नई एमआरएनए वैक्सीन ने मेलेनोमा कैंसर के लौटने का खतरा 40 प्रतिशत से अधिक घटाया एक नई व्यक्तिगत एमआरएनए वैक्सीन और इम्यूनोथेरेपी के संयोजन ने उच्च जोखिम वाले मेलेनोमा के मरीजों में कैंसर के दोबारा उभरने या मौत के खतरे को 42 प्रतिशत तक कम कर दिया है। त्वचा के कैंसर के इलाज की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है, जहां एक नई एमआरएनए वैक्सीन ने शुरुआती सर्जरी के बाद मेलेनोमा के वापस लौटने के जोखिम में भारी कमी दर्ज की है। इस क्रांतिकारी चिकित्सा दृष्टिकोण ने चिकित्सीय जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है, क्योंकि यह पारंपरिक उपचारों की तुलना में काफी बेहतर परिणाम दे रहा है। चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले समय में कैंसर के उपचार के तरीकों को पूरी तरह से बदल सकती है। क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे और मरीजों की भागीदारी इस बड़े क्लिनिकल ट्रायल का नाम INTerpath-001 रखा गया था, जिसमें कुल 1,137 ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जो उच्च जोखिम वाले मेलेनोमा से पीड़ित थे और जिनकी सर्जरी के जरिए ट्यूमर को पूरी तरह से निकाला जा चुका था। इन सभी प्रतिभागियों को दो अलग-अलग समूहों में बांटा गया था। पहले समूह के मरीजों को केवल Pembrolizumab नाम की दवा दी गई, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उनसे लड़ने में मदद करती है। वहीं, दूसरे समूह के रोगियों को इसी दवा के साथ एक खास एमआरएनए वैक्सीन दी गई, जिसे Intismeran Autogene कहा जाता है। मरीजों की निगरानी और स्वास्थ्य लाभ के आंकड़े शोधकर्ताओं ने सभी प्रतिभागियों की औसतन 24.6 महीने तक बारीकी से निगरानी की, जिसके बाद उन्होंने पाया कि वैक्सीन के इस्तेमाल से कैंसर के दोबारा उभरने या मरीज की मौत का जोखिम 42 प्रतिशत तक कम हो गया। इसके अलावा, परिणामों से यह भी साफ हुआ कि इस प्रायोगिक चिकित्सा पद्धति ने बीमारी के शरीर के अन्य अंगों में फैलने के खतरे को 38 प्रतिशत तक घटा दिया। अनुवर्ती अवधि के अंत में, जिन मरीजों को दोनों उपचार दिए गए थे, उनमें से 82.2 प्रतिशत लोग पूरी तरह से रोगमुक्त बने रहे, जबकि केवल Pembrolizumab पाने वाले समूह में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत दर्ज किया गया था। व्यक्तिगत चिकित्सा और ट्यूमर म्यूटेशन की प्रक्रिया यह वैक्सीन प्रत्येक मरीज के शरीर से लिए गए ट्यूमर के सैंपल के आधार पर तैयार की जाती है, जिससे विशिष्ट म्यूटेशन की पहचान की जाती है। इन म्यूटेशन्स की मदद से ऐसे खास प्रोटीन बनाए जाते हैं जिन्हें इम्यून सिस्टम आसानी से पहचान सके और कैंसर कोशिकाओं पर हमला कर सके। वैज्ञानिकों ने प्रत्येक रोगी के लिए ऐसे अधिकतम तीन आणविक हस्ताक्षरों का चयन किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी चरण III के परीक्षण ने यह साबित किया है कि मरीज के ट्यूमर की आणविक विशेषताओं के आधार पर बनाई गई व्यक्तिगत चिकित्सीय वैक्सीन पारंपरिक इम्यूनोथेरेपी के परिणामों में काफी सुधार कर सकती है। दुष्प्रभाव और आगे की विनियामक प्रक्रियाएं परीक्षण के दौरान कुछ प्रतिभागियों को हल्के दुष्प्रभाव भी झेलने पड़े, जिनमें बुखार, थकान और इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दर्द शामिल था। इस तरह के लक्षण इससे पहले के ट्रायल में भी देखे गए थे और इस तीसरे चरण के निष्कर्षों ने यह दिखा दिया है कि Pembrolizumab के साथ इस वैक्सीन का उपयोग करने पर सुरक्षा का स्तर वैसा ही बना रहता है। हालांकि, दवा बनाने वाली कंपनियों ने इस बात पर जोर दिया है कि यह वैक्सीन मेलेनोमा को रोकने के लिए नहीं