# मेक्सिको के हिडाल्गो में मिला लाखों साल पुराना जीवाश्म, एक्सोलोटल की नई प्रजाति की हुई पहचान

> मेक्सिको के हिडाल्गो में मिले जीवाश्मों से वैज्ञानिकों ने Ambystoma quetzalcoatli नाम की नई प्रजाति की पहचान की है, जो देश में मिली पहली जीवाश्म सैलामैंडर प्रजाति और एक्सोलोटल वंश का अब तक का सबसे पुराना रिकॉर्ड है।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-07-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/mexico-ke-hidalgo-men-mila-lakhon-sala-purana-jivashma-eksolotala-ki-nai-prajati-ki-hui-pahachana-4659 · **Language:** Hindi
**Tags:** जीवाश्म विज्ञान, एक्सोलोटल, मेक्सिको, हिडाल्गो, नई प्रजाति, नियोटेनी

मेक्सिको के वैज्ञानिकों ने जीवाश्म की एक बिल्कुल नई प्रजाति की पहचान की है, जिसे _Ambystoma quetzalcoatli_ नाम दिया गया है। यह मेक्सिको में औपचारिक रूप से वर्णित होने वाली पहली जीवाश्म सैलामैंडर प्रजाति है और साथ ही _Ambystoma_ वंश, यानी आज के एक्सोलोटल जिस समूह से आते हैं, उसका देश में अब तक मिला सबसे पुराना रिकॉर्ड भी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से यह समझने में बड़ी मदद मिलेगी कि आज मेक्सिको में पाई जाने वाली जैव विविधता आखिर बनी कैसे।

## हिडाल्गो की वह झील जो कभी 85 वर्ग किलोमीटर में फैली थी
ये जीवाश्म हिडाल्गो राज्य की अतोतोनिल्को एल ग्रांदे नगरपालिका में मिले हैं। कभी यहां करीब 85 वर्ग किलोमीटर में फैला एक विशाल मीठे पानी का झील तंत्र हुआ करता था। माना जाता है कि अमाहाक नदी का रास्ता किसी वजह से अस्थायी रूप से रुक गया था, जिसकी वजह से ये झीलें बनीं। यहां का समशीतोष्ण और अर्ध-आर्द्र वातावरण ऐसा रहा कि पौधों, डायटम, घोंघों, ऑस्ट्राकोड्स, भृंगों और मछलियों के ढेरों जीवाश्म यहां से मिल चुके हैं। लेकिन इस जगह से मिले उभयचर जीवाश्मों का अब तक कभी विस्तार से वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ था।

## दो दशक पुराने जीवाश्मों पर नई नजर
जिन जीवाश्मों पर यह पूरा अध्ययन टिका है, वे कुल मिलाकर एक दर्जन सैलामैंडर जीवाश्म हैं, जिन्हें 2000 के दशक की शुरुआत में FES सारागोसा पुरावनस्पति शोध समूह ने इकट्ठा किया था। इनमें से कई जीवाश्म इतनी अच्छी हालत में मिले कि पूरा कंकाल जुड़ा हुआ था, जिससे बारीक शारीरिक बनावट का अध्ययन आसानी से किया जा सका। शुरुआत में इन्हें _Ambystoma_ वंश की ही कोई प्रजाति मान लिया गया था, वही वंश जिससे आज के एक्सोलोटल आते हैं। लेकिन जॉर्ज हेरेरा फ्लोरेस और मारिया पात्रीसिया वेलास्को दे लियोन की अगुवाई में एक टीम ने सीटी स्कैन यानी कंप्यूटेड टोमोग्राफी और आज जीवित प्रजातियों से बारीक तुलना करके दोबारा इनकी पहचान करने का फैसला किया।

## _Ambystoma quetzalcoatli_ को अलग क्या बनाता है
'पैलियोन्टोलॉजिया इलेक्ट्रॉनिका' नामक पत्रिका में छपे इस अध्ययन के मुताबिक, करीब तीन दशक पुराने ये जीवाश्म असल में एक ऐसी प्रजाति के निकले, जिसे विज्ञान ने पहले कभी दर्ज ही नहीं किया था। खोपड़ी और कंकाल में कई ऐसी खासियतें मिलीं, जो आज जिंदा किसी भी एक्सोलोटल में नहीं दिखतीं, जैसे खोपड़ी के ऊपरी हिस्से में एक लंबा सा छेद, तालु की अलग बनावट, खोपड़ी की कुछ हड्डियों का अलग ढंग से जुड़ना, और सबसे खास बात, धड़ में 17 कशेरुकाओं का होना। यह आखिरी बात इसलिए मायने रखती है क्योंकि आज के एक्सोलोटल में धड़ की कशेरुकाओं की संख्या 16 या उससे कम ही होती है।

## 13 जीवित प्रजातियों से हड्डी दर हड्डी तुलना
इन जीवाश्मों की पहचान पक्की करने के लिए टीम ने इन्हें _Ambystoma_ वंश की 13 जीवित प्रजातियों से मिलाकर देखा। इनमें मेक्सिको में ही पाई जाने वाली शोचिमिल्को एक्सोलोटल यानी _Ambystoma mexicanum_ भी शामिल थी, साथ ही मेक्सिको और अमेरिका दोनों जगह पाए जाने वाले टाइगर सैलामैंडर भी। इस तुलना के लिए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संग्रहों में मौजूद थ्री-डी इमेजिंग और सीटी स्कैन डेटा का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा टीम ने आज के जीवित सैलामैंडर _Ambystoma velasci_ के पूरे कंकाल भी हासिल किए, ताकि हड्डियों की बनावट और आकार की सीधी तुलना जीवाश्मों से की जा सके। इसके बाद शोधकर्ताओं ने कंकाल की बनावट की तुलना और पहले हो चुके डीएनए आधारित अध्ययनों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की कि इन जीवाश्म सैलामैंडरों और आज की जीवित प्रजातियों के बीच क्रम-विकास का रिश्ता आखिर कैसा है।

