# डेटा सेंटरों के खिलाफ अमेरिका में बढ़ता जनाक्रोश, विरोध को दबाने के लिए चीन पर मढ़ा जा रहा दोष

> अमेरिका में डेटा सेंटरों के खिलाफ आम जनता का विरोध तेजी से बढ़ रहा है, जिसे दबाने के लिए राजनेता और टेक कंपनियां चीन की साजिश का सहारा ले रही हैं, हालांकि इसके पक्ष में बेहद मामूली सबूत ही मिले हैं।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-09-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/data-sentaron-ke-khilapha-america-men-barhata-janakrosha-virodha-ko-dabane-ke-lie-china-para-marha-ja-raha-dosha-28541 · **Language:** Hindi
**Tags:** डेटा सेंटर विरोध, चीन दुष्प्रचार दावा, डोनाल्ड ट्रंप डेटा सेंटर, अमेरिकी राजनीति, टेक इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमेशन और रोजगार

अमेरिका भर में डेटा सेंटरों के तेजी से होते विस्तार के खिलाफ आम जनता का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है, जिससे टेक उद्योग और इसके समर्थक राजनेता बैकफुट पर आ गए हैं। हाल ही में हुए जनमत सर्वेक्षणों से खुलासा हुआ है कि अब 75 प्रतिशत अमेरिकी अपने स्थानीय इलाकों में नए डेटा सेंटरों के निर्माण का विरोध कर रहे हैं। पिछले साल यह आंकड़ा महज 42 प्रतिशत था, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि स्थानीय स्तर पर जनाक्रोश कितनी तेजी से बढ़ा है। जनता के इस बदलते मिजाज ने देश के राजनीतिक समीकरणों को भी बदल दिया है। आगामी मध्यावधि चुनावों को देखते हुए दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता अब डेटा सेंटर परियोजनाओं से दूरी बनाने लगे हैं। टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट और पेन्सिलवेनिया के गवर्नर जोश शापिरो, जो कभी डेटा सेंटरों को आर्थिक प्रगति का जरिया बताकर उनका समर्थन करते थे, अब अपनी रणनीति बदलकर जनता के सामने सख्त रुख अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।

## विरोध को दबाने के लिए चीन पर दोष मढ़ने की कोशिश
एक तरफ जहां राज्यों के गवर्नर और स्थानीय नेता वोट खोने के डर से डेटा सेंटर परियोजनाओं से किनारा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ दक्षिणपंथी राजनेता और टेक उद्योग के दिग्गज इस जनविरोध के पीछे एक नया कारण तलाश रहे हैं। जनता की वाजिब चिंताओं जैसे कि बिजली के बढ़ते बिल, पानी की भारी खपत और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को स्वीकार करने के बजाय, ये नेता इसका सारा दोष विदेशी ताकतों, खासकर चीन पर मढ़ रहे हैं। यह बहस तब और तेज हो गई जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने यह घोषणा की कि उसने चीन से जुड़े लगभग 200 ऐसे खातों की पहचान की है जो प्लेटफॉर्म पर डेटा सेंटरों के खिलाफ माहौल बना रहे थे।

इस खबर के आते ही मुख्यधारा के मीडिया और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की खबरें चलने लगीं, जिनमें स्थानीय विरोध प्रदर्शनों को चीन की एक सोची-समझी साजिश करार दिया गया। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में इस मुद्दे को हवा दी। उन्होंने लिखा कि चीन अमेरिका में डेटा सेंटरों के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन से बेहद खुश है, और साथ ही उन्होंने डेटा सेंटरों के निर्माण का जोरदार समर्थन किया। हालांकि, डेटा सेंटरों के विरोध के पीछे विदेशी साजिश होने का दावा नया नहीं है। इस साल की शुरुआत में भी कई दक्षिणपंथी थिंक टैंकों ने रिपोर्ट जारी कर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर अमेरिकी जनता में डेटा सेंटरों के खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाया था। जून में ओपनएआई ने भी चीनी सरकार से जुड़े कुछ खातों को प्रतिबंधित किया था जो कथित तौर पर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे थे।

