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  "type": "article",
  "title": "डीपफेक और निजी तस्वीरों के ऑनलाइन दुरुपयोग पर तत्काल रोक लगाने के लिए जॉर्जिया कानून की मांग",
  "summary": "माया जामा की फर्जी अश्लील तस्वीरों और कई पीड़ितों के अनुभवों के बाद सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री को फौरन हटाने के लिए किल स्विच कानून की मांग तेज हो गई है।",
  "content": "डिजिटल दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की मदद से तैयार की जाने वाली फर्जी और आपत्तिजनक सामग्री महिलाओं के लिए एक गंभीर मानसिक और सामाजिक संकट बनती जा रही है। ब्रिटिश मीडिया हस्ती माया जामा ने हाल ही में साझा किया कि अज्ञात व्यक्तियों ने उनकी सामान्य तस्वीरों को एडिट करके फर्जी नग्न तस्वीरों में बदल दिया और फिर उन्हें इंटरनेट पर प्रसारित कर दिया। माया जामा ने बताया कि कुछ साल पहले किसी ने उनकी बिकिनी वाली तस्वीरों को लेकर इस तरह बदला कि वे पूरी तरह नग्न दिखने लगीं। इस फर्जीवाड़े का असर इतना गहरा था कि शुरुआत में उनकी अपनी मां और करीबी दोस्तों को भी लगा कि वे तस्वीरें असली हैं। इस घटना के बाद उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह बात भी कही थी कि इंटरनेट अब बेहद डरावनी जगह बन चुका है और स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।\n\nजॉर्जिया कानून और किल स्विच की वकालत\nइस तरह के डिजिटल उत्पीड़न और बिना सहमति के निजी तस्वीरों के प्रसार के खिलाफ लव आइलैंड की पूर्व हस्ती जॉर्जिया हैरिसन ने एक बड़ा कानूनी मोर्चा खोल रखा है। वह इस अपराध पर अंकुश लगाने के लिए जॉर्जिया कानून के नाम से एक सख्त कानूनी ढांचा लागू करने की मांग कर रही हैं ताकि माया जामा जैसी स्थिति का सामना करने वाले किसी भी व्यक्ति को फौरन राहत मिल सके। जिमीज जॉब्स ऑफ द फ्यूचर पॉडकास्ट में अपनी बात रखते हुए, जहां पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर जैसी हस्तियां भी शिरकत कर चुकी हैं, जॉर्जिया हैरिसन ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक तत्काल किल स्विच यानी पॉज स्विच की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके जरिए किसी आपत्तिजनक सामग्री की रिपोर्ट होते ही उसे तुरंत सार्वजनिक पहुंच से बाहर कर दिया जाना चाहिए जब तक कि उसकी पूरी समीक्षा न हो जाए।\n\nजॉर्जिया हैरिसन का यह अभियान उनके अपने दर्दनाक अतीत से उपजा है। छह साल पहले उनके पूर्व साथी स्टीफन बियर ने उनके साथ शारीरिक संबंध बनाते समय गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया था। इसके बाद उसने उस क्लिप को अपने ओनलीफैन्स खाते पर अपलोड कर दिया और कुछ ही दिनों के भीतर वह अश्लील वीडियो पूरे इंटरनेट पर फैल गया। इस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद स्टीफन बियर को वोयरिज्म और रिवेंज पोर्न के दो आरोपों में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उसे सजा सुनाई और वह जेल में 10 महीने और 15 दिन बिताने के बाद जनवरी 2023 में रिहा हुआ। हालांकि कानूनी सजा पूरी होने के बावजूद वह आपत्तिजनक वीडियो आज भी इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है, जिससे पीड़िता को लगातार मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।