कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने जताई गहरी चिंता, गणित के क्षेत्र में एआई की तेज तरक्की से वैज्ञानिक सहमे गणित के क्षेत्र में एआई की तीव्र प्रगति ने शोधकर्ताओं के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी है, जहां वैज्ञानिक अपनी भूमिका और करियर के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का शुद्ध गणित के अमूर्त और बेहद जटिल क्षेत्र में तेजी से दखल बढ़ा है। इसने वैश्विक शैक्षणिक समुदाय के भीतर हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ जहां शोधकर्ता उन वैज्ञानिक सफलताओं को अपनी आंखों के सामने देख रहे हैं जिन्हें हासिल करने में पहले दशकों लग जाते थे, वहीं दूसरी तरफ इस विषय के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वैज्ञानिकों के बीच एक गहरा अस्तित्वगत संकट और डर भी पैदा हो रहा है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टीवन स्ट्रोगेट्ज़ इस दोहरी स्थिति को करीब से देख रहे हैं। उनका मानना है कि जहां एक तरफ यह वैज्ञानिक प्रगति बेहद रोमांचक है, वहीं दूसरी तरफ इसके साथ इंसानी स्तर पर काफी कड़वाहट और विवाद भी जुड़ रहे हैं। स्टीवन स्ट्रोगेट्ज़ अपने सह-लेखक एलेक्स टाउनसेंड के साथ मिलकर एक नई किताब लिख रहे हैं, जो इस साल नवंबर में प्रकाशित होने वाली है। इस किताब का नाम 'बिग मैथ' है, जिसमें इस बात का विस्तार से विश्लेषण किया गया है कि कैसे गणित धीरे-धीरे इंसानी समझ के दायरे से बाहर निकलता जा रहा है और इस पर बड़ी कॉर्पोरेट प्रयोगशालाओं का वर्चस्व स्थापित हो रहा है। नेवियर-स्टोक्स विवाद और कॉर्पोरेट प्रयोगशालाओं की होड़ गणितीय समुदाय के भीतर यह तनाव उस समय और बढ़ गया जब ओपनएआई ने यह घोषणा की कि उसने एक 90 साल पुरानी गणितीय समस्या को सुलझाने के लिए हजारों की संख्या में डिजिटल एजेंटों का इस्तेमाल किया है। इस समस्या के समाधान के साथ 10 लाख डॉलर (लगभग 8.3 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम इनाम जुड़ा हुआ है। यह समाधान, जिसका अभी भी स्वतंत्र वैज्ञानिक समुदायों द्वारा बारीकी से सत्यापन किया जाना बाकी है, स्पेनिश गणितज्ञों डिएगो कोर्डोबा और लुइस मार्टिनेज-जोरोआ द्वारा विकसित की गई एक विशेष रणनीति पर आधारित है। हालांकि, ओपनएआई की इस बड़ी घोषणा पर उस समय विवाद के बादल मंडराने लगे जब एक अन्य प्रमुख गणितज्ञ ट्रिस्टन बकमास्टर ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी के गणितज्ञ ट्रिस्टन बकमास्टर का दावा है कि ओपनएआई को जब उनके और एंथ्रोपिक के शोधकर्ता लेवेंट अल्पोगे के संयुक्त काम के बारे में पता चला, तो उसने आनन-फानन में इस समस्या के समाधान को अपनी सफलता के रूप में पेश कर दिया। बकमास्टर का यह भी आरोप है कि ओपनएआई ने इस शोध के श्रेय के निर्धारण को भी अपने पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की। यह पूरा घटनाक्रम यह दिखाता है कि कैसे बड़ी टेक कंपनियां अपने बड़े आईपीओ से पहले मीडिया की सुर्खियां बटोरने के लिए पारंपरिक अकादमिक मर्यादाओं को ताक पर रख रही हैं। गणित की दुनिया में एआई की असाधारण रफ्तार यह विवाद कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह गणित के क्षेत्र में आ रहे एक बहुत बड़े बदलाव का हिस्सा है। हाल ही में एंथ्रोपिक ने यह घोषणा की थी कि उसके एआई मॉडल क्लॉड ने गणित के सबसे प्रसिद्ध और कठिन सिद्धांतों में से एक 'फर्मेट का अंतिम सिद्धांत' (फर्मेट्स लास्ट थ्योरम) के एक स्थापित प्रमाण को औपचारिक रूप देने के दौरान 