हवाई के टेलीस्कोप ने सुलझाया 840 साल पुराना रहस्य, 1181 में फटे तारे के अवशेषों में दिखीं गैस की विशाल मोतियां हवाई स्थित जेमिनी नॉर्थ टेलीस्कोप ने सुपरनोवा अवशेष Pa 30 की अभूतपूर्व तस्वीरें खींची हैं, जिसमें धागे में पिरोए मोतियों जैसी गैस की विशाल गांठें और बीच में एक जॉम्बी तारा दिखाई दिया है। अंतरिक्ष की गहराइयों में सदियों पहले घटी एक दुर्लभ खगोलीय घटना अब आधुनिक विज्ञान की मदद से बेहद स्पष्ट रूप में सामने आई है। हवाई स्थित जेमिनी नॉर्थ टेलीस्कोप से ली गई ताजा तस्वीरों ने एक प्राचीन सुपरनोवा के मलबे में छिपे ऐसे जटिल ढांचों को उजागर किया है, जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया था। इन नए अवलोकनों से इस सुपरनोवा अवशेष में पहले की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक संरचनाएं दिखाई दी हैं। पहले जहां केवल आतिशबाजी या सिंहपर्णी (डैंडेलियन) के फूल जैसी गैस की लंबी और निरंतर दिखने वाली लपटें नजर आती थीं, वहीं अब उच्च रिज़ॉल्यूशन के कारण यह साफ हो गया है कि वे धागे लगातार फैले हुए नहीं हैं। इसके विपरीत, वे किसी धागे में पिरोए गए दानों या मोतियों की लड़ी जैसे दिखते हैं, जो अपेक्षाकृत एक समान आकार की गैस की गांठों से मिलकर बने हैं। सौरमंडल से भी विशाल हैं अंतरिक्ष की यह मोतियां द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दिखने में मोतियों जैसी लगने वाली यह संरचनाएं असल में बेहद विशाल हैं। इनमें से प्रत्येक गांठ का व्यास लगभग चार प्रकाश-दिवस (चार लाइट-डे) के बराबर आंका गया है। अध्ययन की सह-लेखक इलारिया कैयाजो ने एक प्रेस विज्ञप्ति में इन संरचनाओं के अकल्पनीय पैमाने को स्पष्ट करते हुए कहा, "हमारे सौर मंडल का पूरा ग्रहीय क्षेत्र इनमें से प्रत्येक गांठ में लगभग 10 बार समा सकता है और फिर भी जगह बची रहेगी।" उन्होंने आगे बताया कि ये गांठें दिखने में आश्चर्यजनक रूप से एक समान हैं और वैज्ञानिक इनका कंप्यूटर मॉडल तैयार करने को लेकर काफी उत्साहित हैं। विस्फोट के मलबे में दिखा अनोखा क्रम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि गैस के यह मोती किस तरह बने, हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि यह तारे के विस्फोट के दौरान बाहर निकले मलबे का सघन जमावड़ा हैं। खगोलविदों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर है कि सुपरनोवा जैसे भीषण धमाके के बाद मलबा आमतौर पर बेहद बेतरतीब और अजीबोगरीब आकारों में बिखरता है। इसके विपरीत, इस अवशेष में मौजूद सभी गांठें न केवल आकार में एक जैसी हैं, बल्कि वे तंतुओं की कतार में बिल्कुल व्यवस्थित तरीके से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। मलबे के भीतर मौजूद यह अनोखा क्रम एक नया रहस्य है, जो तारों के अंत और उनकी मृत्यु की प्रक्रिया को गहराई से समझने में वैज्ञानिकों की मदद कर सकता है। धमाके में बच निकला असामान्य जॉम्बी तारा इस नेबुला, जिसे Pa 30 नाम दिया गया है, की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसके केंद्र में मौजूद तारा पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ है। वैज्ञानिक इसे एक जॉम्बी तारा मानते हैं। आम तौर पर थर्मोन्यूक्लियर सुपरनोवा किसी तारे की सबसे हिंसक मौत होती है, जिसमें तारा पूरी तरह से तबाह हो जाता है। हालांकि, कुछ अत्यंत दुर्लभ मामलों में तारे का एक हिस्सा इस महाविनाशकारी विस्फोट के बाद भी बच जाता है। वैज्ञानिक अभी तक पूरी तरह से यह नहीं समझ पाए हैं कि ऐसा कैसे और क्यों होता है। Pa 30 के तंतुओं और गांठों की यह अनोखी बनावट खगोलविदों को यह समझने में मदद करेगी कि ऐसे विस्फोट किस तरह होते हैं और कोई तारा जीवित बचकर जॉम्बी तारा कैसे बना रहता है। 