# बाइनेंस में 6.34 अरब डॉलर की रिकॉर्ड सेंधमारी का खुलासा, फर्जी इंटरव्यू और मालवेयर से कर्मचारियों को बनाया गया मोहरा

> दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस में हुई 6.34 अरब डॉलर की चोरी के तार फर्जी जॉब ऑफर और महीनों की सोची-समझी साजिश से जुड़े हैं, जहां कर्मचारियों के जरिए वॉलेट साइनिंग सिस्टम में घुसपैठ की गई थी।

**Type:** article · **Category:** साइबर सुरक्षा · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/security/binance-men-6-34-araba-dolara-ki-rikorda-sendhamari-ka-khulasa-pharji-intaravyu-aura-malaveyara-se-karmachariyon-ko-banaya-gaya-mo-55988 · **Language:** Hindi
**Tags:** बाइनेंस हैक, क्रिप्टोकरेंसी चोरी, साइबर सुरक्षा, उत्तर कोरिया हैकर्स, ट्रेडरट्रेटर, ब्लॉकचेन सुरक्षा, मालवेयर हमला, मनी लॉन्ड्रिंग

क्रिप्टोकरेंसी जगत की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार बाइनेंस ने अपने सिस्टम पर हुए विशालकाय हमले की शुरुआती जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है, जिसमें महज 20 मिनट के भीतर 6.34 अरब डॉलर मूल्य की डिजिटल संपत्ति गायब कर दी गई थी। मंगलवार को सामने आई इस आधिकारिक सुरक्षा समीक्षा के मुताबिक, यह कोई अचानक हुआ साधारण हमला नहीं था, बल्कि धोखेबाजों के एक सुव्यवस्थित जाल का नतीजा था। इसमें कंपनी के ही एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को फर्जी ऑनलाइन जॉब इंटरव्यू के झांसे में फंसाया गया, जिसके बाद उसके वर्क कंप्यूटर पर मालवेयर इंस्टॉल करवाया गया। वहां से घुसपैठियों ने कंपनी के आंतरिक नेटवर्क में अपनी पहुंच बनाई, एक अंदरूनी एआई टूल की खामियों का फायदा उठाया और आखिरकार वॉलेट साइनिंग सर्विस तक पहुंच बनाकर सामान्य निकासी नियमों को पूरी तरह बायपास कर दिया।

इस गंभीर सुरक्षा चूक पर कंपनी ने सार्वजनिक तौर पर खेद व्यक्त किया है। बाइनेंस ने अपने सुरक्षा दस्तावेज में स्पष्ट कहा कि यह घटना किसी भी सूरत में नहीं होनी चाहिए थी और इससे निवेशकों, कारोबारी साझेदारों तथा समूचे क्रिप्टो उद्योग में जो घबराहट और अनिश्चितता फैली है, उसके लिए वह माफी मांगती है। एक्सचेंज ने प्रभावित ग्राहकों और साझेदारों के नुकसान की भरपाई के लिए विशेष फंड अलग रख दिया है। इसके साथ ही जिन आंतरिक नेटवर्कों और सर्वरों पर हमलावरों ने सेंध लगाई थी, उन्हें पूरी तरह बदलकर नए सिरे से तैयार कर दिया गया है। कंपनी ने जोर देकर कहा कि यह कोई अकेला तकनीकी दोष या सामान्य ईमेल फ़िशिंग नहीं थी, बल्कि एक बहुस्तरीय संगठित साजिश थी।

## लगभग आधी रकम जब्त, बाकी को सफेद करने की जुगत
हमले के दौरान यद्यपि 6 अरब डॉलर से अधिक की डिजिटल संपत्ति बाइनेंस के हॉट वॉलेट्स से निकाल ली गई थी, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी उद्योग के विभिन्न मंचों की त्वरित प्रतिक्रिया के चलते इसका लगभग आधा हिस्सा तत्काल फ्रीज कराने में सफलता मिल गई। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि हैकर्स उस जमे हुए धन को अपने कब्जे में लेकर खर्च नहीं कर पाए। इसके बावजूद, अरबों डॉलर की भारी रकम अभी भी उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर्स के नियंत्रण में बनी हुई है। ये साइबर अपराधी अब चोरी किए गए सिक्कों को अलग-अलग रास्तों से घुमाकर ऐसी शक्ल में बदलने की जद्दोजहद में हैं, जहां से इन्हें सुरक्षित भुनाया जा सके। वित्तीय जानकारों और साइबर विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी रकम को पूरी तरह ठिकाने लगाने में कई महीनों का वक्त लग सकता है।

