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  "type": "article",
  "title": "चीन में कॉर्पोरेट सॉफ्टवेयर बना ठगों का हथियार, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स और वेबेक्स के जरिए लाखों की चपत",
  "summary": "चीन में साइबर जालसाज माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, सिस्को वेबेक्स और जोहो क्लिक जैसे एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके लोगों से लाखों डॉलर ठग रहे हैं। वर्कप्लेस ऐप्स पर भरोसा और प्राइवेसी फीचर्स के दुरुपयोग से यह नया पिग-बुचरिंग स्कैम तेजी से फैल रहा है।",
  "content": "चीन में साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन वित्तीय ठगी के लिए एक नया और खतरनाक तरीका ढूंढ निकाला है। रोजाना इस्तेमाल होने वाले सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के बजाय जालसाज अब माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, सिस्को वेबेक्स और जोहो क्लिक जैसे अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन प्रोफेशनल और भरोसेमंद वर्कप्लेस प्लेटफॉर्म्स की आड़ में भोले-भाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है और उनसे लाखों डॉलर की ठगी की जा रही है। किसी स्थापित बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनी के नाम से जुड़ा होने के कारण लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते हैं और अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं।\n\nभरोसे की आड़ में पिग-बुचरिंग स्कैम का जाल\nइस पूरे मामले की गंभीरता तब सामने आई जब झाओ नाम की एक पीड़िता ने अपनी आपबीती साझा की। प्राइवेसी कारणों से केवल अपना अंतिम नाम बताने वाली झाओ ने बताया कि जब उनसे किसी अनजान व्यक्ति ने कम्युनिकेट करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट टीम्स पर आने को कहा, तो उन्हें बिल्कुल भी शक नहीं हुआ। चूंकि वह इस ऐप का इस्तेमाल पहले भी कर चुकी थीं और यह दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विकसित किया गया है, इसलिए उन्होंने इस पर आंख मूंदकर भरोसा कर लिया।\n\nशुरुआत में जालसाज ने सामान्य बातचीत की और धीरे-धीरे झाओ का विश्वास हासिल किया। बाद में उसने उनके साथ भविष्य के सपने साझा करने का नाटक किया और उन्हें क्रिप्टो करेंसी इनवेस्टमेंट प्रोजेक्ट में पैसे लगाने की सलाह दी। ठग ने दावा किया कि शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने की तुलना में इस क्रिप्टो प्रोजेक्ट से बेहद कम समय में काफी ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। झाओ इस मौके को देखकर बहुत उत्साहित हो गईं। उन्होंने ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में कई बैंकों से लोन ले लिया और सारा पैसा उस फर्जी प्रोजेक्ट में इनवेस्ट कर दिया। इसके कुछ ही दिनों बाद वह व्यक्ति उनका सारा पैसा लेकर अचानक गायब हो गया। जब झाओ ने पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाही, तो वह उस टीम्स अकाउंट में दोबारा लॉग इन ही नहीं कर पाईं, जिसके जरिए बातचीत हुई थी। इस वजह से वह पुलिस को चैट हिस्ट्री या अन्य डिजिटल सबूत भी नहीं दे सकीं।\n\nजब झाओ ने इस घटना का जिक्र सोशल मीडिया पर किया, तो उन्हें पता चला कि वह अकेली पीड़िता नहीं हैं। चीन भर से दर्जनों ऐसे लोग सामने आए जो बिल्कुल इसी तरह की धोखाधड़ी का शिकार हुए थे। पीड़ितों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, लोगों ने इस स्कैम में 1,500 डॉलर से लेकर 3,00,000 डॉलर तक की रकम गंवाई है। इनमें से केवल एक ही व्यक्ति अपने गंवाए हुए पैसों में से कुछ हिस्सा वापस पा सका, क्योंकि उसने आरोपी के बैंक अकाउंट को ट्रैक कर लिया था।