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  "title": "अंतरिक्ष प्रेमी ध्यान दें, 28 अगस्त 2026 को पृथ्वी की छाया में छिपेगा 92 प्रतिशत चांद, जानिए भारत में विजिबिलिटी की स्थिति",
  "summary": "वर्ष 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगने जा रहा है, जो एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। भारतीय समय के अनुसार सुबह 6:55 बजे शुरू होने वाले इस खगोलीय नजारे की पूरी समय सारणी और वैश्विक दृश्यता के बारे में विस्तार से पढ़ें।",
  "content": "आकाशगंगा और खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अगस्त 2026 का अंत बेहद खास रहने वाला है। आगामी 28 अगस्त 2026 को अंतरिक्ष में इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण घटित होने जा रहा है। विज्ञान और खगोलशास्त्र की गणनाओं के अनुसार यह साधारण ग्रहण न होकर एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण (डीप पार्शियल लूनर एक्लिप्स) होगा। इस घटना के दौरान चंद्रमा का एक बहुत बड़ा हिस्सा हमारी पृथ्वी की सबसे गहरी और घनी छाया क्षेत्र में प्रवेश कर जाएगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ग्रहण के सबसे उच्चतम बिंदु पर चांद का लगभग 92 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की अंबरल शैडो (गहरी छाया) से पूरी तरह ढक जाएगा।\n\nसाल 2026 के अंतिम चंद्र ग्रहण का वैज्ञानिक महत्व और स्वरूप\nयह खगोलीय घटना इसलिए भी विशेष चर्चा में है क्योंकि जब 92 प्रतिशत चंद्रमा पृथ्वी की घनी छाया में सिमट जाता है, तो आसमान में एक अद्भुत दृश्य बनता है। जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होकर चंद्रमा तक पहुंचता है, तो केवल लाल रंग की तरंगदैर्ध्य ही चांद की सतह तक पहुंच पाती है। इसके कारण ग्रहण के दौरान चंद्रमा हल्के तांबे या गहरे लाल रंग का नजर आने लगता है। सामान्य भाषा में लोग इसे 'ब्लड मून प्रभाव' भी कहते हैं। हालांकि खगोलविदों का स्पष्ट कहना है कि लाल रंग की आभा दिखने के बावजूद यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं है, बल्कि आंशिक श्रेणी का ही ग्रहण है।\n\nक्या भारतीय आसमान में नजर आएगा यह खगोलीय नजारा?\nभारतीय दर्शकों और खगोल प्रेमियों के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या वे 28 अगस्त को अपनी छतों से या खुले मैदानों से इस घटना को देख सकेंगे? इसका स्पष्ट जवाब है कि भारत से यह चंद्र ग्रहण बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा। इसका कारण यह है कि जिस समय अंतरिक्ष में पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा इस विशेष स्थिति में होंगे, उस पूरे समय के दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहेगा। आसान शब्दों में कहें तो भारत में उस समय दिन रहेगा या चंद्रमा आसमान में उदित ही नहीं होगा। देश की राजधानी दिल्ली, राजस्थान के जयपुर, कर्नाटक के बेंगलुरु और मध्य प्रदेश के भोपाल सहित भारत के किसी भी हिस्से से इस ग्रहण को सीधे नग्न आंखों या टेलीस्कोप से देखना संभव नहीं होगा। भारतीय खगोल प्रेमियों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और विदेशी वेधशालाओं द्वारा की जाने वाली लाइव स्ट्रीमिंग ही इसे देखने का एकमात्र जरिया होगी।\n\nचंद्र ग्रहण 2026 का संपूर्ण समय चक्र और चरण (IST)\nद्रिक पंचांग और खगोलीय आंकड़ों के आधार पर इस चंद्र ग्रहण की कुल समयावधि करीब 5 घंटे 35 मिनट की होगी। हालांकि ग्रहण का मुख्य और सबसे प्रभावशाली आंशिक चरण लगभग 3 घंटे 16 मिनट तक कायम रहेगा। भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम की समय सारणी इस प्रकार रहने वाली है\n\n• उपछाया चरण का प्रारंभ: 28 अगस्त 2026 की सुबह 6:55 बजे ग्रहण का पहला चरण (पेनम्ब्रल फेज़) शुरू होगा।\n• आंशिक चंद्र ग्रहण की शुरुआत: सुबह 8:04 बजे चंद्रमा पृथ्वी की मुख्य छाया में प्रवेश करना शुरू करेगा।\n• ग्रहण का अधिकतम चरम बिंदु: सुबह 9:43 बजे ग्रहण अपने उच्चतम चरण में पहुंचेगा, जब चंद्रमा का 92 फीसदी हिस्सा ढका होगा।\n• आंशिक ग्रहण का समापन: सुबह 11:21 बजे आंशिक चंद्र ग्रहण का चरण समाप्त हो जाएगा।\n• उपछाया चरण की समाप्ति: दोपहर 12:30 बजे उपछाया चरण समाप्त होने के साथ ही पूरा चंद्र ग्रहण खत्म हो जाएगा।\n\nकिन देशों और अंतरराष्ट्रीय शहरों से दिखाई देगा ग्रहण?