप्यूटर साइंस में जटिलता और एल्गोरिदम डिज़ाइन से जुड़े अनगिनत शोध आधारित रहे हैं। इस पुरानी मान्यता के तहत यह माना जाता था कि किसी समस्या का आकार बढ़ने पर उसे हल करने में लगने वाली मेहनत तेजी से बढ़ती है। सम्मेलनों में होगी चर्चा और उलझन शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस नई स्थिति से अकादमिक सम्मेलनों में अजीब परिस्थितियां पैदा होंगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि लोग इस बात से शुरुआत करेंगे कि यह परिकल्पना अब गलत साबित हो चुकी है और उनके कई पुराने शोध पत्र बेकार हो गए हैं। हालांकि इसे विज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है जिससे नई सीख मिलती है। अभी तक नहीं हुआ स्वतंत्र सत्यापन विशेषज्ञों ने अभी तक एआई द्वारा तैयार किए गए इन प्रमाणों का पूरी तरह से स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया है। दोनों कंपनियों ने इन शोध पत्रों को गिटहब पर प्राकृतिक भाषा और लीन फॉर्मेट में अपलोड कर दिया है। ओपनएआई ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सांता बारबरा के उन कंप्यूटर वैज्ञानिकों से संपर्क किया है जिन्होंने मूल रूप से इस हाइपोथिसिस का प्रस्ताव दिया था। इसके अलावा एमआईटी के एक शिक्षाविद् को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है ताकि शोधकर्ताओं को इन साक्ष्यों को समझने में मदद मिल सके। इस पहल के तहत एक गूगल फॉर्म के जरिए स्वेच्छा से काम करने वालों और प्रतिक्रिया देने वालों को आमंत्रित किया गया है, साथ ही ओपनएआई ने इस विषय पर एक सम्मेलन आयोजित करने के लिए फंड देने का वादा किया है। शोधकर्ताओं पर असर और प्रतिक्रियाएं यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सांता बारबरा के प्रोफेसर डैनियल लोक्सटाटोन का कहना है कि यदि यह परिणाम सही साबित होते हैं तो उनके लगभग 50 प्रकाशित शोध पत्र या तो अर्थहीन हो जाएंगे या उनमें सुधार की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने इस स्थिति को क्षेत्र के बीचों-बीच गिराए गए एक बड़े बम के समान बताया है। कोपेनहेगन के आईटी विश्वविद्यालय में एल्गोरिदम अनुसंधान समूह के प्रमुख थोर हुसफेल्ड ने इस साल का अधिकांश समय अपने उपक्षेत्र की एक अकेली समस्या पर विचार करने में बिताया था। उनका कहना है कि अब उनका वह सारा काम बेकार हो गया है। उन्होंने पहले उस परिकल्पना को तैयार किया था जिसे अब ओपनएआई ने गलत साबित कर दिया है। इसके बावजूद उन्होंने इस नए परिणाम को लेकर काफी उत्साह व्यक्त किया है। गणित में नई रोशनी की तलाश थोर हुसफेल्ड का मानना है कि गणितज्ञ होना एक अंधेरे कमरे में टटोलने जैसा है और ऐसा लगता है जैसे किसी ने एक पूरे उपक्षेत्र को ज्ञान की रोशनी से रोशन कर दिया हो। वैज्ञानिक सदियों से परिकल्पनाएं बनाकर उन्हें गलत साबित करने की प्रक्रिया से आगे बढ़ते रहे हैं। अकादमिक जगत में किसी का काम पीछे छूट जाना आम बात है, लेकिन एआई ने इस गति को बहुत तेज कर दिया है। एआई द्वारा लगातार नए परिणाम सामने आने से कई शोधकर्ताओं पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बढ़ रहा है। हुसफेल्ड के विभाग ने एक व्यावसायिक मनोवैज्ञानिक को काम पर रखने पर भी विचार किया है क्योंकि कुछ लोग इस बदलाव से काफी निराश और परेशान महसूस कर रहे हैं। इसके अलावा एआई की वजह से बड़ी मात्रा में सामग्री उत्पन्न हो रही है जिससे शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी और बेकार सामग्री में फर्क करना कठिन हो गया है। ओपनएआई ने इस महीने की शुरुआत में गिटहब पर 400 समस्याओं से जुड़े 722 पांडुलिपियां अपलोड कर दी थीं जिससे शिक्षाविदों में नाराजगी देखी गई। कुछ दस्तावेजों में गलतियां भी पाई गईं जिससे यह प्रतीत हुआ कि यह कदम जल्दबाजी में उठाया गया था। हालांकि इस बार एआई द्वारा प्रस्तुत नया शोध पत्र पिछली प्रकाशनों की तुलना में बेहतर बताया जा रहा है। लिंकोपिंग विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर विक्टर लागरक्विस्ट का कहना है कि यदि यह परिकल्पना गलत है तो यह एक रोमांचक स्थिति है। वह उन समस्याओं पर फिर से काम करना चाहते हैं जिन्हें उन्होंने इस धारणा के तहत छोड़ दिया था कि यह परिकल्पना सही है। वेब सुरक्षा के पीछे काम करने वाली क्रिप्टोग्राफी पर भी इसका असर पड़ सकता है जो इस बात पर आधारित है कि कुछ गणितीय समस्याओं को हल करने में बहुत अधिक समय लगता है। हालांकि यह विशेष परिणाम सीधे तौर पर क्रिप्टोग्राफी को प्रभावित नहीं करता, लेकिन इससे सिस्टम डिजाइनरों को सतर्क हो जाना चाहिए। भविष्य में कंप्यूटर विज्ञान की इस प्रक्रिया को जारी रखना महत्वपूर्ण है ताकि आधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को पहचाना जा सके। जोन्सन का मानना है कि वह अपने और दूसरों के उन पत्रों की फिर से समीक्षा करेंगे जो इस परिकल्पना पर आधारित थे। वह इस बात से उत्साहित हैं कि उन्हें इस प्रमाण के विवरण को गहराई से देखने का मौका मिल रहा है। उनका कहना है कि यदि कोई प्रमाण सही है तो भविष्य में उसका उपयोग किया जाना चाहिए, चाहे वह इंसानों ने तैयार किया हो या किसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने। सवाल-जवाब 1. ओपनएआई और एंथ्रोपिक ने किस परिकल्पना को गलत साबित करने का दावा किया है? दोनों कंपनियों ने एक्सपोनेंशियल टाइम हाइपोथिसिस को गलत साबित करने का दावा किया है। 2. कंप्यूटर साइंस के शोध पर इसका क्या असर पड़ा है? इस खोज से जटिलता और एल्गोरिदम डिज़ाइन से जुड़े कई पुराने शोध और अकादमिक पेपर अप्रसंगिक हो सकते हैं। 3. एआई द्वारा तैयार किए गए प्रमाणों को कहाँ प्रकाशित किया गया है? इन प्रमाणों को गिटहब पर प्राकृतिक भाषा और लीन फॉर्मेट में प्रकाशित किया गया है। 4. प्रोफेसर डैनियल लोक्सटाटोन के कितने शोध पत्रों पर असर पड़ सकता है? उनके लगभग 50 प्रकाशित शोध पत्र या तो अर्थहीन हो सकते हैं या उनमें सुधार की आवश्यकता हो सकती है। https://trendkia.com/science/ai-breakthrough-disproves-exponential-time-hypothesis-and-upends-computer-science-53320 TrendKia — Har trend, sabse pehle.