\n\nमौजूदा 48 घंटे की समयसीमा पर उठते गंभीर सवाल\nब्रिटेन में 29 अप्रैल को पारित हुए क्राइम एंड पुलिसिंग एक्ट 2026 के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि किसी भी गैर-सहमति वाली अंतरंग तस्वीर या वीडियो की रिपोर्ट मिलने पर उसे 48 घंटे के भीतर हटा दिया जाए। यदि कोई तकनीकी कंपनी इस नियम का पालन करने में विफल रहती है, तो उस पर उसके कुल राजस्व का 10 प्रतिशत तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यह वित्तीय दंड बेहद बड़ा है, क्योंकि मेटा जैसी कंपनी ने अकेले वर्ष 2025 में 149 मिलियन पाउंड का भारी राजस्व दर्ज किया था। इसके अलावा नियम तोड़ने वाली कंपनियों के ब्रिटेन में संचालन पर पूरी तरह रोक लगाने का भी कानूनी प्रावधान रखा गया है।\n\nजब यह कानून पहली बार लागू किया गया था, तब जॉर्जिया हैरिसन ने इसे महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा की दिशा में एक जरूरी कदम बताया था। लेकिन उनका मानना है कि वास्तविक स्थिति को देखते हुए यह समयसीमा नाकाफी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मौजूदा सरकार ने यह वादा किया था कि वे अंतरंग तस्वीरों के दुरुपयोग को आतंकी सामग्री और बाल पोर्नोग्राफी जितना ही गंभीर मानेंगे, तो फिर उस वादे पर पूरी तरह अमल क्यों नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि आज भी हर रात तीन बजे उनके इनबॉक्स में अनगिनत लोगों के रोते-बिलखते संदेश आते हैं, जिनकी आपत्तिजनक सामग्री किसी साइट पर अपलोड होती है और मदद के लिए कोई प्लेटफॉर्म जवाब तक नहीं देता।\n\nपीड़ित पर जांच का बोझ डालने के बजाय आरोपी पर जिम्मेदारी\nआमतौर पर जब कोई पीड़िता किसी प्लेटफॉर्म पर अपनी निजी या फर्जी तस्वीरों की रिपोर्ट करती है, तो उसे टेक कंपनियों से केवल एक औपचारिक ईमेल या फॉर्म मिलता है जिसमें लिखा होता है कि वे इस पर काम कर रहे हैं। जॉर्जिया हैरिसन के अनुसार यह प्रक्रिया पीड़ितों को दोबारा प्रताड़ित करती है। उनका प्रस्ताव है कि रिपोर्ट दर्ज होते ही कंटेंट को पूरी तरह रोक दिया जाना चाहिए। इसके तहत पीड़िता को यह साबित करने के लिए फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि सामग्री बिना सहमति के डाली गई है, बल्कि सामग्री अपलोड करने वाले व्यक्ति पर यह साबित करने का भार होना चाहिए कि उसके पास सहमति थी। यदि वह व्यक्ति सहमति साबित कर पाता है तभी सामग्री दोबारा दिखे, लेकिन इसका बोझ किसी भी हाल में पीड़िता पर नहीं पड़ना चाहिए।\n\nजोडी का अनुभव और 73 हजार हस्ताक्षरों वाला आंदोलन\nयह प्रस्तावित व्यवस्था जोडी जैसी कई अन्य महिलाओं की मदद कर सकती है, जिन्होंने इस डिजिटल हिंसा का सीधा दंश झेला है। वर्ष 2020 में जोडी के एक दोस्त ने एक्स पर उनकी तस्वीरें देखीं जहां उनका इस्तेमाल सेक्स वर्क के विज्ञापन के लिए किया जा रहा था। जब जोडी ने पुलिस से संपर्क करके बताया कि उस फर्जी खाते पर उनका असली नाम, उनका सही पता और उनकी पहचान से जुड़ी सटीक जानकारियां मौजूद हैं, तो पुलिस ने मदद करने से इनकार करते हुए कह दिया कि ऐसी चीजें अक्सर होती रहती हैं।