# मेल-ऑर्डर ब्राइड की बेटी की दास्तान, क्या चाहती हैं कट्या सुवोरोवा

> कट्या सुवोरोवा की मां ने 1997 में रूस से भागने के लिए मेल-ऑर्डर ब्राइड कैटलॉग का सहारा लिया था। इस फैसले और ग्रीन कार्ड की तलाश में बीते दशकों का संघर्ष अब उन्होंने अपनी आत्मकथा में बयां किया है।

**Type:** article · **Category:** यौन स्वास्थ्य · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/sexual-health/mela-rdara-braida-ki-beti-ki-dastana-kya-chahati-hain-katya-suvorova-31024 · **Language:** Hindi
**Tags:** मेल ऑर्डर ब्राइड, कट्या सुवोरोवा, प्रवासी जीवन, ग्रीन कार्ड, परिवार संघर्ष, आत्मकथा

साल 1997 का दौर था और मॉस्को से बाहर निकलने की जद्दोजहद चल रही थी। कट्या सुवोरोवा की मां युलिया रूस छोड़ने की तैयारी में जुटी थीं। युलिया के कुछ आपराधिक गिरोहों से संपर्क थे और उन्हें रूस छोड़ना जरूरी हो गया था, लेकिन अपने पति से तलाक के बाद उनके पास विकल्प बेहद सीमित रह गए थे। ऐसे में उन्होंने मेल-ऑर्डर ब्राइड कैटलॉग में अपनी तस्वीर और प्रोफाइल भेज दी, ताकि किसी पुरुष का ध्यान उनकी तरफ आकर्षित हो सके।

इसके बाद के दशकों में कई असफल शादियां हुईं और कट्या को भारी मानसिक आघात झेलना पड़ा। कट्या अपनी मां के साथ इस सफर का हिस्सा बनी रहीं, क्योंकि युलिया हर हाल में अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करना चाहती थीं। आज 33 वर्ष की हो चुकीं लेखिका कट्या ने अपने उन शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि इंटरनेट के आने से पहले ये प्रक्रिया मैगजीन के जरिए होती थी। उस दौर में महिलाएं ब्रोकरेज के पास जाकर मैगजीन में अपना नाम डलवाती थीं और पुरुष कैटलॉग मंगाकर अपनी पसंद की महिला चुनते थे।

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इमिग्रेशन स्टडीज सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, उस समय हर साल लगभग 10,000 मेल-ऑर्डर शादियां होती थीं, जिनमें से करीब 4,000 मामलों में अमेरिकी पुरुष शामिल होते थे। कई महिलाएं कैटलॉग में अपनी तस्वीर आगे छपवाने के लिए पैसे भी देती थीं। जब कट्या 17 साल की थीं और ह्यूस्टन में रह रही थीं, तब उन्होंने गैराज की सफाई करते समय अपनी मां का पुराना कैटलॉग ढूंढ निकाला। उस विज्ञापन में युलिया की तस्वीर के साथ एक छोटा सा विवरण लिखा था कि वह एक परिवार और अमर प्रेम की तलाश में हैं।

लेखिका का कहना है कि उस दौर में कई महिलाएं पुरुषों को रिझाने के लिए पारंपरिक और रूढ़िवादी बायो लिखा करती थीं। विज्ञापनों में अक्सर लिखा होता था कि वे अपने पति की सेवा करना चाहती हैं और एक आदर्श पत्नी बनना चाहती हैं। कोई भी महिला करियर वुमन होने का दावा नहीं करती थी, बल्कि हर कोई पारंपरिक पत्नी की छवि पेश करती थी। इन महिलाओं को भली-भांति पता होता था कि पुरुष क्या चाहते हैं और वे अपने देश में साथी क्यों नहीं ढूंढ रहे हैं।

## मेल-ऑर्डर मैरिज के सत्ता समीकरण
युलिया ने इस विषय पर अपनी बेटी से हमेशा कम ही बात की, लेकिन कट्या को अपने बचपन की घटनाएं अच्छी तरह याद हैं। जो नाम के एक व्यक्ति ने युलिया के विज्ञापन का जवाब दिया और वादा किया कि वह उन्हें अमेरिकी सीमा पार करवाएगा और वहां पहुंचने पर विवाह वीजा की व्यवस्था कर देगा। युलिया के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा था। उन्होंने नब्बे के दशक के टेलीविजन शो और बेवाच जैसे धारावाहिकों में एक बेहद खूबसूरत अमेरिका की तस्वीर देखी थी और उन्हें लगता था कि वहां वे और कट्या सुरक्षित रहेंगी, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हुआ।

