# दिवाली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा चुनते समय इन अहम बातों का रखें ध्यान

> दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा खरीदते समय उनकी मुद्रा, सूंड की दिशा और निर्माण सामग्री से जुड़े जरूरी नियमों का पालन करना फलदायी माना जाता है।

**Type:** article · **Category:** अध्यात्म · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/spirituality/divali-pujana-ke-lie-lakshmi-ganesh-ki-pratima-chunate-samaya-ina-ahama-baton-ka-rakhen-dhyana-42938 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिवाली पूजन, लक्ष्मी गणेश मूर्ति, दिवाली नियम, पंडित योगेंद्र शुक्ला, पूजा विधि, मिट्टी की मूर्तियां

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही चारों तरफ तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो जाती हैं। लोग घरों की साफ-सफाई और रंग-रोगन में जुटे हैं, वहीं बाजारों में भी विशेष रौनक देखने को मिल रही है। घर की सजावट के साथ-साथ पूजन सामग्री की खरीदारी भी तेज हो चुकी है। दिवाली की रात सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ हर घर में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन अवसर के लिए प्रतिमाओं का चयन पूरी सावधानी के साथ करना चाहिए, क्योंकि सही स्वरूप वाली प्रतिमा का पूजन करने से पूजा का शुभ फल प्राप्त होता है। ऐसे में बाजार जाकर मूर्ति खरीदते समय कुछ जरूरी नियमों को जान लेना आवश्यक है।

## देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश के स्वरूप से जुड़े जरूरी नियम
पंडित योगेंद्र शुक्ला के अनुसार, देवी लक्ष्मी की प्रतिमा का चयन करते समय उनकी मुद्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मां लक्ष्मी की कभी भी खड़ी मुद्रा वाली मूर्ति नहीं खरीदनी चाहिए, क्योंकि खड़ी प्रतिमा देवी के जाने का संकेत मानी जाती है। इसलिए गृहस्थों को हमेशा बैठी हुई मुद्रा वाली देवी लक्ष्मी की प्रतिमा ही लानी चाहिए, जो घर में स्थिरता का प्रतीक बनती है।

इसी तरह भगवान गणेश की प्रतिमा खरीदते समय उनकी सूंड की दिशा देखना बेहद महत्वपूर्ण है। पंडित योगेंद्र शुक्ला के मुताबिक, गणेश जी की प्रतिमा में उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी होनी चाहिए। दाईं दिशा की ओर मुड़ी हुई सूंड वाली प्रतिमा को दिवाली पूजन के लिए शुभ नहीं माना जाता है।

## संयुक्त प्रतिमा लेने से क्यों बचना चाहिए
बाजार में अक्सर ऐसी प्रतिमाएं मिलती हैं जिनमें देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश एक साथ जुड़े होते हैं। पंडित योगेंद्र शुक्ला बताते हैं कि पूजन के लिए संयुक्त प्रतिमाएं खरीदना उचित नहीं माना जाता है। दोनों देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हमेशा अलग-अलग ही खरीदनी चाहिए ताकि पूजा के दौरान उन्हें उचित स्थान पर स्वतंत्र रूप से स्थापित किया जा सके।

इसके अलावा, खरीदारी करते समय प्रतिमा की बनावट की बारीकी से जांच करनी चाहिए। यदि मूर्ति में कहीं भी कोई दरार, टूट-फूट या खरोंच दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल न खरीदें। शास्त्रों के अनुसार खंडित प्रतिमाओं को घर में रखना अशुभ प्रभाव डालता है और इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।

## मूर्ति के लिए कौन सी सामग्री मानी जाती है सर्वश्रेष्ठ
प्रतिमा किस धातु या तत्व से बनी है, इसका भी पूजन में गहरा प्रभाव पड़ता है। प्लास्टिक अथवा रेजिन से बनी प्रतिमाओं का पूजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे पूजा का प्रभाव कम होता है। इसके विपरीत, मिट्टी और पीतल जैसी प्राकृतिक सामग्री से निर्मित प्रतिमाएं सबसे ज्यादा शुभ और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाली मानी जाती हैं।

पंडित योगेंद्र शुक्ला का कहना है कि शास्त्रों में भी मिट्टी की प्रतिमा का विधान बताया गया है। परंपराओं के अनुसार गंगा जी, केन अथवा गौशाला जैसी पवित्र जगहों से मिट्टी लाकर बनाई गई लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा का पूजन अत्यंत कल्याणकारी और फलदायी माना जाता है।