जांच विवरणों से पता चलता है कि 29 अक्टूबर को हुए इस अंतिम हमले के पीछे हैकर्स की महीनों की कड़ी मेहनत और गुप्त तैयारी शामिल थी। जैसे ही 10 से अधिक अलग-अलग ब्लॉकचेन नेटवर्कों पर मौजूद बाइनेंस के हॉट वॉलेट्स से फंड ट्रांसफर होना शुरू हुआ, ब्लॉकचेन ट्रैकिंग से जुड़ी कई स्वतंत्र एजेंसियों ने इसकी कड़ियां डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) के हैकर्स से जोड़ दीं। विशेष रूप से कुख्यात साइबर गिरोह ट्रेडरट्रेटर पर संदेह जताया गया, जिसने पिछले साल भी एक अन्य हमले में 1.5 अरब डॉलर से अधिक की चोरी को अंजाम दिया था। इसके तुरंत बाद, 31 अक्टूबर को एफबीआई ने भी औपचारिक तौर पर इस चोरी के तार ट्रेडरट्रेटर समूह से जोड़ दिए।

## इंजीनियरों के नेटवर्क को हथियार बनाकर सिस्टम में सेंध
साइबर सुरक्षा कंपनी सोफोस के थ्रेट इंटेलिजेंस के सीनियर डायरेक्टर राफे पिलिंग ने इस पूरे मामले पर अपनी तकनीकी राय साझा की है। राफे पिलिंग ने स्पष्ट किया कि बाइनेंस द्वारा दी गई जानकारी सीधे तौर पर ट्रेडरट्रेटर के पुराने काम करने के तौर-तरीकों से मेल खाती है। उनके अनुसार, हमलावरों ने केवल किसी एक वॉलेट की निजी चाबी नहीं चुराई, बल्कि उन्होंने पहले कंपनी के इंजीनियरों को निशाने पर लेकर उनके सिस्टम से समझौता कराया। उस पहुंच का उपयोग पूरे नेटवर्क के आंतरिक ढांचे को समझने और उसमें चुपचाप आगे बढ़ने के लिए किया गया, और अंततः उन प्रणालियों को ही विकृत कर दिया जो लेनदेन को अधिकृत करने का काम करती थीं।

हालांकि बाइनेंस ने अपने आधिकारिक बयान में ट्रेडरट्रेटर समूह का सीधा नाम लेने से परहेज किया है, लेकिन उसने एफबीआई द्वारा उत्तर कोरिया की ओर किए गए खुलासे का समर्थन किया है और स्वीकार किया है कि डीपीआरके के हैकर्स पहले भी उसे निशाना बनाने की कोशिश कर चुके हैं। कंपनी की सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अकेले साल 2026 के दौरान ही बाइनेंस की आंतरिक सुरक्षा टीम ने उत्तर कोरिया से जुड़े 57 संभावित साइबर खतरों की पहचान करके उन्हें समय रहते नाकाम किया था।

## जून से शुरू हुआ था जाल, फर्जी असाइनमेंट से हुआ शिकार
इस भीषण हमले की पहली कड़ी चालू वर्ष के जून महीने से जुड़ती है। बाइनेंस के अनुसार, उस वक्त एक कर्मचारी, जिसे इंजीनियर ए के रूप में दर्ज किया गया है, ने इंटरनेट पर खोज करते समय होमब्रू का एक छेड़छाड़ किया गया इंस्टॉलेशन डाउनलोड कर लिया था। हालांकि उस समय सुरक्षा प्रणालियों ने इस खतरे को पकड़कर निपटा दिया था, लेकिन उस कर्मचारी से जुड़ी निजी और तकनीकी जानकारियां हैकर्स के हाथ लग चुकी थीं।

