{
  "type": "article",
  "title": "तूफान बावी की तेज हवाओं ने चीन में झरने का पानी उल्टा बहा दिया, वजह जानकर हैरान रह जाएंगे आप",
  "summary": "चीन के झेजियांग प्रांत में टाइफून बावी की तेज हवाओं ने डालोंगकिउ झरने का पानी नीचे गिरने के बजाय आसमान की ओर उड़ा दिया, ऐसा ही रिवर्स वाटरफॉल नजारा भारत के महाराष्ट्र और अमेरिका के नियाग्रा फॉल्स में भी देखने को मिलता है।",
  "content": "पानी हमेशा ऊपर से नीचे गिरता है, यह ग्रेविटी का सबसे बुनियादी नियम है। लेकिन चीन के झेजियांग प्रांत में हाल ही में एक ऐसा नजारा दिखा जिसने इस नियम को उल्टा कर दिया। यहां डालोंगकिउ झरने का पानी नीचे गिरने की बजाय आसमान की ओर उड़ने लगा, यानी एक तरह का रिवर्स वाटरफॉल बन गया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और लोग हैरान हैं कि आखिर पानी उल्टी दिशा में कैसे बह सकता है। असल में यह कोई जादू नहीं बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक और वैज्ञानिक घटना है, और ऐसा ही नजारा भारत के महाराष्ट्र और अमेरिका के नियाग्रा फॉल्स में भी देखने को मिलता है।\n\nझेजियांग में तूफान ने कैसे बदली झरने की दिशा\n11 जुलाई को चीन के वेनझोउ शहर में टाइफून बावी ने भारी तबाही मचाई थी। इस तूफान के चलते इलाके में बेहद तेज हवाएं चल रही थीं और कई जगहों पर सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। यही तेज हवाएं डालोंगकिउ वाटरफॉल पर एक असाधारण असर छोड़ गईं। यह झरना करीब 190 मीटर यानी 623 फीट ऊंचा है। जब झरने का पानी इतनी ऊंचाई से नीचे गिरना शुरू हुआ, तभी तूफानी हवा ने उस पानी को दोबारा हवा में उछाल दिया। इससे एक तरह का भंवर बन गया और पानी नीचे जाने के बजाय ऊपर की ओर उड़ने लगा। मौके पर मौजूद लोगों ने इस दुर्लभ नजारे को अपने कैमरों में कैद कर लिया और यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म के सीन जैसा लग रहा था। इस घटना का एक वीडियो चीनी मीडिया संस्था सीसीटीवी प्लस के आधिकारिक अकाउंट से भी 13 जुलाई 2026 को साझा किया गया, जिसमें बताया गया कि यह घुमावदार रिवर्स वाटरफॉल टाइफून बावी की तेज हवाओं की वजह से बना और यह एक दुर्लभ नजारा था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह पूरा मामला हवा के भारी दबाव के कारण हुआ।\n\n \n\nभारत में भी मिलता है यह अनोखा नजारा\nचीन की यह घटना कोई अकेला या नया मामला नहीं है। भारत में भी मानसून के मौसम में ऐसा नजारा देखने को मिलता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में स्थित नानेघाट। यह एक प्राचीन पहाड़ी दर्रा है, जो समुद्र तल से करीब 2600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। जून से अगस्त के महीनों के बीच यहां बेहद तेज हवाएं चलती हैं। जब झरने का पानी इस ऊंचाई से नीचे गिरता है, तो हवा का दबाव इतना ज्यादा हो जाता है कि पानी वापस ऊपर की तरफ उड़ने लगता है। देखने में ऐसा लगता है जैसे पानी सीधे ग्रेविटी को चुनौती दे रहा हो। यही वजह है कि मानसून के दौरान नानेघाट भारत के सबसे खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट्स में गिना जाने लगता है। इसी तरह की एक और तस्वीर 12 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर नवीन मैलके नाम के एक यूजर ने साझा की, जिसमें महाराष्ट्र के अंबोली इलाके में भी रिवर्स वाटरफॉल जैसा नजारा कैद हुआ नजर आया।\n\nनियाग्रा फॉल्स समेत दुनिया के दूसरे उदाहरण\nअमेरिका का नियाग्रा फॉल्स दुनिया के सबसे ताकतवर झरनों में गिना जाता है। यहां भी पानी के बहाव और हवा के दबाव का मेल कई बार ऐसे हालात बना देता है जिससे रिवर्स वाटरफॉल जैसा भ्रम पैदा होता है। तेज हवा की रफ्तार पानी के गिरने की ताकत से जब ज्यादा हो जाती है, तो पानी नीचे जाने की बजाय हवा में ही उड़ने लगता है। यही वजह है कि नियाग्रा फॉल्स पर भी कई बार ऐसा नजारा दिखता है, जिसे देखकर दुनिया भर के वैज्ञानिक लगातार स्टडी करते रहते हैं। 