ब्रह्मांड का अब तक का सबसे विशाल 3डी मैप तैयार, आम लोग भी कर सकेंगे अंतरिक्ष की सैर खगोलविदों ने डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट की मदद से ब्रह्मांड का सबसे बड़ा त्रि-आयामी नक्शा तैयार किया है, जिसे ऑनलाइन मुफ्त में देखा जा सकता है। एरिजोना के सोनोरा मरुस्थल में स्थित एक सूने पर्वत पर स्थापित डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट ने पिछले पांच वर्षों के दौरान ब्रह्मांड का नक्शा तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य एक अनसुलझी पहेली से पर्दा उठाना था, जिसके परिणाम स्वरूप ब्रह्मांड का अब तक का सबसे वृहद त्रि-आयामी नक्शा बनकर तैयार हुआ है। अब इस नवीनतम रिलीज के साथ, जिसे लेगेसी इमेजिंग सर्वे का नाम दिया गया है, कोई भी आम नागरिक इस विशाल डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरिक्ष के अछूते पहलुओं को खुद देख सकता है और इसके रहस्यों को टटोल सकता है। अरबों आकाशीय पिंडों और खरबों पिक्सल्स का डेटा इस अत्याधुनिक मैप में आंकड़ों का एक ऐसा विशाल भंडार समाहित है जो किसी को भी हैरान कर सकता है। इसमें करीब 5.6 लाख करोड़ पिक्सल्स मौजूद हैं, जिनके भीतर लगभग 4 अरब आकाशीय पिंडों को दर्ज किया गया है। इन आकाशीय पिंडों में सुदूर तारे, विशालकाय आकाशगंगाएं, ब्लैक होल और अंतरिक्ष में घूमने वाले क्षुद्रग्रह पूरी स्पष्टता के साथ शामिल हैं। यह डिजिटल नक्शा संपूर्ण आकाश के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से को अपने दायरे में समेटता है, जिसमें दृश्य प्रकाश के साथ-साथ नियर-इफ्रारेड यानी अवरक्त तरंगों को भी सफलतापवूर्क रिकॉर्ड किया गया है। आकाशगंगा की बाधाओं को पार करती तकनीक इस मैपिंग प्रक्रिया में कुछ हिस्से छूट भी गए हैं, जिनमें हमारी अपनी आकाशगंगा के भीतर मौजूद तारे, अंतरिक्ष की धूल और अन्य सघन पदार्थ शामिल हैं जो दूर के दृश्यों को छिपा लेते हैं। जमीन से अंतरिक्ष का अध्ययन करने वाले खगोलविदों के सामने यह हमेशा से एक बहुत बड़ी चुनौती रही है। चूंकि हमारी अपनी आकाशगंगा एक तली हुई चपटी रोटी की तरह फैली हुई है, जिसके कारण यह रात के आसमान में तारों की एक घनी पट्टी के रूप में नजर आती है, इसलिए शोधकर्ताओं ने एक अनूठा रास्ता निकाला। उन्होंने इस उपकरण की पांच हजार यांत्रिक आंखों को आकाशगंगा के ठीक ऊपर या नीचे की तरफ केंद्रित किया, ताकि सुदूर अंतरिक्ष की सबसे साफ और स्पष्ट तस्वीरें हासिल की जा सकें। लंबी तैयारी और वैज्ञानिकों का साझा प्रयास भले ही यह विशेष सर्वे पांच साल की अवधि में पूरा हुआ हो, लेकिन इसके पीछे कुल 13 वर्षों की कड़ी मेहनत और जमीनी तैयारी जुड़ी हुई थी। इस वृहद डेटा संग्रह अभियान में दुनिया भर के 160 से अधिक खगोल वैज्ञानिक सीधे तौर पर शामिल रहे हैं। इस पूरी परियोजना के सफर के दौरान शोधकर्ता अब तक 1,800 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं, जिनमें इस अनमोल डेटा का हवाला दिया गया है। लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी के शोधकर्ता डेविड शेलगेल ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह अब अंतरिक्ष अनुसंधान की मुख्य धारा का हिस्सा बन चुका है। डार्क एनर्जी और ब्रह्मांडीय इतिहास का रहस्य इसी वर्ष की शुरुआत में इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों ने एक और नक्शा जारी किया था, जिसमें 47 मिलियन आकाशगंगाओं और क्वासर की दूरियों को दर्शाया गया था। इससे हमारे ब्रह्मांड के 11 अरब वर्षों के पुराने इतिहास को दोबारा संजोने में मदद मिली और डार्क एनर्जी