## प्रतिमा को प्रतिवर्ष बदलने और विसर्जन की परंपरा
दिवाली पूजन के संदर्भ में यह नियम भी अहम है कि हर साल एक ही प्रतिमा से बार-बार पूजन नहीं किया जाता। दिवाली पर प्रतिवर्ष मां लक्ष्मी और गणेश जी की नई प्रतिमा लाई जाती है और पूजन संपन्न होने के उपरांत पुरानी प्रतिमाओं का आदरपूर्वक विसर्जन कर दिया जाता है। यदि कोई श्रद्धालु चांदी या पीतल जैसी स्थायी धातुओं की प्रतिमाएं स्थापित करना चाहता है, तो उन्हें गंगाजल से पवित्र करके अथवा उनकी विधिवत प्राण प्रतिष्ठा करवाकर मंदिर में स्थापित किया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
दिवाली पूजन के लिए सही प्रतिमा चुनने से घर में धार्मिक नियमों के अनुरूप सकारात्मक और समृद्ध माहौल बनता है।

- **प्रतिमा का स्वरूप:** खरीदारी के समय बैठी हुई लक्ष्मी जी और बाईं सूंड वाले गणेश जी का ही चुनाव करें। इससे घर में सुख-समृद्धि के आगमन की पारंपरिक मान्यता पूरी होती है।
- **सामग्री का चयन:** प्लास्टिक या रेजिन के स्थान पर केवल शुद्ध मिट्टी या पीतल की मूर्तियां खरीदें। यह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ पूजा के पारंपरिक विधान के अनुरूप है।
- **अखंडित प्रतिमा:** खरीदने से पूर्व मूर्ति की ठीक से जांच करें ताकि कोई दरार या खरोंच न हो। किसी भी प्रकार की खंडित मूर्ति घर में स्थापित करने से बचें।
- **वार्षिक विसर्जन:** दिवाली पूजन के बाद मिट्टी की पुरानी प्रतिमाओं का सम्मानपूर्वक विसर्जन करें। यदि धातु की मूर्ति है तो उसे गंगाजल से शुद्ध कर मंदिर में स्थापित रखें।

## ऐसा क्यों हुआ
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा के चयन को लेकर शास्त्रों और परंपराओं में स्पष्ट नियम तय किए गए हैं ताकि पूजन का पूरा धार्मिक फल मिल सके।

- **मुद्रा का प्रतीकात्मक अर्थ:** खड़ी मुद्रा प्रस्थान का संकेत देती है जबकि बैठी मुद्रा स्थिरता का प्रतीक मानी जाती है। इसी कारण बैठी हुई लक्ष्मी जी की पूजा धन के स्थायी निवास के लिए की जाती है।
- **सूंड की दिशा का महत्व:** बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी को गृहस्थों के लिए सौम्य और शांत फलदायी माना जाता है। वहीं दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले स्वरूप के पूजन नियम अत्यधिक कठिन माने जाते हैं।
- **प्राकृतिक तत्वों की पवित्रता:** शास्त्रों में मिट्टी और प्राकृतिक धातुओं को सकारात्मक ऊर्जा का संवाहक माना गया है। पवित्र स्थानों जैसे गंगा या गौशाला की मिट्टी से बनी मूर्तियां अत्यधिक ऊर्जावान मानी जाती हैं।
- **अखंडता का नियम:** खंडित या दरार वाली मूर्तियों में दोष माना जाता है। इसलिए शास्त्र केवल पूर्ण और निर्दोष स्वरूप वाले विग्रहों की पूजा की अनुमति देते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. दिवाली पूजन के लिए मां लक्ष्मी की कैसी मूर्ति खरीदनी चाहिए?
दिवाली पूजन के लिए हमेशा मां लक्ष्मी की बैठी हुई मुद्रा वाली प्रतिमा खरीदनी चाहिए, क्योंकि खड़ी प्रतिमा जाने की मुद्रा को दर्शाती है।

### 2. भगवान गणेश की मूर्ति में सूंड किस दिशा में होनी चाहिए?
भगवान गणेश की प्रतिमा में उनकी सूंड बाईं तरफ मुड़ी होनी चाहिए। दाईं ओर मुड़ी सूंड की मूर्ति दिवाली पूजन के लिए शुभ नहीं मानी जाती।

### 3. क्या लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त प्रतिमा खरीदना सही है?
नहीं, लक्ष्मी जी और गणेश जी की आपस में जुड़ी हुई मूर्तियां खरीदना उचित नहीं माना जाता। दोनों प्रतिमाएं हमेशा अलग-अलग ही खरीदनी चाहिए।

### 4. मूर्ति निर्माण के लिए कौन सी सामग्री सबसे उत्तम मानी जाती है?
दिवाली पूजन के लिए मिट्टी या पीतल की मूर्तियां सबसे उत्तम मानी जाती हैं, जबकि प्लास्टिक या रेजिन से बनी मूर्तियों से बचना चाहिए।

### 5. यदि पीतल या चांदी की प्रतिमा हो तो क्या हर साल नई मूर्ति लानी होगी?
नहीं, पीतल या चांदी की मूर्तियों को हर साल बदलना जरूरी नहीं होता; उन्हें गंगाजल से पवित्र करके या प्राण प्रतिष्ठा कर मंदिर में रखा जा सकता है।

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