# सात महीने के लंबे इंतजार के बाद इसरो फिर से भरेगा उड़ान, सितंबर में जीसैट-1ए की लॉन्चिंग से नए मिशनों का आगाज

> भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन सात महीने के अंतराल के बाद अपने अंतरिक्ष अभियानों को दोबारा शुरू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। सितंबर के पहले हफ्ते में श्रीहरिकोटा से जीसैट-1ए उपग्रह के प्रक्षेपण के साथ ही इसरो के आगामी अभियानों की श्रृंखला शुरू होगी।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-08-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/isro-ready-to-resume-space-launches-after-7-month-gap-starting-with-gisat-1a-satellite-in-september-17872 · **Language:** Hindi
**Tags:** इसरो, जीसैट-1ए, अंतरिक्ष मिशन, श्रीहरिकोटा, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, गगनयान, रॉकेट लॉन्च

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) बीते सात महीनों से बने गतिरोध को तोड़ते हुए एक बार फिर से अंतरिक्ष में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है। लगातार तकनीकी अड़चनों और अभियानों में आए ठहराव के बाद, भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में अपने बहुप्रतीक्षित लॉन्च कार्यक्रम को फिर से सक्रिय करने जा रही है। इस नए चरण की शुरुआत श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीसैट-1ए अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट के प्रक्षेपण के साथ होगी। काफी समय से लॉन्च पैड पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे इस उपग्रह के बाद, नवंबर महीने में नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को भी अंतरिक्ष में भेजने की योजना बनाई गई है। इसरो का यह कदम पिछले अभियानों में मिली विफलताओं से उबरकर भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को पुनः पटरी पर लाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

## जीसैट-1ए की विशेषताएं और भारत के लिए इसके मुख्य उद्देश्य
सितंबर में भेजे जाने वाले जीसैट-1ए सैटेलाइट को ईओएस-05 (EOS-05) के नाम से भी जाना जाता है। यह उपग्रह वास्तव में 2021 में प्रक्षेपित किए गए जीसैट-1 (ईओएस-03) का स्थान लेगा। वर्ष 2021 के उस मिशन में रॉकेट का अंतिम प्रोपल्सिव स्टेज का इंजन समय पर सक्रिय नहीं हो सका था, जिसके कारण उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा में पहुंचने से चूक गया था। इसरो ने नए जीसैट-1ए उपग्रह को लगभग 10 वर्षों के लंबे मिशन जीवनकाल के लिए डिज़ाइन और निर्मित किया है। इस अत्याधुनिक सैटेलाइट का प्राथमिक कार्य भारतीय उपमहाद्वीप के विशाल भू-भाग की लगातार और बहुत ही कम समय के अंतराल पर उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेना है।

यह उपग्रह भारत की अर्थ ऑब्जर्वेटरी क्षमताओं को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान करेगा। इसके जरिए देश में आने वाली विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं की रियल-टाइम निगरानी संभव हो सकेगी। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में फसलों के स्वास्थ्य और पैटर्न में होने वाले बदलावों का सटीक आकलन, देश भर के वन क्षेत्रों और पर्यावरण संरक्षण पर नजर रखना, तथा सीमावर्ती व रणनीतिक भू-भागों में होने वाली गतिविधियों की निगरानी करना इस उपग्रह के मुख्य दायित्वों में शामिल है। इसरो के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस उपग्रह के सफल स्थापन से भारत के मौसम पूर्वानुमान और संसाधन प्रबंधन तंत्र को बहुत बड़ी मजबूती मिलेगी।

## हालिया तकनीकी विफलताएं और अभियानों का विश्लेषण
इसरो के लिए पिछला डेढ़ साल काफी चुनौतियों से भरा रहा है। वर्ष 2025 और 2026 के दौरान एजेंसी द्वारा संचालित किए गए कुल 6 अंतरिक्ष अभियानों में से 3 अपने लक्ष्य तक पहुंचने में असमर्थ रहे। इन असफलताओं का मुख्य कारण लॉन्च व्हीकल के विभिन्न चरणों में आई तकनीकी खराबी और अंतरिक्ष यान के इंजनों में उत्पन्न गड़बड़ियां थीं। वर्ष 2026 की शुरुआत भी इसरो के लिए उत्साहजनक नहीं रही, जब 12 जनवरी को PSLV-C62 रॉकेट के माध्यम से अर्थ ऑब्जर्वेटरी सैटेलाइट EOS-N1 को कक्षा में स्थापित करने की कोशिश नाकाम हो गई थी। प्रारंभिक अध्ययनों से पता चला था कि प्रक्षेपण के दौरान रॉकेट के तीसरे चरण में एक अवांछित 'असामान्यता' उत्पन्न हुई थी। इस असफलता की विस्तृत पड़ताल के लिए गठित 'फेलियर एनालिसिस कमेटी' की रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।

इसी तरह वर्ष 2025 में आयोजित 5 अभियानों में से भी कुछ अभियानों को भारी झटके लगे थे। इनमें PSLV-C61 मिशन शामिल था, जिसका उद्देश्य EOS-9 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित करना था। यह रॉकेट भी तीसरे चरण में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण अपने पथ से भटक गया था। यद्यपि इसरो ने स्पष्ट किया है कि PSLV-C61 और PSLV-C62 की घटनाएं एक-दूसरे से पूरी तरह स्वतंत्र और अलग-अलग तकनीकी कारणों से हुई थीं, लेकिन दोनों ही मामलों की अंतिम जांच रिपोर्टों का अभी भी इंतजार किया जा रहा है।

