# भरतपुर के गांवों में हर आषाढ़ में लौट आती है यह पीली रहस्यमयी चिड़िया, खजूर के पेड़ पर बसाती है अपना आशियाना

> राजस्थान के भरतपुर जिले में हर साल आषाढ़ के महीने में एक दुर्लभ पीली चिड़िया गांवों में दिखाई देती है, जो सिर्फ खजूर के पेड़ों पर ही अपना घोंसला बनाती है.

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-07-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/bharatpur-ke-ganvon-men-hara-asharha-men-lauta-ati-hai-yaha-pili-rahasyamayi-chiriya-khajura-ke-pera-para-basati-hai-apana-ashiyan-9322 · **Language:** Hindi
**Tags:** आषाढ़ की चिड़िया, भरतपुर, पीली चिड़िया, खजूर का पेड़, दुर्लभ पक्षी, राजस्थान वन्यजीव

राजस्थान के भरतपुर जिले के गांवों में मानसून की शुरुआत के साथ ही एक अनोखी चिड़िया की चर्चा शुरू हो जाती है. साल के बाकी ग्यारह महीनों में यह पक्षी कहीं नजर नहीं आता, लेकिन आषाढ़ का महीना लगते ही अचानक गांव-गांव में दिखने लगता है. इसी वजह से ग्रामीणों ने इसे अपनी बोली में आषाढ़ की चिड़िया नाम दे दिया है.

## गौरैया जैसी शक्ल, लेकिन पीले रंग की अलग पहचान
आकार और बनावट में यह चिड़िया आम गौरैया से मिलती जुलती है, इसलिए पहली नजर में कोई इसे खास पक्षी नहीं समझेगा. लेकिन इसके पंखों पर चढ़ी हल्की पीली आभा इसे भीड़ से अलग कर देती है. इसका शांत स्वभाव भी लोगों को भाता है और जैसे ही यह चिड़िया किसी गांव में दिखाई देती है, आसपास के लोग इसे देखने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं.

## खजूर के ऊंचे पेड़ों पर बनता है सुरक्षित घोंसला
इस चिड़िया की सबसे दिलचस्प आदत इसका घोंसला बनाने का तरीका है. यह मुख्य रूप से खजूर के पेड़ों को ही अपना ठिकाना बनाती है और वहीं करीने से सजा हुआ सुंदर घोंसला तैयार करती है. खजूर के पेड़ लंबे और मजबूत होते हैं, जिससे ऊंचाई पर बना घोंसला जमीन के शिकारियों से सुरक्षित रहता है. इसके घोंसले सिर्फ मजबूत ही नहीं होते, बल्कि बनावट में भी इतने आकर्षक होते हैं कि देखने वाले तारीफ किए बिना नहीं रहते.

## आषाढ़ में ही क्यों आती है यह चिड़िया
दरअसल यह पूरा मौसम इस चिड़िया के प्रजनन का समय होता है. आषाढ़ के दौरान ही यह खजूर के पेड़ों पर घोंसले बनाकर अंडे देती है. कुछ समय बाद जब बच्चे बड़े होने लगते हैं, तो यह चिड़िया उन्हें लेकर वहां से आगे कहीं और निकल जाती है. यही कारण है कि साल के बाकी महीनों में इसे ढूंढना लगभग नामुमकिन हो जाता है, यह सिर्फ आषाढ़ के मौसम से ही जुड़ी नजर आती है.

## प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण
भरतपुर के गांवों में हर साल आने वाली यह हल्के पीले रंग की दुर्लभ चिड़िया प्रकृति प्रेमियों के बीच खासी दिलचस्पी का विषय बनी रहती है. इसका खूबसूरत रंग और करीने से बना घोंसला तो आकर्षक है ही, लेकिन इसकी मौसमी मौजूदगी और अचानक आना-जाना इसे और भी रहस्यमयी बना देता है. गांव वाले बताते हैं कि यह चिड़िया हर साल कुछ ही हफ्तों के लिए लौटती है और फिर अपनी सुंदरता की यादें छोड़कर गायब हो जाती है.

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** मानसून के मौसम में प्रकृति और पक्षियों में दिलचस्पी रखने वाले लोग इस तरह की मौसमी और दुर्लभ चिड़ियों को पहचानकर प्रकृति के इस चक्र को करीब से समझ सकते हैं.
- **भरतपुर में:** स्थानीय ग्रामीणों और पक्षी प्रेमियों के पास आषाढ़ के महीने में खजूर के पेड़ों वाले इलाकों में जाकर इस दुर्लभ पीली चिड़िया को देखने का मौका रहता है, जो साल में सिर्फ कुछ हफ्तों के लिए ही मिलता है.

## सवाल-जवाब

### 1. यह चिड़िया साल में कब दिखाई देती है?
यह चिड़िया साल भर में केवल आषाढ़ के महीने में ही दिखाई देती है.

### 2. इसे आषाढ़ की चिड़िया क्यों कहा जाता है?
क्योंकि यह साल के बाकी महीनों में गायब रहती है और सिर्फ आषाढ़ महीने में नजर आती है, इसी वजह से ग्रामीणों ने इसका यह नाम रखा है.

### 3. यह चिड़िया अपना घोंसला कहां बनाती है?
यह मुख्य रूप से खजूर के पेड़ों पर ही अपना सुंदर और सलीकेदार घोंसला बनाती है.

### 4. यह चिड़िया देखने में कैसी लगती है?
यह आम गौरैया जैसी दिखती है, लेकिन इसका हल्का पीला रंग इसे अलग पहचान देता है.

### 5. यह चिड़िया खजूर के पेड़ पर ही घोंसला क्यों बनाती है?
खजूर के लंबे और मजबूत पेड़ों की ऊंचाई घोंसले को जमीन के शिकारियों से सुरक्षा देती है.

### 6. अंडे देने के बाद यह चिड़िया कहां चली जाती है?
अंडे देने और बच्चों के थोड़ा बड़ा होने के बाद यह चिड़िया अपने बच्चों के साथ वहां से किसी और जगह चली जाती है.

### 7. यह चिड़िया किस इलाके में देखी जाती है?
राजस्थान के भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में यह चिड़िया आषाढ़ के महीने में देखी जाती है.

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