# धौलपुर का प्राचीन सैंपऊ महादेव मंदिर, जहां त्रेता युग में भगवान राम ने किया था यज्ञ

> धौलपुर के सैंपऊ उपखंड में स्थित प्राचीन महादेव मंदिर त्रेता युग से जुड़ा है, जहां भगवान राम ने यज्ञ किया था और इसकी महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/dhaulapura-ka-prachina-sataumpau-mahadev-temple-jahan-treta-yuga-men-bhagwan-ram-ne-kiya-tha-yajna-38768 · **Language:** Hindi
**Tags:** सैंपऊ महादेव मंदिर, धौलपुर, त्रेता युग, राम रामेश्वर मंदिर, शिवलिंग, भगवान राम

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमाओं से सटा धौलपुर जिला अपने भीतर कई ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे हुए है। यहाँ के प्राचीन और भव्य मंदिरों का निर्माण रियासतकाल के दौरान राजाओं और महाराजाओं द्वारा करवाया गया था। इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में से एक प्रमुख धार्मिक स्थल सैंपऊ महादेव मंदिर है, जिसे स्थानीय स्तर पर राम रामेश्वर मंदिर के रूप में भी पूजा जाता है। इतिहासकार अरविंद शर्मा के अनुसार, इस धार्मिक स्थल का निर्माण कार्य धौलपुर रियासत के महाराज भगवंत सिंह के मामा राजधर कन्हैया लाल द्वारा कराया गया था।

## स्थापत्य कला और संरचना की विशेषता
राजधर कन्हैयालाल उस समय धौलपुर रियासत के दीवान के पद पर कार्यरत थे। जिला मुख्यालय से लगभग तीस किलोमीटर की दूरी पर सैंपऊ उपखंड के भीतर बना यह मंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य कला के लिए विशेष पहचान रखता है। इस मंदिर की बाहरी दीवारों पर विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं और पक्षियों के चित्र अत्यंत बारीकी से उकेरे गए हैं। इसके अलावा, यहाँ देवताओं की मनमोहक मूर्तियां भी दीवारों पर सुसज्जित हैं। मंदिर की बनावट ऐसी है कि इसके मुख्य गर्भगृह तक पहुँचने के लिए कुल चार अलग-अलग दरवाजे बने हुए हैं।

## त्रेता युग और भगवान राम से जुड़ा इतिहास
सैंपऊ महादेव मंदिर के पुजारियों का कहना है कि यहाँ स्थापित शिवलिंग सीधे तौर पर भगवान श्री राम के काल यानी त्रेता युग से संबंधित है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने अपने गुरु विश्वामित्र के साथ इस पावन स्थान पर यज्ञ का आयोजन किया था। इसके पश्चात, उन्होंने विधि-विधान से महादेव के इस शिवलिंग का जलाभिषेक कर प्राण-प्रतिष्ठा की थी। तभी से इस पवित्र स्थल को राम रामेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाने लगा। मंदिर के महंत बताते हैं कि गुरु विश्वामित्र के निर्देश पर ही भगवान श्री राम ने इसी क्षेत्र में ताड़का का वध किया था। इसके अलावा, मंदिर के पुजारियों के मुताबिक वर्ष 1305 में संत श्याम रतन पुरी अपनी बहन लीला बाई के साथ इस स्थान पर आए थे। उन्हें भगवान महादेव ने स्वप्न में आकर शिवलिंग के दर्शन दिए थे, जिसके बाद से इस पावन स्थल को स्वयं शंभू महादेव के रूप में भी पुकारा जाने लगा।

