# आईआईटी कानपुर के शोध में खुलासा: आठ हफ्ते महामंत्र जाप से छात्रों के दिल और दिमाग में आए सकारात्मक बदलाव

> आईआईटी कानपुर के एक नए अध्ययन में सामने आया है कि लगातार आठ सप्ताह तक महामंत्र का जाप करने से पहली बार जाप करने वाले छात्रों के दिल और दिमाग की गतिविधियों में सकारात्मक बदलाव आए हैं।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/iit-kanpur-study-shows-positive-brain-and-heart-changes-in-students-after-eight-weeks-of-chanting-48603 · **Language:** Hindi
**Tags:** आईआईटी कानपुर, महामंत्र जाप, मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, ईईजी टेस्ट, प्रो बृजभूषण

कानपुर के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में हाल ही में एक ऐसा अध्ययन सामने आया है जिसने शैक्षणिक तनाव के बीच मानसिक शांति के पारंपरिक तरीकों पर वैज्ञानिक रोशनी डाली है। इस शोध के तहत 28 ऐसे विद्यार्थियों को चुना गया जिन्होंने अपने जीवन में पहले कभी मंत्र जाप नहीं किया था। इन छात्रों ने लगातार आठ हफ्ते तक ‘हरे रामा, हरे कृष्णा’ महामंत्र का जाप किया और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का बारीकी से आकलन किया गया।

शोध की शुरुआत से पहले और आठ सप्ताह की अवधि पूरी होने के बाद इन सभी छात्र-छात्राओं के कुछ विशेष चिकित्सीय परीक्षण कराए गए। इनमें मुख्य रूप से ईईजी यानी इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी और हार्ट रेट वैरिएबिलिटी टेस्ट शामिल थे। इन परीक्षणों के जरिए यह परखने का प्रयास किया गया कि नियमित रूप से महामंत्र का उच्चारण करने से मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों और हृदय की धड़कनों के पैटर्न में किस तरह के बदलाव दर्ज होते हैं।

इस पूरे अध्ययन की अगुवाई आईआईटी कानपुर के उप निदेशक प्रो. बृजभूषण ने की। उनका मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि जब कोई व्यक्ति बिना किसी पूर्व अभ्यास के अचानक इस तरह के पारंपरिक अभ्यासों से जुड़ता है, तो उसके शारीरिक और मानसिक तंत्र पर इसका क्या असर पड़ता है। अकादमिक माहौल में लगातार रहने वाले युवा अक्सर पढ़ाई के भारी दबाव, परीक्षाओं की चिंता और भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण मानसिक तनाव से गुजरते हैं।

भारतीय संस्कृति और समाज में सदियों से साधना, योग और मंत्र जाप को मानसिक शांति का एक प्रभावी माध्यम माना जाता रहा है। देश के तमाम लोग अपनी दैनिकचर्या में कुछ पल ध्यान या जप के लिए निकालते हैं, लेकिन इस बार इसे पूरी तरह से वैज्ञानिक कसौटी पर परखा गया। अध्ययन में शामिल किए गए सभी 28 छात्र ऐसे थे जिनका पहले से ऐसा कोई दैनिक नियम नहीं था, जिससे परिणामों की सटीकता और अधिक प्रासंगिक हो गई।

प्रो. बृजभूषण ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मानव शरीर के भीतर स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की दो बेहद महत्वपूर्ण शाखाएं होती हैं जिन्हें सिम्पेथेटिक और पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम कहा जाता है। ये दोनों प्रणालियां मिलकर शरीर की तमाम गतिविधियों और विभिन्न परिस्थितियों में प्रतिक्रिया देने की क्षमता को नियंत्रित करती हैं। जब इंसान किसी दबाव या खतरे की स्थिति में होता है, तब सिम्पेथेटिक सिस्टम सक्रिय हो जाता है और हृदय गति को बढ़ा देता है।

