# नासा का नया स्पेस टेलीस्कोप ब्रह्मांड के अनछुए रहस्यों को सुलझाने के लिए तैयार

> नासा का नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप ब्रह्मांड के विस्तार, डार्क एनर्जी और अनगिनत नए एक्सोप्लैनेट्स की खोज के लिए अगस्त 30 को लॉन्च होने जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-08-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/nasa-new-space-telescope-gears-up-to-unravel-deep-cosmic-mysteries-21233 · **Language:** Hindi
**Tags:** नासा, रोमन स्पेस टेलीस्कोप, खगोल विज्ञान, डार्क एनर्जी, एक्सोप्लैनेट, अंतरिक्ष अनुसंधान

अदृश्य ताकतों से संचालित ब्रह्मांड लगातार और तेजी से फैलता जा रहा है, जिसे वैज्ञानिक डार्क एनर्जी कहते हैं। इस विशाल ब्रह्मांड की बनावट और उसके छिपे हुए रहस्यों पर्दा हटाने के लिए एक नया स्पेस टेलीस्कोप तैयार किया गया है, जिसे फ्लोरिडा स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से अगस्त 30 को लॉन्च किया जाना है।

## ब्रह्मांड की खोज के लिए नई तकनीक
हबल टेलीस्कोप जितनी साफ तस्वीर देने की क्षमता और उससे लगभग 100 गुना बड़े फील्ड ऑफ व्यू के साथ, नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप खगोल भौतिकी के सामने खड़े सबसे बड़े सवालों के जवाब तलाशने में मदद करेगा। नासा की सीनियर प्रोजेक्ट साइंटिस्ट जूली मैकनेरी का कहना है कि यह वेधशाला मूल रूप से खोज करने वाली मशीन है जो दुर्लभ और हैरान करने वाली चीजों को सामने लाएगी। अपने पांच साल के शुरुआती मिशन के दौरान, यह टेलीस्कोप आकाशगंगाओं और डार्क मैटर का विस्तृत नक्शा तैयार करेगा ताकि यह समझा जा सके कि ब्रह्मांड की सबसे बड़ी संरचनाएं समय के साथ कैसे बदलती हैं। नासा की पहली मुख्य खगोलविद के नाम पर रखे गए इस यंत्र का मुख्य काम गुरुत्वाकर्षण के कारण प्रकाश में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को मापना है।

## जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के साथ साझेदारी
यह वेधशाला जेम्स लैग्रेंज पॉइंट 2 नामक अंतरिक्ष बिंदु पर रहकर काम करेगी जो पृथ्वी से लगभग दस लाख मील दूर स्थित है। जहां जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप अंतरिक्ष के बहुत दूर के हिस्सों में गहराई से झांकने के लिए जाना जाता है, वहीं रोमन टेलीस्कोप एक साथ आसमान के बहुत बड़े हिस्से को देखने की क्षमता रखता है। कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी की खगोल भौतिकीविद् राहेल मेंडेलबौम के अनुसार, रोमन एक ही समय में आकाश के एक बड़े क्षेत्र का निरीक्षण कर सकता है।

## लाखों नए ग्रहों की तलाश
इस विस्तृत नजरिए के दम पर टेलीस्कोप करीब 2,00,000 नए ग्रहों का पता लगा सकता है, जो अब तक खोजे गए लगभग 6,300 पुष्ट एक्सोप्लैनेट्स की तुलना में एक बड़ी छलांग होगी। इनमें से अधिकांश ग्रहों को तब पहचाना जाएगा जब वे अपने मूल तारों के प्रकाश को रोकेंगे, जबकि अन्य को तारों के प्रकाश पर उनके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव को मापकर खोजा जाएगा। लुईसियन स्टेट यूनिवर्सिटी के एक्सोप्लैनेट शोधकर्ता मैथ्यू पेनी बताते हैं कि माइक्रोलेंसिंग तकनीक की मदद से उन ग्रहों का पता लगाना भी संभव होगा जो अपने तारों से काफी दूर स्थित हैं। इसके अलावा यह टेलीस्कोप आवारा ग्रहों को भी ढूंढ निकालेगा जो अपने तारों से अलग हो चुके हैं।

## ब्रह्मांडीय संरचनाओं और डार्क मैटर का अध्ययन
ग्रहों के अलावा यह टेलीस्कोप एक अरब से अधिक आकाशगंगाओं पर अपनी नजर रखेगा, विशेष रूप से महाविस्फोट के करीब दो से छह अरब साल बाद के कालखंड पर। वैज्ञानिक प्रारंभिक ब्रह्मांड में पदार्थ के फैलाव और डार्क मैटर के वितरण को समझने के लिए कमजोर गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग तकनीक का उपयोग करेंगे। इन पैटर्नों की तुलना करके शोधकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि ब्रह्मांड की मानक प्रणाली में कहां और क्या खामियां मौजूद हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** अंतरिक्ष अनुसंधान और खगोल भौतिकी में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों तथा शोधकर्ताओं को इस मिशन से ब्रह्मांड के विकास को समझने के लिए अभूतपूर्व डेटा और नए अनुसंधान अवसर मिलेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. नासा का नया स्पेस टेलीस्कोप कब और कहां से लॉन्च होगा?
यह टेलीस्कोप फ्लोरिडा स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से अगस्त 30 को लॉन्च किया जाएगा।

### 2. नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य आकाशगंगाओं, डार्क मैटर और डार्क एनर्जी का अध्ययन करना तथा बड़ी संख्या में नए एक्सोप्लैनेट्स की खोज करना है।

### 3. रोमन टेलीस्कोप किस प्रकार ग्रहों का पता लगाएगा?
यह ट्रांजिट विधि और माइक्रोलेंसिंग तकनीक का उपयोग करके तारों के प्रकाश में आने वाले बदलावों और गुरुत्वाकर्षण प्रभावों के जरिए ग्रहों को खोजेगा।

### 4. यह टेलीस्कोप अंतरिक्ष में कहां स्थापित किया जाएगा?
यह टेलीस्कोप पृथ्वी से लगभग दस लाख मील दूर लैग्रेंज पॉइंट 2 पर स्थापित किया जाएगा।

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