\n\nएंटरप्राइज फीचर्स का गलत फायदा उठा रहे ठग\nइस धोखाधड़ी का शिकार हुए लगभग सभी पीड़ितों की कहानी एक जैसी ही है। जालसाज अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर लोगों से संपर्क साधते हैं और फिर किसी बहाने से उन्हें माइक्रोसॉफ्ट टीम्स डाउनलोड करने और उनके द्वारा दिए गए क्रेडेंशियल्स से लॉग इन करने के लिए कहते हैं। यह तरीका चीन में इतना आम हो चुका है कि स्थानीय पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बाकायदा अलर्ट जारी करना पड़ा है। कुछ स्थानीय पुलिस ब्यूरो ने तो सार्वजनिक चेतावनी जारी करते हुए माइक्रोसॉफ्ट टीम्स का नाम लिया है और इसे जालसाजी में इस्तेमाल होने वाला ऐप करार दिया है। इसके अलावा चीन के प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म माईमाई ने बताया कि अगर उनके मैसेजिंग सिस्टम में 'टीम्स' या 'स्काइप' जैसे हाई-रिस्क कीवर्ड्स पाए जाते हैं, तो यूजर को तुरंत चेतावनी भेजी जाती है।\n\nसाइबर अपराधी इन कॉर्पोरेट ऐप्स के एंटरप्राइज फीचर्स का बेहद शातिर तरीके से फायदा उठाते हैं। वे खुद एक फर्जी ऑर्गनाइजेशन या कंपनी का अकाउंट बनाते हैं और अपने टारगेट किए गए पीड़ितों के लिए क्रेडेंशियल्स जनरेट करके उन्हें भेजते हैं। चूंकि पूरे ऑर्गनाइजेशन का एडमिन कंट्रोल जालसाजों के पास होता है, इसलिए जैसे ही ठगी का काम पूरा होता है, वे पीड़ित का अकाउंट तुरंत डीएक्टिवेट कर देते हैं। अकाउंट बंद होते ही पीड़िता के पास से पूरी चैट हिस्ट्री और डेटा गायब हो जाता है, जिससे पुलिस या जांच एजेंसियों के लिए सबूत जुटाना बेहद मुश्किल हो जाता है।\n\nपीड़ितों को इस अजीब सेटअप पर शक न हो, इसके लिए ठग अलग-अलग बहाने बनाते हैं। कभी वे कहते हैं कि वे अपनी कंपनी के लैपटॉप या वर्क डिवाइस से काम कर रहे हैं जिसमें सिर्फ अप्रूव्ड ऐप्स ही चलते हैं, तो कभी वे यह दावा करते हैं कि उन्होंने सिर्फ उन दोनों के बीच प्राइवेसी और सीक्रेट बातचीत के लिए यह नया टीम्स अकाउंट तैयार किया है। झाओ ने जब आरोपी से पूछा कि वह चीन के सबसे लोकप्रिय ऐप वीचैट का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहा, तो उसने बहाना बनाया कि वर्क प्रोजेक्ट पर होने की वजह से उसके सहकर्मी वीचैट मैसेज देख सकते हैं, इसलिए टीम्स उनका गुप्त ठिकाना है।\n\nएप्लिकेशन स्टोर पर शिकायतों की बाढ़\nचीन में ऐपल के ऐप स्टोर पर माइक्रोसॉफ्ट टीम्स के रिव्यू सेक्शन को देखने से पता चलता है कि यूजर्स लंबे समय से इस खतरे के बारे में चेतावनी दे रहे थे। पिछले 18 महीनों में चीनी ऐप स्टोर पर टीम्स के 500 रिव्यूज का विश्लेषण करने पर पाया गया कि उनमें से 30 प्रतिशत रिव्यूज में यूजर्स ने सीधे तौर पर स्कैम और धोखाधड़ी की शिकायत की थी। ऐप पर स्कैम से जुड़ी सबसे पुरानी समीक्षा साल 2022 की पाई गई थी।\n\nइसी साल जनवरी में लिखे गए एक रिव्यू में एक यूजर ने दुख जताते हुए लिखा था कि जालसाजों ने संपर्क साधने के लिए उससे यह ऐप रजिस्टर करवाया और उससे 14.8 लाख आरएमबी (लगभग 2,20,000 डॉलर) ठग लिए। यूजर ने चेतावनी देते हुए लिखा था कि यह निश्चित रूप से एक 'पिग-बुचरिंग' स्कैम था और लोगों को ऐसे झांसों से बेहद सावधान रहने की जरूरत है।\n\nटेक कंपनियों के कड़े कदम और बदलाव\nइस पूरे मामले पर माइक्रोसॉफ्ट के डिजिटल क्राइम डिविजन के वैश्विक प्रमुख स्टीवन मसाडा ने एक बयान जारी कर कहा कि जालसाज नियमित रूप से सोशल इंजीनियरिंग स्कीम चलाने के लिए स्थापित ब्रांड्स और कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग करते हैं। कंपनी ऐसी गतिविधियों की लगातार जांच करती है, अपनी नीतियों का उल्लंघन करने वाले खातों पर कार्रवाई करती है और धोखाधड़ी की पहचान करने वाले सुरक्षा तंत्र को मजबूत बना रही है।\n\nजून के महीने से माइक्रोसॉफ्ट ने चीन में टीम्स यूजर्स के लिए एक सामान्य चेतावनी बैनर दिखाना शुरू किया है, जिसमें आम स्कैम के प्रति सचेत रहने और संवेदनशील जानकारी साझा न करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही कंपनी ने चीन में टीम्स का पर्सनल वर्जन बंद कर दिया है और अब यह सेवा वहां केवल एंटरप्राइज खातों के माध्यम से ही उपलब्ध है। झाओ ने भी बताया कि मई में जब उनके साथ ठगी हुई थी तब ऐप में कोई चेतावनी नहीं दिखती थी, लेकिन अगस्त में जब उन्होंने दोबारा उस ऐप का इस्तेमाल किया तो स्क्रीन पर प्राइवेसी और सुरक्षा संबंधी अलर्ट मैसेज दिखाई देने लगे थे।