इसके विपरीत, पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम शरीर को शांत करने और उसे वापस सामान्य स्थिति में लाने का काम करता है। हार्ट रेट वैरिएबिलिटी टेस्ट इन्हीं दोनों प्रणालियों के बीच संतुलन और गतिविधियों का आकलन करने में मदद करता है, जबकि ईईजी मस्तिष्क के भीतर चल रही विद्युत तरंगों को ट्रैक करता है। इन दोनों वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से शोधकर्ताओं ने मंत्र जाप के सत्रों से पहले और बाद की स्थितियों का तुलनात्मक अध्ययन किया।

शोध के नतीजे बताते हैं कि आठ हफ्ते के इस निरंतर अभ्यास के बाद विद्यार्थियों के परीक्षणों में स्पष्ट बदलाव दर्ज किए गए। हालांकि, इस अध्ययन में केवल 28 विद्यार्थियों को ही शामिल किया गया था, इसलिए शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि इसके आधार पर यह अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ऐसे परिणाम हर व्यक्ति पर एक जैसे ही लागू होंगे। इस दिशा में और अधिक व्यापक स्तर पर बड़े समूहों के साथ अध्ययन करने की आवश्यकता है ताकि इसके प्रभावों की गहराई से पुष्टि हो सके।

आज की तीव्र प्रतिस्पर्धा भरी दुनिया में विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना बेहद जरूरी हो गया है। इस तरह के वैज्ञानिक आकलन यह समझने में मदद करते हैं कि तनाव प्रबंधन के लिए कौन-से पारंपरिक और वैकल्पिक तरीके मददगार साबित हो सकते हैं। आईआईटी कानपुर का यह शोध परंपरा और विज्ञान के बीच की कड़ी को टटोलने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

## इसका आप पर असर
यह शोध विद्यार्थियों और उच्च दबाव वाले माहौल में काम करने वाले लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करता है।

- **भारत में:** शैक्षणिक संस्थानों और कार्यस्थलों पर तनाव प्रबंधन के लिए पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीकों के उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
- **कानपुर में:** स्थानीय स्तर पर छात्रों और युवाओं को मानसिक शांति और तनावमुक्ति के लिए ऐसे वैज्ञानिक अध्ययनों से प्रेरणा मिल सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में विद्यार्थियों को अत्यधिक पढ़ाई और भविष्य की अनिश्चितताओं के कारण लगातार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। इसी तनाव के स्तर को कम करने और पारंपरिक मंत्र जाप के वैज्ञानिक प्रभावों का आकलन करने के लिए यह शोध किया गया था।

- **शैक्षणिक दबाव:** छात्रों के बीच परीक्षाओं और प्रतिस्पर्धी माहौल के कारण बढ़ने वाले तनाव को नियंत्रित करने के वैकल्पिक तरीकों की खोज की आवश्यकता थी।
- **पारंपरिक प्रभाव:** भारतीय समाज में लंबे समय से माने जाने वाले मानसिक शांति के तरीकों को आधुनिक ईईजी और एचआरवी परीक्षणों के जरिए परखना इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य था।
- **सीमित दायरा:** इस अध्ययन में केवल 28 ऐसे छात्रों को शामिल किया गया था जिन्होंने पहले कभी जाप नहीं किया था, ताकि परिणामों में सटीकता बनी रहे।

## सवाल-जवाब

### 1. इस शोध का नेतृत्व किसने किया?
इस अध्ययन का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के उप निदेशक प्रो. बृजभूषण ने किया।

### 2. शोध में कितने छात्रों को शामिल किया गया था?
इस शोध में कुल 28 ऐसे छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया था जिन्होंने पहले कभी मंत्र जाप नहीं किया था।

### 3. छात्रों ने कौन से महामंत्र का जाप किया?
विद्यार्थियों ने लगातार आठ सप्ताह तक 'हरे रामा, हरे कृष्णा' महामंत्र का जाप किया।

### 4. शोध के दौरान कौन से परीक्षण किए गए?
छात्रों के मस्तिष्क और हृदय की गतिविधियों को मापने के लिए ईईजी और हार्ट रेट वैरिएबिलिटी टेस्ट किए गए।

### 5. शोध में क्या मुख्य परिणाम सामने आया?
आठ सप्ताह के नियमित जाप के बाद छात्रों के ईईजी और हार्ट रेट वैरिएबिलिटी परीक्षणों में सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._