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  "type": "article",
  "title": "क्लाइमेट वीक में डेटा सेंटर के खिलाफ प्रदर्शन और पर्यावरण पर बढ़ता संकट",
  "summary": "क्लाइमेट वीक के दौरान डेटा सेंटर्स और एआई को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों ने पर्यावरण और जलवायु पर इनके असल असर को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।",
  "content": "क्लाइमेट वीक के दौरान आयोजित एक पैनल चर्चा उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई जब मंच पर बैठे वक्ताओं के बीच एआई और डेटा सेंटर्स के फायदों पर बात चल रही थी। चर्चा के ठीक एक मिनट बाद ही दर्शक दीर्घा से एक व्यक्ति उठा और उसने फ्रैक्ट गैस के इस्तेमाल के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत वहां से हटा दिया।\n\nक्लाइमेट वीक में प्रदर्शन और वक्ताओं की प्रतिक्रिया\n\nइस पहली बाधा के बाद भी व्यवधान का सिलसिला थमा नहीं और अगले 10 मिनट तक एक्सटिंक्शन रिबेलियन एनवाईसी समूह के कार्यकर्ताओं ने एक के बाद एक खड़े होकर अपनी बात रखी। वे एआई और डेटा सेंटर्स से होने वाले नुकसान के बारे में मंच पर मौजूद वक्ताओं के सामने चिल्ला रहे थे, जबकि वक्ता किसी तरह अपनी बातचीत को जारी रखने की कोशिश कर रहे थे। क्रूसे के सह-संस्थापक और अध्यक्ष कल्ली कैवनेस ने बाद में मॉडरेटर से स्वीकार किया कि सुरक्षाकर्मियों द्वारा आखिरी प्रदर्शनकारी को बाहर निकाले जाने के कई मिनट बाद भी वह इसी घटना के बारे में सोच रहे थे।\n\nडेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों और एआई फर्मों के लिए पिछला कुछ समय काफी तनावपूर्ण रहा है क्योंकि जनता के बीच इन प्रोजेक्ट्स को लेकर विरोध बढ़ रहा है और कई राज्यों में मोरेटोरियम लगाए जा रहे हैं। कैवनेस का मानना था कि शायद इनमें से ज्यादातर प्रदर्शनकारी डेटा सेंटर के आसपास नहीं रहते और वे स्थानीय टैक्स बेस को मिलने वाले फायदों से अनजान हैं। वहीं, एनेम ऑइल और एरा के प्रतिनिधियों ने यह तर्क देने की कोशिश की कि डेटा सेंटर भविष्य में अच्छे नागरिक की तरह काम कर सकते हैं और बिजली ग्रिड को सुधारने तथा साफ ऊर्जा लाने में मददगार बन सकते हैं।\n\nस्थानीय चिंताएं बनाम वैश्विक जलवायु संकट\n\nडेटा सेंटर्स को लेकर हो रहे विरोध में स्थानीय मुद्दे सबसे आगे रहे हैं और कई ओपिनियन पोल बताते हैं कि पानी की खपत, बिजली बिल, स्थानीय हवा और शोर प्रदूषण के बाद जलवायु परिवर्तन मतदाताओं की सूची में काफी नीचे आता है। यहां तक कि कई जलवायु निवेशक भी मुख्य रूप से ऊर्जा प्रणाली पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मिशगन के 7वें congressional district से चुनाव लड़ रहे विलियम लॉरेंस जैसे राजनीतिक नेता भी एआई और डेटा सेंटर के विकास को रोकने के अपने प्लेटफॉर्म में हवा, पानी और जीवन की गुणवत्ता पर खतरे की बात तो करते हैं, लेकिन सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन का जिक्र नहीं करते हैं।\n\nउनका कहना है कि उनके जिले में कम से कम तीन हाइपरस्केलर्स प्रोजेक्ट बन रहे हैं और लोग पानी तथा बिजली बिलों के मुद्दों से ज्यादा जूझ रहे हैं, हालांकि व्यापक पर्यावरणीय चेतना अभी भी डेटा सेंटर आंदोलन को प्रेरित कर रही है।