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  "type": "article",
  "title": "क्लैरिटीचेक के अनसिक्योर्ड क्लाउड सर्वर से 450 GB फेशियल डेटा लीक, निजी जानकारियां जोखिम में",
  "summary": "ऑनलाइन पीपल फाइंडर प्लेटफॉर्म क्लैरिटीचेक के एक असुरक्षित क्लाउड स्टोरेज बकेट में 450 GB फेशियल इमेज और निजी डेटा खुला पाया गया, जिससे लाखों लोगों की प्राइवेसी पर खतरा मंडरा रहा है।",
  "content": "डिजिटल पहचान और ऑनलाइन सर्च टूल के इस दौर में व्यक्तिगत प्राइवेसी को लेकर एक बड़ा खतरा सामने आया है। व्यक्तियों की खोज करने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म क्लैरिटीचेक का एक विशाल डेटाबेस बिना किसी पासवर्ड या सिक्योरिटी प्रोटेक्शन के इंटरनेट पर खुला पड़ा पाया गया। स्वतंत्र सुरक्षा शोधकर्ता जेरेमिया फाउलर की पड़ताल के मुताबिक, असुरक्षित अमेज़न S3 स्टोरेज बकेट में लगभग 450 GB आकार की तस्वीरें मौजूद थीं। इस डेटाबेस में वयस्कों, किशोरों और छोटे बच्चों की प्रोफाइल फोटो, स्क्रीनशॉट और अन्य प्रकार की तस्वीरें शामिल थीं। ये तमाम फाइलों वाले फोल्डर \"faces\" और \"profiles\" नाम से बने हुए थे, जिन्हें कंपनी की वेबसाइट के पब्लिक कोड में मौजूद यूआरएल के जरिए इंटरनेट पर कोई भी आसानी से एक्सेस कर सकता था।\n\nपीपल फाइंडर प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और फेशियल सर्च सुविधा\nक्लैरिटीचेक उन कई वेबसाइटों में शामिल है जो हाल के वर्षों में इंटरनेट पर लोगों की पहचान उजागर करने के दावे के साथ उभरी हैं। ये टूल वेब सर्वर, सार्वजनिक रिकॉर्ड और विभिन्न डेटाबेस को खंगालकर किसी भी व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाने का दावा करते हैं। प्लेटफॉर्म का दावा है कि वह फोन नंबर, ईमेल एड्रेस, व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर (VIN) और नाम के जरिए सर्च चला सकता है। इसके अलावा, इसकी फोटो-सर्च सेवा का दावा है कि वह किसी भी तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति की पहचान कर सकती है और महज कुछ सेकंड में उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल ढूंढ सकती है।\n\nजब इस सिस्टम के जरिए फेशियल इमेज सर्च का परीक्षण किया गया, तो प्लेटफॉर्म पहले चेहरे के लैंडमार्क्स को स्कैन करने और चेहरे की बनावट का नक्शा तैयार करने का दावा करता है। इसके बाद वह वेब पर मौजूद अन्य तस्वीरों से उसका मिलान करता है। शुल्क का भुगतान करने पर यह सेवा किसी व्यक्ति का पूरा नाम, पता, लोकेशन हिस्ट्री, सार्वजनिक उपस्थिति, तस्वीरें, वीडियो, सोशल मीडिया अकाउंट और यहां तक कि छिपे हुए डेटिंग प्रोफाइल तक की जानकारी देने वाला रिपोर्ट तैयार करती है।\n\nमहीनों तक असुरक्षित रहा डेटा और अनधिकृत एक्सेस की आशंका\nसुरक्षा शोधकर्ता जेरेमिया फाउलर ने चेतावनी दी कि यह विशाल डेटाबेस महीनों तक इंटरनेट पर असुरक्षित स्थिति में पड़ा रहा। शुरुआती दौर में कंपनी को इस खामी की जानकारी देने के प्रयास विफल रहे थे, लेकिन जुलाई में मामला सामने आने के बाद क्लैरिटीचेक ने इस डेटाबेस को सुरक्षित कर दिया। किसी भी प्रकार का अनपेक्षित डेटा एक्सपोजर जोखिम पैदा करता है, लेकिन जब बात बायोमेट्रिक डेटा यानी चेहरे की तस्वीरों की आती है, तो यह खतरा अत्यधिक गंभीर हो जाता है क्योंकि इसे कभी बदला नहीं जा सकता।