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  "title": "अनंत चतुर्दशी 2026 पर बप्पा को विदाई देने की सही घड़ियां, भद्रा और पंचक के बीच ऐसे चुनें दोषमुक्त समय",
  "summary": "अनंत चतुर्दशी 2026 पर गणेश विसर्जन के दिन पंचक, भद्रा और शूल योग का प्रभाव रहेगा। जानिए देव प्रतिमा विसर्जन के शास्त्रसम्मत नियम और विदाई के सबसे उत्तम चौघड़िया व अभिजीत मुहूर्त।",
  "content": "गणेशोत्सव के अंतिम पड़ाव यानी अनंत चतुर्दशी पर घरों और भव्य सार्वजनिक पंडालों में विराजित विघ्नहर्ता भगवान गणेश को सजल नेत्रों से विदाई दी जाती है। धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, विसर्जन केवल प्रतिमा को विदा करने का अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह ईश्वर से अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना का पावन अवसर भी माना जाता है। प्रकृति के शाश्वत नियम की तरह ही यह प्रक्रिया सिखाती है कि जिसका सृजन हुआ है, वह अंततः अपने मूल पंचतत्व में विलीन हो जाता है। साल 2026 में 25 सितंबर को पड़ने वाली अनंत चतुर्दशी पर श्रद्धालु बप्पा को विदाई देने की तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन इस तिथि पर कई खगोलीय और ज्योतिषीय संयोग एक साथ बन रहे हैं।\n\nपंचक और भद्रा के साए में विसर्जन के नियम\nपंचांग की गणनाओं के मुताबिक, विसर्जन के पूरे दिन पंचक और भद्रा का प्रभाव बना रहने वाला है। इसके अलावा दोपहर 2 बजकर 5 मिनट तक शूल योग भी विद्यमान रहेगा, जिसे ज्योतिष में कष्टकारी और तीक्ष्ण माना गया है। शूल का शाब्दिक अर्थ कांटा या चुभने वाला अस्त्र होता है। ऐसे में कई भक्तों के मन में संशय है कि क्या पंचक और भद्रा की उपस्थिति में गणपति विसर्जन शास्त्रसम्मत माना जाएगा।\n\nज्योतिषाचार्यों का मत है कि पंचक से जुड़े कड़े निषेध मुख्य रूप से नश्वर देह के अंतिम संस्कार और मृत्यु संबंधी कार्यों पर लागू होते हैं। गणेश प्रतिमा का जल विसर्जन किसी पार्थिव शरीर का दाह संस्कार नहीं, बल्कि प्राण प्रतिष्ठित देव प्रतिमा का पुनः अपने दिव्य स्वरूप में लौटने का पवित्र अनुष्ठान है। इसलिए देव विसर्जन को अंतिम संस्कार की श्रेणी में नहीं गिना जाता, जिसके चलते पंचक काल के भीतर भी श्रद्धापूर्वक विसर्जन संपन्न किया जा सकता है।\n\nतिथि और अशुभ योगों की सटीक समय सीमा\nपंचांग के अनुसार, पंचक का आरंभ 23 सितंबर की रात्रि से हो चुका है और यह 28 सितंबर की सुबह तक प्रभावी रहेगा। इस व्यवस्था के अनुसार 25 सितंबर का पूरा दिन पंचक के घेरे में ही रहेगा। वहीं भद्रा का आरंभ 25 सितंबर को प्रातः 11 बजकर 6 मिनट पर होगा, जो अगले दिन 26 सितंबर की सुबह 6 बजकर 12 मिनट तक चलेगा। इन दोनों के साथ दोपहर 2 बजकर 5 मिनट तक शूल योग की उपस्थिति रहेगी। इन तमाम संयोगों के बीच श्रद्धालु शुभ चौघड़िया और श्रेष्ठ लग्न का चयन कर बप्पा को विदा कर सकते हैं।\n\n25 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त\nअलग-अलग शहरों में स्थानीय सूर्योदय के आधार पर चौघड़िया के समय में कुछ मिनटों का अंतर देखने को मिल सकता है। मुख्य पंचांग के अनुसार चौघड़िया और विशेष मुहूर्तों की समय सारिणी इस प्रकार है\n\n• लाभ चौघड़िया: सुबह 7 बजकर 41 मिनट से सुबह 9 बजकर 12 मिनट तक\n• अमृत चौघड़िया: सुबह 9 बजकर 12 मिनट से सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक\n• शुभ चौघड़िया: दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 1 बजकर 43 मिनट तक\n• चर एवं लाभ मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक\n• विसर्जन का उत्तम मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट के बीच\n• प्रातः काल शुभ मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 12 मिनट से सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक\n• रवि योग: सुबह 6 बजकर 12 मिनट से सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक\n• अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक\n• विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 14 मिनट से दोपहर 3 बजकर 2 मिनट तक\n• गोधूलि बेला: शाम 6 बजकर 15 मिनट से शाम 6 बजकर 39 मिनट तक\n\nउत्तर पूजा और विसर्जन की मर्यादा\nप्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जाने से पहले घर या पंडाल में विधिपूर्वक उत्तर पूजा संपन्न करनी चाहिए। भगवान गणेश की अंतिम आरती करें और उन्हें ताजे पुष्प, दूर्वा, ताजे फल और मोदक अथवा परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर बप्पा से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-शांति की प्रार्थना करें। अनुष्ठान के अंत में पूजा-अर्चना के दौरान अनजाने में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना करें।