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  "type": "article",
  "title": "मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण वाले विज्ञापनों का खुलासा, सुरक्षा तंत्र की पोल खुली",
  "summary": "शोधकर्ताओं ने पाया है कि मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े सैकड़ों विज्ञापन प्रसारित किए गए हैं। इन विज्ञापनों में कुछ तस्वीरें असली बच्चों की भी थीं, जिसके बाद तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।",
  "content": "सोशल मीडिया दिग्गज मेटा के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को रोकने के तमाम दावों के बावजूद गंभीर खामियां सामने आई हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि कंपनी द्वारा सुरक्षा के लिए नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स लागू किए जाने के बाद भी इस तरह के आपत्तिजनक विज्ञापन धड़ल्ले से चल रहे हैं। टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट के शोधकर्ताओं की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के अंत से लेकर अब तक फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स और मैसेंजर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 350 से अधिक वीडियो विज्ञापन प्रसारित किए जा चुके हैं। इनमें से 250 से ज्यादा विज्ञापन अगस्त महीने की शुरुआत के बाद से चलाए गए हैं, जो मेटा की ऑटोमेटेड समीक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर बड़े सवाल खड़े करते हैं।\n\nअसली बच्चों की तस्वीरों का दुरुपयोग और शाही परिवार का मामला\n\nइस बार सामने आए विज्ञापनों और पिछली बार पकड़ी गई सामग्री में एक बड़ा और चिंताजनक अंतर यह है कि इस बार शोधकर्ताओं ने वास्तविक बच्चों की पहचान वाले विज्ञापनों का पता लगाया है। इनमें एक यूरोपीय शाही परिवार के एक नाबालिग सदस्य की आधिकारिक तस्वीर का दुरुपयोग करके उसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से अश्लील वीडियो में बदल दिया गया था। शोधकर्ताओं ने इस गंभीर मामले की जानकारी संबंधित देश के अधिकारियों को दे दी है और पीड़िता की पहचान गुप्त रखी है। टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट की निदेशक केटी पॉल का कहना है कि यह केवल एआई द्वारा बनाई गई सामग्री का मामला नहीं है, बल्कि इंटरनेट से असली तस्वीरें उठाकर उनका दुरुपयोग किया जा रहा है और कंपनी इस प्रक्रिया से भारी कमाई कर रही है।\n\nविज्ञापनों का पैटर्न और ऐप स्टोर से कनेक्शन\n\nजांच में सामने आया है कि इन विज्ञापनों का एक तय पैटर्न होता है। इनमें अक्सर किसी प्री-टीन या किशोर लड़की की सामान्य तस्वीर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके ऊपर लिखा होता है कि यह सिर्फ एक फोटो नहीं है और तस्वीर के साथ कुछ भी करने पर कोई पाबंदी नहीं है। इसके बाद वीडियो शुरू होते ही बच्चों के चेहरों को अश्लील क्लिप्स में बदल दिया जाता है। जब उपयोगकर्ता इन विज्ञापनों पर क्लिक करते हैं, तो उन्हें गूगल और ऐपल के ऐप स्टोर पर मौजूद 'नडिफिकेशन' या एआई फेस-स्वैपिंग ऐप्स डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है। शोधकर्ताओं ने ऐसे चार नाबालिगों की पहचान की है जिनकी तस्वीरों का गलत इस्तेमाल हुआ, जिनमें तीन अमेरिका से हैं और एक यूरोपीय शाही परिवार की सदस्य हैं। इनमें से कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंजर्स और स्टॉक फोटो वेबसाइट्स से ली गई थीं।\n\nदुनियाभर में हजारों लोगों तक पहुंची आपत्तिजनक सामग्री\n\nमेटा की विज्ञापन लाइब्रेरी के आंकड़ों के अनुसार, ये विज्ञापन यूरोपीय संघ के देशों में 29,000 से अधिक खातों और यूनाइटेड किंगडम में लगभग 7,000 खातों को दिखाए गए थे। इसके अलावा, अमेरिका में 250, ऑस्ट्रेलिया में 120 और भारत में 80 से अधिक बार ये विज्ञापन दिखे, हालांकि भारत में कंपनी विस्तृत विज्ञापन प्रदर्शन डेटा प्रकाशित नहीं करती है। टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट के अनुसार, जब उन्होंने लाइव विज्ञापनों की शिकायत की तो मेटा को उन्हें हटाने में एक सप्ताह तक का समय लग गया, और इस दौरान उन विज्ञापनों को सैकड़ों और बार देखा जा चुका था।