\n\nजीवाश्म ईंधन की बढ़ती खपत और ऊर्जा संकट\n\nब्लूमबर्गएनईएफ के विश्लेषकों के अनुसार, डेटा सेंटर्स की वजह से आने वाले वर्षों में जीवाश्म ईंधन से चलने वाली बिजली की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है। साल 2035 तक डेटा सेंटर्स की वैश्विक बिजली की मांग पांच प्रतिशत से अधिक हो सकती है और उनकी जरूरतें तीन गुना बढ़ सकती हैं। इस मांग का अधिकांश हिस्सा नए और मौजूदा नेचुरल गैस प्लांट से पूरा किया जाएगा, जिससे बिजली क्षेत्र का उत्सर्जन दस साल से भी कम समय में छह प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसके अलावा, डेटा सेंटर्स को बिजली देने के लिए ग्रिड से बाहर बनाए जा रहे गैस पावर प्लांट यदि सभी बन जाते हैं तो वे अमेरिका के बिजली क्षेत्र के उत्सर्जन को बीस से तैंतीस प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।\n\nइस बीच, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए सुपरक्रिटिकल कार्बन डाइऑक्साइड तकनीक का उपयोग करने वाले एक नए स्टार्टअप को लॉन्च किया गया है, जिसका उद्देश्य गंदे डेटा सेंटर गैस टर्बाइन को अधिक कुशल बनाना है।\n\nतकनीक और पर्यावरण से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें\n\nगूगल अगले सप्ताह एक प्रायोगिक उपग्रह लॉन्च करने जा रहा है जो कंप्यूटर चिप्स से लैस होगा ताकि यह परखा जा सके कि अंतरिक्ष में डेटा सेंटर कैसे काम कर सकते हैं। यह उपग्रह एक साल तक कक्षा में रहेगा और इसके उपकरण सरल प्रश्नों के उत्तर देंगे। ओरेकल ने न्यू मैक्सिको में अपने डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के डेवलपर को भुगतान में देरी करने के लिए फोर्स मैज्योर नोटिस भेजा है, जो स्थानीय पर्यावरणीय चुनौतियों और परमिट के मुद्दों से जूझ रहा है। इसके अलावा, क्या मूल अमेरिकी जनजातियों को डेटा सेंटर के विकास का समर्थन करना चाहिए, यह एक ऐसा मुद्दा है जो देश भर के उम्मीदवारों और नेताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।\n\nइसका आप पर असर\nडेटा सेंटर्स के भारी ऊर्जा और पानी के उपयोग से स्थानीय स्तर पर बिजली के बिलों में वृद्धि और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आम नागरिकों को सीधा असर झेलना पड़ेगा।\n\n• भारत में: देश भर में तेजी से बढ़ते डिजिटल बुनियादी ढांचे और डेटा सेंटर निर्माण के कारण भविष्य में स्थानीय बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति और शुल्कों में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।\n\n• स्थानीय स्तर पर: जिन क्षेत्रों में बड़े डेटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, वहां के निवासियों को पानी की कमी, स्थानीय वायु प्रदूषण और भारी ऊर्जा खपत के कारण बढ़ते बिजली बिलों की समस्या का सीधा सामना करना पड़ सकता है।\n\n• आर्थिक प्रभाव: ऊर्जा की बढ़ती मांग और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता बने रहने से व्यापक आर्थिक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं, जिसका असर आम जनता के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।\n\n• पर्यावरणीय जोखिम: डेटा सेंटर्स के कारण कार्बन उत्सर्जन बढ़ने से क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता और जलवायु पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी खतरा हो सकता है।