# अजमेर की पहाड़ियों में स्थित बादर माता मंदिर में संतान सुख और रोगों से मुक्ति की सदियों पुरानी मान्यता

> पुष्कर के पास कानस और होकरा गांव के बीच पहाड़ियों पर स्थित 1300 साल पुराना बादर माता मंदिर अपनी चमत्कारी मान्यताओं, त्वचा रोगों से मुक्ति और संतान प्राप्ति की आस्था के लिए प्रसिद्ध है।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/ajmer-ki-pahariyon-men-sthita-badar-mata-temple-men-sntana-sukha-aura-rogon-se-mukti-ki-sadiyon-purani-manyata-35843 · **Language:** Hindi
**Tags:** बादर माता मंदिर, अजमेर, पुष्कर, राजस्थान मंदिर, तीर्थ स्थल, धार्मिक मान्यताएं

राजस्थान में अजमेर जिले के तीर्थ स्थल पुष्कर से तकरीबन 5 किलोमीटर की दूरी पर कानस और होकरा गांव की सुरम्य पहाड़ियों के मध्य बादर माता का प्राचीन मंदिर अवस्थित है। चारों तरफ से प्राकृतिक छटा और अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा यह धार्मिक स्थल भक्तों के गहरे विश्वास का केंद्र बना हुआ है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इस पावन धाम में न केवल शीश नवाने आते हैं, बल्कि अपनी गंभीर व्याधियों और जीवन के संकटों से मुक्ति पाने की प्रार्थना भी करते हैं।

## गंभीर रोगों से छुटकारा और संतान प्राप्ति का अटूट विश्वास
क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार, बादर माता के दरबार में हाजिरी लगाने वाले जातकों को गंभीर और पुरानी बीमारियों से राहत मिलती है। विशेष रूप से चर्म रोग, लंबे समय से चली आ रही शारीरिक तकलीफों और मानसिक अवसाद से पीड़ित लोगों के कष्ट दूर होने की अनेक कथाएं यहां प्रचलित हैं। निसंतान दंपतियों के लिए भी यह धाम गहरी श्रद्धा का स्थल है। ऐसी लोक मान्यता है कि सच्चे मन से माता के सम्मुख मन्नत मांगने और विधिवत पूजा अर्चना करने पर महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है और उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है।

## 1300 वर्षों से अधिक का गौरवशाली इतिहास और चमत्कारी कुंड
मंदिर के वर्तमान पुजारी राजू रावत के अनुसार, इस देवस्थान का इतिहास 1300 वर्ष से भी अधिक पुराना है। वे स्वयं पिछले 30 वर्षों से माता की सेवा और पूजा पाठ का दायित्व संभाल रहे हैं। उनसे पहले उनके पूर्वज भी पीढ़ियों से इसी स्थान पर माता की आराधना करते चले आ रहे हैं। पुजारी का कहना है कि उनकी कई पीढ़ियां माता के अलौकिक चमत्कारों और कृपा की गवाह रही हैं।

मंदिर परिसर में एक अत्यंत पावन जल कुंड भी विद्यमान है, जो पूरे बारह महीने स्वच्छ जल से लबालब रहता है। इस कुंड के पानी को भक्तगण बेहद चमत्कारी मानते हैं। श्रद्धालुओं में यह दृढ़ विश्वास है कि इस कुंड के पावन जल के प्रयोग से चर्म रोगों और अन्य शारीरिक व्याधियों से तत्काल लाभ मिलता है। इसके साथ ही संतान प्राप्ति की कामना रखने वाली महिलाएं भी इस कुंड और माता के चरणों में अपना शीश झुकाती हैं।

## अनहोनी से पूर्व चेतावनी और ग्रामीणों की अटूट श्रद्धा
गांव के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्राचीन समय में जब इलाके में डकैती, चोरी अथवा असुरक्षा का वातावरण बन जाता था, तब माता की कृपा से ग्रामीणों को किसी भी संकट की पूर्व सूचना या संकेत मिल जाया करते थे। इन अलौकिक चेतावनियों के चलते पूरा गांव सतर्क हो जाता था और किसी भी बड़ी अनहोनी से पूर्व सुरक्षात्मक कदम उठा लिए जाते थे। माता के इन्हीं चमत्कारों और सुरक्षा भाव की वजह से आज भी यह तीर्थ स्थल आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
पुष्कर और अजमेर के समीप स्थित इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के बारे में जानकारी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहद उपयोगी है।