29,500 छोटे सिद्धांतों को साबित किया है। इस परियोजना पर दुनिया भर के मानव गणितज्ञ कई वर्षों से काम कर रहे थे, लेकिन क्लॉड ने इस काम को बेहद कम समय में कर दिखाया। इसके अलावा, पिछले साल अगस्त में ओपनएआई ने भी गणित की 10 अन्य पुरानी और जटिल समस्याओं को सुलझाने में महत्वपूर्ण प्रगति करने का दावा किया था। स्टीवन स्ट्रोगेट्ज़ का मानना है कि इन बदलावों की वजह से गणित के क्षेत्र में शोध की रफ्तार कई गुना बढ़ गई है। उनका कहना है कि वर्ष 2026 को गणित के इतिहास में या तो एक चमत्कारी वर्ष के रूप में याद किया जाएगा या फिर एक विनाशकारी वर्ष के रूप में, क्योंकि इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संख्या में मशीनी सफलताओं ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया है। वह स्पष्ट करते हैं कि आने वाले समय में अगर कोई गणितज्ञ एआई की मदद के बिना शोध कार्य करना चाहेगा, तो उसके लिए इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा में टिके रहना लगभग नामुमकिन होगा। इंसानी हुनर के पीछे छूटने का मानसिक तनाव यह तकनीकी बदलाव अब केवल सैद्धांतिक नहीं रह गया है, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी शोधकर्ताओं को प्रभावित कर रहा है। स्टीवन स्ट्रोगेट्ज़ के बुक को-राइटर एलेक्स टाउनसेंड इसका सीधा उदाहरण हैं। एलेक्स टाउनसेंड ने अपने हालिया शोध कार्य को गति देने के लिए चैटजीपीटी का सहारा लिया था। उन्होंने इस तकनीक की मदद से न्यूमेरिकल लीनियर अलजेब्रा की दशकों पुरानी एक कठिन समस्या का समाधान निकाला। टाउनसेंड और उनके साथी शोधकर्ता स्वीकार करते हैं कि अगर वे इस एआई तकनीक का उपयोग नहीं करते, तो इस काम के लिए आवश्यक श्रम और वित्तीय लागत इतनी अधिक होती कि वे इस परियोजना को कभी पूरा नहीं कर पाते। हालांकि, इस बड़ी सफलता के बावजूद टाउनसेंड के मन में अपने करियर और हुनर को लेकर एक गहरी निराशा बैठ गई है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने जीवन के 15 साल शुद्ध गणित के शोध को दिए हैं, और आज जब वे अपने करियर के सबसे रचनात्मक और मजबूत पड़ाव पर हैं, तब उन्हें महसूस हो रहा है कि उनके इस सर्वोच्च हुनर की अब कोई खास अहमियत नहीं रह गई है क्योंकि एक मशीन उनसे बेहतर काम कर सकती है। पहले वे खुद को ज्ञान की सीमाओं को विस्तार देने वाला एक अग्रणी वैज्ञानिक मानते थे, लेकिन अब वे खुद को केवल एक एआई एजेंट का संचालन करने वाले मैनेजर के रूप में देखते हैं। टाउनसेंड अपनी इस चिंता को खुलकर साझा करते हुए कहते हैं, "मैं इससे पूरी तरह से खतरा महसूस कर रहा हूँ।" डरावनी फिल्म की तरह करीब आता मशीनी वर्चस्व स्टीवन स्ट्रोगेट्ज़ गणित की इस वर्तमान स्थिति की तुलना एक ऐसी डरावनी फिल्म से करते हैं जिसमें एक अनजानी और रहस्यमयी ताकत धीरे-धीरे इंसानों के करीब आती जा रही है। उनका मानना है कि हम अभी इस फिल्म के अंत तक नहीं पहुंचे हैं, लेकिन जो बदलाव हो रहे हैं वे सचमुच डराने वाले हैं। वह अपनी इस भावना को व्यक्त करते हुए कहते हैं, "सहज रूप से, मैं वास्तव में बहुत डरा हुआ हूँ।" स्ट्रोगेट्ज़ का आरोप है कि तकनीकी कंपनियां इन जटिल समस्याओं का उपयोग केवल अपने प्रचार और मार्केटिंग के लिए कर रही हैं। उदाहरण के लिए, नेवियर-स्टोक्स अस्तित्व और सुगमता की समस्या इतनी जटिल और सैद्धांतिक है कि हवाई जहाज बनाने वाले या पुलों का निर्माण करने वाले किसी भी व्यावहारिक इंजीनियर को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं होती। यह विशुद्ध रूप से अमूर्त गणित का हिस्सा है। लेकिन ओपनएआई जैसी कंपनियों के लिए यह अपनी तकनीकी श्रेष्ठता साबित करने का एक जरिया है। एंथ्रोपिक जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले खुद को बेहतर दिखाने और निवेशकों के बीच अपनी साख बनाने के लिए शुद्ध गणित के इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों का इस्तेमाल एक कॉर्पोरेट हथियार के रूप में किया जा रहा है। क्या केवल अनुवादक बनकर रह जाएंगे मानव वैज्ञानिक? ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या भविष्य में मानव गणितज्ञों की कोई उपयोगिता बची रहेगी? स्ट्रोगेट्ज़ का मानना है कि आने वाले कुछ समय तक इंसानों की भूमिका केवल मशीनों द्वारा तैयार किए गए जटिल समाधानों को समझने और उन्हें आसान भाषा में समझाने तक सीमित हो सकती है। इसे वे 'प्रूफ डाइजेशन' कहते हैं। एआई जो समाधान पेश करता है, वे इतने विशाल और जटिल होते हैं कि आम इंसान उन्हें सीधे नहीं समझ सकते। अभी इन समाधानों का अनुवाद करने के लिए मानव विशेषज्ञों की आवश्यकता है, लेकिन स्ट्रोगेट्ज़ को डर है कि जल्द ही मशीनें इस अनुवाद कार्य में भी इंसानों को पीछे छोड़ देंगी। हालांकि, एआई के इस प्रभाव से व्यावहारिक गणित के कुछ क्षेत्र अभी सुरक्षित रह सकते हैं। अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और अंतर्राष्ट्रीय संबंध जैसे विषय जो वास्तविक दुनिया की अव्यवस्थित और अनिश्चित परिस्थितियों से निपटते हैं, उनमें एआई को पूरी तरह से लागू करना आसान नहीं होगा क्योंकि इनके नियम शुद्ध गणित की तरह पूरी तरह से निश्चित नहीं होते। अकादमिक भविष्य और प्रेरणा का अंत शोधकर्ताओं के सामने एक और बड़ी चुनौती गणितीय सुरुचि और रुचि को बचाए रखने की है। गणित केवल समीकरणों को हल करने का नाम नहीं है, बल्कि यह इंसानी कौतूहल और सुंदरता की खोज भी है। मशीनें तार्किक रूप से सटीक हो सकती हैं, लेकिन उनके भीतर अभी तक यह समझ विकसित नहीं हुई है कि कौन सा सिद्धांत इंसानों के लिए सुंदर या प्रासंगिक है। हालांकि, भविष्य में मशीनों को इस कलात्मक रुचि के लिए भी प्रशिक्षित किया जा सकता है। स्ट्रोगेट्ज़ स्वीकार करते हैं कि इस तकनीक के आने से गणित का लोकतंत्रीकरण भी हुआ है, जिससे अब आम लोग भी बिना जीवन भर की कठिन ट्रेनिंग के गणितीय खोजों में भाग ले सकते हैं। लेकिन इसका दूसरा स्याह पहलू यह है कि यदि सारा शोध कार्य एआई द्वारा ही किया जाने लगेगा, तो कोई भी सरकार या संस्थान मानव गणितज्ञों को शोध के लिए फंड क्यों देगा? स्ट्रोगेट्ज़ चेतावनी देते हैं कि गणित इस मामले में पहला ऐसा क्षेत्र बनने जा रहा है जहां इंसानी समझ का अंत होने की कगार पर है, और यह पूरी मानवता के लिए एक चेतावनी की तरह है जो यह दर्शाता है कि भविष्य में अन्य क्षेत्रों का क्या हश्र होने वाला है। इसका आप पर असर यह समाचार दर्शाता है कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मानव बौद्धिक क्षमता के सबसे कठिन और अमूर्त क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में ले रही है, जिसका सीधा असर भविष्य की नौकरियों और शिक्षा प्रणाली पर पड़ेगा। • शिक्षा और करियर: गणित और विज्ञान के छात्रों को अब केवल पारंपरिक सूत्रों को याद रखने के बजाय एआई उपकरणों के संचालन और उनके द्वारा दिए गए डेटा के विश्लेषण पर ध्यान देना होगा। इसका मतलब है कि केवल शैक्षणिक डिग्रियां भविष्य में रोजगार की गारंटी नहीं होंगी। • शोध और अनुसंधान में नौकरियों की कमी: विश्वविद्यालयों और कॉर्पोरेट प्रयोगशालाओं में अनुसंधान के लिए बड़ी मानव टीमों