\n\nसिस्को वेबेक्स और जोहो क्लिक भी निशाने पर\nचीनी सोशल मीडिया पर सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, यह समस्या सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट टीम्स तक सीमित नहीं है। सिस्को के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप वेबेक्स और भारतीय सॉफ्टवेयर दिग्गज जोहो के वर्कप्लेस ऐप क्लिक का इस्तेमाल करके भी इसी तरह की ठगी की जा रही है। फरवरी 2025 से ऐपल के चीनी ऐप स्टोर पर वेबेक्स के 150 से अधिक रिव्यूज का विश्लेषण किया गया, जिसमें से 71 प्रतिशत रिव्यूज में प्लेटफॉर्म पर हुए स्कैम का जिक्र था।\n\nदूसरी ओर जोहो के प्रवक्ता सैम वंडर्ल ने स्वीकार किया कि कंपनी ने जोहो क्लिक का इस्तेमाल करके पीड़ितों को ठगने के कुछ मामलों की पहचान की है। जोहो ने अपनी आंतरिक जांच के आधार पर संदिग्ध खातों का पता लगाया। 27 अगस्त तक जोहो ने चीन में क्लिक के लिए ऑनलाइन भुगतान बंद कर दिया, संदिग्ध जालसाजों द्वारा बनाए गए सभी खातों को निलंबित कर दिया और चीन में क्लिक के मुफ्त संस्करण को पूरी तरह से बंद करने की योजना बनाई है।\n\nपश्चिम के ऐप्स की सुरक्षा खामियां\nचीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे ज़ियाओहोंगशू और दोयिन पर दर्जनों पीड़ितों ने बताया कि ठग हर जगह नए शिकार की तलाश में रहते हैं। वे कभी जॉब रिक्रूटर, कभी मकान किराए पर लेने वाले किराएदार, कभी टिंडर पर संभावित पार्टनर तो कभी चीनी फैक्ट्रियों से सामान खरीदने वाले अंतरराष्ट्रीय खरीदार बनकर लोगों से जुड़ते हैं।\n\nपश्चिमी कॉर्पोरेट ऐप्स साइबर अपराधियों के लिए बेहद मुफीद साबित हो रहे हैं। टेलीग्राम या व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म चीन में ब्लॉक हैं, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट टीम्स और वेबेक्स पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इसके अलावा इनमें स्क्रीन शेयरिंग और रिमोट कंट्रोल जैसे एडवांस टूल्स मौजूद हैं, जिनकी मदद से ठग पीड़ित के डिवाइस पर पूरा नियंत्रण पा लेते हैं। न्यूयॉर्क में रहने वाले चीनी सॉफ्टवेयर इंजीनियर टैन चेनक्सिन ने बताया कि उन्हें अमेरिकी सीमा शुल्क और चीनी पुलिस की संयुक्त जांच का झांसा देकर वेबेक्स डाउनलोड करने को कहा गया था। हालांकि उन्होंने समय रहते सतर्कता बरती और पैसे ट्रांसफर करने से मना कर दिया। चीन के घरेलू ऐप्स जैसे वीचैट में कीवर्ड डिटेक्शन सिस्टम काफी सख्त होता है, जबकि पश्चिमी ऐप्स इस तरह की धोखाधड़ी से निपटने के लिए उतने तैयार नजर नहीं आते।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर ऑनलाइन और कॉर्पोरेट टूल्स का उपयोग करने वाले सभी इंटरनेट यूजर्स के लिए एक बड़ी चेतावनी है।\n\n• भारत में: किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर वर्कप्लेस ऐप डाउनलोड करने या दिए गए लॉगिन क्रेडेंशियल्स का उपयोग करने से बचें। अपनी निजी जानकारी और स्क्रीन शेयरिंग कभी न करें।\n• चीन में: स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने सलाह दी है कि टीम्स, वेबेक्स या क्लिक पर अनजान लोगों से मिली निवेश सलाह पर तुरंत विश्वास न करें और संदिग्ध खातों की रिपोर्ट करें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ठग बातचीत के लिए माइक्रोसॉफ्ट टीम्स का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?\nक्योंकि माइक्रोसॉफ्ट एक भरोसेमंद ब्रांड है और इसके एंटरप्राइज फीचर्स से ठग आसानी से अकाउंट डिलीट करके चैट सबूत मिटा सकते हैं।\n\n2. इस स्कैम में लोगों को कितना नुकसान हुआ है?\nपीड़ितों ने 1,500 डॉलर से लेकर 3,00,000 डॉलर तक की रकम गंवाई है, जिसमें एक मामले में 14.8 लाख आरएमबी की ठगी हुई।\n\n3. माइक्रोसॉफ्ट ने इस धोखाधड़ी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?\nमाइक्रोसॉफ्ट ने चीन में पर्सनल टीम्स बंद कर दिया है, सुरक्षा चेतावनी बैनर जोड़े हैं और केवल एंटरप्राइज खातों की अनुमति दी है।\n\n4. क्या टीम्स के अलावा अन्य ऐप्स पर भी यह स्कैम हुआ है?\nहां, सिस्को के वेबेक्स और जोहो के क्लिक ऐप पर भी यूजर्स के साथ इसी तरह की जालसाजी की खबरें सामने आई हैं।",
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  "category": "साइबर सुरक्षा",
  "publishedAt": "2026-08-28",
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