- **अजमेर और पुष्कर में:** स्थानीय निवासियों और पास से गुजरने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर एक प्रमुख आध्यात्मिक गंतव्य है। पुष्कर आने वाले पर्यटक मात्र 5 किलोमीटर की दूरी तय करके कानस और होकरा की पहाड़ियों में स्थित इस शांतिपूर्ण धाम के दर्शन कर सकते हैं।
- **भारत में:** लंबे समय से त्वचा रोग या संतानहीनता से जूझ रहे देश भर के आस्तिक श्रद्धालु यहां अपनी मन्नत लेकर पहुंच सकते हैं। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्राकृतिक पहाड़ियों में सुकून तलाशने वाले यात्रियों के लिए यह एक सुंदर और शांत तीर्थ स्थल साबित होता है।
- **यात्रा व्यवस्था:** कानस और होकरा के ग्रामीण रास्तों से होकर पहाड़ी तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। वर्ष भर पानी से भरा रहने वाला कुंड यहां आने वाले दर्शनार्थियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है।
- **सांस्कृतिक विरासत:** 1300 साल से अधिक पुरानी धरोहरों में रुचि रखने वाले इतिहास और संस्कृति प्रेमियों को यहां पीढ़ियों से चली आ रही पूजा परंपरा देखने को मिलती है। वर्तमान पुजारी के 30 साल के अनुभव और पूर्वजों की परंपरा को करीब से जाना जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
बादर माता मंदिर की प्रसिद्धि और इसके प्रति लोगों की अटूट निष्ठा के पीछे 1300 वर्षों से अधिक का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आधार मौजूद है।

- **रोग निवारण और संतान सुख की मान्यता:** मंदिर परिसर में मौजूद बारहमासी जल कुंड और माता की कृपा से त्वचा रोगों और असाध्य बीमारियों में आराम मिलने के विश्वास ने इस धाम को प्रसिद्धि दिलाई है। इसी आस्था के बल पर कई पीढ़ियों से संतानहीन महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए यहां मन्नत मांगती आई हैं।
- **सुरक्षा और अलौकिक संकेत की परंपरा:** प्राचीन काल में ग्रामीण इलाकों में डकैती और असुरक्षा का भय आम बात थी, और ग्रामीणों का मानना है कि माता समय पूर्व ही विपत्ति का संकेत दे देती थीं। समय रहते गांव को सतर्क करने की इन घटनाओं ने जनमानस में माता के प्रति रक्षक का अटूट भाव स्थापित किया।
- **पीढ़ी-दर-पीढ़ी सेवा:** पुजारी राजू रावत और उनके पूर्वज सदियों से माता की अखंड सेवा करते रहे हैं। एक ही परिवार द्वारा लगातार 1300 साल पुरानी परंपरा को 30 वर्षों से अधिक समय से जीवंत रखने से भी श्रद्धालुओं का विश्वास निरंतर गहरा होता गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. बादर माता का प्राचीन मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के अजमेर जिले में पुष्कर से लगभग 5 किलोमीटर दूर कानस और होकरा गांव के बीच पहाड़ियों पर स्थित है।

### 2. बादर माता मंदिर कितना पुराना है?
मंदिर के पुजारी के अनुसार, यह धार्मिक स्थल 1300 वर्ष से भी अधिक पुराना है।

### 3. मंदिर परिसर के कुंड की क्या विशेषता है?
यह पवित्र कुंड पूरे साल पानी से भरा रहता है और मान्यता है कि इसके जल के प्रयोग से त्वचा रोग और शारीरिक व्याधियों में राहत मिलती है।

### 4. वर्तमान में मंदिर के पुजारी कौन हैं और वे कितने समय से सेवा कर रहे हैं?
वर्तमान पुजारी राजू रावत हैं, जो पिछले 30 वर्षों से यहां पूजा-अर्चना कर रहे हैं और उनका परिवार पीढ़ियों से इस सेवा में लगा है।

### 5. मंदिर के बारे में कौन सी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं?
मान्यता है कि यहां प्रार्थना करने से गंभीर बीमारियां और चर्म रोग ठीक होते हैं, साथ ही निसंतान महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होती है।

### 6. प्राचीन काल में ग्रामीणों को मंदिर से क्या सहायता मिलती थी?
प्राचीन समय में चोरी या असुरक्षा के संकट से पहले माता की कृपा से संकेत मिल जाया करते थे, जिससे ग्रामीण समय रहते सतर्क हो जाते थे।

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