इंटरनेट से जुड़े रेफ्रिजरेटरों पर हुए साइबर हमलों ने बढ़ाई चिंता, ठप हुईं कोल्ड चेन व्यवस्थाएं फ्रांस और यूरोप के कई देशों में इंटरनेट से जुड़े रेफ्रिजरेटरों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर साइबर हमले किए गए हैं, जिससे चिकित्सा और खाद्य सामग्री की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फ्रांस में रक्त और प्लाज्मा बैग का प्रबंधन करने वाले तीन परिसरों को इस सप्ताह इंटरनेट से जुड़े रेफ्रिजरेटरों पर हुए व्यापक साइबर हमलों के कारण आंशिक रूप से असर का सामना करना पड़ा। इस बुधवार को Établissement Français du Sang (EFS) ने पुष्टि की कि रक्त संग्रहित करने वाले कोल्ड रूम का तापमान 2 नवंबर को काफी बढ़ा दिया गया था। राहत की बात यह रही कि EFS के अनुसार तुरंत सक्रिय हुए अलार्म तंत्र और कर्मचारियों की सतर्कता के कारण समय रहते सुरक्षा उपाय लागू कर दिए गए, जिससे रक्त के नमूने खराब होने से बच गए। यूरोप और अमेरिका में सुपरमार्केट बने निशाना यह घटनाक्रम हाल के दिनों में सामने आई साइबर हमलों की उस श्रृंखला के बीच हुआ है, जिसने कम से कम 11 यूरोपीय देशों की सुपरमार्केट श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है। इन हमलों के कारण वहां भी रेफ्रिजरेटरों का तापमान अचानक बहुत अधिक बढ़ गया। पूरे महाद्वीप से सामने आई तस्वीरों में तापमान में अचानक आए उछाल के बाद भारी मात्रा में खाद्य सामग्री को कचरे में फेंका जाता हुआ देखा जा सकता है। इसी तरह के फ्रिज हमलों ने अक्टूबर के महीने में फ्रांस की सैकड़ों दुकानों को प्रभावित किया था, जिन्हें मजबूरन भोजन नष्ट करना पड़ा था। इसके अलावा अगस्त के दौरान अमेरिका के सैन्य अड्डों पर स्थित लगभग छह कमिसरी और किराने की दुकानें भी ऐसी ही घटनाओं की चपेट में आईं, जिससे खाने का सामान खराब हो गया। पेंटागन इन सभी मामलों की जांच कर रहा है और पिछले सप्ताह आई खबरों के अनुसार वह फ्रांसीसी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर उठ रहे गंभीर सवाल क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लंबे समय से शोध कर रहे Josh Corman का कहना है कि हमारी कनेक्टेड तकनीक पर निर्भरता उसकी सुरक्षा की दिशा में हमारी सामूहिक इच्छाशक्ति से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है। इस विशेषज्ञ का यह भी मानना है कि इन नाजुक कोल्ड चेन प्रणालियों का विफल होना बहुत भारी पड़ सकता है, लेकिन इसके बावजूद हमें लगातार कठोर सबक सीखने पड़ रहे हैं। वर्तमान में वह इंस्टीट्यूट फॉर सिक्योरिटी एंड टेक्नोलॉजी नामक गैर-लाभकारी संस्था में सार्वजनिक सुरक्षा और लचीलेपन से जुड़े पद पर कार्यरत हैं। हमलावरों की पहचान और तकनीकी खामियां फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन घटनाओं के पीछे असल में किसका हाथ है और क्या ये सभी हमले आपस में जुड़े हुए हैं या फिर इन्हें अलग-अलग समूहों द्वारा अंजाम दिया जा रहा है। पिछले महीने फ्रांसीसी सुपरमार्केट पर हुए हमलों की पहली लहर के पीछे ऐसा प्रतीत होता है कि हमलावरों ने इंटरनेट पर खुले हुए और अनपैच किए गए रेफ्रिजरेटर नियंत्रकों का फायदा उठाया। इनमें ऐसे सॉफ्टवेयर संस्करण भी शामिल थे जिनमें कथित तौर पर कमजोर पासवर्ड का इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें तारीख के आधार पर तैयार किया गया था। इनमें से कई साइबर हमले डेनमार्क की कंपनी Danfoss द्वारा बनाए गए तापमान नियंत्रकों में मौजूद कमियों का फायदा उठाकर किए गए हैं। शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि इन हमलों को अंजाम देना बहुत अधिक मुश्किल काम नहीं रहा होगा। इस मामले को लेकर कंपनी ने टिप्पणी करने के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया। कंपनियों और सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी अन्य बयानों में Danfoss की तरफ से यह कहा गया कि जिन प्रणालियों पर असर पड़ा वे पुराने हो चुके फर्मवेयर पर चल रही थीं और साथ ही ग्राहकों से अपने उत्पादों को अपडेट रखने का आग्रह भी किया गया। अमेरिकी साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचा सुरक्षा एजेंसी ने इस घटनाओं के सिलसिले में जारी एक चेतावनी में बताया कि हमले प्रमाणीकरण को दरकिनार करने, मनमाना कोड इंजेक्ट करने और कमजोर कॉन्फ़िगरेशन के जरिए कोल्ड स्टोरेज प्रणालियों की कमजोरियों का फायदा उठा सकते हैं। इस तरह के इंटरनेट से जुड़े उपकरणों में पाई जाने वाली कमजोरियों के कारण महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर मंडरा रहे गंभीर खतरों को लेकर विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते आ रहे हैं। विदेशी अभिनेताओं की भूमिका और कड़े निर्देश कुछ रूसी हैक्टिविस्टों ने इन हमलों में से कुछ की जिम्मेदारी लेने का प्रयास किया, लेकिन वे इसके समर्थन में कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सके। इसके बावजूद कुछ शोधकर्ताओं को ऐसे संकेत मिले हैं कि रूस से जुड़े तत्व कम से कम कुछ घटनाओं में शामिल हो सकते हैं। इस सप्ताह क्रेमलिन ने इन आरोपों से इनकार किया है। अन्य मामलों में शोधकर्ताओं को ईरान से जुड़े तत्वों के साथ संभावित संबंधों के संकेत भी मिले हैं। अमेरिकी अधिकारियों को संदेह है कि ईरान समर्थित हमलावर अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हुए फ्रीजर हमलों के पीछे हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच अभी जारी है। स्वीडन के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र ने अपनी हालिया सलाह में इस बात पर प्रकाश डाला है कि कई व्यवसाय पुरानी तकनीक का उपयोग करते हैं जबकि उनके सिस्टम तेजी से आपस में जुड़ते जा रहे हैं। एजेंसी ने यह भी सुझाव दिया कि कंपनियों को उन उपकरणों की सूची तैयार करनी चाहिए जो इंटरनेट से जुड़े हैं, जहां तक संभव हो उन्हें डिस्कनेक्ट कर दें और यह सुनिश्चित करें कि यदि उन्हें जोड़ना ही पड़े तो वे नियंत्रित पहुंच, पैच और निगरानी के दायरे में रहें। इसका आप पर असर इंटरनेट से जुड़े उपकरणों और कोल्ड स्टोरेज प्रणालियों पर हो रहे इन हमलों से खाद्य आपूर्ति और चिकित्सा सेवाओं की सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है। • भारत में: देश भर में कोल्ड चेन और इंटरनेट से जुड़े उपकरणों का उपयोग करने वाले उद्योगों को अपनी साइबर सुरक्षा और सॉफ्टवेयर पैचिंग को तुरंत मजबूत करना चाहिए। इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखना कितना आवश्यक है। • भोजन की बर्बादी: तापमान में अचानक वृद्धि होने से सुपरमार्केट और खाद्य भंडारों में रखी करोड़ों की सामग्री बर्बाद हो सकती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है। • चिकित्सा सुरक्षा: रक्त और प्लाज्मा जैसे संवेदनशील चिकित्सीय नमूनों के तापमान में बदलाव से मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। • उत्पादक जिम्मेदारी: निर्माताओं और कंपनियों को पुराने फर्मवेयर और कमजोर पासवर्ड वाली प्रणालियों को तुरंत अपडेट करना होगा। • व्यापारिक लागत: खुदरा विक्रेताओं और सैन्य संस्थानों को इस तरह के हमलों से होने वाले वित्तीय नुकसान से बचने के लिए अपने नेटवर्क को डिस्कनेक्ट या सुरक्षित करना होगा। ऐसा क्यों हुआ इन साइबर हमलों के पीछे मुख्य कारण पुराने सॉफ्टवेयर, कमजोर पासवर्ड और इंटरनेट से सीधे जुड़े उपकरणों की सुरक्षा में बरती गई लापरवाही है। • कमजोर नियंत्रक: हमलावरों ने डेनमार्क की कंपनी Danfoss द्वारा बनाए गए तापमान नियंत्रकों और अनपैच किए गए सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का फायदा उठाया। • कमजोर पासवर्ड: कई प्रणालियों में ऐसी दिनांक-आधारित और साधारण पासवर्ड प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया था जिन्हें आसानी से तोड़ा जा सकता था। • पुराना फर्मवेयर: प्रभावित सिस्टम पुराने और असुरक्षित फर्मवेयर पर चल रहे थे, जिन्हें समय पर अपडेट नहीं किया गया था। • भौगोलिक और राजनीतिक तनाव: रूस और ईरान से जुड़े हैक्टिविस्टों और समूहों की संभावित संलिप्तता की ओर संकेत मिले हैं, हालांकि मामलों की जांच अभी भी जारी है। सवाल-जवाब 1. फ्रांस में किन जगहों को इन हमलों से नुकसान पहुंचा? फ्रांस में रक्त और प्लाज्मा बैग का प्रबंधन करने वाले तीन परिसरों को इन हमलों के कारण प्रभावित होना पड़ा। 2. रक्त के नमूने खराब क्यों नहीं हुए? संगठन के अलार्म तंत्र और कर्मचारियों की तत्परता के कारण समय रहते सुरक्षा उपाय लागू कर दिए गए, जिससे नमूने सुरक्षित रहे। 3. कितने देशों में सुपरमार्केट प्रभावित हुए हैं? कम से कम 11 यूरोपीय देशों की सुपरमार्केट श्रृंखलाओं में रेफ्रिजरेटर के तापमान बढ़ने की घटनाएं सामने आई हैं। 4. किन उपकरणों और कंपनियों के नियंत्रकों को निशाना बनाया गया? हमलावरों ने मुख्य रूप से डेनमार्क की कंपनी Danfoss द्वारा निर्मित तापमान नियंत्रकों की कमजोरियों का फायदा उठाया। 5. अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ऐसी घटना कब हुई थी? अगस्त के महीने में अमेरिका के सैन्य अड्डों पर स्थित लगभग छह कमिसरी और किराने की दुकानों पर ऐसी घटनाएं हुईं थीं। 6. स्वीडन के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र ने क्या सलाह दी है? केंद्र ने कंपनियों को अपने जुड़े उपकरणों की सूची बनाने और जरूरत न होने पर उन्हें इंटरनेट से डिस्कनेक्ट करने की सलाह दी है। https://trendkia.com/security/fridge-hacking-wave-sparks-urgent-security-alarms-across-global-cold-chains-57587 TrendKia — Har trend, sabse pehle.