ऑस्ट्रेलिया के ऊपर आसमान में आज रात दिखेगा चमकदार उल्का, वैज्ञानिकों ने पहले ही ट्रैक किया छोटा एस्टेरॉयड अमेरिका के माउंट लेमन ऑब्जर्वेटरी ने एक छोटे एस्टेरॉयड सीईआरएनक्यू52 को उत्तर-पश्चिम ऑस्ट्रेलिया की तरफ बढ़ते देखा है, जो वायुमंडल में जलकर खत्म हो जाएगा और किसी को कोई खतरा नहीं होगा। अमेरिका की एक दूरबीन ने अंतरिक्ष में एक छोटा सा एस्टेरॉयड देखा है, जो तेज रफ्तार से पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा है। माउंट लेमन ऑब्जर्वेटरी के टेलिस्कोप से मिली इस जानकारी के मुताबिक यह एस्टेरॉयड सीधे धरती के वायुमंडल में दाखिल होगा और उत्तर-पश्चिम ऑस्ट्रेलिया के आसमान में एक चमकदार उल्कापिंड की तरह टूटकर बिखर जाएगा। कितना बड़ा है यह एस्टेरॉयड इस एस्टेरॉयड को अभी सीईआरएनक्यू52 नाम दिया गया है। इसका आकार महज 0.8 मीटर है, यानी यह 3 फीट से भी छोटा है। इतने छोटे आकार की वजह से वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि यह धरती से टकराएगा नहीं, बल्कि वायुमंडल में दाखिल होते ही जलकर पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसलिए किसी को भी इससे खतरा नहीं है। हां, उत्तर-पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले लोगों को आसमान में एक बेहद शानदार और चमकदार नजारा देखने को मिल सकता है। भारत में किस वक्त होगा यह नजारा यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी यानी ईएसए के प्लैनेटरी डिफेंस प्रमुख रिचर्ड मोइस्ल के मुताबिक यह एस्टेरॉयड 16:00 से 16:30 यूटीसी के बीच वायुमंडल में दाखिल होगा। भारतीय समय के हिसाब से यह रात करीब 9:30 से 10:00 बजे का वक्त होगा। उस समय ऑस्ट्रेलिया के उस हिस्से में अंधेरा रहेगा, इसलिए वहां मौजूद लोगों को आसमान में अचानक एक तेज चमकती रोशनी यानी ब्राइट फ्लैश साफ नजर आ सकती है। माउंट लेमन ऑब्जर्वेटरी के सर्वे ने इस एस्टेरॉयड को धरती के वायुमंडल में पहुंचने से काफी पहले ही खोज निकाला था, जिससे वैज्ञानिकों को इसकी दिशा और समय का सटीक अंदाजा लगाने का मौका मिला। वैज्ञानिकों के लिए यह घटना खास क्यों इस पूरी घटना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी एस्टेरॉयड को धरती के वायुमंडल में घुसने से पहले ही पहचान लिया गया। अब तक ऐसा सिर्फ 13 बार हो चुका है, यानी यह एक दुर्लभ मामला है। एस्टेरॉयड को उनकी कक्षा के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा जाता है। एटेन एस्टेरॉयड वे होते हैं, जिनकी सूर्य के इर्द-गिर्द औसत कक्षा धरती की कक्षा से भीतर की तरफ होती है। इसके उलट अपोलो एस्टेरॉयड की कक्षा धरती की कक्षा से बाहर की ओर होती है। सीईआरएनक्यू52 को समय रहते पकड़ लेने से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि छोटे आकार के एस्टेरॉयड को भी वायुमंडल में प्रवेश से पहले ट्रैक किया जा सकता है, जो भविष्य में बड़े खतरों से बचाव के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इसका आप पर असर इस एस्टेरॉयड से धरती को कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसका असर सीधे तौर पर सिर्फ आसमान देखने वालों तक सीमित रहेगा। • कोई खतरा नहीं: एस्टेरॉयड सिर्फ 0.8 मीटर का है और वायुमंडल में ही जल जाएगा। इसका मतलब है कि धरती पर किसी को भी जान-माल के नुकसान की चिंता करने की जरूरत नहीं है। • ऑस्ट्रेलिया के लोगों के लिए नजारा: उत्तर-पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले लोग रात के अंधेरे में आसमान में तेज चमकती रोशनी देख सकते हैं। जो लोग उस वक्त बाहर होंगे, उन्हें बिना किसी उपकरण के यह नजारा दिख सकता है। • भारत में जिज्ञासा का वक्त: भारतीय समय के हिसाब से यह घटना रात करीब 9:30 से 10:00 बजे के बीच होगी। भारत से यह सीधे नहीं दिखेगा, लेकिन स्पेस में दिलचस्पी रखने वाले लोग इस समय पर अपडेट देख सकते हैं। • भविष्य की सुरक्षा के लिए संकेत: वैज्ञानिकों ने इस छोटे एस्टेरॉयड को पहले ही ट्रैक कर लिया, जो दिखाता है कि खतरनाक आकार के एस्टेरॉयड को भी समय रहते पकड़ना मुमकिन है। इससे आगे चलकर बड़े खतरों की पहले से चेतावनी मिलने की उम्मीद बढ़ती है। सवाल-जवाब 1. सीईआरएनक्यू52 कितना बड़ा है? यह करीब 0.8 मीटर यानी 3 फीट से भी छोटा एस्टेरॉयड है। 2. क्या यह एस्टेरॉयड धरती से टकराएगा? नहीं, यह वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलकर खत्म हो जाएगा, धरती से टकराने का खतरा नहीं है। 3. यह घटना कब होगी? यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक यह 16:00 से 16:30 यूटीसी के बीच होगी, यानी भारत में रात करीब 9:30 से 10:00 बजे। 4. यह नजारा कहां दिखेगा? उत्तर-पश्चिम ऑस्ट्रेलिया के आसमान में लोगों को यह चमकदार उल्का दिख सकता है। 5. इस एस्टेरॉयड को किसने खोजा? अमेरिका के माउंट लेमन ऑब्जर्वेटरी के टेलिस्कोप सर्वे ने इसे खोजा। 6. यह घटना वैज्ञानिकों के लिए क्यों खास है? क्योंकि वायुमंडल में प्रवेश से पहले किसी एस्टेरॉयड की पहचान होने की यह अब तक सिर्फ 13वीं घटना है। https://trendkia.com/science/australia-ke-upara-asamana-men-aja-rata-dikhega-chamakadara-ulka-vaijnanikon-ne-pahale-hi-traika-kiya-chhota-esteroyada-28650 TrendKia — Har trend, sabse pehle.