## नियोटेनी, एक ऐसी खूबी जो लाखों साल से बरकरार है
सबसे दिलचस्प बात यह सामने आई कि _Ambystoma quetzalcoatli_ में भी वही खूबी थी, जो आज शोचिमिल्को, पात्ज़कुआरो और अल्चिचिका जैसी झीलों के एक्सोलोटल में पाई जाती है, यानी नियोटेनी। यह एक ऐसी जैविक खासियत है जिसकी वजह से जानवर बड़े होने के बाद भी अपनी बचपन जैसी शारीरिक बनावट बनाए रखता है और उसमें पूरी तरह कायांतरण नहीं होता। आमतौर पर यह गुण उन्हीं जगहों पर विकसित होता है जहां झीलें स्थिर हों और बाकी दुनिया से कटी हुई हों, जिससे जानवर पर पूरी तरह बदलने का कोई खास दबाव ही नहीं बनता। इस जीवाश्म में यह खूबी मिलने का मतलब है कि मेक्सिको के एक्सोलोटल प्लायोसीन काल में, यानी आज से लाखों साल पहले भी, इसी तरह जिंदगी जी रहे थे।

## एक्सोलोटल के इतिहास की नई शुरुआत
इन तमाम शारीरिक खूबियों को देखने के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि यह सचमुच एक बिल्कुल नई प्रजाति है, और इसकी खोज ने एक्सोलोटल के क्रम-विकास के इतिहास को पहले मानी गई समयरेखा से कहीं ज्यादा पीछे धकेल दिया है। साथ ही यह भी साबित होता है कि ये उभयचर आज के मेक्सिको में लाखों साल से मौजूद रहे हैं। मेक्सिको के राष्ट्रीय स्वायत्त विश्वविद्यालय, यानी UNAM ने एक बयान में कहा, "_Ambystoma quetzalcoatli_ की खोज बताती है कि एक्सोलोटल वंश का क्रम-विकास इतिहास पहले सोचे गए से कहीं ज्यादा पुराना है। मेक्सिको में इसकी मौजूदगी प्लायोसीन काल तक जाती है और इसका शुरुआती विविधीकरण प्राचीन झील तंत्रों से जुड़ा हुआ है।" विश्वविद्यालय ने आगे कहा कि यह खोज सिर्फ एक नई प्रजाति की पहचान भर नहीं है, बल्कि यह इस बात को भी मजबूत करती है कि मेक्सिको की आज की जैव विविधता की जड़ें उन पारिस्थितिकी तंत्रों में हैं जो लाखों साल पहले खत्म हो चुके हैं।

## इसका आप पर असर
- **जीव विज्ञान के छात्रों और एक्सोलोटल में दिलचस्पी रखने वालों के लिए:** इस खोज से एक्सोलोटल वंश के क्रम-विकास की तस्वीर और साफ होती है, जो मेक्सिको के उभयचरों पर पढ़ाई करने वालों या एक्सोलोटल के संरक्षण से जुड़े लोगों के काम आ सकती है, क्योंकि आज जीवित एक्सोलोटल प्रजातियां लुप्तप्राय मानी जाती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. यह नई जीवाश्म प्रजाति कहां मिली?
यह मेक्सिको के हिडाल्गो राज्य की अतोतोनिल्को एल ग्रांदे नगरपालिका में मिली, जहां कभी करीब 85 वर्ग किलोमीटर में फैला एक झील तंत्र हुआ करता था।

### 2. इस खोज को इतना खास क्यों माना जा रहा है?
यह मेक्सिको में औपचारिक रूप से वर्णित होने वाली पहली जीवाश्म सैलामैंडर प्रजाति है और देश में Ambystoma वंश का अब तक मिला सबसे पुराना रिकॉर्ड है।

### 3. यह प्रजाति आज के एक्सोलोटल से किन बातों में अलग है?
इसकी खोपड़ी के ऊपर एक लंबा छेद, अलग तालु बनावट और धड़ में 17 कशेरुकाएं हैं, जबकि आज के एक्सोलोटल में 16 या उससे कम कशेरुकाएं होती हैं।

### 4. ये जीवाश्म कब मिले थे और अध्ययन किसने किया?
जीवाश्म 2000 के दशक की शुरुआत में FES सारागोसा पुरावनस्पति शोध समूह ने इकट्ठा किए थे, और नए सिरे से अध्ययन जॉर्ज हेरेरा फ्लोरेस व मारिया पात्रीसिया वेलास्को दे लियोन की अगुवाई वाली टीम ने किया।

### 5. क्या इस जीवाश्म प्रजाति में भी नियोटेनी पाई गई?
हां, शोचिमिल्को, पात्ज़कुआरो और अल्चिचिका एक्सोलोटल की तरह Ambystoma quetzalcoatli में भी नियोटेनी पाई गई, यानी यह बड़े होने के बाद भी बचपन जैसी शारीरिक बनावट बनाए रखता था।

### 6. यह अध्ययन कहां प्रकाशित हुआ है?
यह अध्ययन 'पैलियोन्टोलॉजिया इलेक्ट्रॉनिका' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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