भाद्रपद कृष्ण एकादशी पर अजा एकादशी और सोमवार का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ समय और पूजा विधान 7 सितंबर 2026 को अजा एकादशी और सोमवार का पावन मेल बन रहा है, जिसमें भगवान विष्णु के साथ देवाधिदेव महादेव की आराधना का विशेष अवसर मिलेगा। दिन के प्रमुख शुभ-अशुभ मुहूर्त और पंचांग विवरण विस्तार से देखें। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में 7 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन माना जा रहा है, क्योंकि इस तिथि पर अजा एकादशी व्रत के साथ सोमवार व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। इस विशिष्ट खगोलीय और पंचांगीय स्थिति के चलते श्रद्धालुओं को जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु और संहारकर्ता देवाधिदेव महादेव दोनों की पूजा एक ही दिन करने का फल प्राप्त होगा। पंचांग गणना के अनुसार इस दिन एकादशी तिथि शाम 05:03 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत द्वादशी तिथि का आरंभ होगा। नक्षत्रों की बात करें तो शाम 06:14 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र प्रभावी रहेगा और उसके बाद पुष्य नक्षत्र की शुरुआत होगी। करणों में बव करण प्रातः 06:16 बजे तक और तत्पश्चात बालव करण शाम 05:03 बजे तक मान्य रहेगा। योग में व्यतीपात प्रातः 06:41 बजे तक रहेगा, जिसके बाद वरीयान योग 8 सितंबर की भोर 03:38 बजे तक चलेगा। दिशाशूल पूर्व दिशा का है, जबकि चंद्रमा पहले मिथुन राशि में और बाद में कर्क राशि में गोचर करेंगे, वहीं सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेंगे। हरि और हर की संयुक्त आराधना का धार्मिक महत्व सनातन परंपरा में एकादशी का व्रत पूर्ण रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जबकि सप्ताह का सोमवार भगवान शिव तथा चंद्र देव की उपासना के लिए निर्धारित है। जब यह दोनों अवसर एक साथ आते हैं, तो इसे 'हरि-हर' उपासना का अत्यंत मंगलकारी योग माना जाता है। श्रद्धालु दिन के समय भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए अजा एकादशी का उपवास रख सकते हैं तथा सायंकाल और प्रदोष काल में भगवान भोलेनाथ की विधिपूर्वक अर्चना कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा का भगवान शिव के साथ अति घनिष्ठ संबंध है, क्योंकि चंद्रमा उनके मस्तक पर आभूषण के रूप में शोभायमान हैं। इसी कारण देवाधिदेव महादेव को चंद्रशेखर और सोमेश्वर जैसे दिव्य नामों से पुकारा जाता है। प्रदोष काल में शिव पूजन की सरल एवं प्रामाणिक विधि सोमवार के दिन भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष काल को सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है। 7 सितंबर को प्रदोष काल शाम 06:35 बजे से रात 08:05 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में पूजन प्रारंभ करते हुए सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध गंगाजल अथवा स्वच्छ शीतल जल अर्पित करना चाहिए। इसके पश्चात पंचामृत विधान के अंतर्गत दूध, दही, शहद आदि से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। अभिषेक संपन्न होने के बाद महादेव को प्रिय श्वेत चंदन का त्रिपुंड लगाना चाहिए और बिल्वपत्र, धतूरा तथा आक के पुष्प श्रद्धापूर्वक अर्पित करने चाहिए। पूरे पूजन के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' पंचाक्षर मंत्र का निरंतर मानसिक या वाचिक जप करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। अंत में शिव चालीसा अथवा शिव स्तुति का सस्वर पाठ कर कपूर से आरती करें और उपस्थित जनों में प्रसाद वितरण करें। दिन के मुख्य शुभ मुहूर्त और समय सारिणी पंचांग के अनुसार किसी भी नए व मांगलिक कार्य के लिए शुभ मुहूर्तों का विशेष महत्व होता है। दिन का