\n\nइसके कुछ ही महीनों बाद जोडी को एक अज्ञात ईमेल मिला जिसने उन्हें एक चैट फोरम की ओर निर्देशित किया। वहां पहुंचकर जोडी ने पाया कि उनकी अनगिनत फर्जी और यौन रूप से स्पष्ट तस्वीरें पोस्ट की गई थीं। वे सभी तस्वीरें उनके निजी इंस्टाग्राम अकाउंट से चुराई गई थीं और उन्हें डीपफेक तकनीक से नग्न रूप दे दिया गया था। उस पल को याद करते हुए जोडी ने बताया कि वह पूरी तरह टूट चुकी थीं। वह उनके जीवन का सबसे भयानक दिन था जहां गहरे सदमे और डर ने उन्हें घेर लिया था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे अपने माता-पिता, अपने प्रेमी और अपने कार्यस्थल पर लोगों को क्या जवाब देंगी। आज भी जोडी को यकीन नहीं है कि उनके वे सारे डीपफेक इंटरनेट से पूरी तरह मिटाए जा चुके हैं या नहीं।\n\nउस मामले में आरोपी को केवल छह महीने की निलंबित जेल की सजा मिली, 100 पाउंड का मुआवजा देने का आदेश दिया गया, सामुदायिक सेवा कराई गई और अदालत के आदेश पर यौन पुनर्वास थेरेपी दी गई। उसे यौन अपराधियों के रजिस्टर में भी शामिल नहीं किया गया। इसके बाद जोडी ने भी सख्त नियमों के लिए अभियान शुरू किया। उनके 73,000 हस्ताक्षरों वाले मजबूत अभियान ने एंड वायलेंस अगेंस्ट विमेन कोएलिशन, रिवेंज पोर्न हेल्पलाइन, सर्वाइवर ग्रुप नॉट योर पोर्न और विशेषज्ञ प्रोफेसर क्लेयर मैकग्लिन के साथ मिलकर 48 घंटे के कानून को बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।\n\nइसके बावजूद जोडी का भी साफ कहना है कि 48 घंटे का इंतजार बहुत लंबा होता है। उनका मानना है कि तकनीकी कंपनियों के पास इसे कहीं अधिक तेजी से हटाने की तकनीकी क्षमता मौजूद है। जब तक तस्वीरें ऑनलाइन रहती हैं, तब तक नुकसान कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि उन्हें अनगिनत बार डाउनलोड, कॉपी और साझा किया जा सकता है। पीड़ितों के लिए इस बात का महत्व कम होता है कि प्लेटफॉर्म पर कितना जुर्माना लगेगा, उनके लिए सबसे बड़ी राहत यही होती है कि उनकी तस्वीरें फौरन इंटरनेट से हटा दी जाएं।\n\nइसका आप पर असर\nइंटरनेट और सोशल मीडिया पर एआई डीपफेक और निजी तस्वीरों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के नए नियमों का सीधा प्रभाव डिजिटल उपयोगकर्ताओं की निजता और सुरक्षा पर पड़ेगा।\n\n• आम उपयोगकर्ताओं के लिए: यदि कोई आपकी निजी या छेड़छाड़ की गई फर्जी तस्वीर ऑनलाइन डालता है, तो नई मांग के तहत रिपोर्ट करते ही वह तुरंत ब्लॉक हो सकेगी। इससे तस्वीरों के वायरल होने या अनगिनत डिवाइसों में सहेजे जाने से पहले ही नुकसान को थामा जा सकेगा।\n• सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर: टेक कंपनियों को 48 घंटे के मौजूदा समय के बजाय कंटेंट को फौरन पॉज करने की प्रणाली बनानी होगी। ऐसा न करने पर कंपनियों पर उनके कुल राजस्व का 10 प्रतिशत तक का भारी जुर्माना या प्रतिबंध लग सकता है।\n• सामग्री अपलोड करने वालों के लिए: किसी भी निजी या संवेदनशील तस्वीर को पोस्ट करने पर अब अपलोडर को ही सहमति का सबूत देना होगा। बिना स्पष्ट सहमति के किसी की तस्वीर साझा करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई और जेल का खतरा बना रहेगा।