# अमेरिकी चुनावों में सोलर लॉबी का आक्रामक रुख: कंजरवेटिव विरोधियों को हराने के लिए मैदान में उतरे नए राजनीतिक गुट

> स्वच्छ ऊर्जा समर्थक अब केवल पर्यावरण की दुहाई देने के बजाय तीखे राजनीतिक विज्ञापनों और आक्रामक प्रचार के जरिए विरोधी उम्मीदवारों को सीधे चुनौती दे रहे हैं। क्रिप्टो उद्यमी क्रिस लार्सन समर्थित पीएसी ने प्राथमिक चुनावों में कई प्रमुख राजनेताओं को निशाना बनाकर ऊर्जा राजनीति का रुख बदल दिया है।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/us-chunav-mein-solar-lobby-ka-aakramak-rukh-conservative-virodhiyon-ko-harane-ke-liye-maidan-mein-utare-naye-rajnitik-gut-47407 · **Language:** Hindi
**Tags:** सौर ऊर्जा, अमेरिकी चुनाव, क्रिस लार्सन, रिपब्लिकन पार्टी, अक्षय ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा

अमेरिकी चुनाव प्रचार में अमूमन पर्यावरण समर्थक संगठन जलवायु संकट और पृथ्वी को बचाने की भावुक अपील करते नजर आते हैं, लेकिन इस बार सियासी दंगल में उनका तौर-तरीका पूरी तरह बदल चुका है। स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा एक संगठन अब पारंपरिक रक्षात्मक रवैया छोड़कर उन नेताओं को सीधे निशाने पर ले रहा है जो नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की राह में रोड़ा अटकाते रहे हैं। इस रणनीति के केंद्र में कोई साधारण पर्यावरण समूह नहीं, बल्कि 'इन्वेस्ट इन टुमारो कोएलिशन' नामक एक खास पोलिटिकल एक्शन कमेटी (पीएसी) है। न्यूयॉर्क के कुशल चुनावी रणनीतिकारों की निगरानी में चलने वाले इस संगठन को क्रिप्टो क्षेत्र की दिग्गज हस्ती क्रिस लार्सन का बड़ा आर्थिक संबल मिला हुआ है। लार्सन ब्लॉकचेन कंपनी रिपल के सह-संस्थापक हैं और उनका मानना है कि पारंपरिक जीवाश्म ईंधन कंपनियाँ वर्षों से बेहद कड़ा चुनावी खेल खेलती आई हैं, जबकि सौर ऊर्जा उद्योग अब तक जरूरत से ज्यादा नरम बना रहा।

## रूढ़िवादी प्राथमिकताओं में दक्षिणपंथी मुद्दों से वार
इस नई राजनीतिक पहल की सबसे चौंकाने वाली बात इसका प्रचार का तरीका है। रिपब्लिकन पार्टी के आंतरिक मुकाबलों में जब इन नेताओं के खिलाफ विज्ञापन चलाए जाते हैं, तो उनमें सौर पैनलों, पवन चक्कियों या ग्लोबल वार्मिंग का कोई जिक्र तक नहीं होता। न्यूयॉर्क शहर के पूर्व मेयर माइकल ब्लूमबर्ग के प्रशासन में काम कर चुके रणनीतिकार क्रिस कॉफी इस अभियान का प्रबंधन संभाल रहे हैं। कॉफी की स्पष्ट राय है कि दक्षिणपंथी मतदाताओं के बीच पर्यावरण की चर्चा करने का कोई लाभ नहीं होता। इसकी जगह उन स्थानीय और वैचारिक कमजोरियों को उभारा जाता है जिससे संबंधित नेता अपने ही खेमे के मतदाताओं की नजरों में संदेहास्पद नजर आने लगे। चुनावी जंग में प्रत्याशी को यह साबित करके घेरना सबसे कारगर हथियार बन जाता है कि वह पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक आंदोलन के प्रति पूरी तरह वफादार नहीं है।