सबसे प्रमुख अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:49 बजे (अभिजीत गणना अनुसार 11:55 ए एम से 12:45 पी एम) तक रहेगा। अन्य शुभ काल इस प्रकार हैं • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:32 बजे से प्रातः 05:17 बजे तक • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:25 बजे से दोपहर 03:16 बजे तक • अमृत काल: दोपहर 03:59 बजे से शाम 05:29 बजे तक • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:37 बजे से शाम 06:59 बजे तक • सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 06:14 बजे से अगली सुबह 06:03 बजे (8 सितंबर) तक • निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:57 बजे से मध्यरात्रि 12:43 बजे (8 सितंबर) तक • चन्द्रोदय: 8 सितंबर की भोर 02:51 बजे • शिववास स्थिति: शाम 05:03 बजे तक कैलाश पर, उसके बाद नंदी पर वास रहेगा। अशुभ काल और राहुकाल की अवधि पंचांग में शुभ कार्यों से बचने के लिए कुछ समय खंडों को अशुभ माना गया है, जिनमें नए अनुष्ठान, यात्रा या बड़े लेन-देन वर्जित कहे गए हैं • राहुकाल: प्रातः 07:37 बजे से प्रातः 09:11 बजे तक • यमगण्ड: प्रातः 10:45 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक • गुलिक काल: दोपहर 01:54 बजे से दोपहर 03:28 बजे तक • दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:45 बजे से दोपहर 01:35 बजे तक • वर्ज्य: प्रातः 07:03 बजे से प्रातः 08:32 बजे तक इसका आप पर असर यह पंचांग व्रत रखने वाले और नए कार्यों का शुभारंभ करने वाले साधकों के लिए दैनिक योजना बनाने में सीधे मदद करता है। • व्रतधारियों के लिए: एकादशी तिथि शाम 05:03 बजे तक रहेगी, जिसके चलते व्रत का संकल्प और नियम दिनभर प्रभावी रहेंगे। शाम के समय फलाहार और द्वादशी में पारण के नियमों का पालन करना सुगम होगा। • शिव पूजन के लिए: प्रदोष काल शाम 06:35 बजे से 08:05 बजे तक रहेगा, जो देवाधिदेव महादेव के जलाभिषेक का मुख्य समय है। मंदिर जाने या घर पर रुद्राभिषेक करने की योजना इसी अवधि में बनाएं। • नए कार्यों के लिए: अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:49 बजे तक और सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 06:14 बजे से शुरू होगा। किसी भी शुभ शुरुआत या खरीदारी के लिए इन समयों का चयन करना श्रेयस्कर रहेगा। • सावधानी के लिए: प्रातः 07:37 बजे से 09:11 बजे तक राहुकाल का पहरा रहेगा। इस दौरान किसी भी महत्वपूर्ण सौदे, यात्रा या अनुबंध से बचना चाहिए। सवाल-जवाब 1. 7 सितंबर 2026 को अजा एकादशी तिथि कब तक रहेगी? पंचांग के अनुसार अजा एकादशी तिथि शाम 05:03 बजे तक रहेगी, जिसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी। 2. इस दिन का सबसे प्रमुख अभिजित मुहूर्त किस समय रहेगा? अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक (गणना अनुसार 11:55 ए एम से 12:45 पी एम) रहेगा। 3. सोमवार की शाम को शिव पूजन के लिए प्रदोष काल कब से कब तक है? प्रदोष काल शाम 06:35 बजे से रात्रि 08:05 बजे तक रहेगा, जो शिव पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है। 4. 7 सितंबर 2026 को राहुकाल का समय क्या है? राहुकाल प्रातः 07:37 बजे से शुरू होकर प्रातः 09:11 बजे तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। 5. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग कब से सक्रिय होगा? सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 06:14 बजे से शुरू होकर 8 सितंबर की सुबह 06:03 बजे तक प्रभावी रहेगा। https://trendkia.com/spirituality/bhadrapada-krishna-ekadashi-para-aja-ekadashi-aura-somavara-ka-durlabha-snyoga-janen-shubha-samaya-aura-puja-vidhana-37387 TrendKia — Har trend, sabse pehle.