इसके बाद सितंबर की शुरुआत में साजिश का दूसरा और अधिक खतरनाक दौर शुरू हुआ। कंपनी के एक अन्य सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ, इंजीनियर बी, से एक मान्यता प्राप्त जॉब-हंटिंग प्लेटफॉर्म पर संपर्क साधा गया। इसके बाद एक फर्जी रिक्रूटर ने उसका वीडियो इंटरव्यू लिया। सामने वाले ने खुद को असली और विश्वसनीय दिखाने के लिए वास्तविक दिखने वाले सोशल मीडिया प्रोफाइल और व्यक्तिगत तस्वीरें तक साझा कीं। प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इंजीनियर बी का दूसरा इंटरव्यू ऑनलाइन चैट के जरिए आयोजित किया गया। इस बातचीत के अंतिम चरण में, इंजीनियर बी को एक तथाकथित टेस्ट असाइनमेंट डाउनलोड करने को कहा गया, जिसमें एक दुर्भावनापूर्ण कोड रिपॉजिटरी छिपी हुई थी। इंजीनियर ने उस फाइल को अपने काम वाले कंप्यूटर पर चला दिया।

इस मालवेयर में सुरक्षा जांच से बचने और अपनी पहचान छुपाने की बेहद जटिल तकनीकें इस्तेमाल की गई थीं। इसने सिस्टम में पहले से मौजूद एक वैध डेवलपमेंट टूल के हिस्से को अपनी नकली और दुर्भावनापूर्ण फाइल से बदल दिया। इसके जरिए हमलावर दूर बैठे सर्वर से कमांड निष्पादित करने लगे और बाहरी सर्वर से गुप्त संपर्क स्थापित कर लिया। हमलावरों ने अपने किसी भी पदचिह्न को न छोड़ने के लिए सभी मानक तरकीबों का इस्तेमाल किया था।

## 29 अक्टूबर की रात 20 मिनट में उड़ाए अरबों डॉलर
अक्टूबर के अंतिम दिनों में, वास्तविक चोरी से लगभग एक सप्ताह पहले, हैकर्स ने इंजीनियर बी के कंप्यूटर के जरिए इंजीनियर ए के उस वॉलेट का नियंत्रण हासिल कर लिया, जिसमें महीनों पहले सेंध लगी थी। इसके साथ ही उन्होंने एक अन्य वॉलेट सॉफ्टवेयर इंजीनियर सी के सिस्टम में भी पैठ बना ली। इसके बाद 29 अक्टूबर को हमलावरों ने चुराए गए क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके सॉफ्टवेयर इंजीनियर सी के कंप्यूटर पर सीधा लॉगिन किया और अंतिम हमला शुरू कर दिया।

उस शाम पूरी वारदात पलक झपकते ही पूरी कर ली गई। हमलावरों ने आंतरिक वॉलेट साइनिंग सर्विस के अनधिकृत उपयोग से सामान्य निकासी प्रक्रियाओं और सुरक्षा जांचों को दरकिनार करते हुए लगातार लेनदेन शुरू कर दिए। सोफोस के राफे पिलिंग ने रेखांकित किया कि ट्रेडरट्रेटर समूह अपनी योजनाओं को बारीकी से गढ़ने और लक्षित कंपनी की आंतरिक कार्यप्रणाली को गहराई से समझने में माहिर है। उन्होंने कहा कि शुरुआती घुसपैठ केवल पहला कदम होती है, जबकि वास्तविक हमला इस बात पर आधारित होता है कि पीड़ित संगठन असल में पैसों का लेन-देन कैसे करता है।

## हथियार कार्यक्रमों में क्रिप्टो फंड के इस्तेमाल की आशंका
टीआरएम लैब्स के आंकड़ों से पता चलता है कि 2017 की शुरुआत से लेकर अब तक उत्तर कोरिया से जुड़े हैकरों ने लगभग 12 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी चुराई है, जिसमें से आधे से अधिक हिस्सा केवल इसी वर्ष के हमलों से हासिल किया गया है। यद्यपि यह रकम बहुत बड़ी है, लेकिन यह साफ नहीं है कि इसमें से कितना धन वास्तव में उत्तर कोरिया की सीमाओं तक पहुंच पाता है, क्योंकि कई एक्सचेंज ऐसे लेनदेनों को समय रहते ब्लॉक कर देते हैं और संपत्तियां फ्रीज हो जाती हैं।