## कमजोर सबूत और बॉट नेटवर्क का पूरा सच
टेक कंपनियों और नेताओं द्वारा चीन पर लगाए जा रहे इन गंभीर आरोपों के बावजूद, साइबर विशेषज्ञों और चीन मामलों के जानकारों का कहना है कि इसके पक्ष में कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। वॉशिंगटन डीसी में पेश की गई रिपोर्टों में बिना किसी ठोस प्रमाण के केवल अनुमानों और अटकलों के आधार पर दावे किए गए हैं। जब इन दावों की गहराई से जांच की गई, तो हकीकत कुछ और ही निकलकर सामने आई।

उदाहरण के लिए, जून में जब ओपनएआई ने चीनी खातों पर कार्रवाई की थी, तब कंपनी ने खुद स्वीकार किया था कि वे खाते अमेरिका में डेटा सेंटरों को लेकर पहले से मौजूद असंतोष का केवल फायदा उठाने की कोशिश कर रहे थे, न कि उन्होंने इस विरोध को जन्म दिया था। इसके अलावा, एक्स द्वारा हाल ही में हटाए गए 200 खाते वास्तव में 2,000,000 खातों वाले एक बेहद विशाल बॉट नेटवर्क का हिस्सा थे। पूरे बॉट नेटवर्क में डेटा सेंटर विरोधी खातों की हिस्सेदारी एक प्रतिशत के बेहद छोटे से हिस्से के बराबर थी। इससे यह साफ होता है कि यह अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की कोई विशेष रणनीतिक साजिश नहीं थी, बल्कि एक सामान्य स्पैम नेटवर्क का हिस्सा मात्र थी।

डिजिटल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने वाली शोध संस्था ग्राफिका के खुफिया विशेषज्ञों ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका में डेटा सेंटरों के खिलाफ चल रहा आंदोलन पूरी तरह से घरेलू और स्थानीय समस्याओं से उपजा है। यद्यपि विदेशी एजेंसियां अमेरिका के आंतरिक विवादों पर नजर रखती हैं, लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि चीन या कोई अन्य देश अमेरिकी जनता के इस भारी विरोध को संचालित कर रहा है।

## टेक क्षेत्र के भीतर उठते सवाल और विरोधाभास
चीन द्वारा दुष्प्रचार फैलाने के दावों पर अब टेक उद्योग के भीतर से भी सवाल उठने लगे हैं। टेक ब्लॉगर एंडी मैस्ले, जिनकी रिसर्च को कोएफिशिएंट गिविंग नामक संस्था से वित्तीय सहायता मिलती है, खुद डेटा सेंटरों के बड़े समर्थक रहे हैं। इसके बावजूद वे चीन पर दोष मढ़ने की इस प्रवृत्ति को संशय की नजर से देखते हैं। एंडी मैस्ले का कहना है कि जब भी वे टेक समर्थकों से चीन के हस्तक्षेप का कोई ठोस प्रमाण मांगते हैं, तो वे चुप हो जाते हैं।

मैस्ले के अनुसार, टेक उद्योग के दिग्गजों के लिए चीन को दोष देना एक बेहद सुविधाजनक बहाना बन गया है, क्योंकि वे यह स्वीकार नहीं करना चाहते कि आम नागरिक वास्तव में अपने घरों के आसपास विशाल डेटा सेंटरों का निर्माण पसंद नहीं करते। उन्होंने टेक समुदाय से चीन के हस्तक्षेप से जुड़े सबूत देने की सार्वजनिक अपील भी की, लेकिन उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं मिली।

इसके साथ ही, विश्लेषक इस पूरे तर्क में एक बड़ा विरोधाभास भी देखते हैं। एक तरफ दक्षिणपंथी नेता और टेक कंपनियां आरोप लगाती हैं कि चीन अमेरिकी डेटा सेंटरों को नुकसान पहुंचाना चाहता है, तो दूसरी तरफ वे यह भी शिकायत करते हैं कि चीनी कंपनियां अमेरिकी एआई तकनीक की चोरी कर रही हैं। चूंकि आधुनिक एआई मॉडल पूरी तरह से डेटा सेंटरों की कंप्यूटिंग क्षमता पर निर्भर होते हैं, इसलिए चीन के लिए उस इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाना तार्किक रूप से बेतुका लगता है जिस पर उसकी अपनी तकनीक निर्भर बताई जाती है।

## आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए बाहरी बलि का बकरा
अंतरराष्ट्रीय मामलों और नीतिगत मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि अपनी आंतरिक समस्याओं के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराना अमेरिकी राजनीति की पुरानी आदत रही है। चीन मामलों की विशेषज्ञ लुईस मात्साकिस का कहना है कि चीन के खतरे को लेकर मचाया जाने वाला यह हंगामा वास्तव में विदेशी गतिविधियों से ज्यादा अमेरिकी समाज की अंदरूनी घबराहट को दर्शाता है। यह पूरा घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि अमेरिकी नेता विदेशी प्रभाव अभियानों की प्रकृति को समझने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।

डेटा सेंटरों के कारण बिजली की अत्यधिक खपत, स्थानीय जल स्रोतों पर पड़ता दबाव और टेक कंपनियों की मनमानी जैसे बुनियादी मुद्दों का समाधान तलाशने के बजाय, राजनेता चीन को बलि का बकरा बनाना आसान समझते हैं। विदेशी साजिश का राग अलाप कर टेक कंपनियां और नीति निर्माता उस सच्चाई से मुंह मोड़ रहे हैं, जो यह दर्शाती है कि अमेरिकी जनता अपने दैनिक जीवन, पर्यावरण और जेब पर पड़ रहे सीधे असर के कारण इन डेटा सेंटरों का विरोध कर रही है।

## ऑटोमेशन, नौकरियों का नुकसान और कानूनी विवाद
पर्यावरण और ऊर्जा संबंधी चिंताओं के अलावा, डेटा सेंटरों से मिलने वाले आर्थिक लाभों और रोजगार के वादों की पोल भी अब खुलने लगी है। डेटा सेंटर निर्माण के समय कंपनियां स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर नौकरियां देने के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन आधुनिक ऑटोमेशन के कारण यह हकीकत से काफी दूर है। मेटा जैसी दिग्गज टेक कंपनियां अब अपने डेटा सेंटरों में इंसानों की जगह रोबोटिक कर्मचारियों को तैनात करने की योजना पर तेजी से काम कर रही हैं।

डेटा सेंटरों में बढ़ते ऑटोमेशन का असर केवल तकनीकी नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा नुकसान कैंटीन कर्मचारियों, सफाईकर्मियों और मेंटेनेंस स्टाफ जैसी स्थानीय नौकरियों पर भी पड़ रहा है। कंपनियों का मुख्य उद्देश्य इन कामों को ऑटोमेट करके परिचालन लागत को कम करना है। टेक्सास जैसे राज्यों में यह स्थिति साफ देखी जा सकती है, जहां देश में सबसे ज्यादा डेटा सेंटर बन रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वहां कॉलेज से निकलने वाले युवाओं में बेरोजगारी की दर काफी अधिक है।

दूसरी ओर, डेटा सेंटर सौदों में बरती जा रही गोपनीयता के कारण जनता का गुस्सा और बढ़ता जा रहा है। अर्कांसस राज्य में बिजली आपूर्ति करने वाली कंपनी एंटरजी ने स्थानीय समाचार पत्र अर्कांसस डेमोक्रेट-गजट के खिलाफ अदालत से स्टे आर्डर लेने की कोशिश की, क्योंकि समाचार पत्र ने गूगल के साथ हुए एक गोपनीय डेटा सेंटर सौदे की जानकारी प्रकाशित कर दी थी। यह जानकारी एक स्थानीय महिला द्वारा सूचना के अधिकार के तहत कानूनी रूप से हासिल की गई थी। बिजली कंपनी ने व्यापारिक गोपनीयता के उल्लंघन का दावा करते हुए उस आम नागरिक को भी अदालत में घसीट लिया, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।

देश भर में डेटा सेंटरों के खिलाफ बढ़ते इस असंतोष को देखते हुए अब विभिन्न राज्यों की सरकारें सख्त कानून बनाने की तैयारी कर रही हैं। आगामी 2026-2027 के विधायी सत्रों में डेटा सेंटरों की बिजली-पानी की खपत, कर छूट और पारदर्शिता से जुड़े कई कड़े कानून पेश किए जाने की संभावना है, जिससे यह स्पष्ट है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर जारी यह लड़ाई आने वाले समय में और उग्र होने वाली है।