\n\nहालांकि क्लैरिटीचेक अपनी वेबसाइट का उपयोग करने वाले लोगों से यह सहमति लेता है कि उनके पास फोटो अपलोड करने की अनुमति है, लेकिन व्यवहारिक रूप में जिन लोगों के चेहरे इस लीक में शामिल थे, उन्हें इस बात की कोई भनक भी नहीं थी कि उनका डेटा इस प्लेटफॉर्म के पास जमा है। लोग आमतौर पर अपनी पहचान साबित करने के लिए ऐसे टूल का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि दूसरों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए इसका उपयोग करते हैं।\n\nफाउलर के अनुसार, जब कोई व्यक्ति किसी अन्य की पहचान पता करने की कोशिश करता है, तो उसके पास संबंधित व्यक्ति की आधिकारिक अनुमति नहीं होती। ऐसी स्थिति में लोगों को यह पता ही नहीं चल पाता कि उनकी तस्वीरें इस तरह के सार्वजनिक डेटाबेस में डाल दी गई हैं। कोई भी स्वचालित एआई बॉट इस तरह के डेटाबेस को क्रॉल करके चेहरे निकाल सकता है और उनका उपयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल को ट्रेनिंग देने के लिए कर सकता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि लीक हुए डेटा में बच्चों की भी कई तस्वीरें शामिल थीं।\n\nकंपनी का रुख और डेटा एक्सपोजर की परिभाषा पर बहस\nमामला उजागर होने के बाद क्लैरिटीचेक के एक प्रवक्ता ने बताया कि सुरक्षा खामी की ओर ध्यान दिलाए जाने के बाद संबंधित टीमों ने तुरंत कार्रवाई की और डेटा तक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया। हालांकि, कंपनी ने इस स्थिति को सार्वजनिक लीक या एक्सपोजर मानने से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि किसी आम इंटरनेट उपयोगकर्ता के लिए इस डेटा तक पहुंचना संभव नहीं था।\n\nप्रवक्ता के अनुसार, इस अस्थायी स्टोरेज लोकेशन तक पहुंचने के लिए एक विशिष्ट और अनइंडेक्स किए गए यूआरएल की जानकारी होना जरूरी था, जिसे साधारण वेब खोज या सेवा के सामान्य उपयोग से नहीं खोजा जा सकता था। कंपनी का यह भी दावा है कि डेटा में एक ही फाइलों की रीसाइज़ की गई और क्रॉप की गई प्रतियां थीं, इसलिए इसमें 90 लाख विशिष्ट तस्वीरें होने की बात सही नहीं है। कंपनी ने यह भी जोड़ा कि उसने भविष्य के लिए अपनी सुरक्षा रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं में सुधार किया है।\n\nएपीआई में खामी से उजागर हुईं व्यक्तिगत संपर्क जानकारियां\nफेशियल डेटाबेस के अलावा, क्लैरिटीचेक के एपीआई (API) कॉन्फ़िगरेशन में भी गंभीर खामी पाई गई। किसी भी सामान्य वेब ब्राउज़र का उपयोग करके वेबसाइट के यूआरएल में थोड़ा सा बदलाव करके केवल किसी व्यक्ति का नाम दर्ज करके उसकी निजी जानकारियां हासिल की जा सकती थीं। नाम डालते ही सिस्टम उससे मिलते-जुलते नाम वाले व्यक्तियों के कई संभावित ईमेल एड्रेस, घर के पते और फोन नंबर प्रदर्शित कर देता था। संपर्क किए जाने के बाद कंपनी ने इन यूआरएल को सुरक्षित कर दिया। कंपनी का कहना है कि ये विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और लाइसेंस प्राप्त थर्ड-पार्र्टी डेटा प्रदाताओं से प्राप्त किए गए थे।