एंथ्रोपिक ने आईपीओ दस्तावेजों में प्राकृतिक गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों को बताया बड़ा खतरा एंथ्रोपिक ने अपने आईपीओ विवरण पत्र में चेतावनी दी है कि डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति की बाधाएं उसकी परिचालन योजनाओं को प्रभावित कर सकती हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल विकसित करने वाली प्रमुख कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने शुरुआती सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के दस्तावेजों में स्वीकार किया है कि प्राकृतिक गैस की संभावित कमी और कीमतों में अनिश्चितता उसके भविष्य के कामकाज के लिए एक गंभीर जोखिम है। जैसे-जैसे अमेरिका में डेटा सेंटरों की स्थापना में तेजी आ रही है, इन विशाल परिसरों के संचालन के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता पड़ रही है। इस समस्या से निपटने के लिए कई टेक कंपनियां राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से कनेक्शन मिलने का सालों तक इंतजार करने के बजाय अपने खुद के ऑन-साइट गैस आधारित पावर प्लांट का निर्माण कर रही हैं। डेटा सेंटर क्षेत्र में ऊर्जा खपत की भयावह स्थिति ऊर्जा क्षेत्र का विश्लेषण करने वाली शोध संस्था क्लीनव्यू के आंकड़ों से पता चलता है कि ऑन-साइट या बिहाइंड-द-मीटर गैस परियोजनाओं की मांग अभूतपूर्व दर से बढ़ रही है। जुलाई 2025 तक जहा इस तरह की परियोजनाओं की क्षमता केवल 20 गीगावाट दर्ज की गई थी, वहीं अक्टूबर 2026 तक इसके बढ़कर 110 गीगावाट तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया गया है। इस तेज बढ़ोतरी के कारण प्राकृतिक गैस बाजार में प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी हो गई है। एंथ्रोपिक ने अपने आईपीओ ड्राफ्ट में स्पष्ट किया है कि अन्य कंपनियों के साथ ईंधन प्राप्त करने की यह होड़ उसे उन परिस्थितियों के सामने लाकर खड़ा करती है जो उसके नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हैं। कंपनी ने कहा है कि इससे कुछ इलाकों में प्राकृतिक गैस के दाम काफी बढ़ सकते हैं, जिससे उसके लिए लंबी अवधि का ईंधन अनुबंध हासिल करना मुश्किल हो सकता है। क्लाउड प्रदाताओं पर निर्भरता घटाने की नई रणनीति पारंपरिक रूप से एंथ्रोपिक अपनी कंप्यूटिंग जरूरतों के लिए बड़ी क्लाउड प्रदाता कंपनियों पर निर्भर रही है। आईपीओ दस्तावेजों में अमेज़न, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और स्पेसएक्स जैसी दिग्गज कंपनियों के नाम शामिल किए गए हैं। उदाहरण के लिए, कंपनी मेम्फिस, टेनेसी स्थित स्पेसएक्स के कोलॉसस डेटा सेंटर से सर्वर स्पेस किराए पर ले रही है। हालांकि, वह परिसर वर्तमान में बिना अनुमति के गैस टर्बाइन चलाने के आरोपों को लेकर कानूनी मुकदमों का सामना कर रहा है। दूसरे दिग्गजों पर अपनी निर्भरता कम करने और अपने बुनियादी ढांचे पर सीधा नियंत्रण रखने के उद्देश्य से एंथ्रोपिक ने हाल के महीनों में खुद डेटा सेंटर लीज पर लेने और विकसित करने की योजना पर काम शुरू किया है। इसी रणनीति के तहत कंपनी ने पिछले साल फ्लूइडस्टैक के साथ 50 अरब डॉलर की साझेदारी की घोषणा की थी। फ्लूइडस्टैक इस विस्तार के लिए डेटा सेंटर के विकास और परिचालन सेवाएं प्रदान कर रही है। एंथ्रोपिक ने पहले ही टेक्सस और न्यूयॉर्क में अपनी डेटा सेंटर साइटों की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, कंपनी