## इसका आप पर असर
डेटा सेंटरों के खिलाफ बढ़ता विरोध अमेरिका और अन्य देशों में आम नागरिकों के बिजली के बिल, स्थानीय नौकरियों और जल संसाधनों की उपलब्धता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

- **बिजली उपभोक्ता:** डेटा सेंटरों की भारी बिजली खपत से स्थानीय पावर ग्रिड पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों को अपने घरों में मासिक बिजली दरों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।
- **स्थानीय रोजगार चाहने वाले:** डेटा सेंटरों में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल से स्थायी नौकरियां घट रही हैं। इससे स्थानीय युवाओं को केवल निर्माण कार्य के दौरान ही काम मिल पाता है और लंबे समय का रोजगार खत्म हो जाता है।
- **कॉलेज ग्रेजुएट्स:** टेक्सास जैसे टेक इंफ्रास्ट्रक्चर वाले क्षेत्रों में डेटा सेंटर बनने के बावजूद तकनीकी नौकरियां पैदा नहीं हो रही हैं। इसके कारण उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को डिग्री होने के बाद भी बेरोजगारी से जूझना पड़ रहा है।
- **पारदर्शिता और करदाता:** बिजली कंपनियों द्वारा टेक दिग्गजों के साथ गोपनीय सौदे करने से आम जनता को सही जानकारी नहीं मिल पाती। इससे करदाताओं पर अप्रत्यक्ष वित्तीय बोझ पड़ता है और कंपनियों को सस्ती दर पर बिजली मिल जाती है।
- **स्थानीय नीतियां:** 2026-2027 के आगामी विधायी सत्रों में डेटा सेंटरों के खिलाफ सख्त कानून लागू किए जाएंगे। इससे स्थानीय निकायों को पानी और जमीन के इस्तेमाल पर कड़े नियम लागू करने का कानूनी अधिकार मिलेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी नागरिक अपने इलाकों में नए डेटा सेंटरों का विरोध क्यों कर रहे हैं?
बिजली के बढ़ते बिलों, पानी की अत्यधिक खपत, पर्यावरणीय चिंताओं और वादे के मुताबिक नौकरियां न मिलने के कारण विरोध 75 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

### 2. क्या अमेरिका में डेटा सेंटर विरोधी आंदोलन के पीछे चीनी बॉट नेटवर्क का हाथ था?
नहीं, विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि यह विरोध पूरी तरह से घरेलू समस्याओं से उपजा है और विदेशी खाते केवल पहले से मौजूद असंतोष का फायदा उठा रहे थे।

### 3. एक्स पर डेटा सेंटरों के खिलाफ कितने सोशल मीडिया खाते पाए गए थे?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने 200 खातों की पहचान की थी, जो 2,000,000 खातों वाले एक बड़े बॉट नेटवर्क का महज 0.1 प्रतिशत थे।

### 4. ग्रेग एबॉट और जोश शापिरो जैसे नेता डेटा सेंटरों पर अपना रुख क्यों बदल रहे हैं?
आगामी मध्यावधि चुनावों को देखते हुए राजनेता जनता के गुस्से से बचने के लिए अलोकप्रिय डेटा सेंटर परियोजनाओं से दूरी बना रहे हैं।

### 5. डेटा सेंटरों में ऑटोमेशन से नौकरियों पर क्या असर पड़ रहा है?
मेटा जैसी कंपनियां सर्वर रखरखाव और कैंटीन संचालन के लिए रोबोट तैनात कर रही हैं, जिससे इंसानी नौकरियों और मेंटेनेंस स्टाफ की जरूरत कम हो गई है।

### 6. अर्कांसस में गूगल के डेटा सेंटर सौदे को लेकर क्या कानूनी विवाद हुआ?
बिजली कंपनी एंटरजी ने गूगल के साथ हुए सौदे की जानकारी को दबाने के लिए कोर्ट से स्टे आर्डर मांगने की कोशिश की, जो एक नागरिक को आरटीआई के जरिए मिली थी।

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