# समय गणना में ऐतिहासिक बदलाव, मई 2027 से बंद होगी लीप सेकंड जोड़ने की परंपरा

> अंतरराष्ट्रीय समय निर्धारकों ने डिजिटल नेटवर्क और सॉफ्टवेयर प्रणालियों में पैदा होने वाली तकनीकी गड़बड़ियों को रोकने के लिए मई 2027 से लीप सेकंड को हमेशा के लिए समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/samaya-ganana-men-aitihasika-badalava-may-2027-se-bnda-hogi-leap-second-jorane-ki-parnpara-48426 · **Language:** Hindi
**Tags:** लीप सेकंड, बीआईपीएम, परमाणु घड़ी, यूटीसी, टाइमकीपिंग, सॉफ्टवेयर बग, विज्ञान समाचार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समय के सटीक मापन और घड़ियों के तालमेल को लेकर पिछले तीन दशकों से चली आ रही बहस अब हमेशा के लिए खत्म हो चुकी है। वैश्विक समय निर्धारकों ने यह तय कर दिया है कि आधुनिक डिजिटल युग में लीप सेकंड की व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा। आम नागरिकों के दैनिक जीवन में यह बदलाव भले ही प्रत्यक्ष रूप से महसूस न हो, लेकिन वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क, वित्तीय बाजारों और क्लाउड अवसंरचना के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। इस फैसले के अमल में आने से उन गंभीर तकनीकी जोखिमों को भी टाल दिया गया है, जो इतिहास में पहली बार किसी नकारात्मक लीप सेकंड की संभावित आवश्यकता से पैदा हो सकते थे।

## लीप सेकंड की व्यवस्था और इसका इतिहास
समय के आधिकारिक मापन की देखरेख करने वाले इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स (बीआईपीएम) ने घोषणा की है कि मई 2027 के बाद कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम यानी यूटीसी में कोई अतिरिक्त लीप सेकंड नहीं जोड़ा जाएगा। वर्ष 1972 में जब परमाणु घड़ियों और पृथ्वी के घूर्णन पर आधारित खगोलीय समय के बीच अंतर बढ़ने लगा था, तब पहली बार इस प्रणाली को शुरू किया गया था। तब से लेकर अब तक घड़ियों के समय को पृथ्वी के घूमने की वास्तविक गति के साथ बनाए रखने के लिए कुल 32 सकारात्मक लीप सेकंड जोड़े जा चुके हैं। सबसे हालिया लीप सेकंड वर्ष 2016 के अंत में जोड़ा गया था।

पृथ्वी अपनी धुरी पर बिल्कुल स्थिर गति से नहीं घूमती है। चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण समुद्र में उठने वाले ज्वार-भाटे से पैदा होने वाला घर्षण, पृथ्वी के भीतर मौजूद पिघले हुए कोर की गतिविधियां, महासागरीय जलधाराएं और वायुमंडलीय परिस्थितियां इसके घूमने की गति को प्रभावित करती हैं। अधिकांश समय इन प्राकृतिक कारकों की वजह से पृथ्वी का घूर्णन धीमा पड़ जाता है। दूसरी तरफ, सीजियम जैसे तत्वों पर आधारित परमाणु घड़ियां अविश्वसनीय रूप से सटीक चलती हैं और एक सेकंड के अरबवें हिस्से में भी विचलित नहीं होतीं। इसी अंतर को पाटने के लिए यूटीसी को खगोलीय समय यूटी1 के समानांतर रखने हेतु समय-समय पर एक सेकंड जोड़ दिया जाता था।

## कंप्यूटर प्रणालियों और इंटरनेट नेटवर्क पर संकट
समय की गणना में मात्र एक अतिरिक्त सेकंड जोड़ना सुनने में मामूली लग सकता है, लेकिन सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग और वैश्विक सर्वरों के लिए यह भारी भ्रम पैदा करता है। कंप्यूटर और डेटाबेस समय को एक निरंतर बहती हुई संख्या के रूप में गिनते हैं, जहां प्रत्येक मिनट में ठीक 60 सेकंड होने की अपेक्षा की जाती है। जब किसी मिनट को 61 सेकंड का बना दिया जाता है, तो सर्वर के ऑपरेटिंग सिस्टम अचानक स्तब्ध रह जाते हैं। कई प्रणालियों में एक ही सेकंड दो बार दर्ज होने लगता है, जिससे डेटा करप्ट होने या कंप्यूटर क्रैश होने का खतरा पैदा हो जाता है।