जो के साथ योजनाएं ज्यादा समय तक नहीं टिक पाईं और कुछ ही समय में रिश्ते में खटास आ गई। कट्या को संदेह है कि जो ने कभी उनके ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने का इरादा ही नहीं रखा था। अमेरिका में ग्रीन कार्ड स्वतः नहीं मिलता, बल्कि अमेरिकी नागरिक पति को ही इसके लिए आवेदन करना होता है। कई बार पुरुष जानबूझकर इस आवेदन को रोक लेते हैं ताकि महिलाएं दस्तावेजहीन रहें और डर के साये में जिएं। यह नियंत्रण स्थापित करने का एक तरीका होता है, खासकर तब जब पुरुषों के पास ज्यादा दौलत न हो और वे इसका इस्तेमाल महिलाओं पर धौंस जमाने के लिए करें।

इसके बाद युलिया कट्या को लेकर नेवादा चली गईं, जहां उन्होंने नब्बे के दशक के अंत में एक बार में जैरी नाम के शख्स से मुलाकात की और उससे शादी कर ली। कट्या का आरोप है कि पांच साल की उम्र में जैरी उनके साथ बुरा बर्ताव करता था और रोने पर उन्हें cupboards में बंद कर देता था। युलिया अपनी बेटी से कहती थीं कि ग्रीन कार्ड मिलने तक उन्हें यहीं रहना होगा, लेकिन जब स्थिति असहनीय हो गई तो उन्होंने वहां से भी निकलने का फैसला किया।

जैरी के काम के सिलसिले में वे लोग ह्यूस्टन आ गए थे, जहां युलिया ने जैरी का साथ छोड़कर अखबार में फिर से विज्ञापन छपवा दिया। सोवियत संघ के दौर के पीछे पली-बढ़ी महिलाओं के प्रति अमेरिकी पुरुषों के खास आकर्षण का फायदा उठाते हुए उन्होंने क्रिस नाम के शख्स को ढूंढ निकाला। युलिया तुरंत गर्भवती हुईं और कट्या की बहन माशा का जन्म हुआ। क्रिस शुरुआत में अच्छे लगे लेकिन वह रिश्ता भी घरेलू हिंसा में बदल गया। उन्होंने भी दस्तावेजों के लिए आवेदन नहीं किया, इसलिए वह शादी करीब दो साल ही चली।

इसके बाद युलिया ने कुछ समय तक डेटिंग की और फिर उनकी मुलाकात एडम से हुई, जो उनके आखिरी पूर्व पति बने। एडम ने आखिरकार उनके ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन किया और दोनों को कानूनी दस्तावेज मिल गए। एडम ने कभी इस बात का गलत फायदा नहीं उठाया, जिससे परिवार को बड़ी राहत मिली कि अब वे अलग नहीं होंगे। एडम के साथ भी रिश्ता खत्म हो गया और उसके बाद युलिया ने दोबारा शादी नहीं की।

## मेल-ऑर्डर ब्राइड्स के बारे में सच्चाई
कट्या अब अपनी मां के संपर्क में नहीं हैं क्योंकि वे समझ नहीं पातीं कि उनकी मां ने उन्हें ऐसे हालातों में क्यों रखा, हालांकि वे अपनी मां के मजबूत इरादों की सराहना भी करती हैं। उन्होंने अपनी इन तमाम यादों को अपनी पहली आत्मकथा 'अंग्रेटफुल इमिग्रेंट डॉटर' में समेटा है, जो 29 सितंबर को प्रकाशित होने वाली है। समाज द्वारा मेल-ऑर्डर ब्राइड्स को लेकर बनाए गए पूर्वाग्रहों से कट्या बेहद खफा हैं।

उनका कहना है कि उन्हें ताने सुनने पड़े कि उनकी मां रूस से आई एक महिला हैं, लेकिन हकीकत वैसी नहीं है जैसी लोग समझते हैं। अगर इन महिलाओं को बेहतर पासपोर्ट की चाहत थी, तो इसमें गलत क्या है और बदले में पुरुष क्या पा रहे थे? समाज हमेशा यह मान लेता है कि विदेशी महिला ही किसी सीधे-साधे अमेरिकी का फायदा उठा रही है, लेकिन असल में यह हमेशा सत्ता और नियंत्रण का ही खेल होता है।

