साइबर विशेषज्ञ वांगेलिस स्तिकास ने उत्तर कोरियाई हैकर्स के नेटवर्क को किया हैक, दुनिया भर की 1640 कंपनियों पर हमले का हुआ खुलासा उत्तर कोरियाई कमांड सर्वरों में 22 महीने की रिवर्स हैकिंग से 57 देशों की 1640 कंपनियों में डेटा सेंधमारी का खुलासा हुआ है, जिसमें रूट सिस्टम एक्सेस, क्रिप्टो कीज और ठेकेदारों के जरिए हुई घुसपैठ शामिल है। उत्तर कोरिया की सरकारी शह प्राप्त हैकिंग व्यवस्था में एक बड़े खुलासे ने दुनिया भर के कॉरपोरेट नेटवर्कों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले 22 महीनों के दौरान साइबर सुरक्षा शोधकर्ता वांगेलिस स्तिकास ने उत्तर कोरियाई हैकर्स के कमांड-एंड-कंट्रोल सर्वरों में सेंध लगाकर डेटा हासिल किया, जिससे खुलासा हुआ है कि 57 देशों की 1,640 कंपनियां इन साइबर हमलों से प्रभावित हुई हैं। लास वेगास में आयोजित ब्लैक हैट सुरक्षा सम्मेलन में इस विस्तृत जानकारी को साझा करते हुए स्तिकास ने बताया कि इनमें से 700 से 800 संस्थानों में अत्यंत गंभीर और नुकसानदेह घुसपैठ हुई थी, जिसके जरिए हमलावरों ने महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड वातावरण और डिजिटल एसेट सिस्टम का प्रशासनिक नियंत्रण हासिल कर लिया था। उत्तर कोरियाई कमांड इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व सेंधमारी इस बड़े खुलासे की शुरुआत साइबर सुरक्षा फर्म कुमियो के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) वांगेलिस स्तिकास द्वारा की गई एक अनूठी रिवर्स जांच से हुई। उत्तर कोरियाई हैकर्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कई कमांड-एंड-कंट्रोल सर्वरों तक पहुंच प्राप्त करने के बाद स्तिकास लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थे। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई मामलों में हैकर्स खुद अपने ही मालवेयर से संक्रमित हो गए। इस तकनीकी चूक का फायदा उठाकर शोधकर्ता को हैकर्स के वर्कस्टेशन तक सीधी पहुंच मिल गई, जिससे वह उनके स्लैक अकाउंट, डिस्कॉर्ड सर्वर और आंतरिक तकनीकी पत्राचार को देखने में सक्षम हो गए। लगभग दो साल की निगरानी अवधि के दौरान स्तिकास ने हैकर्स के सर्वर पर मौजूद करीब 5 टेराबाइट चुराए गए डेटा, सोर्स कोड और डेवलपर क्रेडेंशियल की गहन जांच की। सर्वर पर संग्रहीत क्रिप्टोग्राफिक कीज, कॉन्फ़िगरेशन फाइलों और चोरी की गई लॉग फाइलों का विश्लेषण करके उन्होंने उत्तर कोरिया के वैश्विक अभियानों के पीड़ितों की सूची तैयार की। स्तिकास ने इन जानकारियों को केवल अपने तक सीमित रखने के बजाय जिम्मेदार प्रकटीकरण प्रक्रियाओं का पालन करते हुए प्रभावित संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीमों को सूचित किया ताकि खतरे को समय रहते रोका जा सके। उच्च-स्तरीय प्रशासनिक पहुंच और प्रभावित संस्थानों की सूची उत्तर कोरियाई साइबर इकाइयों द्वारा हासिल की गई पहुंच का दायरा काफी विस्तृत था। घुसपैठ के तकनीकी दस्तावेजों के अनुसार, हमलावरों ने अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) पर होस्ट किए गए कॉरपोरेट सर्वरों और क्लाउड सिस्टम पर नियमित रूप से रूट-स्तरीय अनुमतियां (उच्चतम प्रशासनिक अधिकार) हासिल कर ली थीं। वहीं