Ebola का सबसे प्रभावी टीका 15 साल से लैब में क्यों बंद है? Thomas Geisbert द्वारा विकसित Ebola का एक आशाजनक टीका सालों से तैयार होने के बावजूद फंडिंग की कमी और कम व्यावसायिक रुचि के कारण इंसानी परीक्षणों से दूर रहा है। फंडिंग और रुचि का अभाव Ebola वायरस के खिलाफ एक बेहद कारगर टीका पिछले 15 सालों से सिर्फ इसलिए धूल फांक रहा है क्योंकि उसे बनाने में किसी ने व्यावसायिक लाभ नहीं देखा। University of Texas Medical Branch के इम्यूनोलॉजी प्रोफेसर Thomas Geisbert ने rVSV तकनीक का उपयोग करके यह टीका तैयार किया था, जो बंदरों पर किए गए परीक्षणों में पूरी तरह सफल रहा था। हालांकि, उस समय न तो इसके लिए पर्याप्त फंडिंग मिली और न ही बड़ी फार्मा कंपनियों ने इसमें कोई खास दिलचस्पी दिखाई। शुरुआत और विकास का इतिहास Thomas Geisbert का यह शोध 2000 के दशक की शुरुआत में अमेरिका की सेना द्वारा एक रक्षा परियोजना के रूप में शुरू किया गया था। चिंता यह थी कि Ebola जैसे वायरस का इस्तेमाल जैविक हथियारों के रूप में किया जा सकता है। 2003 में, उन्होंने एक ही इंजेक्शन से बंदरों को Ebola से बचाने में सफलता हासिल की थी। इसके बाद 2009 में, उन्होंने कई प्रकार के Ebola वायरस के खिलाफ एक संयुक्त टीका भी विकसित किया। क्यों नहीं मिला टीका? व्यावसायिक रूप से Ebola टीका एक लाभ कमाने वाला उत्पाद नहीं माना गया। 2013 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैले भीषण प्रकोप के दौरान Merck द्वारा Ervebo टीका विकसित किया गया, जिसमें Thomas Geisbert के काम का बड़ा योगदान था। दुर्भाग्य से, Bundibugyo नामक Ebola स्ट्रेन को कम घातक मानते हुए उस पर ध्यान नहीं दिया गया, जबकि वह भी जानलेवा साबित हुआ। मौजूदा स्थिति और भविष्य TrendKia के अनुसार, वर्तमान में मध्य और पूर्वी अफ्रीका में फैले प्रकोप के बाद अब जाकर इस पर काम तेज हुआ है। 2023 के एक अध्ययन में पाया गया कि यह टीका बंदरों को संक्रमण के बाद भी सुरक्षा दे सकता है। वर्तमान में Coalition for Epidemic Preparedness Innovations ने $3.2 मिलियन की फंडिंग की पेशकश की है, ताकि इंसानी परीक्षणों की दिशा में पहला कदम बढ़ाया जा सके। इसके उत्पादन की जिम्मेदारी International AIDS Vaccine Initiative ने ली है। हालांकि, लाइव वायरस के नमूनों की कमी और 2 प्रतिशत के अज्ञात जेनेटिक अंतर के कारण अभी भी कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। इसका आप पर असर सामान्य रूप से: इस रिपोर्ट से पता चलता है कि स्वास्थ्य संकटों के दौरान टीकों के विकास में देरी केवल तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि अक्सर फंडिंग की कमी के कारण होती है। सवाल-जवाब 1. Thomas Geisbert कौन हैं? Thomas Geisbert University of Texas Medical Branch में इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर हैं जिन्होंने Ebola के लिए वैक्सीन विकसित की है। 2. यह वैक्सीन 15 साल से क्यों उपलब्ध नहीं थी? इस वैक्सीन के विकास में फंडिंग की कमी और बड़ी फार्मा कंपनियों द्वारा व्यावसायिक लाभ न देखे जाने के कारण इसे नजरअंदाज किया गया था। 3. rVSV वैक्सीन कैसे काम करती है? यह एक हानिरहित वायरस का उपयोग करके शरीर को Ebola से लड़ने के लिए जरूरी जेनेटिक निर्देश प्रदान करती है। 4. क्या वर्तमान प्रकोप में इस वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है? नहीं, अभी इस वैक्सीन को इंसानी परीक्षणों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। https://trendkia.com/science/ebola-ka-sabase-prabhavi-tika-15-sala-se-laiba-men-kyon-bnda-hai-1791 TrendKia — Har trend, sabse pehle.