इसी सोची-समझी योजना के तहत टेक्सास के अटॉर्नी जनरल पद के चुनाव में चिप रॉय के खिलाफ लगभग पंद्रह लाख डॉलर झोंक दिए गए। प्रचार का बड़ा हिस्सा ट्रुथ सोशल और रंबल जैसे दक्षिणपंथी मंचों पर केंद्रित रखा गया। इसी तर्ज पर दक्षिण कैरोलिना के सांसद राल्फ नॉर्मन पर विज्ञापनों में निशाना साधा गया, जबकि टेनेसी के सांसद एंडी ओगल्स को काम से गैरहाजिर रहने वाला जनप्रतिनिधि बताकर घेरा गया। इन हमलों का असर यह रहा कि चिप रॉय, राल्फ नॉर्मन और एंडी ओगल्स अपनी-अपनी प्राथमिक प्रतियोगिताएं हार गए। इसी गठबंधन से वित्तीय मदद पाने वाले एक अन्य गुट ने रोड आइलैंड के डेमोक्रेटिक गवर्नर डैन मैकी को भी घेरा, जिन्हें भी अपनी चुनावी जंग गंवानी पड़ी।

## करोड़ों डॉलर का चुनावी बजट और बदलते निशाने
शुरुआती प्राथमिक मुकाबलों में करीब पचास लाख डॉलर खर्च करने के बाद यह पीएसी अब आम चुनाव की ओर बढ़ चुका है और उसने सात प्रमुख विरोधियों को हराने के लिए डेढ़ करोड़ डॉलर का अतिरिक्त बजट तय किया है। आगामी चरणों के लिए इंडियाना की सांसद विक्टोरिया स्पार्ट्ज़ को निशाना बनाने के लिए बीस लाख डॉलर के विज्ञापनों की योजना तैयार की गई है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा खत्म करने और बुजुर्गों पर विवादित टिप्पणियों को लेकर टेक्सास के ब्रैंडन हेरेरा को घेरने की तैयारी है। वहीं कोलोराडो की सांसद लॉरेन बोएबर्ट के चर्चित 'बीटलजूस' थियेटर विवाद को लेकर भी पंद्रह लाख डॉलर का विज्ञापन अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उनके सार्वजनिक आचरण पर सवाल खड़े किए गए हैं।

न्यूयॉर्क के उत्तरी हिस्से से संसद प्रत्याशी एंथनी कांस्टेंटिनो के खिलाफ भी इसी संगठन ने मोर्चा खोल रखा है। कांस्टेंटिनो की स्टिकर बनाने वाली कंपनी द्वारा पूर्व में पुलिस विरोधी नारे छपने के वाकये को जोर-शोर से प्रचारित किया जा रहा है। अमेरिका में बंदूक अधिकार समर्थक और श्रमिक संगठन दशकों से अपने विरोधियों को इसी आक्रामक अंदाज में चुनावी नुकसान पहुंचाते रहे हैं। 'कम्युनिटी क्लीन एनर्जी कोएलिशन' की बोर्ड अध्यक्ष स्टेफ़ बॉश मानती हैं कि स्वच्छ ऊर्जा उद्योग को अपनी बात मनवाने के लिए अब थोड़ा खौफ और आक्रामकता दिखानी ही होगी। हालांकि रणनीतिकार जेम्स कार्विल जैसे पुराने राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेल और गैस कंपनियों के अरबों डॉलर के राजनीतिक खर्च के सामने बीस लाख या दो करोड़ डॉलर की रकम बेहद सीमित है।