साल 2012 में लीप सेकंड लागू होने के दौरान इसका घातक असर देखा गया था, जब प्रमुख एयरलाइन क्वांटास का टिकट बुकिंग और चेक-इन सिस्टम पूरी तरह ठप हो गया था। उस घटना में सॉफ्टवेयर के क्रैश होने से उड़ानों में भारी देरी हुई थी और सैकड़ों यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा था। ऐसी तकनीकी आपदाओं से बचने के लिए बड़ी टेक कंपनियों जैसे गूगल और मेटा ने स्मीयर तकनीक का सहारा लिया। इस प्रक्रिया के तहत वे अचानक एक पूरा सेकंड जोड़ने के बजाय उस अतिरिक्त समय को लगभग चौबीस घंटे के भीतर बहुत सूक्ष्म हिस्सों में धीरे-धीरे वितरित कर देती थीं। हालांकि, दुनिया के अनगिनत छोटे डेटाबेस, बैंकिंग सिस्टम और दूरसंचार नेटवर्क के पास इस तरह के महंगे समाधान नहीं थे, जिससे हर बार लीप सेकंड आने पर तकनीकी खराबी का खतरा मंडराता रहता था।

## नकारात्मक लीप सेकंड और जलवायु परिवर्तन की भूमिका
पारंपरिक रूप से हमेशा सकारात्मक लीप सेकंड ही जोड़े जाते रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति पूरी तरह उलट गई है। ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ के तेजी से पिघलने और जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण में अप्रत्याशित बदलाव हुए हैं, जिससे पृथ्वी के घूमने की गति में कुछ तेजी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में प्रतिष्ठित शोध पत्रिका नेचर में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में यह सामने आया कि ग्रह के तेज घूर्णन के कारण संभवतः वर्ष 2029 तक दुनिया को अपने इतिहास में पहली बार एक नकारात्मक लीप सेकंड की आवश्यकता पड़ सकती थी।

सकारात्मक लीप सेकंड में एक सेकंड जोड़ा जाता है, जबकि नकारात्मक लीप सेकंड में घड़ियों से सीधे एक सेकंड काटना पड़ता, यानी 59वें सेकंड से सीधे शून्य सेकंड पर जाना पड़ता। सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों और मानक संगठनों ने जब इस स्थिति का परीक्षण किया, तो कई कंप्यूटर प्रणालियों में भीषण विफलताएं देखने को मिलीं। पचास वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जब सकारात्मक सेकंड ही सॉफ्टवेयर में बग पैदा कर रहे थे, तो एक ऐसे कदम को उठाना बहुत बड़ा जोखिम था जिसका कभी वास्तविक दुनिया में परीक्षण ही नहीं हुआ था। इसी खतरे ने समय निर्धारकों को इस पूरी व्यवस्था को समाप्त करने के लिए प्रेरित किया।

## मई 2027 की समयसीमा और भविष्य की योजना
बीआईपीएम के समय विभाग की प्रमुख पैट्रीज़िया तवेला के अनुसार, उद्योग मानक समूहों द्वारा किए गए परीक्षणों में नकारात्मक लीप सेकंड के दौरान कई सॉफ्टवेयर प्रणालियों के पूरी तरह विफल होने की पुष्टि हुई थी। इसी तात्कालिकता को देखते हुए इस व्यवस्था को खत्म करने की तारीख 20 मई 2027 मुकर्रर की गई। यह दिन ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि 20 मई 1875 को ही मीटर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर हुए थे, जिससे बीआईपीएम की नींव रखी गई थी और इसी दिन को विश्व मेट्रोलॉजी दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

अमेरिकी राष्ट्रीय मानक और प्रौद्योगिकी संस्थान यानी एनआईएसटी के फेलो जुदा लेवाइन ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि जीवन से एक बड़ा तकनीकी झंझट अब खत्म हो जाएगा। पैट्रीज़िया तवेला ने स्पष्ट किया कि इस बदलाव के बाद दुनिया भर के सॉफ्टवेयर सिस्टम को कुछ भी अतिरिक्त करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि उन्हें बस सामान्य 60 सेकंड के मिनटों को निरंतर दर्ज करते रहना होगा।

लीप सेकंड को बंद करने का अर्थ यह नहीं है कि परमाणु घड़ियों और पृथ्वी के प्राकृतिक चक्र के बीच का अंतर समाप्त हो जाएगा। यह अंतर समय के साथ धीरे-धीरे जमा होता रहेगा। भविष्य में जब यह विसंगति बहुत अधिक बढ़ जाएगी, तब समायोजन के लिए लीप ऑवर यानी पूरे एक घंटे के बदलाव की परिकल्पना रखी गई है। चूंकि एक घंटे में 3,600 सेकंड होते हैं, इसलिए इस तरह के किसी बदलाव की आवश्यकता आने में अभी कई सहस्राब्दियों का लंबा वक्त लगेगा। तब तक के लिए खगोलीय प्रणालियां जो यूटी1 पर निर्भर हैं, वे यूटीसी और यूटी1 के आपसी अंतर की जानकारी का अलग से इस्तेमाल कर सकेंगी, जबकि आम दुनिया और आधुनिक तकनीक बिना किसी बाधा के सामान्य समय पर चलती रहेगी।

## इसका आप पर असर
लीप सेकंड को समाप्त किए जाने से वैश्विक इंटरनेट सर्वरों, वित्तीय लेनदेन नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं में अचानक आने वाली तकनीकी रुकावटों से पूरी तरह निजात मिल जाएगी।