## शिवलिंग को स्थानांतरित करने का असफल प्रयास
पुजारियों का यह भी कहना है कि जब धौलपुर के महाराजा कीरत सिंह संतान सुख से वंचित थे, तब महादेव की कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। इस चमत्कार से अभिभूत होकर महाराजा कीरत सिंह इस विशाल शिवलिंग को धौलपुर के चोपड़ा मंदिर में स्थापित करना चाहते थे। राजा कीरत सिंह ने इस शिवलिंग को जमीन से निकलवाने के लिए काफी प्रयास किए और लगातार कई दिनों तक इसकी खुदाई का काम चलता रहा। परंतु आश्चर्यजनक रूप से इस शिवलिंग का अंतिम छोर या आधार जमीन में कहीं नहीं मिला, जिससे इसे वहाँ से हटाने का प्रयास असफल हो गया। अंततः इस भव्य मंदिर का वर्तमान निर्माण महाराज कीरत सिंह के पुत्र भगवंत सिंह के शासनकाल में पूरा हुआ।

## विशाल कुआँ और भक्तों की अटूट आस्था
मंदिर परिसर के पास बने विशालकाय कुएं का निर्माण भी धौलपुर रियासत के राजा भगवंत सिंह जी द्वारा करवाया गया था। इस परिसर की एक और अनोखी विशेषता यहाँ का एक खास पेड़ है, जिसकी एक शाखा पर सुंदर फूल खिलते हैं और दूसरी शाखा पर कांटे उगते हैं। इन दोनों शाखाओं को स्थानीय लोग नर और मादा के रूप में मानते हैं। दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि सैंपऊ महादेव का यह शिवलिंग एशिया महाद्वीप के सबसे विशाल शिवलिंगों में शामिल है और केवल दर्शन मात्र से ही भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। महाशिवरात्रि के पावन पर्व, पवित्र सावन महीने और प्रत्येक सप्ताह के सोमवार के दिन देश भर से भारी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पूजा-अर्चना करने और जलाभिषेक करने पहुँचते हैं।

## इसका आप पर असर
सैंपऊ महादेव मंदिर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को प्राचीन वास्तुकला और संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलता है।

- **धार्मिक महत्व:** महाशिवरात्रि और सावन के दौरान यहाँ आने वाले भक्तों को विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और मेलों का लाभ मिलता है।
- **स्थानीय पर्यटन:** धौलपुर क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह मंदिर स्थानीय पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा देता है।

## ऐसा क्यों हुआ
धौलपुर के सैंपऊ महादेव मंदिर के निर्माण और उसके ऐतिहासिक महत्व के पीछे रियासतकालीन परंपराएं और पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हैं।

- **राजाओं का योगदान:** इस मंदिर का निर्माण धौलपुर रियासत के दीवान राजधर कन्हैया लाल द्वारा कराया गया था और बाद में महाराज भगवंत सिंह के शासनकाल में इसे पूर्ण रूप मिला।
- **पौराणिक मान्यता:** पुजारियों और इतिहासकारों के अनुसार यह शिवलिंग त्रेता युग का है और इसकी स्थापना भगवान राम द्वारा गुरु विश्वामित्र के सानिध्य में की गई थी।
- **ऐतिहासिक प्रयास:** धौलपुर के महाराजा कीरत सिंह द्वारा इसे दूसरी जगह ले जाने के असफल प्रयासों ने इसके अद्वितीय स्वरूप और गहराई को और अधिक रहस्यमयी बना दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. सैंपऊ महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर धौलपुर जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर सैंपऊ उपखंड में स्थित है।

### 2. सैंपऊ महादेव मंदिर का दूसरा नाम क्या है?
इस मंदिर को राम रामेश्वर मंदिर और स्वयं शंभू महादेव के नाम से भी जाना जाता है।

### 3. इस मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
इस मंदिर का निर्माण धौलपुर रियासत के महाराज भगवंत सिंह के मामा राजधर कन्हैया लाल ने करवाया था।

### 4. किस युग से संबंधित बताया जाता है यह शिवलिंग?
यहाँ का शिवलिंग भगवान श्री राम के युग यानी त्रेता युग से संबंधित माना जाता है।

### 5. कौन से राजा इस शिवलिंग को धौलपुर ले जाना चाहते थे?
धौलपुर के महाराजा कीरत सिंह इस शिवलिंग को धौलपुर के चोपड़ा मंदिर ले जाना चाहते थे।

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