प्राइवेट पार्ट पर थपकी देने का सेक्शुअल ट्रेंड, प्लेजर या दर्दनाक अनुभव पर विशेषज्ञों ने दी चेतावनी इंटिमेसी के दौरान फीमेल जेनिटल्स पर थप्पड़ या तेज थपकी लगाने की आदत को लेकर बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञ स्पष्ट कर रहे हैं कि बिना सहमति और सही जानकारी के ऐसा करना गंभीर चोट और सूजन का कारण बन सकता है। शारीरिक संबंधों के दौरान अलग-अलग तरह के प्रयोग अक्सर पार्टनर्स के बीच विवाद या असहजता का कारण बन जाते हैं। चाहे रिवर्स काउगर्ल जैसी पोजिशन हो या संबंध बनाते समय थूकने की आदत, इन पर लोगों की पसंद बिल्कुल बंटी हुई रहती है। इसी कड़ी में अब एक और सेक्शुअल क्रिया चर्चा में आ गई है, जिसे एडल्ट फिल्मों में काफी प्रमुखता से दिखाया जाता है। इसे वल्वा यानी महिला जननांग पर थपकी देना या थप्पड़ मारना कहा जाता है। सोशल मीडिया पर एक पुरुष द्वारा अपने निजी अनुभव साझा किए जाने के बाद इस विषय पर भारी बहस छिड़ गई है, जिसमें कई महिलाओं ने इसे बेहद असहज और दर्दनाक बताया है। यह पूरी बहस तब शुरू हुई जब एक 36 वर्षीय पुरुष ने रेडिट पर अपना अनुभव साझा किया। उसने बताया कि पिछले एक साल में उसे कुछ महिलाओं के साथ इंटिमेट होने का मौका मिला और लगभग हर महिला ने अपने प्राइवेट पार्ट पर किसी न किसी तरह की थपकी या थप्पड़ की क्रिया में हिस्सा लिया। उस व्यक्ति के अनुसार, सबसे आम तरीका वह था जिसमें महिलाएं क्लाइमेक्स पर पहुंचते ही तेज थपकी लगाना पसंद कर रही थीं। उसने सवाल उठाया कि क्या यह बेडरूम में कोई नया सेक्शुअल ट्रेंड बन चुका है। हालांकि, उसके इस दावे पर इंटरनेट पर मौजूद कई महिलाओं ने कड़ी हैरानी जताई और अपने बिल्कुल विपरीत अनुभव सामने रखे। इंटरनेट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक महिला ने बताया कि एक पुरुष डेट ने संबंध बनाते वक्त बिना किसी चेतावनी के अचानक उसे प्राइवेट पार्ट पर थप्पड़ मार दिया, जिसके तुरंत बाद उसने सब कुछ रोक दिया और वहां से चली गई। एक अन्य महिला का कहना था कि उसे दर्द बिल्कुल पसंद नहीं है, खासकर संबंध बनाते समय शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्सों पर ऐसा करना कामेच्छा को पूरी तरह खत्म कर देता है और शरीर को रेगिस्तान की तरह सूखा बना देता है। कई अन्य लोगों ने भी दो टूक कहा कि यह न तो कामुक है और न ही आनंददायक। इस तरह की तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद विशेषज्ञ अब इसके पीछे की वजहों और खतरों का विश्लेषण कर रहे हैं। एडल्ट फिल्मों का असर और सहमति की कमी सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान कई महिलाओं ने इस चलन के सामान्य होने के लिए सीधे तौर पर पोर्नोग्राफी को जिम्मेदार ठहराया। यौन स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि एडल्ट कंटेंट में यह एक बेहद आम दृश्य बन चुका है। जब लोग स्क्रीन पर ऐसी चीजें देखते हैं, तो वे अक्सर यह मान बैठते हैं कि असल जिंदगी में भी हर किसी को इसमें आनंद आएगा, जबकि हकीकत इससे काफी अलग हो सकती है। साइकोसेक्शुअल थेरेपिस्ट बेकी क्रेप्सली-फॉक्स बताती