- **डिजिटल सेवाओं पर प्रभाव:** ऑनलाइन बैंकिंग, फ्लाइट बुकिंग और क्लाउड सेवाओं के सर्वर क्रैश होने का जोखिम हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। इससे यूजर्स को समय-समय पर होने वाले अनपेक्षित सर्वर आउटेज या पेमेंट फेलियर का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- **टेक कंपनियों को राहत:** वैश्विक सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को अब अतिरिक्त सेकंड को संभालने के लिए जटिल और जोखिम भरी कोडिंग नहीं करनी पड़ेगी। मई 2027 के बाद अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में सामान्य 60 सेकंड के मिनट ही निरंतर दर्ज किए जाएंगे।
- **सामान्य घड़ियों पर असर:** आम लोगों की कलाई घड़ियों या स्मार्टफोन के उपयोग में कोई बदलाव नहीं आएगा। इंटरनेट से जुड़े सभी गैजेट बिना किसी रुकावट या दोबारा समय सेट किए बिना निर्बाध रूप से काम करते रहेंगे।
- **लंबी अवधि का तालमेल:** खगोलीय समय और परमाणु समय के बीच बढ़ते अंतर को संभालने के लिए भविष्य में कई सदियों बाद सीधे लीप ऑवर की व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। वर्तमान और आने वाली कई पीढ़ियों के तकनीकी सिस्टम पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
लीप सेकंड को बंद करने का मुख्य कारण आधुनिक कंप्यूटर प्रणालियों की संवेदनशीलता और पृथ्वी के घूर्णन में तेजी आने के कारण नकारात्मक लीप सेकंड लागू करने का गंभीर खतरा था।

- **सॉफ्टवेयर में तकनीकी विफलताएं:** कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम और डेटाबेस समय की एक सीधी और सतत गणना पर काम करते हैं। जब किसी मिनट में 61वां सेकंड जोड़ा जाता था, तो सर्वर क्रैश हो जाते थे, जैसा कि 2012 में क्वांटास एयरलाइन के सिस्टम में हुआ था।
- **नकारात्मक लीप सेकंड का बढ़ता जोखिम:** जलवायु परिवर्तन के कारण ध्रुवीय बर्फ पिघलने और पृथ्वी के कोर की गतिविधियों से ग्रह के घूमने की गति में कुछ तेजी आई है। वर्ष 2024 के एक अध्ययन के अनुसार 2029 तक एक सेकंड घटाने की नौबत आ सकती थी।
- **परीक्षणों में गंभीर खामियां:** उद्योग मानक समूहों द्वारा किए गए आंतरिक परीक्षणों में पाया गया कि कंप्यूटर सिस्टम से एक सेकंड घटाने पर व्यापक सॉफ्टवेयर विफलताएं हो रही थीं। चूंकि 50 साल में सकारात्मक सेकंड की समस्याएं ही हल नहीं हुई थीं, इसलिए untested नकारात्मक सेकंड का जोखिम न लेना ही बेहतर समझा गया।
- **मई 2027 की ऐतिहासिक तिथि:** बीआईपीएम ने इस फैसले को लागू करने के लिए 20 मई 2027 का दिन चुना, क्योंकि इसी तारीख को 1875 में मीटर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर हुए थे और यह विश्व मेट्रोलॉजी दिवस भी है।

## सवाल-जवाब

### 1. लीप सेकंड को कब से पूरी तरह समाप्त किया जा रहा है?
अंतरराष्ट्रीय संस्था बीआईपीएम के निर्णय के अनुसार, 20 मई 2027 से आधिकारिक तौर पर यूटीसी में लीप सेकंड जोड़ना बंद कर दिया जाएगा।

### 2. लीप सेकंड की शुरुआत सबसे पहले कब की गई थी?
परमाणु घड़ियों और पृथ्वी के घूर्णन समय के बीच तालमेल बैठाने के लिए इसे पहली बार वर्ष 1972 में लागू किया गया था और तब से अब तक कुल 32 बार लीप सेकंड जोड़े गए हैं।

### 3. लीप सेकंड से कंप्यूटर और इंटरनेट प्रणालियों को क्या परेशानी होती थी?
कंप्यूटर सिस्टम प्रत्येक मिनट में 60 सेकंड की उम्मीद करते हैं, इसलिए 61वां सेकंड आते ही सर्वर क्रैश हो जाते थे और डेटाबेस में गड़बड़ी पैदा हो जाती थी।

### 4. नकारात्मक लीप सेकंड क्या होता है और वैज्ञानिक इससे क्यों चिंतित थे?
नकारात्मक लीप सेकंड में घड़ी से एक सेकंड घटाना पड़ता, जिसका वास्तविक दुनिया में कभी परीक्षण नहीं हुआ था और सिमुलेशन में इससे भारी सॉफ्टवेयर विफलताएं देखी गई थीं।

### 5. लीप सेकंड हटने के बाद परमाणु और खगोलीय समय का अंतर कैसे संभाला जाएगा?
समय निर्धारकों ने भविष्य में लीप ऑवर यानी पूरे एक घंटे के बदलाव की रूपरेखा रखी है, जिसकी आवश्यकता आने में कई हजार साल का समय लगेगा।

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