के बजाय कुछ एआई ऑपरेटरों की आवश्यकता होगी। इससे भविष्य में उच्च-स्तरीय अकादमिक नौकरियों में भारी कटौती देखने को मिल सकती है। • व्यावहारिक तकनीकों का विकास: गणितीय समस्याओं के तेजी से हल होने से डेटा एन्क्रिप्शन, साइबर सुरक्षा और वित्तीय प्रणालियों की कोडिंग में क्रांतिकारी सुधार होंगे। आम उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित और कुशल डिजिटल सेवाएं मिलेंगी। • मानसिक और मनोवैज्ञानिक बदलाव: अत्यधिक कुशल पेशेवरों में मशीनों द्वारा रिप्लेस होने का डर बढ़ेगा, जिससे कार्यस्थलों पर तनाव और हीनभावना की समस्या पैदा हो सकती है। लोगों को अपने मानसिक स्वास्थ्य और करियर री-स्किलिंग पर अतिरिक्त निवेश करना होगा। ऐसा क्यों हुआ गणित के क्षेत्र में एआई की यह अचानक आई बाढ़ बड़ी टेक कंपनियों के बीच बाजार में वर्चस्व स्थापित करने की होड़ और उनकी उन्नत कंप्यूटिंग रणनीतियों का परिणाम है। • कॉर्पोरेट आईपीओ और मार्केट वैल्यू की होड़: ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के बीच निवेशकों को आकर्षित करने के लिए खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने की होड़ मची है। प्रतिष्ठित समस्याओं को हल करना उनके लिए एक बड़ा विज्ञापन टूल है जो उनके मूल्यांकन को खरबों डॉलर तक पहुंचा सकता है। • एजेंटिक एआई का विकास: पारंपरिक एआई मॉडलों के विपरीत, अब कंपनियों ने एक साथ हजारों 'डिजिटल एजेंटों' को एक समस्या पर काम करने की अनुमति दी है। इस सामूहिक सुपरकंप्यूटिंग दृष्टिकोण ने दशकों पुरानी समस्याओं को कुछ ही समय में सुलझाना संभव बना दिया है। • अकादमिक और कॉर्पोरेट संस्कृतियों का टकराव: पारंपरिक अकादमिक शोध धीरे-धीरे और आपसी सहयोग से होता है, लेकिन टेक दिग्गज वित्तीय लाभ और पेटेंट के लिए जल्दबाजी में घोषणाएं करते हैं। इसी जल्दबाजी की वजह से श्रेय देने को लेकर विवाद खड़े हो रहे हैं। सवाल-जवाब 1. ओपनएआई ने किस प्रमुख गणितीय समस्या को हल करने का दावा किया है? ओपनएआई ने दावा किया है कि उसने नेवियर-स्टोक्स अस्तित्व और सुगमता की समस्या को हल कर लिया है, जो 90 साल पुरानी है और जिसके साथ 10 लाख डॉलर का मिलेनियम प्राइज जुड़ा है। 2. ट्रिस्टन बकमास्टर ने ओपनएआई पर क्या आरोप लगाए हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि ओपनएआई ने उनके और एंथ्रोपिक के शोधकर्ता लेवेंट अल्पोगे के काम के बारे में जानने के बाद जल्दबाजी में अपनी घोषणा की और श्रेय के वितरण को प्रभावित करने की कोशिश की। 3. एलेक्स टाउनसेंड ने एआई का उपयोग करके क्या हासिल किया? उन्होंने चैटजीपीटी की मदद से न्यूमेरिकल लीनियर अलजेब्रा की एक दशकों पुरानी समस्या को हल किया, जो बिना एआई के अत्यधिक महंगी और श्रमसाध्य होती। 4. स्टीवन स्ट्रोगेट्ज़ के अनुसार 'प्रूफ डाइजेशन' क्या है? प्रूफ डाइजेशन का मतलब एआई द्वारा दिए गए विशाल और जटिल गणितीय समाधानों को समझना और उन्हें इंसानों के समझने योग्य भाषा में अनुवादित करना है। 5. क्या एआई से व्यावहारिक गणित या अन्य क्षेत्रों को भी खतरा है? अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र जैसे व्यावहारिक क्षेत्र जो वास्तविक दुनिया की जटिलताओं और अनिश्चितताओं से जुड़े हैं, वे शुद्ध गणित की तुलना में एआई के प्रभाव से कुछ समय के लिए सुरक्षित रह सकते हैं। https://trendkia.com/science/cornell-university-ke-prophesara-ne-jatai-gahari-chinta-ganita-ke-kshetra-men-ai-ki-teja-tarakki-se-vaijnanika-sahame-31546 TrendKia — Har trend, sabse pehle.