कट्या का मानना है कि जो पुरुष कैटलॉग के जरिए इन महिलाओं को खरीदते हैं, समाज को उनके प्रति भी वही नफरत और आलोचना दिखानी चाहिए जो उन महिलाओं के प्रति दिखाई जाती है। जब महिलाओं के पास अपनी मर्जी से शादी करने और अपनी स्थिति सुधारने का अधिकार होता है, तो उन्हें इसके लिए बदनाम किया जाता है। अपनी किताब के जरिए वे इसी सोच को बदलना चाहती हैं।

इस कठिन बचपन का एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि कट्या ने रिश्तों को एक अलग नजरिए से देखना सीखा। आज वे अपने उस साथी के साथ बेहद खुशहाल रिश्ते में हैं जिसके साथ वे पिछले 14 वर्षों से जुड़ी हुई हैं। कट्या का मानना है कि उनकी मां ने खुद को कैटलॉग में उतारकर यह सुनिश्चित किया कि उन्हें और उनकी बहन को वह विशेषाधिकार मिल सके जिसके दम पर वे आज प्यार के खातिर शादी कर पाई हैं।

## इसका आप पर असर
मेल-ऑर्डर ब्राइड व्यवस्था और आव्रजन की यह कहानी व्यक्तिगत संघर्षों के जरिए पारिवारिक और कानूनी चुनौतियों पर प्रकाश डालती है।

- **वैश्विक स्तर पर:** यह कहानी अंतरराष्ट्रीय विवाहों और आव्रजन प्रक्रियाओं में छिपी जटिलताओं और कानूनी निर्भरता के जोखिमों को उजागर करती है।
- **दस्तावेजी प्रक्रिया:** अमेरिकी आव्रजन नियमों के तहत प्रायोजक पति पर कानूनी दस्तावेजों की निर्भरता महिलाओं के लिए सुरक्षा या शोषण का कारण बन सकती है।
- **पारिवारिक प्रभाव:** ऐसे जटिल और अस्थिर पारिवारिक माहौल में पलने वाले बच्चों पर लंबे समय तक गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है।
- **सामाजिक दृष्टिकोण:** इस तरह की शादियां करने वाली महिलाओं और उनमें शामिल पुरुषों के प्रति समाज के पूर्वाग्रहों को नए सिरे से परखने की जरूरत है।

## ऐसा क्यों हुआ
सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस में आर्थिक और सामाजिक उथल-पुथल के कारण कई महिलाओं के लिए देश छोड़ना मजबूरी बन गया था।

- **आर्थिक विवशता:** स्थानीय स्तर पर अवसरों की कमी और आपराधिक संपर्कों से बचने की चाहत ने महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय विवाह कैटलॉग का रुख करने के लिए प्रेरित किया।
- **कानूनी बाधाएं:** अमेरिका में स्थायी कानूनी दर्जा हासिल करने के लिए नागरिकों पर निर्भरता ने महिलाओं को कमजोर स्थिति में ला दिया।
- **सांस्कृतिक आकर्षण:** नब्बे के दशक के पश्चिमी मीडिया ने अमेरिका की जो चमकदार तस्वीर दिखाई थी, उसने बेहतर जीवन की आस जगाई।

## सवाल-जवाब

### 1. कट्या सुवोरोवा की मां ने रूस क्यों छोड़ा था?
युलिया के आपराधिक गिरोहों से संबंध थे और तलाक के बाद उनके पास देश छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

### 2. मेल-ऑर्डर ब्राइड कैटलॉग कैसे काम करते थे?
महिलाएं ब्रोकरेज के जरिए मैगजीन में अपनी तस्वीर और विवरण छपवाती थीं, जिसे पुरुष कैटलॉग मंगाकर देखते और संपर्क करते थे।

### 3. सेंटर फॉर इमिग्रेशन साइट्स के अनुसार 90 के दशक में कितनी ऐसी शादियां होती थीं?
उस समय हर साल लगभग 10,000 मेल-ऑर्डर विवाह होते थे, जिनमें से 4,000 अमेरिकी पुरुषों से जुड़े थे।

### 4. युलिया को अमेरिकी दस्तावेज कैसे मिले?
उनके चौथे और अंतिम पति एडम ने उनके ग्रीन कार्ड के लिए आधिकारिक रूप से आवेदन किया था।

### 5. कट्या सुवोरोवा की आत्मकथा का क्या नाम है?
उनकी पहली आत्मकथा का नाम 'अंग्रेटफुल इमिग्रेंट डॉटर' है।

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