# मर चुके तारे के चारों ओर मिले दो गैसीय छल्ले, सौरमंडल के अंत की ओर किया बड़ा इशारा

> खगोलविदों ने पृथ्वी से 1,600 प्रकाश वर्ष दूर एक मृत तारे के इर्द-गिर्द मलबे के दो अनोखे छल्लों की खोज की है, जो भविष्य में हमारे अपने सौरमंडल के संभावित अंत की झलक पेश करते हैं।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/mara-chuke-tare-ke-charon-ora-mile-do-gaisiya-chhalle-sauramndala-ke-anta-ki-ora-kiya-bara-ishara-54456 · **Language:** Hindi
**Tags:** खगोल विज्ञान, सौरमंडल, सफेद बौना तारा, ब्रह्मांड, वेरी लार्ज टेलीस्कोप, अंतरिक्ष अनुसंधान

अंतरिक्ष में गहराई से देखने पर वैज्ञानिकों को एक ऐसे मृत तारे के अवशेष मिले हैं, जो यह समझने में मदद कर सकते हैं कि अरबों साल बाद हमारे सौरमंडल का क्या हश्र होगा। यूरोपीय साउदर्न ऑब्जर्वेटरी के वेरी लार्ज टेलीस्कोप से की गई ताजा निगरानी में सफेद बौने तारे J1328−1450 के चारों ओर गैस और धूल से बना एक बेहद असामान्य डिस्क देखा गया है। इस डिस्क की सबसे खास बात यह है कि इसमें गैस के दो अलग-अलग छल्ले मौजूद हैं, जिनके बीच में एक साफ खाली जगह यानी गैप दिखाई देता है।

## प्राचीन ग्रहों के टूटने से बना मलबे का घेरा
यह मृत तारा पृथ्वी से लगभग 1,600 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। खगोलीय तारा-मानचित्रण सूचियों की बदौलत वैज्ञानिक इस तारे से पहले से ही परिचित थे, लेकिन इसके आसपास मौजूद मलबे की अनोखी बनावट अब सामने आई है। इस घेरे में मौजूद सामग्री असल में उन प्राचीन ग्रहों और चट्टानी पिंडों के बचे हुए टुकड़े माने जा रहे हैं, जो कभी इस तारे की परिक्रमा करते थे। जब तारे का मुख्य ईंधन समाप्त हुआ और वह रेड जायंट यानी लाल दानव चरण में पहुंचा, तो उसने अपने नजदीकी ग्रहों को नष्ट कर दिया। इसके बाद जब तारा सिकुड़कर एक सफेद बौना बना, तब तीव्र और चरम वातावरण के संपर्क में आए चट्टानी अवशेष टूटकर गैस और मलबे के इस दोहरे डिस्क में तब्दील हो गए।

## लगभग 5 अरब साल बाद सूर्य और पृथ्वी का क्या होगा
इस दूरस्थ प्रणाली में जो कुछ भी घटा, वही प्रक्रिया भविष्य में हमारे अपने सौरमंडल में भी दोहराई जा सकती है। आज से करीब 5 अरब साल बाद हमारा सूर्य भी अपने मूल ईंधन को पूरी तरह खत्म कर देगा और एक विशाल लाल दानव का रूप ले लेगा। उस भयानक फैलाव के दौरान सूर्य अपने सबसे करीबी ग्रहों को पूरी तरह निगल सकता है। कालक्रम में सूर्य अपनी बाहरी गैस की परतों को अंतरिक्ष में बिखेर देगा और केंद्र में केवल एक ठंडा पड़ता सफेद बौना तारा शेष रह जाएगा। उस उथल-पुथल से बचने वाले चट्टानी पिंड बाद में टूटकर बिखर सकते हैं और ठीक इसी तरह मृत सूर्य के चारों ओर एक मलबे की डिस्क बना सकते हैं।

## छिपे हुए पिंडों और छल्लों के बनने का रहस्य
वैज्ञानिकों का ध्यान इस बात पर विशेष रूप से टिका है कि मलबे का यह घेरा दो अलग छल्लों में क्यों बंटा हुआ है। जुटाए गए डेटा से संकेत मिलता है कि तारे के भयानक रूपांतरण के बाद भी उस प्रणाली के मलबे में कम से कम दो ग्रहीय पिंड किसी तरह सुरक्षित बच गए होंगे। हालांकि, इन पिंडों को अभी सीधे तौर पर देखा नहीं जा सका है, लेकिन उनकी गुरुत्वाकर्षण गतिविधि ही इस खाली जगह और दोनों छल्लों को आकार दे रही हो सकती है।

अनुमान के अनुसार, ये दोनों पिंड आकार में एक-दूसरे से काफी अलग हो सकते हैं। सफेद बौने के सबसे पास मौजूद पिंड का व्यास केवल कुछ किलोमीटर हो सकता है, जबकि बाहरी छोर पर मौजूद पिंड प्लूटो या हमारे चंद्रमा जितना बड़ा हो सकता है। आसपास के मलबे के साथ इन पिंडों की आपसी अंतःक्रिया ही दो छल्लों की संरचना को स्पष्ट करती है। हालांकि, अलग-अलग पिंडों के होने की अभी पूर्ण पुष्टि नहीं हुई है। दूसरा संभावित पहलू यह भी है कि यह पूरी संरचना किसी एक ही ग्रह जैसे पिंड की पपड़ी और कोर जैसे विभिन्न हिस्सों के अलग-अलग टूटने से तैयार हुई हो।