## प्रशासन का रुख और रिपब्लिकन गढ़ों में सौर ऊर्जा का प्रसार
वॉशिंगटन में राजनीतिक समीकरण तेजी से पेचीदा हो रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने अतीत में स्वच्छ ऊर्जा की कई योजनाओं को कड़े नियमों में उलझाया और तटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं को रोकने के लिए भारी भरकम कदम उठाए। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अन्य देशों को इन योजनाओं से दूर रहने की नसीहत दी गई। प्रशासन के पूर्व राष्ट्रीय ऊर्जा प्रभुत्व परिषद के सदस्य रिचर्ड गोल्डबर्ग का आकलन रहा है कि जहां पवन ऊर्जा बेहद कठिन दौर में पहुंच चुकी है, वहीं सौर ऊर्जा अब भी किसी तरह बची हुई है।

दिलचस्प पहलू यह है कि तेल और गैस का गढ़ माना जाने वाला टेक्सास राज्य आज सौर ऊर्जा उत्पादन में अमेरिका के सबसे अग्रणी इलाकों में तब्दील हो चुका है। घरेलू बाजार में बिजली के बढ़ते बिल, पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) डेटा केंद्रों की बेतहाशा बिजली मांग ने ऊर्जा का नया संकट खड़ा कर दिया है। 'अमेरिकन क्लीन पावर एसोसिएशन' द्वारा कराए गए एक आंतरिक सर्वेक्षण के मुताबिक ट्रंप समर्थक मतदाताओं में से पचहत्तर प्रतिशत लोग राष्ट्रीय ऊर्जा उत्पादन में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के पक्ष में हैं। इस बदलाव को हवा देने के लिए दक्षिणपंथी पॉडकास्ट और पत्रिकाओं के साथ समझौते किए जा रहे हैं। पूर्व में एलन मस्क से जुड़ी रहीं केटी मिलर जैसी हस्तियां भी सोशल मीडिया पर यह तर्क रख रही हैं कि यूटिलिटी स्तर की सत्तर प्रतिशत से ज्यादा नई सौर क्षमता उन्हीं राज्यों में लगी है जहां ट्रंप को चुनावी जीत मिली थी, इसलिए बिजली उत्पादन किसी दल विशेष का नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है।

## चीन के साथ तकनीकी होड़ और देसी विनिर्माण की वकालत
ऊर्जा बहस का केंद्र अब पर्यावरण से हटकर चीन के साथ प्रतिस्पर्धा पर टिक गया है। पिछले वर्ष चीन ने अपने ग्रिड में 315 गीगावाट सौर ऊर्जा जोड़ी, जो अमेरिका द्वारा सभी स्रोतों से तैयार की गई कुल बिजली का लगभग छह गुना है। इसी भारी उत्पादन के बल पर चीन अपने विशाल डेटा केंद्रों को निर्बाध बिजली दे पा रहा है। अमेरिका के भीतर डेटा केंद्रों की बढ़ती भूख को पूरा करने के लिए अब 'अमेरिका फर्स्ट' के नजरिए से सौर ऊर्जा की वकालत की जा रही है।

अमेरिकी सौर निर्माता कंपनी 'टी1 एनर्जी' ने व्हाइट हाउस और सांसदों के बीच अपनी पैरवी मजबूत करने के लिए डॉनल्ड ट्रंप जूनियर के पुराने संपर्कों वाली लॉबिंग फर्म 'चेकमेट गवर्नमेंट रिलेशंस' और पूर्व सीआईए अधिकारी रिक डे ला टोरे की अगुवाई वाली 'टावर स्ट्रैटेजी' को नियुक्त किया है। इनका मुख्य तर्क यह है कि अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान का विरोध सौर ऊर्जा से नहीं, बल्कि चीनी प्रभुत्व से होना चाहिए। रणनीतिकार रिक डे ला टोरे ने सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया है कि डेटा केंद्रों के विस्तार के लिए केवल घरेलू सौर ऊर्जा ही अपेक्षित गति और पैमाने पर तैयार की जा सकती है। हाल के महीनों में विदेशी सौर पुर्जों पर पंद्रह प्रतिशत टैरिफ और न्यूनतम मूल्य सीमाएं तय की गई हैं, जिसे स्थानीय उद्योग अपनी जीत बता रहा है। इसके अलावा ग्रिड से जुड़ने की प्रक्रिया आसान बनाने वाले द्विदलीय अनुमति सुधार विधेयक पर भी संसद में चर्चा जारी है।

