# विश्व मौसम विज्ञान संगठन की चेतावनी, फरवरी तक बना रहेगा अब तक का सबसे शक्तिशाली अल नीनो

> विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने ऐतिहासिक सुपर अल नीनो के फरवरी तक जारी रहने की लगभग 100% संभावना जताई है, जिससे 2027 तक वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड तोड़ सकता है।

**Type:** article · **Category:** विज्ञान · **Published:** 2026-09-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/science/world-meteorological-organization-ki-chetavani-pharavari-taka-bana-rahega-aba-taka-ka-sabase-shaktishali-el-ni-o-26908 · **Language:** Hindi
**Tags:** अल नीनो, मौसम विज्ञान, जलवायु परिवर्तन, तापमान रिकॉर्ड, ग्लोबल वार्मिंग, संयुक्त राष्ट्र, पर्यावरण

दुनिया भर में मौसम प्रणालियों की निगरानी करने वाली वैश्विक संस्था ने इस साल के भीषण अल नीनो को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अपने इतिहास का सबसे स्पष्ट और सटीक पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि इस बात की लगभग 100% संभावना है कि अल नीनो का यह दौर आगामी फरवरी तक बना रहेगा। संयुक्त राष्ट्र की इस प्रमुख मौसम और जलवायु एजेंसी की ओर से आई इतनी स्पष्ट प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि इस बार का अल नीनो कितना ऐतिहासिक और विनाशकारी रूप ले चुका है।

## वैश्विक जलवायु संस्थाओं की ऐतिहासिक चेतावनी
विश्व मौसम विज्ञान संगठन का कहना है कि यह पहला मौका है जब अल नीनो और ला नीना से जुड़ा कोई अपडेट इतने स्पष्ट और असंदिग्ध शब्दों में जारी किया गया है। एजेंसी के अनुसार यह अभूतपूर्व निश्चितता उसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और उन्नत मौसम मॉडल के बीच बने मजबूत तालमेल को दर्शाती है। अल नीनो एक प्राकृतिक रूप से घटने वाली समुद्री और वायुमंडलीय घटना है, जिसमें पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक गर्म हो जाता है। समुद्र के इस बदलाव से पूरी दुनिया में हवा के प्रवाह और बारिश के पैटर्न में भारी उथल-पुथल मच जाती है। वैज्ञानिक साल की शुरुआत से ही एक बड़े अल नीनो के विकसित होने की चेतावनी दे रहे थे, लेकिन ताजा आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि यह रिकॉर्ड इतिहास का सबसे मजबूत अल नीनो बनने जा रहा है।

## वैश्विक तापमान में उछाल और विनाशकारी प्रभाव
अल नीनो के प्रभाव अभी से पूरी दुनिया में महसूस किए जा रहे हैं और आने वाले महीनों में इनके और अधिक घातक होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वैज्ञानिक प्रमाण यह साफ दिखाते हैं कि हमारी पृथ्वी एक अनजाने और खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि समुद्र की सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है और दुनिया चरम मौसम की गंभीर चपेट में आ गई है। क्षेत्रीय मौसम में बदलाव के अलावा अल नीनो वायुमंडल में भारी मात्रा में तापीय ऊर्जा छोड़कर वैश्विक औसत तापमान को लगभग 0.1 से 0.2 डिग्री सेल्सियस (0.2 से 0.4 डिग्री फारेनहाइट) तक बढ़ा देता है। इस बार इसकी तीव्रता इतनी अधिक है कि यह साल दर्ज इतिहास का सबसे गर्म साल बनने की ओर अग्रसर है। चूंकि समुद्र से निकली गर्मी को पूरी जलवायु प्रणाली में घुलने में समय लगता है, इसलिए पूर्वानुमान जताया गया है कि साल 2027 इस साल से भी ज्यादा गर्म साबित हो सकता है।

## मानव निर्मित ग्लोबल वार्मिंग और गंभीर खतरे
यह अतिरिक्त तापीय उछाल मानव निर्मित ग्लोबल वार्मिंग के ऊपर एक बड़ा रेड अलर्ट बन गया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक अन्य रिपोर्ट में भी सचेत किया गया है कि आने वाले कुछ वर्षों में वैश्विक तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर सकती है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय कृषि और प्राकृतिक संसाधन के प्रसिद्ध जलवायु वैज्ञानिक डैनियल स्वैन का मानना है कि इस अल नीनो का आकार और इसके नतीजे इतने व्यापक हैं कि उनका पूरी तरह से सटीक आकलन करना फिलहाल नामुमकिन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना की तीव्रता के कारण अप्रत्याशित और भीषण मौसमी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। स्वैन के अनुसार, दीर्घकालिक ग्लोबल वार्मिंग को छोड़ दें तो वर्तमान में जीवित किसी भी व्यक्ति द्वारा अनुभव की जाने वाली यह संभवतः सबसे बड़ी जलवायु घटना है, जिसके बेहद गंभीर और नाटकीय परिणाम देखने को मिलेंगे।

