# गूगल और एचएचएमआई के वैज्ञानिकों ने बनाया नर फ्रूट फ्लाई का पूरा ब्रेन मैप, 1.6 लाख न्यूरॉन्स से खुलेंगे अल्जाइमर के राज

> शोधकर्ताओं ने 20 साल की मेहनत के बाद नर फ्रूट फ्लाई के पूरे सेंट्रल नर्वस सिस्टम का डिजिटल वायरिंग डायग्राम तैयार किया है। इस सफलता में 1.6 लाख से ज्यादा न्यूरॉन्स का नक्शा बना है, जिससे भविष्य में अल्जाइमर और डिप्रेशन जैसी बीमारियों के इलाज में मदद मिलेगी।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-09-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/google-aura-hhmi-ke-vaijnanikon-ne-banaya-nara-phruta-phlai-ka-pura-brena-maipa-1-6-lakha-nyuronsa-se-khulenge-aljaimara-ke-raja-28534 · **Language:** Hindi
**Tags:** गूगल रिसर्च, ब्रेन मैप, न्यूरॉन्स, फ्रूट फ्लाई, अल्ज़ाइमर, न्यूरोसाइंस, पाथफाइंडर एआई

गूगल रिसर्च और हॉवर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट (एचएचएमआई) के शोधकर्ताओं ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए नर फ्रूट फ्लाई (ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर) के पूरे दिमाग और सेंट्रल नर्वस सिस्टम का पहला संपूर्ण डिजिटल नक्शा तैयार किया है। लगभग दो दशकों की लगातार कोशिशों के बाद मिली इस सफलता से वैज्ञानिक अब मक्खी के दिमाग, ऑप्टिक लोब्स और नर्व कॉर्ड के बीच फैले तंत्रिका तंत्र की विस्तृत वायरिंग को देख सकते हैं। यह खोज इंसानी दिमाग की बेहद जटिल संरचना को समझने और भविष्य में विभिन्न न्यूरोलॉजिकल विकारों के सही कारणों का पता लगाने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है।

## दो दशक का शोध और फ्रूट फ्लाई की अहमियत
न्यूरोसाइंस की दुनिया में फ्रूट फ्लाई को लंबे समय से एक आदर्श मॉडल माना जाता रहा है। देखने में बेहद छोटी होने के बावजूद यह मक्खी सीखने, याद रखने, सामाजिक संपर्क बनाने और सोने-जागने जैसे कई जटिल व्यवहार प्रदर्शित करती है। शोधकर्ताओं ने अब ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर के सभी 166000 न्यूरॉन्स का पता लगा लिया है और उन्हें आपस में जोड़ने वाले नर्वस नेटवर्क की मैपिंग की है। यह पूरी उपलब्धि एक तरह का ऐसा सिस्टम मैप प्रदान करती है, जो यह समझने में मदद करता है कि मक्खी के फुदकने, उड़ने या सोने के समय कौन से न्यूरॉन्स सक्रिय होते हैं।

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## पाथफाइंडर एआई और 50000 मानव-वर्षों की बचत
दिमाग की इस विस्तृत मैपिंग या 'कनेक्टोमिक्स' के निष्कर्ष प्रसिद्ध शोध पत्रिका 'सेल' (Cell) में प्रकाशित हुए हैं। इस परियोजना की शुरुआत एचएचएमआई के जेनेलिया रिसर्च कैंपस में हुई थी, जहां सीनियर ग्रुप लीडर हेराल्ड हेस ने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी तकनीक को नैनोमीटर स्केल पर न्यूरॉन्स की स्पष्ट तस्वीरें लेने के योग्य बनाया। हालांकि, लाखों की संख्या में प्राप्त हुई कच्ची तस्वीरों को एक सटीक नक्शे में बदलना किसी भी सामान्य प्रयोगशाला की कंप्यूटिंग क्षमता से बाहर था।

इस समस्या को सुलझाने के लिए गूगल की कनेक्टोमिक्स टीम ने पाथफाइंडर (PATHFINDER) नाम का एक अत्याधुनिक एआई सिस्टम विकसित किया। यह एआई कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करके तस्वीरों के प्रत्येक पिक्सेल को स्कैन करता है और न्यूरॉन्स के घुमावदार रास्तों को स्वचालित रूप से ट्रेस करता है। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के कंप्यूटेशनल न्यूरोसाइंटिस्ट सेबेस्टियन स्युंग के आकलनों के अनुसार, यदि एआई आधारित ऑटोमेशन का उपयोग न किया जाता तो हाथ से इस रीकंस्ट्रक्शन को पूरा करने में लगभग 50000 मानव-वर्षों का समय लग जाता।