## उद्योग के भीतर मतभेद और भविष्य की दिशा
आक्रामक विज्ञापनों की इस नई नीति को लेकर सौर उद्योग के सभी हितधारक पूरी तरह सहमत नहीं हैं। 'टी1 एनर्जी' के रणनीतिक संचार कार्यकारी उपाध्यक्ष रसेल गोल्ड जैसे दिग्गजों को डर है कि जब रिपब्लिकन सांसद सौर ऊर्जा की उपयोगिता को धीरे-धीरे स्वीकार करने लगे हैं, तब उनके खिलाफ कठोर अभियान चलाना उल्टा पड़ सकता है। उनका मानना है कि रिपब्लिकन नेताओं को ऊर्जा की प्रचुरता और सस्ती दरों के आधार पर साथ लाना ज्यादा समझदारी भरा कदम है और उन्हें सीधे निशाना बनाना एक ऐतिहासिक भूल साबित हो सकता है।

इस बीच 'इन्वेस्ट इन टुमारो कोएलिशन' का नेतृत्व 'क्लीन चॉइस एनर्जी' के मुख्य कार्यकारी टॉम मैट्ज़ी, 'अलाइड क्लाइमेट कैपिटल' के पीटर डेविडसन और 'सिएरा क्लब' के पूर्व प्रमुख माइकल ब्रून जैसे दिग्गज कर रहे हैं। लार्सन ने इस समूह को प्रारंभिक दौर में साठ लाख डॉलर से अधिक का भारी वित्तीय सहारा दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुराने जमाने की तरह जीवाश्म ईंधनों को पूरी तरह खारिज करने की जगह अब ऊर्जा के दोनों स्रोतों को समानांतर रूप से स्वीकार करने का व्यावहारिक संदेश रूढ़िवादी क्षेत्रों में दिया जा रहा है। चुनावी मैदान में सख्त प्रहार और नीतिगत स्तर पर व्यावहारिक तालमेल का यह नया मिश्रण आने वाले समय में अमेरिकी ऊर्जा परिदृश्य को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी ऊर्जा नीतियों और राजनीतिक विज्ञापनों में आए इस कड़े बदलाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

- **बिजली की कीमतों पर असर:** डेटा केंद्रों और घरेलू उद्योगों की बढ़ती मांग के बीच सौर ऊर्जा की आपूर्ति बढ़ने से बिजली की दरों में स्थिरता आ सकती है। इससे लंबे समय में आम उपभोक्ताओं पर महंगे जीवाश्म ईंधनों का आर्थिक बोझ कम होने में मदद मिलेगी।
- **वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा प्रतिस्पर्धा:** अमेरिका में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगाए गए 15 प्रतिशत नए टैरिफ से अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव आएगा। विदेशी सोलर उपकरणों की कीमतों में इजाफे से स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने वाली कंपनियों को बड़ा संबल मिलेगा।
- **राजनीतिक अभियानों का नया स्वरूप:** पर्यावरण से जुड़े संगठन अब नरम प्रचार छोड़ कर सीधे राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की रणनीति अपना रहे हैं। भविष्य के चुनावों में नीतिगत विरोध करने वाले नेताओं को अपने ही खेमे के भीतर कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
- **तकनीकी बुनियादी ढांचे की मजबूती:** एआई और डेटा केंद्रों के लिए तत्काल भारी मात्रा में बिजली उपलब्ध कराने में सौर ऊर्जा की भूमिका केंद्रीय होती जा रही है। इससे तेज गति से चलने वाले डेटा केंद्रों और डिजिटल सेवाओं के विस्तार को आवश्यक ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
सौर ऊर्जा समूहों द्वारा परंपरागत शांतिपूर्ण तरीकों को छोड़कर आक्रामक चुनावी रणनीतियों को अपनाने के पीछे कई ठोस कारण और परिस्थितियां रही हैं।