क्रिप्टो ट्रैकिंग एजेंसी एलिप्टिक के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक टॉम रॉबिन्सन ने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि इस हमले के बाद पैसों की लॉन्ड्रिंग का काम अत्यधिक जटिल और संभवतः पूरी तरह स्वचालित रूप से किया गया है। रॉबिन्सन के अनुसार, शुरुआती साढ़े तीन दिनों में ही 11 ब्लॉकचेन नेटवर्कों पर लगभग 12,000 वॉलेट्स का इस्तेमाल किया गया, जिसमें औसतन हर 25 सेकंड में एक नया वॉलेट सक्रिय हुआ और 40,000 से अधिक अलग-अलग लेनदेन दर्ज किए गए।

अमेरिका, दक्षिण कोरिया और नौ अन्य देशों के विशेषज्ञों वाली मल्टीलेटरल सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम की पिछले साल प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि इस चुराई गई संपत्ति को सफलतापूर्वक नकदी में बदल लिया जाता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि इसका उपयोग उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार विकास और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को वित्तीय मदद देने में किया जाएगा। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि यह गिरोह चीनी भूमिगत बैंकिंग और वहां मौजूद मददगारों पर बहुत अधिक निर्भर करता है, यद्यपि कुछ मामलों में अन्य देशों के बिचौलियों का भी सहारा लिया जाता है।

## इसका आप पर असर
बाइनेंस पर हुआ यह अभूतपूर्व हमला डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था और व्यक्तिगत क्रिप्टो धारकों के जोखिम प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

- **क्रिप्टो निवेशकों पर असर:** यद्यपि बाइनेंस ने नुकसान की भरपाई अपने सुरक्षित फंड से करने का आश्वासन दिया है, फिर भी एक्सचेंज पर सुरक्षा जांच और निकासी प्रक्रियाओं में कड़ी निगरानी देखने को मिल सकती है। इसके चलते सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए फंड ट्रांसफर में अधिक समय और सत्यापन की अतिरिक्त शर्तें लागू हो सकती हैं।
- **तकनीकी पेशेवरों के लिए सबक:** आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के लिए फर्जी ऑनलाइन नौकरियों और कोडिंग असाइनमेंट के जरिए होने वाले फिशिंग हमले सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं। किसी भी अपरिचित कंपनी या इंटरव्यूअर द्वारा भेजे गए कोड और फाइलों को अपने वर्क कंप्यूटर पर चलाना कंपनी के पूरे नेटवर्क को खतरे में डाल सकता है।
- **बाजार स्थिरता और नियमन:** अरबों डॉलर की चोरी और उसे विभिन्न नेटवर्कों पर घुमाने की घटना से वैश्विक वित्तीय नियामकों द्वारा क्रिप्टो एक्सचेंजों पर सख्त नियम थोपने की संभावना बढ़ गई है। आने वाले महीनों में विभिन्न देशों की सरकारें हॉट वॉलेट्स और लेनदेन प्रमाणीकरण पर और कड़े सुरक्षा मानक लागू कर सकती हैं।
- **वैश्विक सुरक्षा चिंताएं:** चोरी किए गए फंड का एक बड़ा हिस्सा अभी भी ब्लैक मार्केट और विदेशी हवाला नेटवर्क के जरिए भुनाए जाने का जोखिम बना हुआ है। यदि यह धन सुरक्षित बच निकलता है, तो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को धता बताकर प्रतिबंधित हथियारों और मिसाइल कार्यक्रमों को वित्तीय ताकत मिलने का खतरा बढ़ जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
बाइनेंस में हुई इस भारी चोरी की मुख्य वजह तकनीकी सुरक्षा में अचानक आई खराबी नहीं, बल्कि महीनों तक सुनियोजित तरीके से कर्मचारियों को सामाजिक झांसे में फंसाना और अंदरूनी पहुंच हासिल करना था। हमलावरों ने सुरक्षा चक्रव्यूह को सीधे तोड़ने के बजाय कर्मचारियों के कंप्यूटरों को जरिया बनाकर वित्तीय स्वीकृति प्रणाली पर कब्जा किया।