\n\nकंपनियों और नियामकों की प्रतिक्रिया\n\nमेटा की प्रवक्ता ट्रेसी क्लेटन ने अपने बयान में कहा कि कंपनी बच्चों के शोषण या इस तरह के ऐप्स को बिल्कुल सहन नहीं करती है। उन्होंने दावा किया कि शोधकर्ताओं द्वारा खोजे गए कई विज्ञापनों को पहले ही हटाया जा चुका है और अधिकांश को 200 से कम इंप्रेशन मिले थे, जिस पर कंपनी को बहुत कम विज्ञापन भुगतान प्राप्त हुआ था। वहीं, ऐपल के प्रवक्ता एडम डेमा ने कहा कि ऐप स्टोर को उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित रखने के लिए कड़े नियम हैं और जिन डेवलपर्स ने नियमों का उल्लंघन किया, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करते हुए ऐप्स को हटा दिया गया है। गूगल के प्रवक्ता डैन जैक्सन ने भी बताया कि उनकी नीति यौन सामग्री की अनुमति नहीं देती है और शिकायत मिलने पर ऐसे सैकड़ों ऐप्स को निलंबित कर दिया गया है।\n\nनियामक जांच और कानूनी मुश्किलें\n\nइस खुलासे के बाद दुनिया भर के कानून निर्माताओं और नियामकों ने जांच शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेटर मार्क वार्नर ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर इन विज्ञापनों पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसके अलावा, मिशिगन और फ्लोरिडा के महाधिवक्ता कार्यालयों ने भी इस मामले की जांच करने की बात कही है। ऑस्ट्रेलिया के ई-सेफ्टी नियामक ने भी इन रिपोर्टों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कंपनी से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। मेटा पहले ही बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में मुकदमों को सुलझाने के लिए भारी भरकम राशि का भुगतान कर चुकी है और कई अदालती फैसलों के खिलाफ अपील कर रही है।\n\nइसका आप पर असर\nमेटा के प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण वाले विज्ञापनों के सामने आने से यह स्पष्ट हो गया है कि सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को लेकर कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत है।\n\n• भारत में: देश में सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले करोड़ों अभिभावकों और युवाओं को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।\n\n• डेटा प्राइवेसी: उपयोगकर्ताओं को यह समझना होगा कि उनके या उनके बच्चों द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड की जाने वाली तस्वीरें किस तरह सुरक्षित नहीं हैं।\n\n• नियामक दबाव: इन घटनाओं के बाद सरकार और नियामक एजेंसियों द्वारा सोशल मीडिया कंपनियों पर विज्ञापन नीतियों को लेकर दबाव और बढ़ सकता है।\n\n• प्लेटफॉर्म नीतियां: मेटा जैसी बड़ी कंपनियों को अपनी विज्ञापन समीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और मानव-संचालित बनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमेटा के विज्ञापनों में इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री के लगातार सामने आने के पीछे कुछ मुख्य तकनीकी और प्रशासनिक कारण जिम्मेदार हैं।\n\n• एआई सुरक्षा तंत्र की सीमाएं: मेटा द्वारा लागू किए गए स्वचालित एआई डिटेक्शन टूल्स नए और परिष्कृत तरीके से तैयार किए गए विज्ञापनों को तुरंत पकड़ने में विफल रहे हैं।\n\n• तेजी से बदलते तरीके: विज्ञापनदाता पहचान छिपाने के लिए लगातार डोमेन बदलते हैं और छवियों को धुंधला करने जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।\n\n• थर्ड-पार्टी रीसेलर्स: चीन आधारित विज्ञापन रीसर्स और डेवलपर्स सुरक्षा प्रणालियों को चकमा देने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।\n\n• विलंबित समीक्षा प्रक्रिया: लाइव विज्ञापनों की रिपोर्टिंग के बाद भी मानव समीक्षा में देरी के कारण आपत्तिजनक सामग्री लंबे समय तक प्रदर्शित होती रही।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर किस तरह के विज्ञापन पाए गए हैं?\nशोधकर्ताओं ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री वाले सैकड़ों वीडियो विज्ञापन खोजे हैं, जिनमें असली बच्चों की तस्वीरें भी शामिल थीं।\n\n2. इन विज्ञापनों का पता किसने लगाया है?\nइन विज्ञापनों का पता गैर-लाभकारी संगठन टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट के शोधकर्ताओं ने लगाया है।\n\n3. क्या इन विज्ञापनों में किसी प्रसिद्ध हस्ती की तस्वीर भी थी?\nहाँ, इनमें एक यूरोपीय शाही परिवार के नाबालिग सदस्य की तस्वीर का दुरुपयोग किया गया था।\n\n4. ये विज्ञापन उपयोगकर्ताओं को कहाँ निर्देशित करते थे?\nये विज्ञापन उपयोगकर्ताओं को ऐपल और गूगल के ऐप स्टोर पर मौजूद एआई फेस-स्वैपिंग और वीडियो ऐप्स डाउनलोड करने के लिए कहते थे।\n\n5. मेटा ने इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी है?\nमेटा ने कहा है कि कंपनी बच्चों के शोषण के खिलाफ सख्त नीति रखती है और कई आपत्तिजनक विज्ञापनों को पहले ही हटाया जा चुका है।",
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  "publishedAt": "2026-09-08",
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