बनाई गई है, बल्कि इसका उद्देश्य पिछली चिकित्सा के बाद बीमारी के लौटने और मौत के जोखिम को कम करना है। व्यापक उपयोग से पहले इसकी प्रभावशीलता को पुख्ता करने और स्वास्थ्य अधिकारियों से मंजूरी लेने के लिए यह जांच के दायरे में बनी हुई है। भविष्य की संभावनाएं और लॉजिस्टिक चुनौतियां दुनियाभर में हर साल मेलेनोमा के कारण 50,000 से अधिक लोगों की मौत होती है, हालांकि शुरुआती दौर में पकड़ में आने पर इसके बचने की संभावना काफी ज्यादा होती है। सैद्धांतिक रूप से आने वाले समय में अन्य प्रकार के ट्यूमर के लिए भी इसी तरह की टीकों को विकसित किया जा सकता है। इस साल की शुरुआत में एक अन्य परीक्षण से यह बात सामने आई थी कि व्यक्तिगत एमआरएनए वैक्सीन अग्नाशय के कैंसर से पीड़ित मरीजों की जीवन रक्षा दर में भी बड़ा सुधार कर सकती है। हालांकि, शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि कैंसर का पक्का इलाज तुरंत मिल गया है, क्योंकि इस तरह की कस्टम वैक्सीन को बड़े पैमाने पर तैयार करना और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के लिए इसे किफायती बनाना एक बड़ी तार्किक चुनौती है। इसका आप पर असर इस चिकित्सीय सफलता का असर सीधे तौर पर कैंसर के उन मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ेगा जो मेलेनोमा जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। • स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव: भविष्य में इस तरह की व्यक्तिगत एमआरएनए तकनीक आने से कैंसर के इलाज के तौर-तरीके पूरी तरह बदल सकते हैं। • लागत और उपलब्धता: वर्तमान में यह एक जटिल और कस्टम प्रक्रिया है, जिसके कारण आम मरीजों के लिए इसकी कीमत और उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। • पुनरावृत्ति का खतरा: उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए बीमारी के दोबारा लौटने का जोखिम कम होने से जीवन रक्षा की उम्मीद काफी बढ़ जाती है। ऐसा क्यों हुआ यह नई चिकित्सा तकनीक ट्यूमर की आनुवंशिक संरचना को समझकर शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करने के सिद्धांत पर काम करती है। • म्यूटेशन की पहचान: प्रत्येक मरीज के ट्यूमर के नमूने से खास म्यूटेशन निकालकर ऐसे प्रोटीन बनाए जाते हैं जिन्हें इम्यून सिस्टम आसानी से पहचान सके। • संयोजन का प्रभाव: एमआरएनए वैक्सीन को Pembrolizumab दवा के साथ मिलाने से शरीर की कैंसर कोशिकाओं से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। • ।व्यापक अनुसंधान: पिछले कुछ वर्षों में एमआरएनए तकनीक पर हुए लगातार शोध और क्लिनिकल ट्रायल ने इसे इंसानी शरीर पर सुरक्षित और असरदार साबित किया है। सवाल-जवाब 1. इस क्लिनिकल ट्रायल का नाम क्या था? इस क्लिनिकल ट्रायल का नाम INTerpath-001 था। 2. ट्रायल में कितने मरीजों को शामिल किया गया था? इस ट्रायल में उच्च जोखिम वाले मेलेनोमा के कुल 1,137 मरीजों को शामिल किया गया था। 3. वैक्सीन और दवा के संयोजन से जोखिम में कितनी कमी आई? इस संयोजन से कैंसर के दोबारा उभरने या मौत का खतरा 42 प्रतिशत तक कम हो गया। 4. इस वैक्सीन का निर्माण किस आधार पर किया जाता है? यह वैक्सीन प्रत्येक मरीज के ट्यूमर के सैंपल से मिलने वाली विशिष्ट म्यूटेशन और आणविक विशेषताओं के आधार पर तैयार की जाती है। 5. ट्रायल के दौरान मरीजों में कौन से दुष्प्रभाव देखे गए? मरीजों में बुखार, थकान और इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द जैसे हल्के दुष्प्रभाव देखे गए। https://trendkia.com/science/new-mrna-vaccine-reduces-risk-of-melanoma-recurrence-by-over-40-percent-51457 TrendKia — Har trend, sabse pehle.