## दुनिया भर में दिखने लगे अल नीनो के असर
यद्यपि अल नीनो अभी अपने चरम स्तर पर नहीं पहुंचा है, फिर भी दुनिया के कई हिस्सों में इसके विनाशकारी लक्षण दिखाई देने लगे हैं। हाल ही में अमेरिका ने दर्ज इतिहास की सबसे गर्म गर्मी का सामना किया है, जिसमें अल नीनो की बड़ी भूमिका रही। वहीं, अल नीनो के दौरान आमतौर पर सूखे रहने वाले इलाकों में जल संकट गहरा गया है। सूडान में नील नदी का जलस्तर घटने से वहां वर्षों से जारी भुखमरी का संकट और विकराल हो गया है, जबकि प्यूर्टो रिको में लंबे सूखे और बुनियादी ढांचे की विफलता के कारण पानी की सख्त राशनिंग लागू करनी पड़ी है। इसके अलावा, पूर्वी प्रशांत महासागर के गर्म होते पानी ने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और तटीय मत्स्य पालन उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है। एंटोनियो गुटेरेस ने जोर देकर कहा कि अब मुकाबला तेजी से बढ़ते जलवायु जोखिमों और हमारे पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के बीच है, जिसे हर हाल में जीतना होगा।

## इसका आप पर असर
इस ऐतिहासिक अल नीनो के मजबूत होने से आने वाले वर्ष में दुनिया भर में मौसम के मिजाज में बड़े बदलाव और रिकॉर्ड गर्मी देखने को मिलेगी।

- **भीषण गर्मी और स्वास्थ्य जोखिम:** रिकॉर्ड उच्च तापमान के कारण बिजली की मांग बढ़ेगी और गर्मी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम पैदा होंगे। अप्रत्याशित लू के कारण बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ सकता है।
- **खाद्य सुरक्षा और कीमतें:** कृषि और समुद्री मत्स्य पालन में व्यवधान के कारण दुनिया भर में खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ सकते हैं। प्रमुख कृषि क्षेत्रों में सूखे की वजह से खाद्यान्न आपूर्ति प्रभावित होगी।
- **जल संकट और राशनिंग:** प्रभावित क्षेत्रों में लंबे सूखे के कारण पानी की सख्त राशनिंग लागू करनी पड़ सकती है। स्थानीय प्रशासन जलाशयों को बचाने के लिए पानी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा सकता है।
- **चरम मौसम और तूफान:** वायुमंडलीय पैटर्न में बदलाव से अप्रत्याशित तूफानों और स्थानीय स्तर पर बाढ़ की घटनाएं बढ़ेंगी। तटीय और संवेदनशील इलाकों को आपातकालीन तैयारियों पर ध्यान देना होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. वर्तमान अल नीनो के कब तक जारी रहने की संभावना है?
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, इस अल नीनो के आगामी फरवरी तक जारी रहने की लगभग 100% संभावना है।

### 2. अल नीनो आमतौर पर वैश्विक तापमान को कितना बढ़ा देता है?
अल नीनो सामान्य तौर पर वायुमंडल में गर्मी छोड़कर वैश्विक औसत तापमान को लगभग 0.1 से 0.2 डिग्री सेल्सियस (0.2 से 0.4 डिग्री फारेनहाइट) तक बढ़ा देता है।

### 3. 2027 के और भी अधिक गर्म होने का अनुमान क्यों जताया गया है?
महासागर से वायुमंडल में निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी को पूरी जलवायु प्रणाली में फैलने में समय लगता है, इसलिए इसका अधिकतम असर 2027 में दिखाई देगा।

### 4. इस अल नीनो के कारण दुनिया में अब तक क्या प्रभाव देखे गए हैं?
अमेरिका में रिकॉर्ड गर्मी, सूडान में नील नदी के घटते जलस्तर से गहराता भुखमरी संकट, प्यूर्टो रिको में जल राशनिंग और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में मत्स्य पालन में भारी व्यवधान दर्ज किया गया है।

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