## सफल अभियानों की उपलब्धियां और सहयोग
तकनीकी चुनौतियों के बीच इसरो ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक सफलताएं भी हासिल की हैं। वर्ष 2025 में संचालित दो GSLV अभियानों में से GSLV-F16 का प्रक्षेपण पूरी तरह सफल रहा था। इस मिशन के माध्यम से भारत और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित निसार (NISAR) उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया था। निसार उपग्रह वैश्विक स्तर पर पृथ्वी की सतह में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को मापने का काम कर रहा है।

हालांकि, GSLV-F15 के माध्यम से NVS-02 नेविगेशन सैटेलाइट को कक्षा में भेजने का प्रयास पूरी तरह से मनमाफिक परिणाम नहीं दे सका। यद्यपि रॉकेट ने अपनी शुरुआती उड़ान बिल्कुल सामान्य रूप से पूरी की थी, परंतु बाद के चरण में सैटेलाइट को उसकी अंतिम कक्षा तक पहुंचाने वाले 'ऑर्बिट-रेज़िंग मैन्युवर्स' के दौरान तकनीकी समस्याएं आ गईं। इन झटकों के अलावा, इसरो ने भारी-भरकम LVM3 रॉकेट का उपयोग करके संचार उपग्रहों ब्लूप्रिंट-2 (Bluebird-2) और CMS-03 से जुड़े दो अन्य अभियानों को सफलता के साथ अंजाम दिया था, जिसने एजेंसी के भारी लिफ्ट क्षमताओं को साबित किया।

## आगामी वर्षों के महत्वाकांक्षी लक्ष्य और रणनीतिक योजनाएं
पिछले अभियानों में आई मंदी के कारण इसरो के वार्षिक लक्ष्य और वास्तविक उपलब्धियों के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिला है। इसरो की अपनी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 15 मिशनों को अंजाम देने का लक्ष्य तय किया गया था। इस योजना के तहत एजेंसी ने कम से कम 4 अर्थ ऑब्जर्वेटरी सैटेलाइट, 1 कम्यूनिकेशन सैटेलाइट और भारत के ऐतिहासिक गगनयान कार्यक्रम के तहत 3 महत्वपूर्ण परीक्षण मिशन शामिल किए थे। साथ ही, PSLV, GSLV और LVM3 रॉकेट्स के कम से कम दो-दो प्रक्षेपण प्रस्तावित किए गए थे। परंतु विभिन्न अड़चनों की वजह से इनमें से अधिकांश लक्ष्य अधूरे रह गए।

इसके बावजूद, इसरो ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए और भी अधिक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है, जिसके तहत रिकॉर्ड 27 मिशन पूरे करने की योजना बनाई गई है। इस भावी रणनीति में इसरो के नए स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) की कम से कम 5 व्यावसायिक उड़ानें शामिल हैं। इसके अलावा, 4 PSLV मिशन, 3 GSLV मिशन और 1 LVM3 मिशन प्रस्तावित हैं। मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम 'गगनयान' के तहत भी कम से कम चार बेहद महत्वपूर्ण परीक्षण मिशन आयोजित किए जाने हैं। सितंबर में होने जा रही जीसैट-1ए की लॉन्चिंग इसरो के इस विशाल रोडमैप के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगी।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** जीसैट-1ए उपग्रह के लॉन्च से बाढ़, चक्रवात और कृषि संबंधी बदलावों की रियल-टाइम सैटेलाइट इमेजिंग संभव होगी, जिससे आपदा प्रबंधन तंत्र मजबूत होगा।

**तकनीकी व वैज्ञानिक क्षेत्र में:** इसरो के दोबारा नियमित लॉन्च शुरू करने से देश के रक्षा, नेविगेशन और कम्यूनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति मिलेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. इसरो का अगला अंतरिक्ष मिशन कौन सा है?
इसरो का अगला मिशन जीसैट-1ए (EOS-05) सैटेलाइट का प्रक्षेपण है, जो सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में आयोजित किया जाएगा।

### 2. जीसैट-1ए उपग्रह का मुख्य कार्य क्या है?
यह उपग्रह पृथ्वी की निरंतर उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेगा, जिससे प्राकृतिक आपदाओं, कृषि पैटर्न, वन क्षेत्र और सीमाओं की निगरानी में मदद मिलेगी।

### 3. पिछला इसरो लॉन्च कब हुआ था और उसका क्या नतीजा रहा?
पिछला लॉन्च 12 जनवरी 2026 को PSLV-C62 के जरिए हुआ था, जिसमें तीसरे चरण में आई तकनीकी खराबी के कारण EOS-N1 सैटेलाइट अपनी कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था।

### 4. वर्ष 2026-27 के लिए इसरो ने कितने मिशनों का लक्ष्य रखा है?
इसरो ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 27 महत्वाकांक्षी मिशनों का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें SSLV, PSLV, GSLV, LVM3 और गगनयान के मिशन शामिल हैं।

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