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  "title": "राजस्थान सीआईडी ने औरंगाबाद से पकड़ा आईएसआई का पैसा पहुंचाने वाला एजेंट, चार साल पुराना जासूसी नेटवर्क बेनकाब",
  "summary": "राजस्थान सीआईडी इंटेलिजेंस ने बुधवार को महाराष्ट्र के औरंगाबाद से आईएसआई के फंडिंग एजेंट रफीक चांद शेख को गिरफ्तार किया, जो जनवरी 2026 में पकड़े गए दो जासूसों तक पैसा पहुंचाता था।",
  "content": "राजस्थान पुलिस की सीआईडी इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान से जुड़े एक बड़े जासूसी रैकेट पर शिकंजा कसते हुए बुधवार को महाराष्ट्र के औरंगाबाद से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने वाले एक फंडिंग एजेंट को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से उस वित्तीय नेटवर्क की परतें खुलकर सामने आई हैं, जिसके जरिए देश विरोधी जासूसी गतिविधियों में शामिल लोगों तक पैसा पहुंचाया जा रहा था।\n\nपूरा मामला क्या है\nपुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (इंटेलिजेंस) प्रफुल्ल कुमार के मुताबिक, यह गिरफ्तारी जनवरी 2026 में शासकीय गुप्त बात अधिनियम यानी ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 के तहत दर्ज एक मामले से जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि इसी केस में जैसलमेर निवासी झाबरा राम और असम के डिब्रूगढ़ में इंडियन एयर फोर्स स्टेशन पर एमटीएस पद पर तैनात सुमित कुमार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी आईएसआई के हैंडलरों तक पहुंचाई थी। यह पूरा मामला भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने से जुड़ा हुआ है, इसलिए जांच एजेंसियां शुरू से ही इसे बेहद गंभीरता से ले रही थीं।\n\nपैसों का ट्रेल कैसे मिला\nजांच एजेंसियों ने जब इस मामले की गहराई से पड़ताल शुरू की तो पता चला कि झाबरा राम और सुमित कुमार को जासूसी के बदले जो पैसा मिला था, वह महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी रफीक चांद शेख के जरिए भेजा गया था। इसके बाद सीआईडी इंटेलिजेंस ने रफीक चांद शेख से पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान सामने आया कि वह पिछले करीब चार साल से आईएसआई के एक हैंडलर के सीधे संपर्क में था। इतने लंबे समय तक चले इस संपर्क ने जांच एजेंसियों को यह अंदाजा दिया कि यह कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और स्थायी वित्तीय नेटवर्क है।\n\nसोशल मीडिया से मिले निर्देश, कई खातों से लेनदेन\nजांच में यह भी खुलासा हुआ कि रफीक चांद शेख सोशल मीडिया के जरिए इस पूरे नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और वहीं से उसे आगे के निर्देश मिलते थे। इन्हीं निर्देशों के आधार पर उसने अपने नाम के साथ-साथ कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम पर भी अलग-अलग बैंक खाते खुलवाए। इन्हीं खातों के जरिए जासूसी गतिविधियों में शामिल लोगों तक धनराशि भेजी जाती थी। जांच में यह भी पुख्ता हो गया कि रफीक चांद शेख असल में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए फंडिंग एजेंट की भूमिका निभा रहा था, यानी वह इस नेटवर्क में सिर्फ एक कड़ी नहीं बल्कि पैसों के लेनदेन को संभालने वाला अहम व्यक्ति था।\n\n30 जून को हुई गिरफ्तारी, जांच अब भी जारी\nइन सबूतों के आधार पर सीआईडी इंटेलिजेंस राजस्थान ने 30 जून 2026 को रफीक चांद शेख को गिरफ्तार कर लिया। एडीजी प्रफुल्ल कुमार ने साफ किया कि इस पूरे प्रकरण में जांच अभी खत्म नहीं हुई है और आईएसआई के इस वित्तीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा उनके लेनदेन की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान पुलिस देश की सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले तत्वों पर लगातार नजर रखे हुए है और ऐसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह गिरफ्तारी दिखाती है कि आईएसआई सोशल मीडिया के जरिए आम लोगों को पैसों के लालच में जासूसी नेटवर्क से जोड़ रही है, ऐसे में अनजान लोगों से जुड़े बैंक खातों या पैसों के लेनदेन की पेशकश से हर किसी को सतर्क रहना जरूरी है।\n• राजस्थान में: सीआईडी इंटेलिजेंस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है, जिससे राज्य में सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और सख्त हो सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. किसे गिरफ्तार किया गया है?\nमहाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी रफीक चांद शेख को गिरफ्तार किया गया है, जिसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का फंडिंग एजेंट बताया गया है।\n\n2. गिरफ्तारी कब और किसने की?\nराजस्थान सीआईडी इंटेलिजेंस ने 30 जून 2026 को औरंगाबाद से रफीक चांद शेख को गिरफ्तार किया, इस बारे में बुधवार को जानकारी दी गई।\n\n3. इससे पहले किन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था?\nजैसलमेर निवासी झाबरा राम और डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन में एमटीएस पद पर तैनात सुमित कुमार को जनवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था।\n\n4. रफीक चांद शेख की भूमिका क्या थी?\nवह करीब चार साल से आईएसआई के एक हैंडलर के संपर्क में था और अपने व अन्य लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर जासूसी में शामिल लोगों तक पैसा पहुंचाता था।\n\n5. मामला किस कानून के तहत दर्ज है?\nयह मामला जनवरी 2026 में शासकीय गुप्त बात अधिनियम यानी ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 के तहत दर्ज किया गया था।\n\n6. आगे जांच में क्या होगा?\nसीआईडी इंटेलिजेंस राजस्थान आईएसआई के इस वित्तीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की जांच जारी रखेगी।",
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  "category": "साइबर सुरक्षा",
  "publishedAt": "2026-07-01",
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    "आईएसआई जासूसी",
    "राजस्थान सीआईडी",
    "फंडिंग एजेंट",
    "औरंगाबाद गिरफ्तारी",
    "ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट",
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