## इसका आप पर असर
यह खोज ब्रह्मांडीय विकास और हमारे अपने सौरमंडल के भविष्य की समयसीमा को समझने में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।

- **खगोल विज्ञान के प्रति उत्साही लोगों के लिए:** यह अध्ययन तारों के जीवन चक्र और ग्रहों के नष्ट होने के वास्तविक प्रमाण प्रस्तुत करता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अरबों वर्षों बाद हमारे गृह सौरमंडल की भौतिक स्थिति किस तरह बदलेगी।
- **वैज्ञानिक शोध के लिए:** सुदूर तारों के चारों ओर मलबे के छल्लों का अध्ययन अन्य प्रणालियों में छिपे पिंडों को खोजने की नई तकनीकें विकसित करता है। यह अवलोकन भविष्य में हमारे टेलीस्कोप से मृत तारों के अध्ययन के तरीकों को नई दिशा देगा।
- **ग्रहों की उत्पत्ति और विनाश के मॉडल:** ग्रहों के अवशेषों का विश्लेषण यह बताता है कि तारों के लाल दानव बनने के दौरान कौन से पिंड बच सकते हैं। इससे हमारे पृथ्वी और सौरमंडल के ग्रहों की दीर्घकालिक स्थिरता की बेहतर गणना संभव होगी।
- **शैक्षणिक संदर्भ में:** यह खोज स्कूलों और विश्वविद्यालयों में खगोल भौतिकी के आधुनिक सिद्धांतों को व्यावहारिक उदाहरण के साथ समझाने का अवसर देती है। छात्र यह प्रत्यक्ष रूप से सीख सकते हैं कि तारों के मलबे से नई ग्रहीय संरचनाएं कैसे विकसित होती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
तारे J1328−1450 के चारों ओर दो छल्लों वाली यह संरचना तारे की मृत्यु और उसके प्राचीन ग्रहीय परिवार के मलबे में तब्दील होने के कारण बनी है।

- **तारे का रेड जायंट बनना:** जब इस तारे का मूल ईंधन समाप्त हुआ, तो यह एक विशालकाय लाल दानव के रूप में फैल गया। इस विस्तार ने पास मौजूद ग्रहों को तोड़ दिया और दूर के पिंडों को चरम विकिरण के हवाले कर दिया।
- **सफेद बौने में रूपांतरण:** अपनी बाहरी गैस की परतों को अंतरिक्ष में उड़ाने के बाद तारा एक सफेद बौने में बदल गया। उस उथल-पुथल से बचने वाले चट्टानी पिंड आपस में टकराकर और बिखरकर मलबे के एक विशाल डिस्क में बदल गए।
- **संभावित ग्रहीय अवशेषों का खिंचाव:** मलबे के बीच में मौजूद खाली स्थान यह बताता है कि रूपांतरण के बाद भी कम से कम दो पिंड बच गए थे। उनके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव ने आसपास की गैस को दो अलग छल्लों में बांट दिया है।
- **एकल ग्रह के विखंडन का विकल्प:** एक अन्य संभावित कारण यह भी हो सकता है कि किसी एक बड़े ग्रह के अलग-अलग हिस्से, जैसे क्रस्ट और कोर, अलग-अलग समय पर बिखरकर इस दोहरी संरचना में व्यवस्थित हो गए हों।

## सवाल-जवाब

### 1. सफेद बौना तारा J1328−1450 पृथ्वी से कितनी दूरी पर स्थित है?
यह मृत तारा पृथ्वी से लगभग 1,600 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।

### 2. इस तारे के चारों ओर खगोलविदों ने क्या खोजा है?
वैज्ञानिकों ने इस तारे के चारों ओर मलबे और गैस से बने दो अलग छल्ले खोजे हैं, जिनके बीच में एक खाली गैप मौजूद है।

### 3. किस वेधशाला के उपकरण से यह अवलोकन किया गया?
यह अवलोकन यूरोपीय साउदर्न ऑब्जर्वेटरी के वेरी लार्ज टेलीस्कोप की मदद से किया गया है।

### 4. मलबे के इन दो छल्लों के बनने का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि तारे के रूपांतरण के बाद बचे हुए कम से कम दो ग्रहीय पिंडों के गुरुत्वाकर्षण ने इस मलबे को दो छल्लों में आकार दिया है।

### 5. हमारे सूर्य का यह रूप कब देखने को मिल सकता है?
करीब 5 अरब वर्षों में सूर्य का ईंधन खत्म होने पर वह लाल दानव बनेगा और अंत में एक सफेद बौना तारा बनकर रह जाएगा।

### 6. संभावित दोनों बचे हुए पिंडों का अनुमानित आकार क्या है?
सफेद बौने के पास मौजूद पिंड कुछ किलोमीटर व्यास का हो सकता है, जबकि बाहरी पिंड प्लूटो या चंद्रमा जितना बड़ा हो सकता है।

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