डायबिटीज के इलाज की नई उम्मीद, पैंक्रियास की कोशिकाओं में एक जीन बदलाव से बन सकती हैं इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएं वैज्ञानिकों ने पैंक्रियास की डक्टल कोशिकाओं में एक खास जीन को निष्क्रिय करके उन्हें इंसुलिन पैदा करने वाली कोशिकाओं में बदलने का नया तरीका खोज निकाला है। डायबिटीज के इलाज की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, जहां शोधकर्ताओं ने पाया है कि पैंक्रियास की कुछ सामान्य कोशिकाओं को केवल एक आनुवंशिक बदलाव के जरिए इंसुलिन उत्पादक कोशिकाओं में बदला जा सकता है। वयस्क शरीर की कोशिकाएं आमतौर पर अपनी पहचान और कार्यप्रणाली को लेकर काफी पक्की होती हैं और उनमें बदलाव आसानी से नहीं होता है। हालांकि, कुछ पूर्व अध्ययनों में यह बात सामने आई थी कि डक्टल कोशिकाएं कभी-कभार अपने आप ही बीटा कोशिकाओं में तब्दील हो जाती हैं। इसी दुर्लभ प्राकृतिक घटना ने वैज्ञानिकों को इस बात की प्रेरणा दी कि वे इस प्रक्रिया को गहराई से समझें और डायबिटीज के उपचार के लिए इसका उपयोग करने की संभावनाओं तलाशें। इस बात की जानकारी नहीं थी कि कौन से जीन इस कायापलट को संचालित कर रहे थे। इस रहस्य को सुलझाने के लिए शोधकर्ताओं ने जेनेटिक स्क्रीन नामक तकनीक का सहारा लिया। इस प्रक्रिया के तहत पूरे जीनोम में डीएनए के छोटे-छोटे हिस्सों को तोड़ा गया ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से हिस्से किसी खास जैविक प्रक्रिया के लिए जरूरी हैं। इस विधि की तुलना किसी कार के इंजन के पुर्जों को बिना किसी नक्शे के अलग करने से की जा सकती है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि ईंधन पहुंचाने या दिशा तय करने में कौन सा कंपोनेंट काम कर रहा है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता Jian Li ने इस नए अध्ययन का नेतृत्व किया जो Science Translational Medicine जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस परीक्षण के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि ALDH3B2 नामक जीन को बाहर निकालने पर डक्टल कोशिकाएं काफी तेज गति से बीटा जैसी कोशिकाओं में बदलने लगीं। बिना किसी आनुवंशिक बदलाव के एक प्रतिशत से भी कम डक्टल कोशिकाएं स्वतः इस स्थिति में पहुंचती थीं, लेकिन जब ALDH3B2 को निष्क्रिय कर दिया गया तो यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 8.5 प्रतिशत तक पहुंच गया। शुरुआती चरण में ये सभी प्रयोग प्रयोगशाला में डिश के भीतर मानव कोशिकाओं पर किए गए थे, जिन्हें बाद में डायबिटीज से पीड़ित चूहों के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया। इस प्रक्रिया के बाद चूहों के शरीर में इंसुलिन का संचार शुरू हो गया और उनका ग्लूकोज स्तर लगभग सामान्य स्थिति तक नीचे आ गया। राहत देने वाली बात यह रही कि यह सकारात्मक प्रभाव पूरे छह हफ्ते तक लगातार बना रहा, जो इस तकनीक की क्षमता को रेखांकित करता है। चिकित्सा विज्ञान ने पहले भी डायबिटीज के मरीजों को लंबे समय तक राहत दिलाने के लिए कई जीन थेरेपी पर काम किया है। उदाहरण के लिए, इसी साल की शुरुआत में शुरू किए गए एक क्लिनिकल ट्रायल में एक अनूठा तरीका अपनाया गया था, जिसमें मांसपेशियों की कोशिकाओं को इंसुलिन बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा अन्य उभरते हुए उपचारों का उद्देश्य प्रयोगशाला में नई इंसुलिन उत्पादक कोशिकाओं को तैयार करना और फिर उन्हें मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट करना है। हालांकि इस तरह के पारंपरिक तरीकों के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली के सक्रिय होने जैसे कुछ गंभीर जोखिम भी जुड़े होते हैं। यह नया अध्ययन एक बिल्कुल अलग और वैकल्पिक संभावना की ओर इशारा करता है, जिसके तहत पैंक्रियास में पहले से मौजूद कोशिकाओं का उपयोग किया जा सकता है। इसमें उन आनुवंशिक स्विचों को बंद करके कोशिकाओं के कार्य को बदला जाता है जो उनकी मूल पहचान को बनाए रखते हैं। इस नई विधि के सामने भी अपनी कुछ बड़ी चुनौतियां हैं, जिनमें सबसे अहम यह सुनिश्चित करना है कि केवल लक्षित कोशिकाओं में ही संपादन हो। ALDH3B2 जीन का उपयोग शरीर की कई अन्य कोशिकाएं भी करती हैं, जो केवल पैंक्रियास तक सीमित नहीं हैं, इसलिए किसी भी तरह की अनचाही जटिलताओं को रोकने के लिए अत्यधिक सटीकता बरतनी होगी। इसके अलावा अभी भी एक बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि आखिर यह जीन डक्टल कोशिकाओं को बीटा कोशिकाओं में बदलने की प्रक्रिया में किस प्रकार भूमिका निभाता है। Jian Li ने