के प्रभावों पर से पर्दा उठने लगा। ऐसा माना जाता है कि डार्क एनर्जी ही हमारे ब्रह्मांड के लगातार विस्तार के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। हालांकि यह रहस्यमयी ताकत अभी भी पूरी तरह समझ से परे है, लेकिन वैज्ञानिक अन्य आकाशीय पिंडों की गति और दूरी के बढ़ने की रफ्तार का विश्लेषण करके इस पर लगातार नजर रख रहे हैं। भविष्य के अध्ययन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट के शुरुआती तीन वर्षों के आंकड़ों से मिले संकेतों के आधार पर और महाविस्फोट के अवशेषों के साथ सुपरनोवा के अवलोकन ने एक नई संभावना को जन्म दिया है। इन अध्ययनों से संकेत मिलता है कि डार्क एनर्जी कोई स्थिर बल नहीं है, बल्कि समय के साथ धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। पूरे पांच साल के डेटा का एक व्यापक विश्लेषण वर्ष 2027 में जारी किया जाने वाला है, जिसे लेकर वैज्ञानिकों का मानना है कि यह हमारे ब्रह्मांड के अतीत और वर्तमान की तस्वीर को पहले से कहीं अधिक जीवंत रूप में सामने रखेगा। आगे चलकर यह डेटा अंतरिक्ष से जुड़े अन्य अभियानों जैसे कि नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप के लिए भी तुलनात्मक आधार का काम करेगा। इसके अलावा, शोधकर्ता पेटोबाइट स्तर के इस भारी-भरकम डेटा के विश्लेषण को और अधिक गति देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स को प्रशिक्षित करने की योजना बना रहे हैं, जिसके भीतर अभी अनगिनत अनछुए रहस्य छिपे हुए हैं। नेशनल साइंस फाउंडेशन के खगोलविद् अर्जुन डे ने कहा कि आसमान के ये आंकड़े ब्रह्मांड के विस्तार और हमारी आकाशगंगा के निर्माण को समझने की बुनियाद हैं, लेकिन यह आसमान हर किसी का है और यह सर्वे सबको इसके अजूबों को देखने का मौका देता है। इसका आप पर असर ब्रह्मांड के इस नए डिजिटल मानचित्र के सार्वजनिक होने से अंतरिक्ष विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में आम लोगों की पहुंच और रुचि में भारी वृद्धि होगी। • भारत में: देश के छात्र, शोधकर्ता और विज्ञान प्रेमी अब बिना किसी शुल्क के इंटरनेट के माध्यम से इस विशाल डेटाबेस तक पहुंच सकेंगे, जिससे शैक्षणिक संस्थानों में अंतरिक्ष अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा। • खगोलीय अनुसंधान पर प्रभाव: दुनिया भर के स्वतंत्र वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों को बिना महंगे उपकरणों के उच्च स्तरीय खगोलीय डेटा का विश्लेषण करने का सीधा अवसर मिलेगा। सवाल-जवाब 1. डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट कहां स्थित है? यह यंत्र एरिजोना के सोनोरा मरुस्थल में एक दूरस्थ पर्वत पर स्थित है। 2. इस नए ब्रह्मांड मानचित्र में कितने आकाशीय पिंड दर्ज हैं? इस मानचित्र में तारों, आकाशगंगाओं, ब्लैक होल और क्षुद्रग्रहों समेत लगभग 4 अरब आकाशीय पिंड शामिल हैं। 3. यह डिजिटल नक्शा कितने प्रतिशत आकाश को कवर करता है? यह नक्शा संपूर्ण आकाश के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से को अपने दायरे में समेटता है। 4. इस परियोजना में कुल कितने वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया? इस डेटा संग्रह अभियान में 160 से अधिक वैज्ञानिकों ने योगदान दिया है। 5. पांच साल के पूरे डेटा का अगला विश्लेषण कब जारी होगा? पूरे पांच वर्षों के आंकड़ों का व्यापक विश्लेषण वर्ष 2027 में जारी किया जाना है। https://trendkia.com/science/astronomers-complete-largest-3d-cosmic-map-allowing-public-exploration-29163 TrendKia — Har trend, sabse pehle.