\n\n• नियामक बदलाव: सार्वजनिक विरोध और मोरेटोरियम बढ़ने के कारण राज्य स्तर पर नए सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं, जिससे तकनीकी कंपनियों और स्थानीय प्रशासन के बीच नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nडेटा सेंटर्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वजह से बिजली की मांग में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिसे पूरा करने के लिए ऊर्जा ढांचे को तेजी से बदला जा रहा है।\n\n• अत्यधिक ऊर्जा खपत: एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने और चलाने वाले सर्वर रूम्स को लगातार भारी मात्रा में बिजली और कूलिंग के लिए पानी की आवश्यकता होती है।\n\n• जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता: स्वच्छ ऊर्जा की धीमी आपूर्ति और ग्रिड की सीमाओं के कारण ऊर्जा कंपनियां तुरंत मांग पूरी करने के लिए नेचुरल गैस और कोयला संयंत्रों का सहारा ले रही हैं।\n\n• स्थानीय विरोध के कारण: पानी की खपत, शोर और बिजली बिलों पर पड़ने वाले असर को लेकर स्थानीय समुदायों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में व्यापक असंतोष फैल रहा है।\n\n• नीतिगत और बुनियादी ढांचे की चुनौतियां: मौजूदा बिजली ग्रिड आधुनिक तकनीक की अचानक आई विशाल ऊर्जा जरूरतों को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्लाइमेट वीक के दौरान पैनल चर्चा में मुख्य विवाद किस बात पर हुआ?\nचर्चा के दौरान एआई और डेटा सेंटर्स के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर एक्सटिंक्शन रिबेलियन एनवाईसी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।\n\n2. ब्लूमबर्गएनईएफ के अनुसार 2035 तक डेटा सेंटर्स की बिजली की मांग कितनी हो जाएगी?\nब्लूमबर्गएनईएफ के विश्लेषण के अनुसार, 2035 तक डेटा सेंटर्स की वैश्विक बिजली की मांग पांच प्रतिशत से अधिक हो जाएगी, जो उनकी वर्तमान जरूरतों से तीन गुना है।\n\n3. मिशगन के 7वें congressional district के चुनाव में विलियम Lawrence का मुख्य मुद्दा क्या है?\nविलियम लॉरेंस ने डेटा सेंटर और एआई के विकास के खिलाफ विरोध को अपने चुनावी अभियान का मुख्य आधार बनाया है।\n\n4. गूगल अगले सप्ताह अंतरिक्ष में क्या परीक्षण करने जा रहा है?\nगूगल कंप्यूटर चिप्स से लैस एक प्रायोगिक उपग्रह लॉन्च करेगा ताकि यह जांचा जा सके कि अंतरिक्ष में डेटा सेंटर कैसे प्रदर्शन करते हैं।\n\n5. ओरेकल ने न्यू मैक्सिको में किस प्रकार का नोटिस भेजा है?\nओरेकल ने एक फोर्स मैज्योर नोटिस भेजा है जो न्यू मैक्सिको में उसके डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के डेवलपर को भुगतान में देरी करने की अनुमति दे सकता है।\n\n6. डेटा सेंटर्स के विस्तार से बिजली क्षेत्र के उत्सर्जन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?\nडेटा सेंटर्स की वजह से होने वाले फॉसिल फ्यूल पावर के निर्माण से दस साल से भी कम समय में बिजली क्षेत्र का उत्सर्जन छह प्रतिशत तक बढ़ सकता है।\n\n7. क्लाइमेट वीक के पैनल में क्रूसे के प्रतिनिधि कौन थे?\nक्रूसे के सह-संस्थापक और अध्यक्ष कल्ली कैवनेस पैनल में शामिल थे।",
  "url": "https://trendkia.com/science/the-data-center-backlash-fails-to-fully-reckon-with-the-looming-climate-crisis-39515",
  "category": "विज्ञान",
  "publishedAt": "2026-09-27",
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    "डेटा सेंटर",
    "क्लाइमेट वीक",
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