- **जीवाश्म ईंधन लॉबी का पुराना दबदबा:** पारंपरिक तेल और गैस कंपनियां दशकों से राजनीति में अरबों डॉलर खर्च करके अपने पक्ष में नीतियां बनवाती रही हैं। स्वच्छ ऊर्जा समर्थकों ने महसूस किया कि केवल पर्यावरण की बात करने से वे विधायी स्तर पर पीछे छूटते जा रहे हैं।
- **बिजली की अप्रत्याशित बढ़ती मांग:** एआई डेटा केंद्रों के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की अस्थिरता ने अमेरिका के भीतर ऊर्जा की भारी किल्लत पैदा कर दी है। चूंकि सौर संयंत्र बहुत कम समय में तैयार किए जा सकते हैं, इसलिए इसे त्वरित समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
- **चीन के साथ ऊर्जा क्षेत्र की होड़:** चीन ने पिछले साल 315 गीगावाट सौर ऊर्जा जोड़कर अपनी बढ़त मजबूत कर ली है। अमेरिकी रणनीतिकारों ने इस अंतर को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बनाकर कंजरवेटिव हलकों में सौर ऊर्जा का समर्थन जुटाने का हथियार बनाया।
- **पारंपरिक प्राथमिकताओं में हार का डर:** कई प्रभावशाली रिपब्लिकन नेता सौर परियोजनाओं को सब्सिडी से वंचित करने और नए परमिट रोकने में लगे थे। इस गतिरोध को तोड़े बिना नई परियोजनाओं को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ना असंभव होता जा रहा था।

## सवाल-जवाब

### 1. इन्वेस्ट इन टुमारो कोएलिशन क्या है?
यह सौर ऊर्जा का समर्थन करने वाली एक राजनीतिक एक्शन कमेटी (पीएसी) है, जो नवीकरणीय ऊर्जा का विरोध करने वाले नेताओं के खिलाफ आक्रामक विज्ञापन अभियान चलाती है।

### 2. इस पीएसी को सबसे ज्यादा आर्थिक सहयोग किसने दिया है?
ब्लॉकचेन वित्तीय कंपनी रिपल के सह-संस्थापक और क्रिप्टो अरबपति क्रिस लार्सन ने इस समूह को शुरुआती दौर में लगभग 60 लाख डॉलर का बड़ा फंड दिया है।

### 3. प्राथमिक चुनावों में इस पीएसी ने किन प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया?
इस गुट ने रिपब्लिकन नेता चिप रॉय, राल्फ नॉर्मन और एंडी ओगल्स के साथ-साथ डेमोक्रेटिक गवर्नर डैन मैकी के खिलाफ कड़े विज्ञापन चलाए, जिसमें इन सभी को अपनी प्राथमिक दौड़ में हार का सामना करना पड़ा।

### 4. रिपब्लिकन मतदाताओं के बीच सौर ऊर्जा को कैसे पेश किया जा रहा है?
पर्यावरण और जलवायु के बजाय इसे चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा, डेटा केंद्रों की बिजली जरूरत और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में पेश किया जा रहा है।

### 5. चीन ने पिछले वर्ष कितनी सौर ऊर्जा अपने ग्रिड में जोड़ी?
चीन ने पिछले वर्ष अपने ग्रिड में 315 गीगावाट सौर ऊर्जा जोड़ी, जो अमेरिका द्वारा सभी ऊर्जा स्रोतों से जोड़ी गई कुल बिजली से लगभग छह गुना अधिक है।

### 6. क्या पूरा सौर उद्योग इस आक्रामक रणनीति से सहमत है?
नहीं, उद्योग के कुछ अधिकारियों का मानना है कि रिपब्लिकन नेताओं पर इस तरह हमला करने से वे दूर हो सकते हैं, जबकि कई नेता ऊर्जा प्रचुरता के कारण पहले से सौर ऊर्जा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

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