क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन कंपनियों के मामले में हैकर्स को प्राइवेट कीज और ब्लॉकचेन नेटवर्क तक सीधी पहुंच मिल गई थी, जिससे वित्तीय नुकसान का बड़ा जोखिम पैदा हो गया था। ब्लैक हैट सम्मेलन में स्तिकास ने लगभग एक दर्जन ऐसी प्रमुख कंपनियों के नामों का सार्वजनिक रूप से खुलासा किया, जिन्होंने चेतावनी मिलने के बाद बेहतर सुरक्षा कदम उठाए और कमियों को ठीक किया। सार्वजनिक किए गए प्रभावित संस्थानों में स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी, वित्तीय संस्थान और सरकारी एजेंसियां शामिल हैं • बोस्टन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल: अमेरिकी नागरिकों का व्यापक कोविड-19 स्वास्थ्य डेटाबेस रखने वाला प्रमुख अस्पताल। • एओन स्मार्ट टेक्नोलॉजी: जापान की एक बड़ी प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी। • ओप्पो: चीन की बहुराष्ट्रीय स्मार्टफोन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता कंपनी। • कॉइनबेस और यूनिसवाप लैब्स: प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस प्लेटफॉर्म। • सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ऑफ इटली: इटली की न्यायपालिका की संवैधानिक शासी संस्था। • अल राजी बैंक की सहायक कंपनी: सऊदी अरब के प्रमुख बैंकिंग संस्थान की एक परिचालन इकाई। • डिजिटल वांडरेन: बेल्जियम में फ्लेमिश सरकार की डिजिटल परिवर्तन एजेंसी। संस्थागत प्रतिक्रियाएं और सुरक्षा सुधारात्मक कदम खुलासे के बाद कई लक्षित संगठनों और सुरक्षा अधिकारियों ने घटनाओं की स्थिति स्पष्ट की। जापान की कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम (CERT) ने एओन स्मार्ट टेक्नोलॉजी से जुड़ी शोधकर्ता की रिपोर्ट की पुष्टि की और बताया कि कंपनी के साथ मिलकर सुरक्षा कमियों को दूर कर लिया गया है। बेल्जियम में फ्लेमिश सरकार के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी बेल्जियम (CCB) के माध्यम से 3 मार्च 2026 को डिजिटल वांडरेन में हुई सेंधमारी की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही प्रभावित वर्कस्टेशन को नेटवर्क से अलग कर दिया गया और सभी संभावित क्रेडेंशियल और एक्सेस कीज को रद्द करके बदल दिया गया। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि घटना को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया गया है। बोस्टन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह मामला अस्पताल के अपने सिस्टम से नहीं, बल्कि एक पूर्व स्वतंत्र ठेकेदार के व्यक्तिगत उपकरण से जुड़ा था। सूचना मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर आईटी सुरक्षा टीम ने सक्रिय एक्सेस क्रेडेंशियल को निष्क्रिय कर दिया। अस्पताल की जांच में आंतरिक सिस्टम या मरीजों के गोपनीय स्वास्थ्य डेटा में किसी भी अवांछित पहुंच के साक्ष्य नहीं मिले, और संबंधित डेटा पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध था। कॉइनबेस ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा शोधकर्ता की सूचना से पहले ही अमेरिका स्थित एक ठेकेदार की स्वतंत्र जांच की थी। हालांकि सुरक्षा जांच में ठेकेदार का उत्तर कोरियाई सरकार या DPRK से सीधा संबंध नहीं