\nयद्यपि भारत में यह दृश्य अदृश्य रहेगा, लेकिन दुनिया के कई बड़े महाद्वीपों में यह आंशिक चंद्र ग्रहण स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। खगोलीय विजिबिलिटी मैप के अनुसार उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के विशाल भूभागों से लोग इसे देख पाएंगे। इसके अतिरिक्त प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर के तटीय तथा मध्य क्षेत्रों में भी यह ग्रहण दिखाई देगा। अंतरराष्ट्रीय शहरों की बात करें तो पेरिस, लंदन, रोम, न्यूयॉर्क और जोहान्सबर्ग जैसे प्रमुख वैश्विक महानगरों में रहने वाले लोग इस खगोलीय नजारे के साक्षी बनेंगे। इन स्थानों पर रात या भोर के समय चंद्रमा क्षितिज से ऊपर रहेगा, जिससे वहां के निवासियों को तांबे जैसे लाल चमकते चांद का मनमोहक दृश्य दिखाई देगा।\n\nभारत में सूतक काल के नियम और पंचांग गणनाएँ\nधार्मिक मान्यताओं और भारतीय पंचांग परंपरा के अनुसार सूतक काल का विचार केवल उन्हीं ग्रहणों पर लागू होता है जो स्थानीय आसमान में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देते हैं। चूंकि 28 अगस्त का यह चंद्र ग्रहण भारत के क्षितिज से नीचे घटित हो रहा है और यहां दृश्यमान नहीं है, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। दिल्ली के लिए जारी पंचांगीय गणनाओं में भी सूतक काल की शुरुआत और समाप्ति के आगे 'लागू नहीं' (नॉट एप्लिकेबल) दर्ज किया गया है। इसका तात्पर्य यह है कि इस दिन मंदिरों के कपाट बंद करने, पूजा-पाठ रोकने या भोजन-जल संबंधी परहेज करने जैसी पारंपरिक बाध्यताएं लागू नहीं होंगी।\n\nसाल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण और भविष्य का दृष्टिकोण\nउल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 में कुल दो चंद्र ग्रहणों का योग बना था। इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को घटित हुआ था, जिसे दुनिया के अलग-अलग भागों में विविध चरणों में देखा गया था। 28 अगस्त को लगने वाला यह आंशिक ग्रहण 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण है। भले ही भारतीय उपमहाद्वीप के लोग इस घटना को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर गंवा देंगे, लेकिन वैज्ञानिकों और खगोलशास्त्रियों के लिए 92 प्रतिशत छाया वाला यह आंशिक ग्रहण चंद्रमा के वायुमंडलीय और भौतिक व्यवहार का अध्ययन करने का एक शानदार अवसर प्रदान करेगा।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होने के कारण आम नागरिकों की दिनचर्या, धार्मिक अनुष्ठानों या दैनिक कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और न ही सूतक काल मान्य होगा।\n\nअंतरिक्ष प्रेमियों के लिए: भारत में रहने वाले खगोल प्रेमी 28 अगस्त की सुबह लाइव वेबकास्ट के जरिए 92 प्रतिशत ढके हुए तांबे जैसे लाल रंग के चांद का नजारा डिजिटल रूप से देख सकेंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. 28 अगस्त 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण किस समय शुरू होगा?\nभारतीय मानक समय (IST) के अनुसार ग्रहण का उपछाया चरण सुबह 6:55 बजे शुरू होगा, जबकि मुख्य आंशिक ग्रहण सुबह 8:04 बजे शुरू होगा।\n\n2. क्या यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?\nनहीं, यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा क्योंकि ग्रहण की पूरी अवधि के दौरान चंद्रमा भारतीय क्षितिज से नीचे रहेगा।\n\n3. इस चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का कितना हिस्सा ढकेगा?\nयह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण है, जिसमें अपनी चरम अवस्था (सुबह 9:43 बजे) के दौरान चंद्रमा का लगभग 92 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में रहेगा।\n\n4. क्या 28 अगस्त को भारत में सूतक काल मान्य रहेगा?\nनहीं, चूंकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए पारंपरिक पंचांग नियमों के अनुसार भारत में सूतक काल लागू नहीं माना जाएगा।\n\n5. यह चंद्र ग्रहण किन देशों से देखा जा सकेगा?\nयह आंशिक चंद्र ग्रहण उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के बड़े हिस्सों के साथ पेरिस, लंदन, रोम, न्यूयॉर्क और जोहान्सबर्ग जैसे शहरों से दिखाई देगा।",
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  "category": "विज्ञान",
  "publishedAt": "2026-08-26",
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    "28 अगस्त चंद्र ग्रहण",
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