\n\nबायोमेट्रिक डेटा लीक के दूरगामी खतरे और साइबर अपराध\nसाइबर सुरक्षा उद्योग और सरकारी एजेंसियां किसी भी ऐसे डेटा को लीक या एक्सपोज्ड मानती हैं जो बिना किसी पासवर्ड या ऑथेंटिकेशन के इंटरनेट पर उपलब्ध हो। मालवेयरबाइट्स के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स प्रमुख मार्क बियर के अनुसार, यदि संवेदनशील डेटा तक अनधिकृत पहुंच की संभावना मौजूद है, तो वह एक्सपोजर की श्रेणी में आता है, भले ही किसी ने उसका दुरुपयोग किया हो या नहीं।\n\nलीक हुआ फेशियल और पर्सनल डेटा साइबर अपराधियों के लिए बेहद कीमती होता है। फाउलर ने चेतावनी दी कि जालसाज इन तस्वीरों का इस्तेमाल करके एआई की मदद से फर्जी डिजिटल पहचान बना सकते हैं और कैटफिशिंग जैसे अपराधों को अंजाम दे सकते हैं। वहीं, अमेरिकन सिविल लिबर्टिस यूनियन (ACLU) की रणनीतिक निदेशक रेबेका विलियम्स का कहना है कि जो सिस्टम सत्यापन के लिए अत्यधिक संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी पर निर्भर होते हैं, वे हमेशा इस प्रकार के सुरक्षा जोखिमों से घिरे रहेंगे क्योंकि उनका मूल मॉडल ही संवेदनशील डेटा एकत्र करने पर टिका है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में एवं वैश्विक स्तर पर: फेशियल बायोमेट्रिक डेटा लीक होने से पासवर्ड की तरह इसे बदला नहीं जा सकता, जिससे एआई-आधारित फर्जी प्रोफाइल (कैटफिशिंग) और पहचान की चोरी का स्थायी खतरा बढ़ जाता है।\n• निजी प्राइवेसी पर प्रभाव: सार्वजनिक पीपल-फाइंडर वेबसाइटों पर बिना सहमति के लोगों की फोटो और संपर्क विवरण स्टोर होना डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्लैरिटीचेक डेटा लीक में किस तरह की जानकारी उजागर हुई?\nइस लीक में 450 GB डेटा शामिल था, जिसमें वयस्कों और बच्चों की तस्वीरें, चेहरे के बायोमेट्रिक स्कैन, स्क्रीनशॉट, ईमेल पते, घर के पते और फोन नंबर शामिल थे।\n\n2. यह डेटाबेस कैसे सुरक्षित नहीं था?\nयह डेटा अमेज़न S3 क्लाउड बकेट में बिना किसी पासवर्ड या लॉगिन सुरक्षा के रखा गया था, जिसे एक विशिष्ट यूआरएल के जरिए आसानी से एक्सेस किया जा सकता था।\n\n3. इस डेटा लीक की खोज किसने की?\nस्वतंत्र सुरक्षा शोधकर्ता जेरेमिया फाउलर ने इस असुरक्षित डेटाबेस की खोज की और इसकी जानकारी दी।\n\n4. क्या क्लैरिटीचेक ने इस सुरक्षा खामी को ठीक कर लिया है?\nहां, मामला सामने आने के बाद कंपनी ने असुरक्षित क्लाउड स्टोरेज और एपीआई यूआरएल की सुरक्षा मजबूत कर दी है।",
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  "category": "साइबर सुरक्षा",
  "publishedAt": "2026-08-19",
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    "क्ैरिटीचेक",
    "डेटा लीक",
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