# क्या चंद्र ग्रहण से वाकई भड़कता है समुद्र का ज्वार? जानिए गुरुत्वाकर्षण और विज्ञान की असली वजह

> चंद्र ग्रहण के दौरान समुद्र में ऊंची लहरें उठने की चर्चा अक्सर होती है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार इसका कारण ग्रहण का अंधेरा नहीं बल्कि सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की विशेष खगोलीय स्थिति है।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-08-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/kya-chndra-grahana-se-vakai-bharakata-hai-samudra-ka-jvara-janie-gurutvakarshana-aura-vijnana-ki-asali-vajaha-22673 · **Language:** Hindi
**Tags:** चंद्र ग्रहण, ज्वार भाटा, विज्ञान, समुद्र, गुरुत्वाकर्षण, खगोल विज्ञान

रात के आकाश में जब चंद्रमा लाल या तांबे के रंग में बदलने लगता है, तो पृथ्वी पर मौजूद विशाल महासागरों में भी अजीब सी हलचल महसूस की जाती है। आम लोगों के मन में हमेशा यह जिज्ञासा बनी रहती है कि क्या चंद्र ग्रहण जैसी बड़ी खगोलीय घटना समुद्र के पानी में भी उथल-पुथल मचा सकती है। प्राचीन काल से ही समुद्र की लहरों और चंद्रमा के बीच के अटूट रिश्ते को स्वीकार किया गया है। ज्वार-भाटा आने के पीछे मुख्य वजह चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल ही माना जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या चंद्र ग्रहण की रात समुद्र की लहरें सामान्य दिनों से ज्यादा ऊंची उठने लगती हैं।

समुद्र विज्ञान और खगोल विज्ञान के विशेषज्ञों का कहना है कि इस सवाल का वैज्ञानिक उत्तर पारंपरिक धारणाओं से थोड़ा अलग है। चंद्र ग्रहण के समय समुद्र में ज्वार की ऊंचाई में वृद्धि अवश्य देखी जा सकती है, लेकिन इसका सीधा संबंध स्वयं ग्रहण के छाने से नहीं होता। इसके पीछे असली वजह ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की बनने वाली एक खास ज्यामितीय रेखा होती है, जिसके प्रभाव से समुद्र का जलस्तर असामान्य रूप से बदलता है।

## सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की खगोलीय स्थिति का प्रभाव
चंद्र ग्रहण की घटना हमेशा पूर्णिमा की रात को ही घटित होती है। इस विशेष स्थिति में हमारी पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बिल्कुल बीच में आ जाती है। इस दौरान तीनों खगोलीय पिंड लगभग एक सीधी रेखा में स्थित होते हैं। यह ज्यामितीय संरेखण केवल ग्रहण का कारण ही नहीं बनता, बल्कि समुद्र की ज्वारीय गतिविधियों को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित करता है। खगोलीय अध्ययन और नासा (NASA) के वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक ही सीध में आते हैं, तो सूर्य और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल एक साथ मिलकर समुद्र के पानी को अपनी ओर खींचता है।

इस सम्मिलित गुरुत्वाकर्षण खींचव के कारण समुद्र में **स्प्रिंग टाइड** (Spring Tide) की स्थिति उत्पन्न होती है। स्प्रिंग टाइड के दौरान उच्च ज्वार (High Tide) सामान्य दिनों की तुलना में अधिक ऊंचा उठ जाता है, जबकि निम्न ज्वार (Low Tide) का स्तर सामान्य से काफी नीचे चला जाता है। यह स्थिति केवल चंद्र ग्रहण वाली रात तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हर पूर्णिमा और अमावस्या को भी बनती है। इसलिए समुद्र में आने वाली ऊंची लहरों का पूरा श्रेय केवल चंद्र ग्रहण को देना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। यदि ग्रहण के दिन तटीय इलाकों में पानी ज्यादा ऊपर उठता दिखता है, तो वह ग्रहण के कारण नहीं, बल्कि तीनों पिंडों के एक सीध में होने का परिणाम होता है।

