ट्रंप प्रशासन के साथ काम करने पर कोलोसल के बेन लैम बोले, चार साल तक रेत में सिर छिपाकर नहीं बैठ सकते विलुप्त जीवों को वापस लाने में जुटी बायोटेक फर्म कोलोसल बायोसाइंसेज लुप्तप्राय जीवों के डीएनए बायोबैंक के लिए ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है। सीईओ बेन लैम ने अपनी रणनीति, 2028 की डेडलाइन और आलोचकों के सवालों पर खुलकर बात की। धरती से विलुप्त हो चुके जीवों को दोबारा जीवित करने के वादे से चर्चा में आई बायोटेक कंपनी कोलोसल बायोसाइंसेज अब लुप्तप्राय वन्यजीवों के डीएनए नमूने जुटाने की बड़ी मुहिम में जुटी है। इस पहल के लिए कंपनी ने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन का सहयोग जुटाया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बेन लैम ने एक सार्वजनिक मंच पर बताया कि जैव विविधता के सामने गंभीर संकट है और ऐसे वक्त में सत्ता से मुंह मोड़कर चार साल तक हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा जा सकता। संरक्षणवादियों की आलोचना और सहयोग की वजह ट्रंप प्रशासन का पिछला रुख जमीन और वन्यजीव संरक्षण को लेकर बहुत सकारात्मक नहीं माना गया है, इसके बावजूद कोलोसल ने जैव विविधता के नमूनों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार को तैयार किया। हालांकि कई पर्यावरणविदों और संरक्षणवादियों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का मानना है कि भविष्य में विलुप्त प्रजातियों को फिर से जिंदा करने का वादा वर्तमान में संकटग्रस्त जीवों को बचाने के प्रयासों को कमजोर कर सकता है। अगर नीति निर्माताओं को लगेगा कि खत्म हो चुकी प्रजातियों को दोबारा प्रयोगशाला में बनाया जा सकता है, तो वे आज के संरक्षण बजट और नियमों में ढिलाई बरत सकते हैं। इन सवालों के जवाब में बेन लैम ने स्पष्ट किया कि जब वन्यजीवों पर भारी खतरा मंडरा रहा हो, तब चार साल तक आंखें मूंदे रहना कोई विकल्प नहीं है। फंडिंग, वैल्यूएशन और अन्य कारोबारी उपक्रम कोलोसल ने पिछले साल अपनी सीरीज सी फंडिंग में 230 मिलियन डॉलर जुटाए थे, जिसके बाद कंपनी का वैल्यूएशन 10.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। अब यह स्टार्टअप एक और नया निवेश राउंड जुटाने की तैयारी में है, जिसमें कंपनी का संभावित मूल्यांकन 20 अरब डॉलर से 30 अरब डॉलर के बीच आंका जा रहा है। कंपनी केवल जीव विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने कई सहायक कंपनियां भी शुरू की हैं। इनमें से एक ऐसा उपक्रम भी शामिल है जो प्लास्टिक को नष्ट करने के लिए सूक्ष्मजीवों का उपयोग करता है। इसके अलावा कोलोसल की हिस्सेदारी वॉरहाउंड नामक स्टार्टअप में भी है। इस उद्यम को बेन लैम ने एंडुरिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पामर लकी के साथ मिलकर शुरू किया है, जिसका मकसद सेना, पुलिस बल और आपातकालीन सेवा कर्मियों के लिए जेनेटिक रूप से संवर्धित कुत्ते तैयार करना है। लैम का कहना है कि वॉरहाउंड के पीछे एक बड़ा उद्देश्य यूरोप में काम करने वाले कुत्तों के लिए चलने वाले पपी मिल्स पर निर्भरता घटाना है। मैमथ की 2028 डेडलाइन और डायर वुल्फ पर उठे सवाल कोलोसल ने वूली मैमथ को पुनर्जीवित करने के बड़े अभियान के तहत डायर वुल्फ को