कहा कि यह वह हिस्सा है जिसकी हमें सबसे पहले पुष्टि करने की आवश्यकता है। इसके बाद अगला कदम या तो जीन थेरेपी का उपयोग करना होगा या फिर इस जीन को रोकने के लिए विशिष्ट छोटे अणुओं की खोज करना होगा ताकि यह देखा जा सके कि हम इसके समान या इससे भी बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं या नहीं। यदि इस तकनीक में आंशिक सफलता भी मिलती है, तो यह दुनिया भर में अनुमानित 83 करोड़ डायबिटीज से पीड़ित लोगों के जीवन पर एक बहुत बड़ा सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इनमें से कई मरीज हर साल बीमारी से जुड़ी गंभीर जटिलताओं के कारण अपनी जान गंवा देते हैं, ऐसे में यह नई खोज उनके लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है। इसका आप पर असर यह नई खोज दुनिया भर के डायबिटीज मरीजों के लिए एक बड़ी राहत और स्वास्थ्य सुधार की नई उम्मीद लेकर आई है। • वैश्विक स्तर पर: दुनिया भर में अनुमानित 83 करोड़ डायबिटीज पीड़ितों के लिए यह तकनीक भविष्य में इंसुलिन के रोजाना के इंजेक्शन से राहत दिला सकती है। • इलाज की लागत: जीन थेरेपी और इस नई तकनीक के व्यापक होने पर डायबिटीज के दीर्घकालिक उपचार खर्चों में कमी आने की संभावना बन सकती है। • स्वास्थ्य जटिलताएं: इस विधि के सफल होने पर डायबिटीज से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं और मौतों के आंकड़ों में भारी गिरावट आ सकती है। • नैदानिक दिशा: पैंक्रियास की अपनी कोशिकाओं का उपयोग होने से प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा अंग अस्वीकार किए जाने के खतरे को कम किया जा सकता है। • भविष्य की तकनीक: इस शोध से छोटे अणुओं या जीन थेरेपी के जरिए डायबिटीज के स्थायी समाधान खोजने के नए रास्ते खुलते हैं। ऐसा क्यों हुआ डक्टल कोशिकाओं में होने वाले इस प्राकृतिक बदलाव और जीन की भूमिका को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक स्क्रीनिंग का सहारा लिया था। • जैविक पहचान: वयस्क शरीर की कोशिकाएं अपनी संरचना में स्थिर होती हैं, लेकिन डक्टल कोशिकाओं में प्राकृतिक रूप से बीटा कोशिकाओं में बदलने की एक दुर्लभ क्षमता पाई गई थी। • जीन की भूमिका: वैज्ञानिकों को यह स्पष्ट नहीं था कि इस कायापलट को कौन से जीन नियंत्रित करते हैं, इसलिए उन्होंने जीनोम के हिस्सों को तोड़कर परीक्षण किया। • ALDH3B2 का प्रभाव: इस प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि ALDH3B2 जीन को हटाने से इन कोशिकाओं का बीटा-जैविक अवस्था में बदलने का प्रतिशत काफी बढ़ जाता है। • शोध के अगले चरण: इस जीन की सटीक भूमिका और इसके क्रियान्वयन को सत्यापित करने के लिए आगे की जीन थेरेपी और छोटे अणुओं पर अध्ययन जारी है। सवाल-जवाब 1. डक्टल कोशिकाएं क्या होती हैं? डक्टल कोशिकाएं पैंक्रियास में पाई जाने वाली कोशिकाएं हैं, जिनमें कुछ खास परिस्थितियों में बीटा-जैविक कोशिकाओं में बदलने की प्राकृतिक क्षमता होती है। 2. ALDH3B2 जीन को हटाने का क्या असर हुआ? ALDH3B2 जीन को निष्क्रिय करने पर डक्टल कोशिकाओं के बीटा जैसी कोशिकाओं में बदलने की दर 1 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 8.5 प्रतिशत हो गई। 3. इस अध्ययन के शुरुआती प्रयोग किस पर किए गए? शुरुआती प्रयोग प्रयोगशाला में डिश के भीतर मानव कोशिकाओं पर किए गए, जिन्हें बाद में डायबिटीज से पीड़ित चूहों के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया। 4. चूहों पर किए गए प्रयोग के क्या परिणाम रहे? प्रत्यारोपण के बाद चूहों के शरीर में मानव इंसुलिन का संचार शुरू हुआ और उनका ग्लूकोज स्तर लगभग सामान्य हो गया, जो छह हफ्ते तक बना रहा। 5. इस तकनीक के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है? सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि संपादन केवल लक्षित कोशिकाओं में हो, क्योंकि ALDH3B2 जीन शरीर की कई अन्य कोशिकाओं द्वारा भी उपयोग किया जाता है। 6. इस अध्ययन का नेतृत्व किसने किया? इस अध्ययन का नेतृत्व हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता Jian Li ने किया। 7. यह शोध किस जर्नल में प्रकाशित हुआ है? यह शोध Science Translational Medicine जर्नल में प्रकाशित हुआ है। 8. दुनिया भर में कितने लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं? दुनिया भर में अनुमानित 83 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। https://trendkia.com/science/kuchha-pancreatic-cells-hain-sirpha-eka-genetic-tweak-dura-diabetes-ke-ilaja-se-39469 TrendKia — Har trend, sabse pehle.