## 12.5 करोड़ सिनेप्टिक कनेक्शन और पिछला रिकॉर्ड
गूगल ने अपने आधिकारिक विवरण में बताया कि 166000 से अधिक न्यूरॉन्स और लगभग 12.5 करोड़ (125 मिलियन) सिनेप्टिक कनेक्शनों के साथ यह नक्शा न्यूरॉन्स की संख्या के आधार पर अब तक का सबसे विशाल ब्रेन मैप बन गया है। शोध की प्रक्रिया के दौरान जैसे-जैसे तस्वीरें प्रोसेस होती गईं, दुनिया भर के स्वयंसेवकों को न्यूरॉन्स के लेबल की जांच और सत्यापन के लिए आमंत्रित किया गया।

यह नया डेटाबेस साल 2024 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में किए गए एक पिछले अध्ययन को आगे बढ़ाता है। उस समय शोधकर्ताओं के एक समूह ने केवल एक मादा मक्खी के मस्तिष्क का कनेक्टोम पूरा किया था, जिसमें लगभग 139000 न्यूरॉन्स दर्ज किए गए थे। वर्तमान शोध में नर फ्रूट फ्लाई के न केवल मस्तिष्क, बल्कि उसके पूरे सेंट्रल नर्वस सिस्टम का खाका खींचा गया है।

## चूहों, जेब्राफिश और इंसानी दिमाग के लिए नया मार्ग
वैज्ञानिक अब नर फ्रूट फ्लाई के इस वायरिंग डायग्राम को एक ऐसे मानक मॉडल के रूप में देख रहे हैं, जिसकी मदद से चूहों और जेब्राफिश जैसे बड़े जीवों के जटिल मस्तिष्कों का अध्ययन किया जा सकेगा। इंसानी दिमाग में लगभग 86 अरब न्यूरॉन्स होते हैं, जिनका पूरा डिजिटल नक्शा तैयार करना फिलहाल वर्तमान तकनीक की सीमाओं से परे है। हालांकि, फ्रूट फ्लाई का यह मॉडल यह समझने का रोडमैप देता है कि न्यूरोनल नेटवर्क किस तरह काम करते हैं और डिप्रेशन, अल्जाइमर या स्किजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियों के दौरान इनमें क्या गड़बड़ी आती है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि ये निष्कर्ष आने वाले समय में दिमागी बीमारियों के नए उपचार और तंत्रिका सुधार की नई राहें खोलेंगे।

## इसका आप पर असर
यह खोज तुरंत किसी अस्पताल में इलाज का जरिया नहीं बनती, लेकिन यह भविष्य के न्यूरोलॉजिकल अनुसंधानों और मानसिक स्वास्थ्य उपचारों की नींव मजबूत करती है।

- **मानसिक स्वास्थ्य शोध में:** अल्जाइमर, स्किजोफ्रेनिया और डिप्रेशन जैसी बीमारियों के कारणों को समझने के लिए वैज्ञानिकों को एक पूर्ण जैविक मॉडल मिल गया है। इससे भविष्य में लक्षित दवाओं के विकास की गति तेज होगी।
- **मेडिकल एआई और मैपिंग में:** एआई द्वारा न्यूरॉन्स की मैपिंग की यह तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में अन्य जटिल जैविक संरचनाओं को जल्दी समझने में मदद करेगी।
- **दीर्घकालिक इलाज में:** आम मरीजों के लिए यह तकनीक आने वाले वर्षों में दिमाग की मरम्मत और न्यूरोलॉजिकल विकारों के लिए सटीक चिकित्सा पद्धतियां विकसित करने में सहायक साबित होगी।
- **खुले वैज्ञानिक डेटा में:** 1.6 लाख न्यूरॉन्स का ओपन-सोर्स डेटा दुनिया भर के शोधकर्ताओं को नए जैविक शोध करने का अवसर प्रदान करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. नर फ्रूट फ्लाई के ब्रेन मैप में कुल कितने न्यूरॉन्स और कनेक्शन हैं?
इस डिजिटल मैप में 166000 से अधिक न्यूरॉन्स और लगभग 12.5 करोड़ (125 मिलियन) सिनेप्टिक कनेक्शन शामिल हैं।

### 2. इस रिसर्च को पूरा करने में कितना समय लगा?
इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और एआई टूल्स के विकास समेत इस पूरे प्रोजेक्ट में लगभग 20 साल का समय लगा है।

### 3. न्यूरॉन्स को ट्रेस करने के लिए किस एआई का इस्तेमाल किया गया?
गूगल की कनेक्टोमिक्स टीम ने पाथफाइंडर (PATHFINDER) नाम का एआई सिस्टम तैयार किया जो कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क से काम करता है।

### 4. क्या इस मैप से अल्जाइमर और डिप्रेशन के इलाज में मदद मिलेगी?
हां, न्यूरॉन्स के पूरे वायरिंग नेटवर्क को समझकर वैज्ञानिक अल्जाइमर, डिप्रेशन और स्किजोफ्रेनिया जैसी बीमारियों के मूल जैविक कारणों को समझ सकेंगे।

### 5. इंसानी दिमाग में कितने न्यूरॉन्स होते हैं?
इंसान के दिमाग में लगभग 86 अरब (86 billion) न्यूरॉन्स होते हैं।

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