लुइसियाना, टेक्सस और वेस्ट वर्जीनिया जैसे राज्यों में बड़े ऑन-साइट गैस आधारित डेटा सेंटरों के निर्माण से जुड़ी हुई है। डेवलपर एनस्केल के आईपीओ दस्तावेज के अनुसार, वेस्ट वर्जीनिया में बनने वाला प्लांट भविष्य में अमेरिका के सबसे बड़े गैस आधारित संयंत्रों में शामिल हो सकता है। तरलीकृत प्राकृतिक गैस निर्यात और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा का असर विभिन्न राज्यों में अपने बुनियादी ढांचे का विस्तार करने के कारण एंथ्रोपिक को क्षेत्रीय आपूर्ति के झटकों और स्थानीय बाजार के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। यह जोखिम विशेष रूप से दक्षिण-पूर्वी अमेरिकी राज्यों में अधिक है, जहां कंपनियों को एलएनजी यानी तरल प्राकृतिक गैस के निर्यातकों के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। अमेरिकी निर्यात टर्मिनलों से विदेशी बाजारों में गैस की आपूर्ति तेजी से बढ़ रही है, और अनुमान है कि अगले दशक में यह मांग दोगुनी हो सकती है। ब्लूमबर्गएनईएफ के गैस अनुसंधान प्रमुख एनरिक गोंजालेस का मानना है कि जिन राज्यों में एलएनजी निर्यात परियोजनाएं केंद्रित हैं, वहां गैस की कीमतें बढ़ना स्वाभाविक है। ब्लूमबर्गएनईएफ के अनुमान के अनुसार, केवल ग्रिड से जुड़े डेटा सेंटर ही 2035 तक प्रतिदिन 15 अरब घन फीट अतिरिक्त प्राकृतिक गैस की मांग पैदा करेंगे, जो कुल अमेरिकी मांग में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। यदि इसमें निर्माणाधीन ऑन-साइट गैस परियोजनाओं के न्यूनतम अनुमान को भी जोड़ दिया जाए, तो अगले दशक तक प्रतिदिन 3 अरब घन फीट अतिरिक्त मांग और जुड़ जाएगी। टेक्सस इस समय बिहाइंड-द-मीटर डेटा सेंटरों का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जिससे एक ही सीमित गैस आपूर्ति के लिए कई डेवलपर्स आपस में टकरा रहे हैं। आम उपभोक्ताओं पर असर और नवीकरणीय ऊर्जा की सीमाएं प्राकृतिक गैस की इस अत्यधिक खपत का अप्रत्यक्ष असर आम लोगों के बिजली के बिलों पर भी पड़ सकता है। एनरिक गोंजालेस के अनुसार, यदि मुख्य गैस हब पर कीमतें बढ़ती हैं, तो बिना किसी कड़े नियम या कानून के इसका पूरा बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाएगा। 2022 के ऊर्जा संकट से सबक लेते हुए उत्पादक कंपनियां भी अत्यधिक उत्पादन से बच रही हैं ताकि बाजार में कीमतें बहुत कम न हों। इस ऊर्जा संकट का एक प्राकृतिक समाधान सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा या भू-तापीय ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोत हो सकते थे, जो पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। हालांकि, एंथ्रोपिक ने अपने आईपीओ विवरण पत्र में नवीकरणीय विकल्पों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि ये नए स्रोत उनकी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त मात्रा में, वांछित समय सीमा के भीतर या किफायती दरों पर उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। इसका आप पर असर एआई डेटा सेंटरों के कारण प्राकृतिक गैस की मांग में भारी उछाल से बिजली की दरों और ऊर्जा सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। • भारत में: भारत की प्रमुख टेक कंपनियां और डेटा सेंटर डेवलपर भी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नई रणनीतियां अपना रहे हैं। अमेरिकी बाजार में गैस महंगी