वापस लाने और जीन एडिटिंग के जरिए वूली चूहे बनाने के दावों से खूब सुर्खियां बटोरी हैं। आलोचकों का आरोप है कि कंपनी अपने परिणामों को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती है और इसमें काम से ज्यादा दिखावा है। उदाहरण के लिए, कंपनी द्वारा तैयार किए गए डायर वुल्फ का जीनोम काफी हद तक सामान्य ग्रे भेड़ियों के समान है। क्लेमसन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड जैकोव्स्की ने प्रजातियों की परिभाषा को लेकर कहा था कि किसी प्रजाति को तय करने में स्वाभाविक रूप से कुछ व्यक्तिपरकता होती है। लैम ने कहा कि अगर कोई उनकी रचनाओं को जीन-संशोधित ग्रे भेड़िये कहे या भविष्य के मैमथ को बालदार हाथी कहे, तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि वूली मैमथ तैयार करने की शुरुआती 2028 की समयसीमा चूक जाएगी, हालांकि कंपनी मैमथ के जीन में 130 संपादन करने में सफल रही है। मेगालोडॉन पर काम करने से साफ इनकार बेन लैम का दावा है कि कंपनी ने कई बड़े ऐलान किए हैं, लेकिन इसके बावजूद अपने जीन-एडिटिंग प्रयासों को बहुत सीमित रूप में पेश किया है और आने वाले समय में दुनिया के सामने और भी आश्चर्यजनक उपलब्धियां आएंगी। हालांकि उन्होंने एक बात पूरी तरह साफ कर दी कि कंपनी महासागरों के प्राचीन विशाल शिकारी मेगालोडॉन जैसे जीवों पर कभी काम नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि लोगों की ओर से मेगालोडॉन को लेकर काफी दिलचस्पी दिखाई गई थी, लेकिन यह संभव नहीं है क्योंकि समुद्र पहले से ही काफी डरावना है। इसका आप पर असर यह घटनाक्रम दर्शाता है कि जेनेटिक इंजीनियरिंग और बायोबैंकिंग तकनीक पर्यावरण नीतियों तथा निजी निवेश की प्राथमिकताओं को कैसे बदल रही हैं। • पर्यावरण संरक्षण पर प्रभाव: लुप्तप्राय जीवों के डीएनए को संरक्षित करने से प्रजातियों के आनुवंशिक रिकॉर्ड तो सुरक्षित होंगे, लेकिन जमीनी स्तर पर जंगलों और वन्यजीवों को बचाने के बजट में कमी का जोखिम बना रहेगा। नीति निर्माताओं का ध्यान वास्तविक प्राकृतिक संरक्षण से हटकर कृत्रिम समाधानों की तरफ भटक सकता है। • बायोटेक और रोजगार के अवसर: कोलोसल की 30 अरब डॉलर तक की वैल्यूएशन और नए स्पिन-ऑफ्स से जेनेटिक्स के क्षेत्र में भारी पूंजी का प्रवाह हो रहा है। इसके चलते मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और जेनेटिक इंजीनियरिंग से जुड़े विशेषज्ञों के लिए नए रोजगार और शोध के अवसर बनेंगे। • सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र: वॉरहाउंड जैसी पहलों से सैन्य बलों और पुलिस के लिए विशेष क्षमताओं वाले कुत्तों का विकास होगा। इससे कार्यकुशलता तो बढ़ सकती है, लेकिन जेनेटिक रूप से संवर्धित जीवों के उपयोग को लेकर वैश्विक स्तर पर नई नैतिक और कानूनी बहस शुरू होगी। • सामान्य नागरिकों के लिए: प्लास्टिक खाने वाले बैक्टीरिया जैसे प्रोजेक्ट्स अगर सफल होते हैं तो कचरा प्रबंधन में क्रांतिकारी सुधार आ सकता है। हालांकि वूली मैमथ को 2028 तक देखने की उम्मीद लगाने वाले विज्ञान प्रेमियों को अब इसके लिए थोड़ा लंबा इंतजार करना होगा। ऐसा क्यों हुआ कोलोसल बायोसाइंसेज द्वारा ट्रंप प्रशासन के साथ साझेदारी और अपनी प्राथमिकताओं का बचाव करने के पीछे