मिला, लेकिन उनके तकनीकी सेटअप में सुरक्षा जोखिम पाए गए थे, जिससे संकेत मिला कि उन्होंने अपना काम किसी तीसरे पक्ष को आउटसोर्स किया था। कॉइनबेस ने काम शुरू होने के 30 दिनों के भीतर ठेकेदार को हटा दिया था और पुष्टि की कि ग्राहकों का कोई भी डेटा या संवेदनशील जानकारी प्रभावित नहीं हुई है। हमले की रणनीति: नकली नौकरी के ऑफर और मालवेयर वितरण इस व्यापक घुसपैठ के पीछे सबसे प्रमुख हथियार सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लक्षित करने वाला सोशल इंजीनियरिंग हमला था। हैकर्स ने आकर्षक वेतन और ऊंचे पैकेज का लालच देकर डेवलपर्स को नकली नौकरी के इंटरव्यू के जाल में फंसाया। जब कोई डेवलपर इसमें रुचि दिखाता था, तो उसे अपनी कोडिंग क्षमता साबित करने के लिए एक टेस्ट प्रोग्राम डाउनलोड करने को कहा जाता था। इस टेस्ट प्रोग्राम को चलाते ही डेवलपर के कंप्यूटर में चुपके से मालवेयर और रिमोट एक्सेस ट्रोजन इंस्टॉल हो जाते थे। माइक्रोसॉफ्ट के सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर कोरियाई हैकर समूह इस तकनीक का उपयोग कॉन्टैजियस इंटरव्यू (Contagious Interview) नामक अभियान के तहत वर्ष 2022 से लगातार कर रहे हैं। बाहरी ठेकेदारों के जरिए इस खतरे का दायरा काफी बढ़ गया था। कई मामलों में एक ही ठेकेदार के पास कई कंपनियों के डेवलपर कीज और सिस्टम एक्सेस मौजूद थे। स्तिकास ने पाया कि कुछ प्रभावित ठेकेदारों के पास 30 अलग-अलग कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच थी, जिससे एक ही कंप्यूटर के संक्रमित होने पर कई कंपनियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। क्रिप्टोकरेंसी पर मुख्य ध्यान और व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम हालांकि हैकर्स के पास अमेरिकी नागरिकों के आपराधिक रिकॉर्ड और स्वास्थ्य संबंधी संवेदनशील डेटाबेस तक पहुंच थी, लेकिन उनका मुख्य ध्यान केवल क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स और डिजिटल संपत्तियों की चोरी पर केंद्रित रहा। गैर-वित्तीय डेटा वाले सिस्टम को हैकर्स ने लगभग अनदेखा कर दिया और अपनी पूरी ताकत वित्तीय संपत्तियों तक पहुंचने में लगाई। सुरक्षा फर्म डीटेक्स की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया अपनी आर्थिक और सैन्य प्राथमिकताओं के लिए एक व्यापक साइबर ढांचा चलाता है। देश में सैकड़ों कुशल साइबर विशेषज्ञ तैनात हैं, जिन्हें कम उम्र से ही प्रशिक्षित किया जाता है। इसके अलावा, हजारों आईटी कर्मचारी फर्जी पहचान के जरिए विदेशी कंपनियों में रिमोट काम करके शासन के लिए राजस्व जुटाते हैं और उन पर सालाना कमाई का कोटा निर्धारित होता है। साइबर सुरक्षा फर्म एक्सपेल के विशेषज्ञ मार्कस हचिंस ने चेतावनी दी कि भले ही हैकर्स का प्राथमिक लक्ष्य क्रिप्टोकरेंसी चोरी करना हो, लेकिन किसी कंपनी के सिस्टम में बनी उनकी लगातार पहुंच राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। यदि वित्तीय हैकर्स द्वारा बनाए गए इस रास्ते का इस्तेमाल उत्तर कोरिया की जासूसी इकाइयां करने लगें, तो वे संवेदनशील सरकारी और औद्योगिक डेटा को आसानी से चुरा सकती हैं। आधुनिक साइबर युद्ध की वास्तविकता और कॉर्पोरेट तैयारी वांगेलिस स्तिकास के लिए