- **फर्जी रिक्रूटमेंट के जरिए मालवेयर इंस्टॉलेशन:** हमलावरों ने वास्तविक दिखने वाले प्रोफाइल का इस्तेमाल कर इंजीनियर बी का साक्षात्कार लिया और परीक्षण कार्य के नाम पर घातक कोड डाउनलोड करवाया। इस मालवेयर ने सिस्टम के वास्तविक डेवलपर टूल को बदलकर हमलावरों को कंप्यूटर पर पूरा नियंत्रण दे दिया।
- **अंदरूनी एआई टूल और सिस्टम का दुरुपयोग:** नेटवर्क में प्रवेश करने के बाद साइबर अपराधियों ने कंपनी के आंतरिक एआई टूल और अन्य कमजोरियों का लाभ उठाकर आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का गहन नक्शा तैयार किया। इससे वे बिना किसी अलार्म के एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम में आगे बढ़ते रहे।
- **वॉलेट साइनिंग सर्विस पर अनधिकृत नियंत्रण:** हमलावरों ने पूर्व में प्रभावित इंजीनियरों के लॉगिन विवरण जुटाए और सीधे सॉफ्टवेयर इंजीनियर सी के कंप्यूटर पर कब्जा कर लिया। इसी कंप्यूटर से उन्होंने वॉलेट हस्ताक्षर सेवा का अनधिकृत इस्तेमाल कर 20 मिनट के भीतर सामान्य निकासी जांच को दरकिनार करते हुए फंड ट्रांसफर कर दिया।
- **ट्रेडरट्रेटर की दीर्घकालिक कार्यशैली:** यह हमला अचानक नहीं हुआ बल्कि जून से लेकर अक्टूबर तक की लंबी योजना का हिस्सा था। उत्तर कोरिया से जुड़ा यह समूह पीड़ित कंपनी के धन भेजने की पूरी प्रक्रिया को बारीकी से समझने के बाद ही अंतिम हमला बोलता है।

## सवाल-जवाब

### 1. बाइनेंस से कुल कितनी रकम चोरी हुई और यह हमला कितनी देर चला?
हमलावरों ने महज 20 मिनट के भीतर बाइनेंस के हॉट वॉलेट्स से 6.34 अरब डॉलर की भारी भरकम रकम उड़ा ली थी।

### 2. हैकर्स ने बाइनेंस के अंदरूनी सिस्टम में कैसे प्रवेश किया?
हैकर्स ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर का फर्जी जॉब इंटरव्यू लेकर उसे असाइनमेंट के नाम पर मालवेयर से युक्त कोड फाइल डाउनलोड करवा दी थी।

### 3. क्या चोरी की गई सारी रकम हैकर्स के कब्जे में सुरक्षित पहुंच गई है?
नहीं, क्रिप्टो उद्योग की त्वरित कार्रवाई से लगभग आधा फंड तुरंत फ्रीज कर दिया गया, हालांकि बाकी अरबों डॉलर अभी भी हैकर्स के पास हैं।

### 4. इस हमले के पीछे किस संगठन या देश का हाथ माना जा रहा है?
एफबीआई और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस हमले के तार उत्तर कोरिया से जुड़े कुख्यात हैकिंग समूह ट्रेडरट्रेटर से जोड़े हैं।

### 5. क्या बाइनेंस उपयोगकर्ताओं को इस चोरी से कोई वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा?
बाइनेंस ने स्पष्ट किया है कि उसने नुकसान की भरपाई के लिए विशेष फंड अलग रख दिया है और आंतरिक प्रणालियों को पूरी तरह बदल दिया है।

### 6. चोरी की गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए हैकर्स क्या तरीका अपना रहे हैं?
हैकर्स ने शुरुआती साढ़े तीन दिनों में ही 11 ब्लॉकचेन पर करीब 12,000 वॉलेट्स और 40,000 से अधिक स्वचालित लेनदेनों का सहारा लिया है।

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