\n• ब्रिटेन और वैश्विक नियमों पर: ब्रिटेन के कड़े कानून अन्य देशों के डिजिटल नियमों के लिए भी एक मॉडल बन रहे हैं। तकनीकी कंपनियों को अपनी वैश्विक नीतियों में बदलाव करने पर मजबूर होना पड़ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कानूनी और सामाजिक बहस तकनीकी प्रगति की तेज रफ्तार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सुस्त निगरानी तंत्र के बीच बढ़ते अंतर के कारण पैदा हुई है।\n\n• एआई टूल्स की आसान उपलब्धता: आधुनिक जनरेटिव एआई टूल्स की मदद से किसी की भी साधारण तस्वीर को कुछ ही मिनटों में आपत्तिजनक डीपफेक में बदलना आसान हो गया है। निजी प्रोफाइल से फोटो चुराकर उन्हें अश्लील सामग्री में ढालने वाले मामलों में तेजी आई है।\n• मौजूदा 48 घंटे की खिड़की का नुकसान: क्राइम एंड पुलिसिंग एक्ट 2026 में 48 घंटे का समय दिया गया है, लेकिन इंटरनेट की तेज रफ्तार के चलते दो दिन के भीतर फाइलें अनगिनत वेबसाइटों पर कॉपी हो जाती हैं। इसी खामी के कारण पीड़ित तत्काल पॉज स्विच की मांग कर रहे हैं।\n• न्याय प्रक्रिया और पुलिस की विफलता: कई मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियां शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेतीं और अपराधियों को मामूली सजा मिलती है। इस प्रशासनिक विफलता ने पीड़ितों और कार्यकर्ताओं को सीधे नए कानून बनाने के लिए अभियान चलाने पर मजबूर किया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. माया जामा के साथ डीपफेक की क्या घटना घटी थी?\nकुछ साल पहले किसी ने उनकी बिकिनी वाली तस्वीरों को एआई के जरिए एडिट करके नग्न तस्वीरों में बदल दिया और इंटरनेट पर फैला दिया, जिसे शुरुआत में उनके परिवार और दोस्तों ने भी सच समझ लिया था।\n\n2. जॉर्जिया कानून और किल स्विच की मुख्य मांग क्या है?\nइस कानून की मांग है कि सोशल मीडिया पर अंतरंग या डीपफेक तस्वीरों की रिपोर्ट होते ही उन्हें फौरन पॉज यानी छिपा दिया जाए, ताकि जांच पूरी होने तक वे किसी को न दिखें।\n\n3. ब्रिटेन के मौजूदा कानून में सामग्री हटाने की क्या समयसीमा है?\nक्राइम एंड पुलिसिंग एक्ट 2026 के तहत बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरों को रिपोर्ट मिलने के 48 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य है।\n\n4. नियमों का पालन न करने पर टेक कंपनियों पर क्या जुर्माना लग सकता है?\nनियमों का उल्लंघन करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके कुल राजस्व का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है या ब्रिटेन में उन पर प्रतिबंध लग सकता है।\n\n5. स्टीफन बियर को किस अपराध में सजा सुनाई गई थी?\nउन्हें जॉर्जिया हैरिसन का गुप्त यौन वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे ओनलीफैन्स पर साझा करने के मामले में वोयरिज्म और रिवेंज पोर्न का दोषी पाया गया था, जिसके लिए उन्होंने साढ़े 10 महीने जेल में काटे।\n\n6. पीड़िता जोडी के मामले में अपराधी को क्या सजा मिली थी?\nअपराधी को छह महीने की निलंबित जेल की सजा, 100 पाउंड का मुआवजा, सामुदायिक सेवा और अदालत द्वारा अनिवार्य पुनर्वास थेरेपी दी गई थी।",
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  "category": "यौन स्वास्थ्य",
  "publishedAt": "2026-10-11",
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