होने से वैश्विक ऊर्जा आयात लागत बढ़ सकती है जिससे घरेलू विनिर्माण पर असर पड़ेगा। • वैश्विक स्तर पर: डेटा सेंटरों द्वारा भारी मात्रा में प्राकृतिक गैस का उपयोग किए जाने से आम उपभोक्ताओं के बिजली बिल बढ़ सकते हैं। आने वाले वर्षों में अमेरिका से एलएनजी निर्यात महंगा होने के कारण वैश्विक गैस बाजार प्रभावित होंगे। • टेक और एआई सेक्टर: एंथ्रोपिक जैसी बड़ी एआई कंपनियों के बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ने से एआई सेवाओं और एपीआई के उपयोग की लागत बढ़ सकती है। • पर्यावरण और ऊर्जा नीति: नवीकरणीय ऊर्जा को नजरअंदाज कर गैस टर्बाइनों का उपयोग बढ़ने से कॉर्पोरेट नेट-जीरो लक्ष्यों को बड़ा झटका लगेगा। ऐसा क्यों हुआ एंथ्रोपिक ने अपने आईपीओ दस्तावेजों में प्राकृतिक गैस को एक बड़े परिचालन जोखिम के रूप में चिन्हित किया है क्योंकि एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए अभूतपूर्व मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। राष्ट्रीय ग्रिड से बिजली कनेक्शन मिलने में लगने वाली देरी से बचने के लिए कंपनियां सीधे प्राकृतिक गैस आधारित पावर प्लांट लगा रही हैं। • ग्रिड कनेक्शन की धीमी गति: सार्वजनिक बिजली ग्रिड से डेटा सेंटरों को जोड़ने में कई साल लगते हैं, जिसके कारण टेक कंपनियां अपने खुद के गैस टर्बाइन प्लांट बना रही हैं। • एलएनजी निर्यात में वृद्धि: अमेरिका से विदेशों में तरल प्राकृतिक गैस का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है, जिससे घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता कम हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं। • नवीकरणीय ऊर्जा की सीमाएं: सौर और पवन ऊर्जा जैसी ग्रीन तकनीकें एआई डेटा सेंटरों की 24/7 निर्बाध बिजली मांग को तुरंत और कम लागत पर पूरा करने में सक्षम नहीं पाई गई हैं। • निजी बुनियादी ढांचे का विकास: एंथ्रोपिक द्वारा क्लाउड प्रदाताओं से हटकर $50 अरब के फ्लूइडस्टैक समझौते के जरिए खुद के डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना ने उसे सीधे गैस बाजार के जोखिमों में धकेल दिया है। सवाल-जवाब 1. एंथ्रोपिक ने अपने आईपीओ दस्तावेजों में प्राकृतिक गैस को जोखिम क्यों माना है? कंपनी का मानना है कि डेटा सेंटरों द्वारा भारी गैस उपयोग से ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी और आपूर्ति में रुकावट आ सकती है, जिस पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। 2. क्लीनव्यू के अनुसार बिहाइंड-द-मीटर गैस परियोजनाओं की मांग कितनी बढ़ी है? जुलाई 2025 में 20 गीगावाट की तुलना में अक्टूबर 2026 तक बिहाइंड-द-मीटर गैस परियोजनाओं की क्षमता 110 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। 3. एंथ्रोपिक किन राज्यों में अपने डेटा सेंटर बना रही है? एंथ्रोपिक टेक्सस, न्यूयॉर्क, लुइसियाना और वेस्ट वर्जीनिया जैसे राज्यों में डेटा सेंटर विकसित कर रही है। 4. क्या एंथ्रोपिक अपने डेटा सेंटरों के लिए सौर या पवन ऊर्जा का उपयोग करेगी? कंपनी ने अपने आईपीओ में कहा है कि सौर, पवन या परमाणु जैसे नवीकरणीय स्रोत उसकी समय सीमा और आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। https://trendkia.com/science/anthropic-ne-ipo-dastavejon-men-prakritika-gaisa-ki-killata-aura-barhati-kimaton-ko-bataya-bara-khatara-52328 TrendKia — Har trend, sabse pehle.