हैं कि यह उन दृश्यों में ज्यादा दिखाई देता है जहां पुरुष एक हावी भूमिका में होते हैं और यह पावर प्ले का हिस्सा बनता है। कुछ महिलाओं में किशोरावस्था से ही इसे लेकर उत्सुकता हो सकती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह रुचि एडल्ट फिल्मों को देखकर सीखी गई आदत होती है। बेकी क्रेप्सली-फॉक्स का कहना है कि भले ही किसी का आनंद लेना वास्तविक हो, लेकिन खुद से यह सवाल पूछना बेहद जरूरी है कि क्या आप वास्तव में यह चाहते हैं या फिर सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आपसे ऐसी उम्मीद की जा रही है। सेक्सोलॉजिस्ट नेस कूपर का कहना है कि पोर्न में दिखाए जाने वाले किसी भी सेक्शुअल एक्ट के साथ हमेशा यह जोखिम रहता है कि कोई पार्टनर यह मान ले कि यह सभी के लिए सुखद होगा। लेकिन बेडरूम में किसी भी नए प्रयोग से पहले खुलकर बात करना और दोनों की पूरी सहमति लेना सबसे अनिवार्य शर्त है। नेस कूपर चेतावनी देती हैं कि यदि जोर से मारा जाए, तो इससे अनचाही चोट, नील पड़ना और सूजन आ सकती है। इससे आगे शारीरिक संबंध बनाना बेहद असहज हो सकता है, साथ ही उस हिस्से को ठीक होने में लंबा समय लग सकता है और सामान्य तौर पर बैठने या चलने-फिरने में भी गंभीर दर्द का सामना करना पड़ सकता है। इस क्रिया की बनावट और उत्तेजना का वैज्ञानिक पहलू नेस कूपर विस्तार से समझाती हैं कि इस क्रिया का मूल अर्थ वल्वा या क्लिटोरिस पर थप्पड़ जैसी गति से एक बार दबाव डालना होता है। इसे साधारण भाषा में स्मैक भी कहा जाता है। हालांकि कुछ सामाजिक दायरों में इसका संबंध केवल रफ सेक्स से जोड़ा जाता है जहां तेज पेनेट्रेशन के कारण शरीर आपस में टकराते हैं। लेकिन जब स्मैक की बात आती है, तो इसका मुख्य केंद्र क्लिटोरिस या मॉन्स प्यूबिस का हिस्सा होता है। इसे हाथ, हथेली, लिंग के अगले हिस्से, स्पैंकिंग पैडल या यहां तक कि फ्लॉगर जैसी चीजों से भी किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो चीज शारीरिक रूप से अच्छी महसूस हो सकती है, वह जोरदार थप्पड़ की जगह एक मजबूत और स्थिर थपकी के अधिक करीब होती है। बेकी क्रेप्सली-फॉक्स के अनुसार, हल्की थपकी देने से तंत्रिकाओं के सिरे सक्रिय हो जाते हैं और उत्तेजना केवल क्लिटोरिस तक सीमित रहने के बजाय पूरे बाहरी वल्वा में फैल जाती है। यह पूरे क्षेत्र को प्लेजर का हिस्सा बनाने का एक सुखद तरीका हो सकता है, बशर्ते दबाव बिल्कुल नियंत्रित हो। इसकी लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि दबाव को पूरी तरह से व्यक्तिगत पसंद के अनुसार बदला जा सकता है, जो तंत्रिका तंत्र को एक नया और तीव्र अनुभव देता है। बेकी क्रेप्सली-फॉक्स बताती हैं कि हल्की थपकी ताजगी और रोमांच लाती है, जबकि थोड़ी तेज थपकी हल्की जलन पैदा कर सकती है। चूंकि इंसानी दिमाग में दर्द और आनंद को प्रोसेस करने वाले हिस्से आपस में काफी करीब से जुड़े होते हैं, इसलिए कुछ लोगों को वह तीखी सनसनाहट बेहद अच्छी लग सकती है। इसके अलावा, इम्पैक्ट प्ले का एक रूप होने के कारण यह किंक और फेटिश की श्रेणी में भी आता है। नेस कूपर बताती हैं कि