14 जुलाई 2026 को कुर्दिस्तान 24 इंग्लिश नाम के एक अकाउंट से नियाग्रा फॉल्स का एक वीडियो शेयर किया गया, जिसमें एक शख्स तेज उठती लहरों के बीच अपनी पीठ के बल शांति से पानी पर तैरता नजर आया, मानो कुछ हुआ ही न हो। इस वीडियो में नियाग्रा फॉल्स के पानी की बेइंतहा ताकत साफ झलकती है, जो इसे दुनिया के सबसे अविश्वसनीय झरनों में से एक बनाती है।\n\nवैज्ञानिक इसे चमत्कार नहीं, एयरोडायनामिक्स का खेल मानते हैं\nविज्ञान की भाषा में रिवर्स वाटरफॉल को कोई चमत्कार नहीं माना जाता। यह पूरी तरह एयरोडायनामिक्स और हवा के दबाव का नतीजा है। जब पहाड़ों के बीच किसी संकरी जगह से तेज हवाएं गुजरती हैं, तो उनकी रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है। अगर इसी रास्ते में कोई झरना आ जाए, तो वह तेज हवा पानी को नीचे जाने से रोक देती है। इससे पानी की धारा टूट जाती है और वह फव्वारे की तरह ऊपर उठने लगती है। सीधे शब्दों में कहें तो जब भी हवा की गति पानी के गिरने की स्पीड से ज्यादा हो जाती है, तब वह हवा पानी को नीचे की बजाय ऊपर की तरफ धकेल देती है। प्रकृति के इस रूप को देखकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं, भले ही इसके पीछे की साइंस पूरी तरह समझ में आ चुकी हो।\n\n \n\nइसका आप पर असर\n• मानसून में घूमने वालों के लिए: अगर आप बरसात के मौसम में महाराष्ट्र के नानेघाट या पश्चिमी घाट की तरफ जाने की योजना बना रहे हैं, तो वहां चलने वाली बेहद तेज हवाओं और अचानक बदलते मौसम को देखते हुए एहतियात बरतना जरूरी है।\n• प्रकृति और साइंस में दिलचस्पी रखने वालों के लिए: यह घटना बताती है कि तेज तूफानी हवाएं झरनों जैसी शांत दिखने वाली जगहों को भी कुछ ही मिनटों में खतरनाक बना सकती हैं, इसलिए ऐसे इलाकों में तूफान या भारी बारिश की चेतावनी के दौरान जाने से बचना चाहिए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रिवर्स वाटरफॉल क्या होता है?\nयह एक ऐसी घटना है जिसमें झरने का पानी नीचे गिरने के बजाय तेज हवा के दबाव से वापस ऊपर की तरफ उड़ने लगता है।\n\n2. चीन के किस झरने में यह नजारा दिखा?\nचीन के झेजियांग प्रांत के वेनझोउ शहर में स्थित डालोंगकिउ झरने में यह नजारा दिखा, जो करीब 190 मीटर यानी 623 फीट ऊंचा है।\n\n3. यह घटना कब हुई?\nयह घटना 11 जुलाई को हुई, जब टाइफून बावी ने वेनझोउ शहर में भारी तबाही मचाई थी।\n\n4. भारत में ऐसा नजारा कहां देखने को मिलता है?\nभारत में महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में स्थित नानेघाट में मानसून के दौरान (जून से अगस्त) यह नजारा देखने को मिलता है, इसके अलावा अंबोली में भी ऐसी तस्वीर सामने आई है।\n\n5. क्या नियाग्रा फॉल्स में भी रिवर्स वाटरफॉल जैसा असर दिखता है?\nहां, तेज हवा की रफ्तार पानी के गिरने की ताकत से ज्यादा होने पर नियाग्रा फॉल्स पर भी ऐसा ही भ्रम पैदा होता है।\n\n6. वैज्ञानिक इस घटना को क्या बताते हैं?\nवैज्ञानिकों के मुताबिक यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि एयरोडायनामिक्स और हवा के भारी दबाव का नतीजा है, जो संकरी जगहों से गुजरने पर तेज हवाओं की रफ्तार बढ़ने से होता है।",
  "url": "https://trendkia.com/science/tuphana-bavi-ki-teja-havaon-ne-china-men-jharane-ka-pani-ulta-baha-diya-vajaha-janakara-hairana-raha-jaenge-apa-7696",
  "category": "विज्ञान",
  "publishedAt": "2026-07-14",
  "tags": [
    "रिवर्स वाटरफॉल",
    "टाइफून बावी",
    "डालोंगकिउ झरना",
    "झेजियांग",
    "नानेघाट",
    "नियाग्रा फॉल्स",
    "साइंस न्यूज"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}