1181 के ऐतिहासिक दस्तावेजों से जुड़ा आधुनिक विज्ञान वैज्ञानिकों के लिए Pa 30 का अध्ययन इसलिए भी खास है क्योंकि यह आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान को आठ सदियों से भी अधिक पुराने मानव इतिहास से सीधे जोड़ता है। इस नेबुला की स्थिति और लक्षण 1181 में चीनी और जापानी खगोलविदों द्वारा दर्ज किए गए ऐतिहासिक रिकॉर्ड से बिल्कुल मेल खाते हैं। उस समय के खगोलविदों ने आकाश में एक नए चमकीले तारे के प्रकट होने का विवरण लिखा था, जो कई महीनों तक लगातार दिखाई देता रहा था। उस दौर में लोगों के लिए यह जानना मुमकिन नहीं था कि वे वास्तव में एक विशालकाय तारे के महाविस्फोट को देख रहे थे। सदियों बाद आधुनिक वैज्ञानिकों ने उस प्राचीन ऐतिहासिक घटना की कड़ियों को जोड़ते हुए साबित किया कि वह विस्फोट इसी Pa 30 नेबुला का जन्म था। इसका आप पर असर गहरे अंतरिक्ष में प्राचीन तारों के अवशेषों की इस अभूतपूर्व मैपिंग का सीधा असर आधुनिक खगोल भौतिकी और ब्रह्मांडीय समझ पर पड़ता है। • विज्ञान प्रेमियों के लिए: यह खोज दिखाती है कि उच्च क्षमता वाले टेलीस्कोप ब्रह्मांड के उन रहस्यों को सुलझा सकते हैं जो सदियों से अनसुलझे थे। पाठक अब ऐतिहासिक खगोलीय घटनाओं को आधुनिक तकनीक के जरिए विस्तृत रूप में समझ सकते हैं। • तारों के अध्ययन में बदलाव: नए डेटा से खगोलविदों को सुपरनोवा विस्फोटों के कंप्यूटर मॉडल सुधारने में मदद मिलेगी। इससे तारों के जीवन चक्र और उनके विनाश के सटीक नियमों को समझना आसान होगा। • ऐतिहासिक रिकॉर्ड की पुष्टि: यह खोज दर्शाती है कि सदियों पुराने ऐतिहासिक दस्तावेज आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधानों के लिए कितने मूल्यवान हैं। इससे दुनिया भर के प्राचीन खगोलीय अभिलेखों के डिजिटलीकरण और अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा। • भविष्य के टेलीस्कोप प्रोजेक्ट्स: इस तरह की सफलताओं से बड़े और शक्तिशाली अंतरिक्ष वेधशालाओं के निर्माण को प्रोत्साहन मिलता है। आने वाले समय में आम जनता को अंतरिक्ष के और भी स्पष्ट व रोमांचक दृश्य देखने को मिलेंगे। ऐसा क्यों हुआ यह महत्वपूर्ण खोज हवाई में जेमिनी नॉर्थ वेधशाला की उन्नत इमेजिंग तकनीक और 1181 के ऐतिहासिक दस्तावेजों के संयोजन के कारण संभव हो सकी है। • अत्याधुनिक टेलीस्कोप तकनीक: जेमिनी नॉर्थ वेधशाला के उच्च रिज़ॉल्यूशन ने मलबे के उन बारीक ढांचों को उजागर किया जो पहले धुंधले थे। इसके चलते वैज्ञानिकों को गैस के तंतुओं में मोतियों जैसी गांठें पहली बार साफ दिखाई दीं। • असामान्य सुपरनोवा विस्फोट: यह संरचना Pa 30 नामक नेबुला के असामान्य थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट का परिणाम है। इस धमाके में तारा पूरी तरह खत्म होने के बजाय एक जॉम्बी तारे के रूप में बच गया। • प्राचीन खगोलीय अभिलेख: वर्ष 1181 में चीनी और जापानी खगोलविदों द्वारा दर्ज किए गए सटीक विवरण ने वैज्ञानिकों को सही दिशा दी। इस ऐतिहासिक कड़ी के कारण ही आधुनिक शोधकर्ताओं ने इस विशिष्ट मलबे की पहचान कर इसका अध्ययन किया। • भौतिकी के अनसुलझे नियम: विस्फोट के दौरान उत्सर्जित पदार्थ का अजीबोगरीब सममितीय जमावड़ा ही इस खोज का मुख्य कारण बना। खगोलविद यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि इतने हिंसक धमाके में गैस की ऐसी सममित गांठें कैसे बनीं। सवाल-जवाब 1. जेमिनी नॉर्थ टेलीस्कोप ने सुपरनोवा के मलबे में क्या नई खोज की है? टेलीस्कोप ने पहले की तुलना में 10 गुना अधिक संरचनाएं देखी हैं, जिनमें गैस के तंतु धागे में पिरोए मोतियों जैसी एक समान गांठों से बने नजर आए हैं। 2. गैस की इन मोतियों का आकार कितना बड़ा है? प्रत्येक गांठ का व्यास लगभग चार प्रकाश-दिवस है, जिसमें हमारा पूरा सौरमंडल करीब 10 बार आसानी से समा सकता है। 3. Pa 30 नेबुला के केंद्र में मौजूद तारा क्यों असामान्य है? यह तारा सुपरनोवा के भीषण विस्फोट में पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ, बल्कि एक जॉम्बी तारे के रूप में अभी भी जीवित बचा हुआ है। 4. इस सुपरनोवा का संबंध 1181 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से कैसे है? चीनी और जापानी खगोलविदों ने 1181 में एक नए तारे का कई महीनों तक दिखना दर्ज किया था, जिसे अब इसी सुपरनोवा विस्फोट से जोड़ा गया है। https://trendkia.com/science/havai-ke-teliskopa-ne-sulajhaya-840-sala-purana-rahasya-1181-men-phate-tare-ke-avasheshon-men-dikhin-gaisa-ki-vishala-motiyan-45965 TrendKia — Har trend, sabse pehle.