यह मैसोकिज्म या सैडोमैसोकिज्म का हिस्सा बन सकता है, जहां दर्द सहने या दर्द देने से यौन उत्तेजना मिलती है। किंक प्ले में रुचि रखने वाले कुछ लोग नियंत्रण और समर्पण की भावना के तहत खुद को तेज थपकी सहने का लक्ष्य देते हैं, जिसे वे पुरस्कार और फोकस के रूप में देखते हैं। इसके साथ ही, थपकी से निकलने वाली आवाज भी करने वाले पार्टनर को उत्तेजित कर सकती है, खासकर तब जब क्लिटोरिस पर पर्याप्त चिकनाई मौजूद हो। कई महिलाओं ने भी इसके सकारात्मक पहलुओं की पुष्टि की है। एक महिला ने तुलना करते हुए बताया कि यह बिल्कुल स्पैंकिंग जैसा है, यदि सही समय और सही दबाव के साथ किया जाए तो यह दर्द और सुख का एक अलग अहसास कराता है, हालांकि यह हर किसी के लिए नहीं है। एक अन्य महिला ने बताया कि यदि सही तरीके से किया जाए तो इसमें चोट नहीं लगती और यह क्लाइमेक्स तक पहुंचने में काफी मदद करता है, और वह खुद सोलो प्ले के दौरान मैजिक वैंड से ऐसा करती हैं। सुरक्षित अभ्यास के लिए जरूरी सावधानियां यदि कोई पार्टनर इस तरह के प्रयोग को आजमाना चाहता है, तो विशेषज्ञों ने इसके लिए कुछ बेहद कड़े सुरक्षा नियम बताए हैं ताकि नाजुक अंगों को नुकसान न पहुंचे। बेकी क्रेप्सली-फॉक्स की सलाह है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान आपस में बातचीत जारी रखनी चाहिए और शुरुआत हमेशा बेहद कोमल स्पर्श से करनी चाहिए। सबसे पहले नाखूनों को अच्छी तरह काट लेना चाहिए और उंगलियों से अंगूठियां निकाल देनी चाहिए ताकि नाजुक त्वचा पर कोई खरोंच न आए। इसके बाद एक आरामदायक स्थिति में आना चाहिए जहां से स्पर्श करना आसान हो। लुब्रिकेंट का उपयोग करना बेहद आवश्यक है ताकि घर्षण या खिंचाव न पैदा हो। संपर्क का मुख्य लक्ष्य हमेशा बाहरी मांसल होंठ होने चाहिए, न कि हड्डियों वाला प्यूबिक हिस्सा। हमेशा बहुत हल्के दबाव से शुरुआत करनी चाहिए और धीरे-धीरे उस स्तर को तलाशना चाहिए जो दोनों पार्टनर्स के लिए सुखद हो। बेकी क्रेप्सली-फॉक्स का कहना है कि नए प्रयोगों को लेकर उत्सुकता होना पूरी तरह सामान्य है, और यह फैसला करना भी उतना ही सामान्य है कि यह आपके लिए नहीं है। किसी भी नई संवेदना के साथ बातचीत, कोमलता और निरंतर फीडबैक ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। इसका आप पर असर बेडरूम में नए शारीरिक प्रयोगों से पहले आपसी संवाद और सही तकनीक का ध्यान न रखने पर शारीरिक चोट और भावनात्मक दूरी का जोखिम हो सकता है। • शारीरिक सुरक्षा पर असर: प्राइवेट पार्ट पर बिना तैयारी या अत्यधिक जोर से थपकी लगाने से नाजुक ऊतकों में नील, सूजन और तेज दर्द हो सकता है। इसके कारण सामान्य रूप से बैठने, चलने और भविष्य में शारीरिक संबंध बनाने में गंभीर कठिनाई आ सकती है। • सहमति और संचार की आवश्यकता: किसी भी नए या आक्रामक प्रयोग से पहले दोनों पार्टनर्स की स्पष्ट और उत्सुक सहमति होना अनिवार्य है। बिना बताए अचानक ऐसा करने से पार्टनर में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है और संबंध तुरंत समाप्त हो सकते हैं। • सुरक्षित तकनीक के नियम: यदि दोनों पार्टनर सहमत हैं, तो