वैज्ञानिक, रणनीतिक और वित्तीय कारण मौजूद हैं। • जैव विविधता पर बढ़ता खतरा: दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन और तेजी से नष्ट होते प्राकृतिक आवासों के कारण वन्यजीवों के विलुप्त होने की दर बढ़ गई है। लैम का तर्क है कि राजनीतिक मतभेदों को परे रखकर सरकार के साथ मिलकर डीएनए नमूने सुरक्षित करना ही वर्तमान संकट का व्यावहारिक उपाय है। • संरक्षण समुदाय का कड़ा विरोध: संरक्षणवादियों का मानना है कि डी-एक्सटिंक्शन के बड़े-बड़े वादे सत्ता प्रतिष्ठानों को वर्तमान पर्यावरण नियमों को कमजोर करने का बहाना देते हैं। इसी वजह से कोलोसल की ट्रंप प्रशासन के साथ साझेदारी की घोषणा होते ही आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया। • विशाल पूंजी और व्यावसायिक विस्तार: कंपनी को 20 से 30 अरब डॉलर के नए वैल्यूएशन राउंड के लिए निवेशकों को अपनी तकनीकी क्षमता और सरकारी पहुंच दिखानी है। प्लास्टिक नष्ट करने वाले बैक्टीरिया और रक्षा क्षेत्र के लिए कुत्ते तैयार करने वाले उपक्रम निवेशकों को आकर्षित करने की इसी रणनीति का हिस्सा हैं। • वैज्ञानिक जटिलताएं और समयसीमा: जीनोम संपादन एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें 130 म्यूटेशन के बावजूद पूरा मैमथ तैयार करने में उम्मीद से अधिक समय लग रहा है। यही वजह है कि 2028 की शुरुआती समयसीमा पीछे खिसक गई है और वैज्ञानिक रूप से विवादित जीवों जैसे मेगालोडॉन को सीधे खारिज कर दिया गया है। सवाल-जवाब 1. कोलोसल बायोसाइंसेज ट्रंप प्रशासन के साथ किस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है? कंपनी संकटग्रस्त और लुप्तप्राय वन्यजीवों के डीएनए नमूने जुटाकर एक सुरक्षित बायोबैंक बनाने के लिए ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है। 2. बेन लैम ने 'रेत में सिर छिपाकर नहीं बैठने' की बात क्यों कही? लैम ने समझाया कि जैव विविधता के गंभीर संकट को देखते हुए राजनीतिक नेतृत्व से किनारा करने के बजाय उनके साथ मिलकर वन्यजीवों के डीएनए सुरक्षित करना जरूरी है। 3. क्या कोलोसल तय समय पर वूली मैमथ तैयार कर पाएगी? नहीं, कंपनी ने स्वीकार किया है कि वह वूली मैमथ तैयार करने की अपनी शुरुआती 2028 की समयसीमा को पूरा नहीं कर पाएगी। 4. कोलोसल का वर्तमान वित्तीय मूल्यांकन कितना है और वह कितना नया फंड जुटाना चाहती है? कंपनी की पिछली सीरीज सी फंडिंग में वैल्यूएशन 10.2 अरब डॉलर थी, और अब वह 20 अरब से 30 अरब डॉलर के संभावित मूल्यांकन पर नया फंड जुटाने की कोशिश कर रही है। 5. वॉरहाउंड स्टार्टअप का मुख्य उद्देश्य क्या है? यह स्टार्टअप सेना, पुलिस और आपातकालीन कर्मियों के लिए जेनेटिक रूप से संवर्धित कुत्ते तैयार करने और यूरोप के पपी मिल्स पर निर्भरता कम करने के लिए बनाया गया है। 6. क्या कोलोसल विशालकाय शार्क मेगालोडॉन को वापस लाने पर विचार कर रही है? नहीं, बेन लैम ने साफ कर दिया है कि कंपनी मेगालोडॉन जैसे प्राचीन समुद्री शिकारियों को पुनर्जीवित करने पर कोई काम नहीं करेगी। https://trendkia.com/science/trump-prashasana-ke-satha-kama-karane-para-colossal-ke-ben-lamm-bole-chara-sala-taka-reta-men-sira-chhipakara-nahin-baitha-sakate-56677 TrendKia — Har trend, sabse pehle.