## समुद्र में ज्वार-भाटा बनने की मूल प्रक्रिया
महासागरों का जल कभी स्थिर नहीं रहता और इसके लगातार ऊपर-नीचे होने के पीछे चंद्रमा का शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण काम करता है। चंद्रमा पृथ्वी के पानी को अपनी ओर आकर्षित करता है, जिससे पृथ्वी का जो हिस्सा चंद्रमा के ठीक सामने होता है, वहां समुद्र का पानी ऊपर की ओर खींचकर एक ज्वारीय उभार बना लेता है। ठीक इसी समय, पृथ्वी के विपरीत दिशा वाले हिस्से में भी गुरुत्वाकर्षण और घूर्णन बल के संतुलन के कारण पानी का दूसरा उभार बनता है। पृथ्वी के अपनी धुरी पर लगातार घूमने की वजह से विभिन्न तटीय क्षेत्रों में दिन के अलग-अलग समय पानी का स्तर चढ़ता और उतरता नजर आता है।

राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) के अनुसार, समुद्र तटों पर एक लूनर डे यानी लगभग 24 घंटे 50 मिनट के चक्र के भीतर दो बार उच्च ज्वार और दो बार निम्न ज्वार की स्थिति बनती है। हालांकि, दुनिया भर के सभी समुद्र तटों पर लहरों की यह ऊंचाई एक समान नहीं होती। समुद्र की प्रकृति को केवल चंद्रमा की स्थिति से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। जल की गहराई, तटीय रेखा का ढांचा, खाड़ियों की चौड़ाई, स्थानीय हवाओं की गति और तात्कालिक मौसम जैसे कई अन्य कारक भी ज्वार-भाटा के अंतिम स्तर को तय करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

## पेरिजी और ग्रहण के समय जलस्तर में बदलाव का सच
एक आम गलतफहमी यह है कि चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा अचानक पृथ्वी के बहुत पास आ जाता है या उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति में कोई अचानक भारी वृद्धि हो जाती है। विज्ञान इस धारणा को पूरी तरह नकारता है। ग्रहण लगने से चंद्रमा की अपनी आकर्षण क्षमता में कोई बदलाव नहीं आता। हालांकि, यदि चंद्र ग्रहण ऐसे समय पड़ता है जब चंद्रमा अपनी अंडाकार कक्षा में पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु पर होता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में **पेरिजी** (Perigee) कहा जाता है, तो ज्वार की लहरें बहुत अधिक ऊंची उठ सकती हैं।

जब चंद्रमा पेरिजी की स्थिति में होता है, तो पृथ्वी पर उसका ज्वारीय बल अपने चरम पर होता है। यदि इस समय पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का संयोग भी बन जाए, तो समुद्र का ज्वार औसतन सामान्य दिनों से कहीं अधिक व्यापक और शक्तिशाली दिखाई दे सकता है। इसलिए, किसी भी चंद्र ग्रहण के अवसर पर तटीय क्षेत्रों में समुद्र के रुख को सही तरीके से समझने के लिए केवल ग्रहण देखना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही चंद्रमा की दूरी, सूर्य का कोण और स्थानीय महासागरीय परिस्थितियों का संपूर्ण अध्ययन करना आवश्यक होता है।

## इसका आप पर असर
**तटीय इलाकों में:** चंद्र ग्रहण या पूर्णिमा के समय स्प्रिंग टाइड के कारण समुद्र में सामान्य से ऊंची लहरें उठ सकती हैं, इसलिए मछुआरों और तटीय निवासियों को सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।

**सामान्य पाठकों के लिए:** यह स्पष्ट करता है कि चंद्र ग्रहण से जुड़ी अंधविश्वासी धारणाओं के पीछे विशुद्ध खगोलीय और गुरुत्वाकर्षण का नियम काम करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या चंद्र ग्रहण के कारण समुद्र में अचानक ऊंची लहरें उठती हैं?
नहीं, ग्रहण के कारण नहीं बल्कि उस दिन सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की एक सीध में होने की स्थिति (पूर्णिमा) के कारण समुद्र में स्प्रिंग टाइड बनती है।

### 2. चंद्र ग्रहण के दौरान कौन सा ज्वार आता है?
इस दौरान स्प्रिंग टाइड (Spring Tide) आती है, जिसमें हाई टाइड सामान्य से अधिक ऊंची और लो टाइड सामान्य से अधिक नीचे होती है।

### 3. एक लूनर डे में कितने ज्वार-भाटा आते हैं?
लगभग 24 घंटे 50 मिनट के एक लूनर डे के दौरान तटों पर आम तौर पर दो हाई टाइड और दो लो टाइड देखने को मिलती हैं।

### 4. पेरिजी स्थिति का ज्वार पर क्या प्रभाव पड़ता है?
जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे पास (पेरिजी पर) होता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव बढ़ जाता है जिससे समुद्र का ज्वार सामान्य औसत से अधिक ऊंचा हो सकता है।

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