\n\nविसर्जन यात्रा के दौरान कुछ आवश्यक सावधानियों का पालन अनिवार्य है। प्रतिमा को आदरपूर्वक उठाकर स्थानीय प्रशासन की ओर से अधिकृत कृत्रिम कुंडों या विसर्जन घाटों तक ही ले जाएं। पर्यावरण और जल स्रोतों की शुचिता बनाए रखने के लिए मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता दें। पूजा में उपयोग की गई फूल-मालाएं और निर्माल्य सीधे जल में प्रवाहित करने के बजाय अलग निर्धारित पात्र में एकत्रित करें। नदी, तालाब या समुद्र किनारे विसर्जन करते समय बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें तथा स्वच्छता के नियमों का पालन करें।\n\nइसका आप पर असर\nअनंत चतुर्दशी पर पंचक और भद्रा के साए के कारण विसर्जन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को सही समय का चयन पहले से करना होगा।\n\n• पूजा का समय: सुबह के अमृत और लाभ चौघड़िया में विसर्जन पूरा करना सबसे सुगम रहेगा। प्रातः 7 बजकर 41 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट के बीच का समय अनुष्ठान के लिए सबसे अनुकूल है।\n• यात्रा और भीड़ प्रबंधन: भद्रा का आरंभ सुबह 11 बजकर 6 मिनट से हो रहा है। जो श्रद्धालु भद्रा से पहले अनुष्ठान करना चाहते हैं, उन्हें प्रातः काल ही घाटों पर पहुंचना होगा।\n• पर्यावरण और स्थानीय नियम: नदियों और झीलों में केवल प्रशासन द्वारा तय किए गए स्थलों पर ही विसर्जन करें। पूजा की फूल-मालाएं और निर्माल्य अलग पात्रों में जमा करने के लिए नगर निगम के दिशा-निर्देशों का पालन करें।\n• पारिवारिक सुरक्षा: विसर्जन स्थलों पर भारी भीड़ और जलभराव को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा का प्रबंध करें। गहरे पानी में उतरने से बचें और प्रशासन के सुरक्षा मानकों का ध्यान रखें।\n\nऐसा क्यों हुआ\n25 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन के दिन पंचक, भद्रा और शूल योग का एक साथ बनना पंचांगीय गणनाओं का स्वाभाविक खगोलीय योग है।\n\n• पंचक का संयोग: पंचक नक्षत्रों का चक्र 23 सितंबर की रात से आरंभ होकर 28 सितंबर की सुबह तक सक्रिय है। इसी निर्धारित अवधि के भीतर अनंत चतुर्दशी की तिथि पड़ने के कारण विसर्जन पूरे दिन पंचक में रहेगा।\n• भद्रा का समय चक्र: पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को पूर्वाह्न 11 बजकर 6 मिनट से भद्रा लग रही है। यह भद्रा अगले दिन 26 सितंबर की सुबह 6 बजकर 12 मिनट तक अनवरत बनी रहेगी।\n• शूल योग का प्रभाव: खगोलीय गणनाओं के आधार पर दोपहर 2 बजकर 5 मिनट तक शूल योग की स्थिति बनी रहेगी। इस तीक्ष्ण योग के उपरांत अनुकूल योगों का आरंभ होगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्या पंचक के दौरान गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जा सकता है?\nहां, ज्योतिषियों के अनुसार पंचक के निषेध मृत्यु और अंतिम संस्कार पर लागू होते हैं, देव प्रतिमा के विसर्जन पर नहीं।\n\n2. 25 सितंबर 2026 को भद्रा किस समय से किस समय तक रहेगी?\nभद्रा सुबह 11 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 26 सितंबर की सुबह 6 बजकर 12 मिनट तक प्रभावी रहेगी।\n\n3. गणेश विसर्जन के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त कौन सा है?\nपंचांग के अनुसार विसर्जन का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 6 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट के मध्य है।\n\n4. दोपहर के समय अभिजीत और विजय मुहूर्त का समय क्या है?\nअभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 14 मिनट से 3 बजकर 2 मिनट तक रहेगा।",
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  "category": "अध्यात्म",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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