जो जांच एक व्यक्तिगत साइड प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई थी, वह हमलों की गंभीरता को देखते हुए अब उनका पूर्णकालिक काम बन चुकी है। सबसे बड़ी चिंता उन सैकड़ों कंपनियों की है जिन्होंने चेतावनियों का कोई जवाब नहीं दिया और सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए। “वे हमारे बीच हैं और हम पर लगातार हमले कर रहे हैं,” स्तिकास ने ब्लैक हैट में कहा। “आखिरकार, हर कोई हैक हो रहा है। हैक होने के बाद आप क्या कदम उठाते हैं, यही एक अच्छी कंपनी को बुरी कंपनी से अलग करता है। और हमने बहुत सी बुरी कंपनियां देखी हैं।” यह घटनाक्रम दुनिया भर के संस्थानों को यह सबक देता है कि वे अपने तीसरे पक्ष के ठेकेदारों की गहन जांच करें, ज़ीरो-ट्रस्ट एक्सेस नीतियां लागू करें और डेवलपर वातावरण की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करें। इसका आप पर असर भारत में: आधुनिक कंपनियों और आईटी पेशेवरों को यह समझना होगा कि अनजान नौकरी के ऑफर के तहत कोडिंग टेस्ट पैकेज डाउनलोड करना या बिना गहन जांच के ठेकेदारों को सिस्टम एक्सेस देना पूरी कंपनी के नेटवर्क को खतरे में डाल सकता है। तकनीकी पेशेवरों और क्रिप्टो उपयोगकर्ताओं के लिए: डेवलपर्स को अनजान स्रोतों से सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने वाले जॉब इंटरव्यू से सतर्क रहना चाहिए, जबकि क्रिप्टो निवेशकों को अपनी प्राइवेट कीज सुरक्षित रखने के लिए हार्डवेयर वॉलेट का उपयोग करना चाहिए। सवाल-जवाब 1. वांगेलिस स्तिकास ने उत्तर कोरियाई हैकर्स के सिस्टम तक पहुंच कैसे हासिल की? स्तिकास ने हैकर्स के कमांड-एंड-कंट्रोल सर्वरों में सेंध लगाई। कुछ मामलों में हैकर्स खुद अपने ही मालवेयर से संक्रमित हो गए थे, जिससे स्तिकास को उनके वर्कस्टेशन और स्लैक तथा डिस्कॉर्ड अकाउंट्स का एक्सेस मिल गया। 2. उत्तर कोरियाई साइबर हमलों से कुल कितने संस्थान प्रभावित हुए हैं? जांच में 57 देशों की 1,640 कंपनियों के प्रभावित होने का पता चला है, जिनमें से 700 से 800 संस्थानों में गंभीर प्रशासनिक घुसपैठ हुई थी। 3. उत्तर कोरियाई हैकर्स ने कॉरपोरेट नेटवर्कों में सेंध लगाने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया? उन्होंने भारी वेतन वाली नकली नौकरियों के ऑफर देकर डेवलपर्स को आकर्षित किया और उनसे एक कोडिंग टेस्ट प्रोग्राम डाउनलोड करवाया, जिससे उनके कंप्यूटर में चुपके से मालवेयर इंस्टॉल हो गया। 4. क्या बोस्टन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल का संवेदनशील मरीज डेटा चुराया गया था? नहीं, बोस्टन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल ने स्पष्ट किया कि सेंधमारी केवल एक ठेकेदार के व्यक्तिगत उपकरण तक सीमित थी और अस्पताल के मुख्य सिस्टम या मरीज डेटाबेस में कोई अनधिकृत पहुंच नहीं हुई। 5. उत्तर कोरियाई हैकर्स का मुख्य उद्देश्य क्या था? हैकर्स का मुख्य ध्यान क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स और ब्लॉकचेन कीज तक पहुंच बनाकर डिजिटल संपत्तियों की चोरी करना था, जबकि गैर-वित्तीय डेटा को उन्होंने काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया। 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