नाखूनों को काटना, अंगूठियां उतारना और पर्याप्त लुब्रिकेंट का उपयोग करना जरूरी है। संपर्क हमेशा बाहरी मांसल हिस्से पर होना चाहिए और हड्डियों वाले प्यूबिक क्षेत्र से पूरी तरह बचना चाहिए। • कामेच्छा पर विपरीत प्रभाव: बिना इच्छा के झेला गया दर्द महिलाओं की शारीरिक उत्तेजना को पूरी तरह समाप्त कर सकता है। दर्द के कारण स्वाभाविक चिकनाई खत्म हो जाती है, जिससे अनुभव पूरी तरह निराशाजनक बन जाता है। ऐसा क्यों हुआ एडल्ट फिल्मों के व्यापक प्रसार और सोशल मीडिया पर खुली बहसों के चलते यह विवादास्पद शारीरिक क्रिया अचानक चर्चा में आई है। मुख्य रूप से फिल्मों में हावी दिखने वाले दृश्यों को असल जिंदगी में बिना सोचे-समझे दोहराने की प्रवृत्ति इस विवाद की जड़ बनी है। • पोर्नोग्राफी का सीधा प्रभाव: एडल्ट फिल्मों में पुरुष प्रभुत्व और पावर प्ले दिखाने के लिए महिला जननांगों पर थपकी देने के दृश्यों को काफी दिखाया जाता है। दर्शकों द्वारा इन काल्पनिक दृश्यों को सामान्य मान लेने से यह व्यवहार वास्तविक जीवन के बेडरूम तक पहुंच गया है। • दर्द और आनंद का तंत्रिका विज्ञान: मानव मस्तिष्क में दर्द और सुख की संवेदनाओं को नियंत्रित करने वाले केंद्र एक-दूसरे के बेहद करीब होते हैं। सही दबाव और सहमति के साथ की गई हल्की थपकी कुछ लोगों में उत्तेजना बढ़ा सकती है, जिसके कारण कुछ पार्टनर्स इसे किंक या इम्पैक्ट प्ले के तौर पर अपनाते हैं। • अपेक्षित व्यवहार का मनोवैज्ञानिक दबाव: कई बार महिलाएं अपनी वास्तविक इच्छा के बजाय सिर्फ पार्टनर की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए ऐसे प्रयोगों को सहन करने लगती हैं। सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति द्वारा इसे आम बताए जाने के बाद महिलाओं ने खुलकर स्पष्ट किया कि बिना सहमति यह असहनीय होता है। सवाल-जवाब 1. प्राइवेट पार्ट पर थपकी देना क्या है? यह एक ऐसी शारीरिक क्रिया है जिसमें हाथ, हथेली या लिंग से महिला के वल्वा या क्लिटोरिस पर हल्की या तेज थपकी दी जाती है। 2. क्या यह क्रिया सभी महिलाओं को पसंद आती है? नहीं, कई महिलाओं का कहना है कि यह बिल्कुल आनंददायक नहीं है और इससे दर्द तथा शारीरिक सूखापन पैदा होता है। 3. इस क्रिया को करने से क्या शारीरिक खतरे हो सकते हैं? यदि जोर से मारा जाए तो इससे अनचाही चोट, नील पड़ना और गंभीर सूजन आ सकती है, जिससे बैठने और चलने में भी दर्द हो सकता है। 4. विशेषज्ञों के अनुसार इसे सुरक्षित तरीके से कैसे किया जा सकता है? नाखून काटकर, अंगूठियां उतारकर, पर्याप्त लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करके और हड्डियों से बचते हुए केवल बाहरी मांसल त्वचा पर हल्की शुरुआत करनी चाहिए। 5. क्या इस तरह के प्रयोग से पहले सहमति जरूरी है? हां, बेडरूम में किसी भी नए प्रयोग से पहले दोनों पार्टनर्स के बीच बातचीत और पूरी सहमति होना सबसे महत्वपूर्ण है। https://trendkia.com/sexual-health/private-part-par-thapki-dene-ka-sexual-trend-pleasure-ya-dardnak-anubhav-par-visheshagyon-ne-di-warning-52813 TrendKia — Har trend, sabse pehle.